ट्रंप ने पीएम मोदी को लेकर जो दावा किया, उसे भारत में एक्सपर्ट्स कैसे देख रहे हैं?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ऐसी बातें कहनी शुरू कर दी हैं, जिन्हें भारत और मोदी सरकार को असहज करने के रूप में देखा जा रहा है.
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे मुलाक़ात के लिए पूछा था कि "सर, प्लीज़ क्या मैं आपसे मिल सकता हूं. मैंने हां कहा क्योंकि मेरे उनके साथ बहुत अच्छे रिश्ते हैं.".
ट्रंप के इस बयान पर भारत में चर्चा हो रही है कि क्या भारत के प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति से इस भाषा में बात की होगी?
भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने अपने एक्स हैंडल से ट्रंप के वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा, "ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद मोदी बिन बुलाए ही अमेरिका गए थे. ट्रंप का कहना है, 'मोदी ने मुझसे पूछा- सर, मैं आपसे मिलने आ सकता हूं, प्लीज़. मैंने कहा- हां.' आपको याद होगा दुनिया के नेताओं में सिर्फ़ मोदी हैं, जिन्हें ट्रंप गेट पर रिसीव करने नहीं आए. अब समझ आया क्यों."
हालांकि, भारत ने अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. इन सवालों पर भारत सीधे कोई जवाब देने से बचता है.
ट्रंप भारत को लेकर लगातार मिले-जुले संकेत देते रहे हैं. मंगलवार को उन्होंने पत्रकारों से कहा कि भारत पर ऊँचे टैरिफ़ को लेकर मोदी उनसे नाराज़ हैं.
रविवार को उन्होंने कहा कि मोदी रूसी तेल की ख़रीद पर उनकी नाराज़गी से अवगत हैं और यह भी कि "हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ़ बढ़ा सकते हैं और यह उनके लिए बहुत बुरा होगा.
इन टिप्पणियों ने इस बात पर संदेह पैदा कर दिया कि क्या ट्रंप भारत के प्रति टकराव वाला रुख़ बनाए रखना चाहते हैं या किसी व्यापार समझौते को तेज़ी से आगे बढ़ाना चाहते हैं.
अमेरिकी मीडिया आउटलेट ब्लूमर्बग ने लिखा है, ''दिसंबर में रूस से भारत का तेल आयात जून में 21 लाख बैरल प्रतिदिन के उच्चतम स्तर से 40% घट गया. यह ट्रंप के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने व्लादिमीर पुतिन की युद्ध मशीन तक नकदी के प्रवाह को रोकने और यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के प्रयास तेज़ कर दिए हैं. 2024 में भारत ने अमेरिका को 87.4 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया था, जो देश के कुल निर्यात का लगभग पाँचवाँ हिस्सा था.''
ट्रंप ने क्या कहा?

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कैनेडी सेंटर में हाउस रिपब्लिकन्स कार्यक्रम में ट्रंप ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों और टैरिफ़ पर बात करते हुए पीएम मोदी और भारत की बात की.
उन्होंने कहा था, "एफ़-35 को पाने में काफ़ी समय लगता है. अपाचे हेलिकॉप्टर को लेकर भारत मेरे पास आया और बोला कि सर हम इसका पांच सालों से इंतज़ार कर रहे हैं. हम अब इसे बदल रहे हैं."
इसके बाद ट्रंप ने कहा, "भारत ने 68 अपाचे हेलिकॉप्टर का ऑर्डर दिया था. प्रधानमंत्री मोदी मुझसे पूछा कि 'सर, प्लीज़ क्या मैं आपसे मिल सकता हूं?' मैंने हां कहा क्योंकि मेरे उनके साथ बहुत अच्छे रिश्ते हैं."
"हालांकि, उनको जितना टैरिफ़ देना पड़ रहा है, उसकी वजह से वो मुझसे उतने ख़ुश नहीं हैं. लेकिन अब उन्होंने बहुत हद तक रूस से (तेल आयात) कम कर दिया है. हम टैरिफ़ की वजह से अमीर हो रहे हैं."
हालांकि, भारतीय मीडिया में ट्रंप के दावे को ग़लत बताया जा रहा है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने अमेरिका से 68 नहीं बल्कि सिर्फ 28 अपाचे हेलिकॉप्टर खरीदे हैं. इनमें से 22 अपाचे के लिए सितंबर 2015 में ओबामा प्रशासन के आख़िरी दिनों में डील हुई थी जबकि बाकी छह के लिए 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल में.
इससे पहले रविवार को एयर फ़ोर्स वन विमान में सवार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी टैरिफ़ और रूस से भारत के तेल कम आयात करने के सवाल पर कहा था, "वे मुझे ख़ुश करना चाहते थे. मूल रूप से मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं. उन्हें पता था कि मैं ख़ुश नहीं था और मुझे ख़ुश करना ज़रूरी था."
बीते साल 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव को ट्रंप ने रोकवाने का दावा किया था. ट्रंप के इन दावों को भारत ने ख़ारिज कर दिया था.
हालांकि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रोकने का एलान सबसे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने किया था.
इसके बाद से लेकर अब तक ट्रंप ने कई बार ये दावा किया कि उनके दखल से ये संघर्ष रुका. यह भी भारत के लिए असहज करने वाला रहा है क्योंकि भारत की नीति रही है कि वह कश्मीर मामले में किसी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करेगा.
भारत में कैसी प्रतिक्रिया?
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को एक्स पर एक पोस्ट में अपना एक वीडियो शेयर किया और पीएम मोदी पर अमेरिका के सामने झुकने का आरोप लगाया.
हालांकि, पार्टी के सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भारत के रुख़ को देश हित से जोड़ा है.
उन्होंने ट्रंप के मोदी पर दिए बयाने के बारे में पूछने पर कहा, "हर देश के लिए उसका राष्ट्रहित सर्वोपरि होता है. मेरे लिए, उस राष्ट्रहित के मायने हैं कि जहां तक संभव हो हम कोई बड़ा दुश्मन और कोई बड़ी समस्या नहीं खड़े करना चाहते. हम चाहते हैं कि सबके साथ संवाद का रास्ता खुला रहे. मैंने कई लेखों में इस बहु-ध्रुवीय रुख़ का समर्थन किया है. जहां हमारे रूस से अच्छे संबंध हैं, चीन से भी ठीक रिश्ते हैं, अमेरिका से अच्छे रिश्ते हैं, हम यूरोप के साथ खुल रहे हैं, अफ़्रीका में नए रिश्ते बनाने की कोशिश में हैं, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में स्थितियां सुधारने की कोशिश कर रहे हैं."
उन्होंने कहा, "हमारे साथ जापान है, दक्षिण कोरिया और दक्षिणपूर्व एशियाई देश हैं. ये सभी चीज़ें विकल्प बढ़ाने की नीति का ही हिस्सा है. जीवन में, राजनीति में और कूटनीति में ये आम है कि आपके पास जितने ज़्यादा विकल्प होंगे, आप उतना ही किसी दूसरे देश की ओर से पैदा की जा रही अनिश्चतताओं से सुरक्षित रहेंगे."
सामरिक मामलों के जानकार ब्रह्म चेलानी ने ट्रंप के बयान से असहमति जताते हुए लिखा, "डोनाल्ड ट्रंप बार-बार नरेंद्र मोदी को 'माई वेरी गुड फ़्रेंड' कहते हैं, असल में ये जुमला डिप्लोमैटिक सॉफ़्टनर के तौर पर काम करता है, जबकि अमेरिका ने 50 फ़ीसदी टैरिफ़ समेत भारत पर सबसे कड़े आर्थिक दबाव बना दिए हैं. भारत ने दशकों में किसी सहयोगी से ऐसा दबाव नहीं झेला."

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उन्होंने लिखा, "अपाचे हेलिकॉप्टर की डिलीवरी में देरी की बात करते हुए ट्रंप ये कहा कि मोदी ने उनसे पूछा कि सर क्या मैं आपसे मिल सकता हूं. इसकी संभावना न के बराबर है कि मोदी ट्रंप या किसी भी देश के नेता को सर कहकर पुकारेंगे. बल्कि ये कथन तो ट्रंप के अंदाज़ से मेल खाती है,क्योंकि अक्सर वो किसी और से हुई बातों को याद करते हुए यही फॉर्मूला अपनाते हैं 'वो मेरे पास आए और कहा सर'. ये खुद को किसी भी बातचीत में ऊपर दिखाने का तरीका है."
ट्रंप की मोदी को लेकर 'सर, प्लीज़ मैं आपसे मिल सकता हूँ' वाली टिप्पणी पर लंबे समय तक कांग्रेस के प्रवक्ता रहे संजय झा ने पूछा है कि क्या यही भारत की डिप्लोमेसी है?
इसके जवाब में भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने लिखा है, ''केवल बच्चे ही इन चीज़ों पर विश्वास करते हैं. पहले यह नैरेटिव चलाया जा रहा था कि मोदी ट्रंप के फोन कॉल लेने से इनकार कर रहे थे. कुछ भले इरादे वाले मध्यस्थों ने दोनों के बीच कॉल करवाने की कोशिश की.नतीजा: ट्रंप ने मोदी को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएँ दीं."
उन्होंने कहा, "ट्रंप के तथ्य भी ग़लत हैं. उनके झूठे दावे के उलट, भारत ने 68 नहीं बल्कि केवल 28 अपाचे हेलिकॉप्टर ऑर्डर किए थे. इनमें से 22 की डिलीवरी समय पर हो गई थी. 2020 में ऑर्डर किए गए 6 हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी में देरी हुई. यह देरी बाइडन प्रशासन के दौरान हुई. किसी भी स्थिति में यह देरी इतनी गंभीर नहीं थी कि मोदी को ट्रंप के सामने कोईगिड़गिड़ाती अपील करनी पड़े. ट्रंप बिना सोचे-समझे बयान दे देते हैं और तथ्यों को लेकर लापरवाह रहते हैं. जो लोग उनकी बातों को अक्षरशः सच मान लेते हैं, उन्हें कम से कम बुनियादी होमवर्क तो करना चाहिए."
क्या रहा है मोदी सरकार का रुख़

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पिछले साल जून में पीएम मोदी कनाडा जी-7 सम्मेलन में शामिल होने गए थे और वहीं से उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से फ़ोन पर 35 मिनट की लंबी बात की थी.
इस बातचीत का ब्यौरा देते हुए भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा था कि पीएम मोदी ने ट्रंप से स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान के साथ युद्धविराम द्विपक्षीय था और किसी तीसरे देश के हस्तक्षेप से नहीं हुआ है.
उन्होंने बताया था कि पीएम मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप से स्पष्ट कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच मई महीने में हुई सैन्य कार्रवाई को रोकने पर बात पाकिस्तान के आग्रह पर हुई थी. साथ ही उन्होंने ये भी बताया था कि ट्रंप चाहते थे कि मोदी कनाडा से अमेरिका उनसे मिलने जाए, लेकिन वह नहीं जा सके.
विक्रम मिसरी ने यह भी कहा था कि पीएम मोदी ने ट्रंप से कहा था कि युद्धविराम के लिए अमेरिका से ट्रेड को लेकर कोई बात नहीं हुई थी.
इसके बाद जुलाई में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिका में क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने गए थे.
इसी दौरे में एस जयशंकर ने एक बार फिर अमेरिकी पत्रिका न्यूज़वीक को दिए इंटरव्यू में कहा कि युद्धविराम पूरी तरह से द्विपक्षीय था.
वहीं, बीते साल अगस्त में जर्मन अख़बार फ़्रैंकफ़र्टर ऑलजेमेनी ज़ीटंग (FAZ) ने एक ख़बर में ये दावा किया था टैरिफ़ को लेकर तनाव के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप की चार फ़ोन कॉल नहीं उठाई थी. जापान के अख़बार निक्केई एशिया ने भी एक रिपोर्ट में कुछ ऐसा ही दावा किया था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिवन्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















