अमेरिका का वो वकील जो निकोलस मादुरो के साथ खड़ा है

बैरी पोलैक

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इमेज कैप्शन, बैरी पोलैक को अमेरिका के सबसे प्रमुख ट्रायल वकीलों में से एक माना जाता है और उन्होंने विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज के मुक़दमे जैसे महत्वपूर्ण मामलों में जीत हासिल की है.
    • Author, अलेजांद्रा मार्टिंस
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ मुंडो

जब निकोलस मादुरो पांच जनवरी को न्यूयॉर्क की अदालत में पेश हुए, तो वह अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं थे जिन्होंने मीडिया का ध्यान अपनी तरफ़ आकर्षित किया.

उनके बगल में एक और व्यक्ति था जो उनके पक्ष में कोर्ट के सामने दलील रखने वाला था, एक अमेरिकी वकील जो इस तरह के बड़े और जटिल मुक़दमों को जीतने के लिए जाना जाता है.

बैरी पोलैक मादुरो के निजी वकील हैं. इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने वेनेज़ुएला के ख़िलाफ़ 'बड़े पैमाने पर' हमला किया था, जिसमें देश के नेता निकोलस मादुरो को पकड़ लिया गया था.

मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को न्यूयॉर्क ले जाया गया था, जहाँ उन पर नार्को-टेररिज़्म की साज़िश के आरोप लगाए गए हैं.

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अपनी उपस्थिति में मादुरो ने ख़ुद को सभी आरोपों से निर्दोष घोषित किया, ज़ोर देकर कहा कि वह वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति बने हुए हैं.

61 वर्षीय पोलैक वॉल स्ट्रीट की लॉ फर्म हैरिस सेंट लॉरेंट एंड वेचस्लर में पार्टनर हैं, जो उस अदालत से कुछ ही मिनटों की दूरी पर स्थित है जहां मादुरो पेश हुए थे. वह जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी लॉ सेंटर में प्रोफे़सर भी हैं.

लंदन के मिडलसेक्स विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफ़ेसर विलियम शेबस ने बीबीसी मुंडो को बताया, "हमें नहीं पता कि अभियोजन पक्ष के पास क्या सबूत हैं, लेकिन पोलैक जैसे शीर्ष वकील लोगों को बरी करवा सकते हैं."

'सटीक और विचारशील'

मादुरो

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इमेज कैप्शन, न्यूयॉर्क की अदालत में मादुरो की पेशी के दौरान बैरी पोलैक मौजूद थे
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क़ानूनी फ़र्म हैरिस सेंट लॉरेंट एंड वेचस्लर की वेबसाइट के अनुसार, पोलैक को 'देश के सबसे उत्कृष्ट ट्रायल वकीलों में से एक के रूप में जाना जाता है' और वह नेशनल एसोसिएशन ऑफ क्रिमिनल डिफेंस लॉयर्स के पूर्व अध्यक्ष हैं.

तीन दशकों से अधिक के अनुभव के साथ, वह "संवेदनशील और अक्सर हाई-प्रोफ़ाइल मुक़दमों और जांचों" पर काम करने के लिए जाने जाते हैं.

कई अन्य प्रमुख मामलों के अलावा, पोलैक ने 2024 में विकिलीक्स के संस्थापक ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार और कार्यकर्ता जूलियन असांज की रिहाई सुनिश्चित की.

अमेरिका की शीर्ष लॉ फर्म्स और वकीलों की रैंकिंग जारी करने वाली चैम्बर्स यूएसए वेबसाइट पोलैक को एक "सावधान और विचारशील वकील" बताती है. इसके अनुसार वो "अपने मुक़दमों में पूरी तरह से डूबे रहते हैं" और "ज्यूरी के सामने बात करने का उनका एक स्वाभाविक तरीका है."

क़ानूनी पेशेवरों के बारे में जानकारियां छापने वाले एक समाचार आउटलेट, 'लॉ ड्रैगन' को अप्रैल में पौलेक ने इंटरव्यू दिया था. ब्रिटिश समाचार पत्र 'द गार्जियन' ने इसका हवाला किया है.

इसके अनुसार, पोलैक इस इंटरव्यू में बताते हैं, "आमतौर पर, जब मैं किसी मुवक्किल से मिलता हूं, तो वे अपने जीवन के सबसे बुरे संकट का सामना कर रहे होते हैं."

"इस प्रक्रिया में उनका मार्गदर्शन करना बेहद संतोषजनक होता है. यह कल्पना करना मुश्किल है कि आप जिसके साथ काम कर रहे हैं उसके जीवन पर इससे अधिक प्रभाव डालने वाला कोई दूसरी चीज़ उस समय नहीं होगी."

पोलैक ने इस इंटरव्यू में अपनी ख़ूबियों का भी ज़िक्र किया.

उन्होंने कहा, "मेरे पास जूरी के साथ अच्छी तरह से संवाद करने की क्षमता है."

"एक तरह से मैं एक अनुवादक हूं. मैं ऐसे उद्योग से जुड़ी बहुत-सी तकनीकी और जटिल जानकारी लेता हूँ, जिससे जूरी शायद परिचित न हो, और उसे सरल व समझने योग्य तरीके़ से उनके सामने पेश करता हूँ."

उल्लेखनीय मामले

जूलियन असांजे

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इमेज कैप्शन, ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार जूलियन असांज जब 2024 में रिहा हुए थे तो उस समय पोलैक भी उनके साथ थे

पोलैक ने असांज के मामले में एक प्ली-डील (दोष स्वीकार करने का समझौता) तय किया, जिससे पत्रकार जूलियन असांज को रिहाई मिल सकी.

दरअसल असांज पर इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान युद्ध से जुड़े दस्तावेज़ों को लीक करने के संबंध में अमेरिका के जासूसी क़ानून के तहत मुक़दमा चल रहा था.

महीनों की बातचीत के बाद, असांज ने गोपनीय रक्षा जानकारी प्राप्त करने और उसको सार्वजनिक करने की साज़िश रचने के एक ही आरोप में अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

इसके बदले में, असांज- जो लंदन की बेलमार्श हाई-सिक्योरिटी जेल में पाँच साल बिता चुके थे और इससे पहले सात साल तक ब्रिटेन में इक्वाडोर दूतावास में ब्रिटिश और अमेरिकी क़ानूनी प्रवर्तन एजेंसियों से बचते हुए शरण लिए रहे, उनको उतनी ही सज़ा सुनाई गई, जितनी अवधि उन्होंने अमेरिका द्वारा प्रत्यर्पण की कोशिशों के दौरान जेल में बिताई थी.

2024 में पोलैक द्वारा कराया गया यह असामान्य समझौता असांज के लिए निर्णायक साबित हुआ.

इसके तहत वह ब्रिटिश जेल से रिहा हुए, अमेरिकी क्षेत्र उत्तरी मारियाना द्वीपसमूह में अपना बयान दर्ज कराया और उसके बाद अपने देश ऑस्ट्रेलिया लौट गए.

एक अन्य प्रमुख मामलों में, पोलैक ने एनरॉन कॉर्पोरेशन के एक पूर्व कार्यकारी माइकल क्राउट्ज़ को आपराधिक धोखाधड़ी के आरोपों से पूरी तरह बरी करवाया.

यह एनरॉन के पतन के बाद चले अनेक मुक़दमों में से केवल दो ऐसे मामलों में से एक था, जिनमें पूर्ण बरी किए जाने का फ़ैसला आया.

इसके अलावा, उन्होंने उन लोगों की भी रिहाई सुनिश्चित की, जिन्हें ग़लत तरीके़ से जेल भेज दिया गया था. इनमें से एक में मार्टिन टैंकलेफ़ भी शामिल हैं, जिन्हें किशोरावस्था में अपने माता-पिता की हत्या के ग़लत आरोप में 17 साल तक जेल में रहना पड़ा.

'मादुरो की गिरफ़्तारी साफ़तौर पर अवैध थी'

असांजे मामले की सुनवाई के दौरान पोलैक लंदन में मौजूद थे।

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इमेज कैप्शन, असांज मामले की सुनवाई के दौरान पोलैक लंदन में मौजूद थे

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, मैनहटन की संघीय अदालत में मादुरो की पेशी के दौरान, पोलैक ने मादुरो का 'सैन्य अपहरण' बताया और इस मामले को लेकर एक लंबी क़ानूनी लड़ाई की आशंका जताई.

इसका संकेत यह है कि बचाव पक्ष यह तर्क देगा कि वेनेज़ुएला में अमेरिका द्वारा की गई यह कार्रवाई अवैध थी.

अंतरराष्ट्रीय क़ानून के विशेषज्ञ और लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में प्रोफ़ेसर अलोंसो गुर्मेंदी ने बीबीसी मुंडो से कहा कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत मादुरो को पकड़ने की कार्रवाई "स्पष्ट रूप से, पूरी तरह और निर्विवाद रूप से अवैध" थी.

उन्होंने बताया कि सिर्फ़ तीन परिस्थितियों में ही कोई देश सीमापार दूसरे देश पर बल प्रयोग कर सकता है.

गुर्मेंदी ने कहा, "पहली स्थिति संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अनुमति दी हो, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. दूसरी स्थिति संबंधित देश ने पहले हमला किया हो और आप आत्मरक्षा कर रहे हों. यहां यह भी लागू नहीं होती, क्योंकि वैध आत्म रक्षा की कितनी भी व्यापक व्याख्या कर लें, वेनेज़ुएला ने अमेरिका पर हमला नहीं किया है. अमेरिका के ख़िलाफ़ वेनेज़ुएला की ओर से कोई सशस्त्र हमला नहीं हुआ."

"तीसरी स्थिति देश की सहमति यानी वेनेज़ुएला को अमेरिका से यह कहना पड़ता कि 'आप आ सकते हैं और मादुरो को ले जा सकते हैं', जो कि नहीं हुआ."

उन्होंने आगे कहा, "इन तीनों में से कोई भी शर्त पूरी नहीं होती, इसलिए यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत एक अवैध कृत्य है. यह आक्रामकता का कार्य है और चूंकि यह आक्रामकता का कार्य है, इसलिए इसमें शामिल लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है और इस मामले में, मादुरो के."

विलियम शेबास ने बीबीसी मुंडो से कहा, "मादुरो के अपहरण की अवैधता का सवाल एक बिल्कुल वैध तर्क है."

उन्होंने कहा, "अन्य देशों में इसके कुछ उदाहरण हैं; सबसे प्रसिद्ध उदाहरणों में से एक 1960 में एडॉल्फ आइख़मान का मामला था, जब उन्हें अर्जेंटीना से अपहरण कर इसराइल ले जाया गया. वहां की अदालत ने इस तर्क को ख़ारिज़ कर दिया था. लेकिन ऐसे भी उदाहरण हैं जहां इस दलील को स्वीकार किया गया, जैसे कि यूनाइटेड किंगडम में."

अलोंसो गुरमेंडी का कहना है कि मादुरो को पकड़ने का अभियान "स्पष्ट रूप से, पूरी तरह से, निर्विवाद रूप से अवैध" था.

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इमेज कैप्शन, अलोंसो गुरमेंडी का कहना है कि मादुरो को पकड़ने का अभियान 'स्पष्ट रूप से, पूरी तरह से, निर्विवाद रूप से अवैध' था

शेबास के अनुसार, "मूल रूप से तर्क यह है कि इस तरह लोगों का अपहरण कर उन्हें अदालतों के सामने पेश करना न्यायिक व्यवस्था का दुरुपयोग है. मौलिक मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से यह एक बहुत मज़बूत तर्क है, लेकिन संभव है कि अमेरिकी अदालतों में इसे ज़्यादा सफलता न मिले."

गुर्मेंदी बताते हैं कि लातिन अमेरिका की क़ानूनी प्रणालियों के विपरीत, "अमेरिका में अवैध तरीके़ से गिरफ़्तार किया जाना न्यायिक प्रक्रिया को अमान्य नहीं करता."

उन्होंने कहा, "लेकिन लातिन अमेरिकी सोच के हिसाब से यह तर्कसंगत नहीं लगता, क्योंकि अवैध रूप से गिरफ़्तारी का मतलब होता है कि अदालत के अधिकार क्षेत्र को ही दूषित कर दिया गया है- और मैं कहूंगा कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत भी ऐसा ही है. इसी के लिए प्रत्यर्पण संधियाँ होती हैं. अंतरराष्ट्रीय क़ानून इस धारणा पर आधारित नहीं है कि आप किसी देश में घुसकर मनमानी कर सकते हैं."

गुर्मेंदी के अनुसार, यह बात एक बुनियादी पहलू की ओर इशारा करती है, जिसे ध्यान में रखना ज़रूरी है.

वो कहते हैं कि हालांकि मेरिका का संविधान कहता है कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून देश का सर्वोच्च क़ानून है, लेकिन अमेरिकी संवैधानिक परंपरा में घरेलू क़ानून को अंतरराष्ट्रीय क़ानून पर प्राथमिकता दी जाती है

हालांकि, उन्होंने आगे कहा, "जब ऑपरेशन की वैधता की बात होगी, तो अमेरिका में यह सवाल उठाया जाएगा कि क्या राष्ट्रपति के पास संविधान के तहत ऐसा करने की शक्ति थी, और उदाहरण के तौर पर यह बहस होगी कि क्या ट्रंप को इसके लिए कांग्रेस की अनुमति की ज़रूरत थी या नहीं."

शीर्ष नेताओं को छूट का तर्क

मादुरो की गिरफ़्तारी के बाद काराकस में प्रदर्शन.

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इमेज कैप्शन, मादुरो की गिरफ़्तारी के बाद काराकास में प्रदर्शन हुए हैं

मादुरो की एक और संभावित क़ानूनी दलील यह हो सकती है कि राज्य प्रमुख होने के नाते उन्हें छूट प्राप्त है.

शेबास ने कहा, "मुझे लगता है कि यह तर्क कहीं अधिक मज़बूत है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय क़ानून में यह बात बहुत स्पष्ट है."

उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस) का एक फ़ैसला है, जिसमें कहा गया है कि किसी देश, राज्य या सरकार के प्रमुख को किसी दूसरे देश की अदालतों के समक्ष इम्युनिटी प्राप्त होती है."

एक मिसाल ऐसी भी है, जब अमेरिका ने लातिन अमेरिका में पनामा के नेता जनरल मैनुअल नोरिएगा को जनवरी 1990 में पकड़ा था.

नोरिएगा को पद से हटाने का आदेश देते समय, व्हाइट हाउस ने 1989 में तत्कालीन उप अटॉर्नी जनरल बिल बार द्वारा दी गई एक क़ानूनी राय का सहारा लिया था, जो अमेरिका के पनामा पर आक्रमण से छह महीने पहले दी गई थी.

उस राय में कहा गया था कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर में अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बल प्रयोग पर लगी रोक, अमेरिका को अपने घरेलू क़ानूनों को लागू करने के लिए विदेशों में बलपूर्वक गिरफ़्तारी करने से नहीं रोकती.

उस समय नोरिएगा पनामा के डी फ़ैक्टो नेता थे और उन्होंने कभी औपचारिक रूप से राष्ट्रपति का पद नहीं संभाला था. उस दौर में देश विरोध प्रदर्शनों और एक सैन्य विद्रोह के प्रयास से उथल-पुथल में था.

शेबास के अनुसार, "नोरिएगा का मामला ही एकमात्र ऐसा उदाहरण है, जिसकी ओर अभियोजन पक्ष इशारा कर सकता है."

हालांकि, इस पर वह यह भी जोड़ते हैं, "मुझे लगता है कि उस मामले और मादुरो की स्थिति के बीच कुछ अहम अंतर हैं. इसलिए, इस संदर्भ में मादुरो के पास कहीं ज़्यादा मज़बूत तर्क है."

मैनुअल नोरीगा

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इमेज कैप्शन, अमेरिका ने 1990 में पनामा के नेता जनरल मैनुअल नोरीगा को पकड़ा था

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका संभवतः यह तर्क देगा कि उसने मादुरो को वैध राष्ट्राध्यक्ष के रूप में मान्यता नहीं दी थी. वॉशिंगटन ने 2019 में विपक्षी नेता जुआन गुआइदो को अंतरिम राष्ट्रपति घोषित किया था.

लेकिन शेबास के अनुसार, "असल मुद्दा यह है कि अमेरिका वेनेज़ुएला को मान्यता देता है. तो फिर सवाल सीधा सा उठता है: वेनेज़ुएला का राष्ट्राध्यक्ष कौन है? और अगर मादुरो नहीं थे, तो उनका अपहरण क्यों किया गया? स्पष्ट रूप से, वे राष्ट्राध्यक्ष थे, भले ही उन्होंने इसका विरोध किया हो, उन्हें नापसंद किया हो, या दावा किया हो कि उन्होंने अवैध रूप से सत्ता हथिया ली है."

"आख़िरकार, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि जो बाइडन चार साल तक अवैध राष्ट्राध्यक्ष थे क्योंकि उन्होंने चुनाव जीतने का दावा किया था. इसलिए अंतरराष्ट्रीय क़ानून के परिप्रेक्ष्य से इससे कुछ भी नहीं बदलता."

गुरमेंडी के अनुसार, वॉशिंगटन द्वारा मादुरो को मान्यता न देने का मतलब यह नहीं है कि उनका देश पर प्रभावी नियंत्रण नहीं है और इसलिए, अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत, वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें प्रतिरक्षा के क़ानूनी संरक्षण का अधिकार है.

विशेषज्ञों के अनुसार, नोरीगा के मामले में प्रतिरक्षा का तर्क कारगर न होना एक बार फिर यह दिखाता है, "हम एक ऐसी वास्तविकता में हैं जहां दो परस्पर विरोधी मानक प्रणालियां हैं, अमेरिका का राष्ट्रीय क़ानून और अंतरराष्ट्रीय क़ानून."

उदाहरण के लिए, लातिन अमेरिका में कई ऐसे देश हैं जो कहते हैं कि जब अंतरराष्ट्रीय क़ानून और घरेलू क़ानून के बीच टकराव होता है, तो अंतरराष्ट्रीय क़ानून ही मान्य होता है. पेरू और इस क्षेत्र के कई अन्य देशों में ऐसा ही है, लेकिन अमेरिका में ऐसा नहीं है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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