रैली में ट्रंप पर हमला क्या उन्हें बाइडन पर दिलाएगा बढ़त?

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- Author, एंथनी जर्चर
- पदनाम, बीबीसी के उत्तरी अमेरिका संवाददाता
अमेरिका में साल 2024 के राष्ट्रपति चुनावों की जब भी बात होगी, डोनाल्ड ट्रंप की उस तस्वीर का ज़िक्र हमेशा होगा, जिसमें वो गोली चलने के बाद कान से चेहरे की तरफ़ बहते ख़ून के साथ मज़बूती के हाथ उठाकर खड़े हैं और उनके पीछे अमेरिकी ध्वज लहरा रहा है.
ट्रंप के जो समर्थक थोड़ी ही देर पहले किसी आशंका से भरे हुए थे, उनके मुंह से निकले तीन शब्दों को सुनते ही रोमांचित हो गए और ये शब्द थे- “फ़ाइट, फ़ाइट, फ़ाइट.’’
पेनसिल्वेनिया में जो हुआ, उसने अमेरिकी जनमानस की चेतना पर एक तरह से अमिट छाप छोड़ी है, क्योंकि राष्ट्रपति चुनाव से जुड़ी सियासत के दौरान ये घटनाक्रम वहां हुआ, जहां सीक्रेट सर्विस एजेंट्स की मौजूदगी में सुरक्षा के ज़बर्दस्त इंतज़ाम थे.
इस घटना से अमेरिकी लोगों में ये संदेश गया कि देश के पूर्व राष्ट्रपति भी हिंसा से बच नहीं सकते, वो हिंसा जो अमेरिका की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कभी भी हो सकती है.
इतना ही नहीं, ये घटना अमेरिका के सियासी इतिहास में एक नाटकीय पल के तौर पर दर्ज हो गई है, जिसे वीडियो क्लिप्स, तस्वीरों और गवाहों के बयानों के ज़रिए इस राष्ट्रपति चुनाव और भावी चुनावों के दौरान भी याद किया जाएगा.


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हिंसा के ख़िलाफ़ बाइडन की अपील
रविवार की शाम ओवल ऑफिस से अपने संबोधन में राष्ट्रपति जो बाइडन ने अमेरिकियों से कहा कि वे चुनावी डिबेट के दौरान अपना आपा नहीं खोएं.
उन्होंने कहा, “ये कभी जंग का मैदान नहीं बनना चाहिए. इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि हमारी धारणा चाहे कितनी भी मज़बूत क्यों न हो, हमें हिंसा का सहारा कभी नहीं लेना चाहिए.”
इसबीच रिपब्लिक पार्टी के कई नेताओं ने डेमोक्रेट्स और राष्ट्रपति जो बाइडन की आलोचना की है. उनका कहना है कि “माहौल ही ऐसा बनाया गया जिससे हिंसा हुई.”
डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने डेमोक्रेट्स को आड़े हाथों लेते हुए रविवार को एक टीवी इंटरव्यू में कहा, “ये लगभग वैसा ही है, जैसा कि वो होता हुआ देखना चाहते थे.”
हालांकि अभी तक ये पता नहीं चला है कि कथित हत्यारे थॉमस मैथ्यू क्रूक्स का राजनीतिक झुकाव किस तरफ़ रहा है और उसका मकसद क्या था.
यूएस कैपिटल हिंसा का हवाला

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डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने यहां तक कहा कि वॉशिंगटन में यूएस कैपिटल हिंसा की घटना के लिए अब किसी को डोनाल्ड ट्रंप पर उंगली नहीं उठाना चाहिए.
एक जनवरी 2020 में ये हिंसक घटनाक्रम तब हुआ था, जब चुनावी नतीजों को चुनौती देते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति ट्रंप ने एक रैली को संबोधित किया था. उसके बाद उनके समर्थकों की भीड़ ने कैपिटल हिल इलाक़े पर धावा बोल दिया था और इस दौरान पुलिस से उनकी झड़पें हुई थीं.
इस घटनाक्रम का नतीजा ये हुआ कि प्रतिनिधि सभा में उनके ख़िलाफ़ महाभियोग चलाया गया, जिसके एक साल बाद उनके विरुद्ध क़ानूनी कार्रवाई का दायरा बढ़ता गया.
यूएस कैपिटल हिंसा मामले में डेमोक्रेट्स, डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना करते रहे हैं. लेकिन पेनसिल्वेनिया में जिस तरह गोलियां चलीं, उससे राष्ट्रपति चुनाव-प्रचार के दौरान डेमोक्रेट्स की उस आलोचना की हवा निकल सकती है.
पेनसिल्वेनिया में हुए घटनाक्रम की वजह से एक अलग तरह की राजनीति को बढ़ावा मिल सकता है. मसलन ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट में कहा जा रहा है, “वो मेरे पीछे नहीं पड़े हैं, वो आपके पीछे पड़े हैं.”
जो बाइडन की बढ़ती मुश्किलें

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अमेरिका में चुनावी सियासत के बीच ये सारी चर्चा ऐसे समय गर्माई है, जब राष्ट्रपति बाइडन की उम्र और उनकी क्षमताएं पहले ही सवालों की घेरे में हैं. इससे बाइडन समर्थक डेमोक्रेट्स, उनके दोबारा चयन को लेकर सशंकित हैं. दो हफ्ते पहले ही प्रेसिडेंशियल डिबेट के दौरान बाडइन के ख़राब प्रदर्शन ने सुर्ख़ियां बटोरी थीं.
दूसरी ओर, पेनसिल्वेनिया में हुआ हमला और ट्रंप उसके बाद जिस तरह नज़र आए, उससे रिपब्लिकंस को आने वाले दिनों में अपने नेता की एक अलग तस्वीर पेश करने में मदद मिलेगी.
इसकी वजह से डेमोक्रेट्स को भी अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है. लेकिन इसके लिए उनके पास समय बहुत है.
पेनसिल्वेनिया में बीते शनिवार की रात जो हुआ, उससे एक बात साफ़ उभरकर सामने आती है और वो ये है कि उम्मीदें और ‘पॉलिटिकल नैरेटिव’ चंद सेकेंड में बदल सकता है.
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