कॉग्निटिव टेस्ट क्या है, इससे बाइडन और ट्रंप के बारे में क्या पता चल सकता है?

जो बाइडन

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इमेज कैप्शन, मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन एक बार फिर राष्ट्रपति चुनावों में उतर चुके हैं, वो डोनाल्ड ट्रंप से मुक़ाबला कर रहे हैं
    • Author, एना फागुये और क्रिस्टल हेस
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

इस बार हो रहे अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारों की उम्र और मेंटल फिटनेस यानी मानसिक स्वास्थ्य महत्वपूर्ण मुद्दा बनते जा रहे हैं.

इन मुद्दों पर राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडन और डोनाल्ड ट्रंप दोनों ही घिरते नज़र आ रहे हैं. बाइडन की उम्र 81 साल और ट्रंप की उम्र 78 साल है.

पिछले महीने ट्रंप और बाइडन की पहली सार्वजनिक डिबेट के बाद यह मुद्दा अचानक से गर्मा गया था. बाइडन अमेरिकी इतिहास के सबसे उम्रदराज़ राष्ट्रपति हैं. वहीं अगर ट्रंप दोबारा से चुने जाते हैं तो वे अमेरिकी इतिहास के दूसरे सबसे उम्रदराज़ राष्ट्रपति बन जाएंगे.

एबीसी न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू के दौरान राष्ट्रपति बाइडन ने कॉग्निटिव टेस्ट देने से इनकार करते हुए कहा, "मैं रोज़ ही कॉग्निटिव टेस्ट देता हूं". उन्होंने कहा कि उनके डॉक्टरों ने कहा कि उनको इसकी कोई ज़रूरत नहीं है.

वहीं ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कॉग्निटिव टेस्ट पूरे कर लिए हैं. उन्होंने कहा कि उन्होंने दो टेस्ट पूरे किए जिनमें से एक जब वो राष्ट्रपति थे और दूसरा हाल ही में हुआ था. ट्रंप ने कहा, "उनके दोनों ही टेस्ट सफल रहे."

ऐसे में यह जानते हैं कि आख़िर यह कॉग्निटिव टेस्ट है क्या और इसे पास करना कितना कठिन हो सकता है.

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क्या होता है कॉग्निटिव टेस्ट?

कॉग्निटिव टेस्ट में कई सारे अलग-अलग टेस्ट और परीक्षण शामिल होते हैं, जो यह मापते हैं कि इंसानी दिमाग़ कितनी अच्छी तरह से काम कर रहा है.

क्लीवलैंड क्लीनिक के मुताबिक़, "इस टेस्ट में किसी ख़ास तरह की बीमारी का पता नहीं चलता, लेकिन ये किसी इलाज के लिए ज़रूरी टेस्ट कराने का संकेत ज़रूर देते हैं."

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अगर किसी व्यक्ति को याददाश्त, पर्सनेलिटी चेंज यानी व्यक्तित्व में बदलाव, संतुलन, ख़ुद को दोहराने, अपने अतीत के कुछ हिस्सों को भूलने या फिर जानकारियों को समझने में परेशानी हो रही है तो उन्हें कॉग्निटिव टेस्ट की ज़रूरत हो सकती है.

सैनफोर्ड मेडिसिन के मुताबिक़, इसके लिए ज़्यादातर इस्तेमाल किए जाने वाले परीक्षणों में से एक मॉन्ट्रियल कॉग्निटिव असेसमेंट है, जो संदेहास्पद कमियों वाले लोगों में कॉग्निटिव स्किल यानी संज्ञानात्मक कौशल का आकलन करने का सबसे तेज़ तरीका है.

असेसमेंट टेस्ट में, याददाश्त, ध्यान, वस्तुओं को नाम देने की क्षमता के साथ मौखिक और लिखित आदेशों का पालन करने की क्षमता का परीक्षण होता है. यह परीक्षा ऑनलाइन भी उपलब्ध है.

अगर किसी के साथ कोई मानसिक समस्या नहीं है तो उसके लिए यह टेस्ट आसान हो सकता है, लेकिन मानसिक समस्या वाले लोगों के लिए यह टेस्ट काफ़ी कठिन हो सकता है.

इस टेस्ट को बनाने वाले कनाडाई न्यूरोलॉजिस्ट ज़िएद नस्रेडिन ने बीबीसी को बताया, "मैं मानता हूं कि अगर बाइडन अमेरिकी नागरिकों को आश्वस्त करना चाहते हैं तो भी और अगर उनको कोई समस्या है तो भी, दोनों ही स्थितियों में उनके लिए यह टेस्ट फ़ायदेमंद हो सकता है."

कैसे किया जाता है कॉग्निटिव टेस्ट?

कॉग्निटिव टेस्ट में डॉक्टर रोगियों से सीखने और याददाश्त से जुड़े कई तरह के सवाल पूछते हैं. लेकिन लंबे समय तक चलने वाले क्लीनिकल मूल्यांकन में कॉग्निटिव टेस्ट के साथ-साथ शारीरिक और तंत्रिका से जुड़ी परीक्षाएं और रोगी का पूरा इतिहास भी शामिल होता है.

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के डेविस अल्ज़ाइमर रोग अनुसंधान केंद्र से जुड़े एसोसिएट डायरेक्टर डैन मुंगास ने बताया, "लंबे समय तक चलने वाला क्लीनिकल परीक्षण बाइडन और ट्रंप दोनों के ही दिमाग की काम करने की क्षमताओं की सही तस्वीर को पेश कर सकता है."

हालांकि ज़्यादातर समय डॉक्टर, मोका (MoCa) जैसे टेस्ट से इस परीक्षण को शुरू करते हैं. अगर किसी का स्कोर अपेक्षा से कम होता है तो फिर दूसरे गहन परीक्षण शुरू किए जाते हैं.

इन गहन परीक्षणों में भाषा परीक्षण, काम करने की क्षमता के साथ-साथ स्थिरता से देखने की क्षमताओं का आकलन किया जाता है. उदाहरण के तौर पर डॉक्टर रोगी को कोई कहानी पढ़ने के लिए कह सकते हैं और फिर उसकी याददाश्त को चेक करने के लिए कहानी के कुछ हिस्सों को याद करने के लिए कह सकते हैं.

इसके अलावा रोगियों से शब्दों की लिस्ट को याद करने, तस्वीरों में दिख रही वस्तुओं का नाम बताने या किसी ख़ास अक्षर से शुरू होने वाली वस्तुओं का नाम बताने के लिए कहा जा सकता है.

दिमाग के काम करने की क्षमताओं में गिरावट के लक्षणों का पता लगाने के लिए डॉ. मुंगास रोगियों से सवाल पूछने के अलावा रोगी के साथ समय बिताने वाले लोगों से बात करने का भी सुझाव देते हैं.

डॉ. मुंगास के मुताबिक़, "यह देखना अहम है कि क्या किसी व्यक्ति की क्षमताएं समय के साथ बदली हैं. एक बार का मूल्यांकन ग़लत भी हो सकता है. आपको यह समझना होगा कि व्यक्ति ने कहां से शुरुआत की थी या वे पहले कैसे थे. अगर वे पहले की तुलना में गिरावट दिखा रहे हैं तो यह एक बुरा संकेत है."

हालांकि मुंगास का यह भी कहना है कि कॉग्निटिव टेस्ट ही सबकुछ नहीं है. एक कॉग्निटिव टेस्ट के सहारे यह तय नहीं किया जा सकता कि कोई व्यक्ति अच्छा राष्ट्रपति बनेगा या नहीं. मैंने अपने पूरे करियर में केवल लोगों का कॉग्निटिव टेस्ट ही किया है.

क्या इस उम्र में कॉग्निटिव टेस्ट पास कर सकते हैं बाइडन और ट्रंप?

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

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अमेरिकन एकेडमी ऑफ़ न्यूरोलॉजी (AAN) डॉक्टरों को 65 साल की उम्र से ज़्यादा के व्यक्तियों के कॉग्निटिव टेस्ट करने की सलाह देती है.

ज़िएद नस्रेडिन ने बीबीसी से कहा, "ऐसा करने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ शारीरिक अक्षमता भी बढ़ती जाती है. ज़िएद चेतावनी देते हुए कहते हैं कि 75 साल की उम्र के बाद 25 फ़ीसदी रोगियों में किसी ना किसी तरह का संज्ञानात्मक विकार होगा."

ज़िएद कहते हैं कि वो न कभी बाइडन से मिले हैं और न ही कभी उन्होंने उनका इलाज़ किया है, हालांकि वे कहते हैं कि यह बहुत आम है कि लोगों में संज्ञानात्मक विकार मौजूद होता है और कई बार उनको इसके बारे में पता भी नहीं चलता.

ज़िएद ने कहा कि उन्होंने पिछले साल बाइडन में कुछ बदलावों को नोटिस किया था. उनका कहना है, "सार्वजनिक जगहों पर बाइडन धीरे-धीरे चलते हैं और उनके भाषण भी धीमे हो गए हैं. उनकी आवाज़ काफ़ी धीमी हो गई है और वे अब वे कुछ शब्दों को बुदबुदा कर बोलते हैं."

उन्होंने कहा कि बाइडन की उम्र में बहुत से लोगों के पास इतना ज़्यादा काम नहीं है और इस उम्र में किसी के लिए सामान्य काम करना भी मुश्किल होता है.

हालांकि ज़िएद यह भी कहते हैं कि उन्होंने बाइडन में यह बदलाव केवल पिछले साल ही देखा ने कि उससे पहले के सालों में.

अगर बाइडन को अल्ज़ाइमर हुआ तो क्या होगा?

अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन राष्ट्रपति की मृत्यु या फिर उसके अपने अधिकार और कर्तव्यों को ना निभा पाने की दशा में उत्तराधिकार की प्रक्रिया के बारे में बताता है.

लेकिन इसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब राष्ट्रपति को पद से हटाना हो, या उनकी मृत्यु हो गई हो, या फिर उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया हो.

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ़ कैनेडी की मृत्यु के बाद इस संशोधन की पुष्टि की गई है. लेकिन हालिया कुछ सालों में इस पर फिर से बहस शुरू हो गई है.

कांग्रेस के सांसदों ने पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल के दौरान इस संशोधन को बदलने के लिए एक क़ानून बनाने का विचार किया था. इसके पीछे मकसद था, विशेषज्ञों एक ऐसा पैनल बनाना जो राष्ट्रपति बनने के लिए मानक तय कर सके.

यूएस कैपिटल दंगों के बाद डेमोक्रेट सांसदों ने 2021 में सदन में एक प्रस्ताव को मंज़ूरी भी दी थी, जिसमें तत्कालीन उपराष्ट्रपति माइक पेंस को ट्रंप को पद से हटाने के लिए 25वें संशोधन को लागू करने के लिए कहा गया था.

हालांकि उस वक्त इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया था. लेकिन बाइडन और ट्रंप की पहली सार्वजनिक बहस के बाद रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सदस्यों ने बाइडन के मंत्रिमंडल से इस खंड को लागू करने की अपील की है.

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