डोनाल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ चले 'लीगल थ्रिलर' पर फ़ैसला जल्द, अमेरिका में कितनी दिलचस्पी?

इमेज स्रोत, Curtis Means/Daily Mail/Bloomberg via Getty Images
- Author, जॉन सडवर्थ
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, न्यूयॉर्क से
डोनाल्ड ट्रंप पर चल रहा मुक़दमा किसी ब्लॉकबस्टर फ़िल्म से कम नहीं हैं. इसमें कामुक विवरण है, साथ ही एक पूर्व राष्ट्रपति कटघरे में हैं.
इससे बड़े किसी कोर्टरूम ड्रामा के बारे में कल्पना करना भी मुश्किल है. इस कहानी में एक पोर्न एक्ट्रेस के साथ यौन संबंध के आरोप में वो शख़्स हैं, जो एक समय में दुनिया के सबसे शक्तिशाली इंसान माने जाते थे, वो एक बार फिर ऐसा बनने की रेस में जुटे हुए हैं.
ये एक सियासी और कानूनी थ्रिलर हैं, जिसका सामना एक ऐसा शख़्स कर रहा है जो कम से कम विनम्रता के लिए तो नहीं जाना जाता.
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ पहला ऐसा आपराधिक मुक़दमा, हफ़्तों चली सुनवाई, लाख़ों पेज़ों के दस्तावेज़ और मुक़दमे की सुनवाई को रिकॉर्ड करने के लिए इकट्ठा हुए लाइव टीवी कैमरा की कतारों के बावजूद अमेरिका के लोगों में इस केस के लिए अज़ीब सी उदासीनता है.
ट्रंप के मुक़दमे को लेकर क्या सोच रहे हैं अमेरिकी लोग?

इमेज स्रोत, EPA
हाल ही में YouGov/Yahoo News के एक सर्वेक्षण में महज़ 16% लोगों ने कहा कि वो इस मुक़दमे पर ''बेहद क़रीबी'' नज़र बनाए हुए हैं. वहीं सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से एक तिहाई लोग कह रहे हैं कि वो कार्यवाही में हल्की रूचि ले रहे हैं.
ज़्यादातर अमेरिकियों का कहना है कि वो इस मुक़दमे में दिलचस्पी लेने की बजाए ''ऊब'' महसूस कर रहे हैं या ''गुस्से'' में हैं. मुक़दमें के दौरान लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए किए गए दूसरे सर्वेक्षणों में भी ऐसे ही नतीजे मिले हैं.
जो विश्लेषक और सर्वेक्षणकर्ता ये सोच रहे थे कि लोअर मैनहट्टन क्रिमिनल कोर्ट में चल रहा ये मुक़दमा एक बड़ी राष्ट्रीय घटना होगी, उनकी सोच में बदलाव आ रहा है.
अब वो ये महसूस कर रहे हैं कि फ़ैसला चाहे जो भी हो, उम्मीद के मुताबिक़ नाटकीय नहीं होगा.
ट्रंप ने हमेशा इस बात से इनकार किया है कि उन्होंने स्टॉर्मी डेनियल्स (असली नाम स्टेफ़नी क्लिफोर्ड) के साथ यौन संबंध बनाए थे. ट्रंप के वकीलों ने स्टॉर्मी को झूठा साबित करने की कोशिश की.
उन्होंने तर्क दिया कि स्टॉर्मी ने आरोपों की वजह से हुई बदनामी का इस्तेमाल पैसे कमाने के लिए किया है. इसमें कई तरह के सामान यहां तक की मोमबत्ती का बेचा जाना भी शामिल है.
कार्यवाही के दौरान बहस में दिए गए कई तरह के ब्योरे

इमेज स्रोत, Reuters
मुक़दमे के सबसे यादगार बातचीत में से एक था ट्रंप के बचाव पक्ष की वकील सुज़ैन नेचेल्स का वो तर्क, जिसमें उन्होंने कहा था कि पोर्न स्टार को ''सेक्स से जुड़ी झूठी कहानियों को वास्तविक दिखाने का बहुत अनुभव है.''
फिर डेनियल्स कहती हैं, '' वाह! उन फिल्मों में सेक्स बिलकुल सच होता है, जैसा कि उस होटल रूम में हुआ था.'' वो आगे कहती हैं कि कहानी अगर मनगढ़ंत होती तो वो इसे और बेहतर तरीके से लिखतीं.
स्टॉर्मी डेनियल्स ने बताया कि ट्रंप कैसे पायजामे में अपने होटल के कमरे का दरवाजा खेलते हैं. जब वो बाथरूम में होती हैं तो वो अपना अंडरवियर उतार देते हैं और उसके बाद दोनों के बीच एक असुरक्षित यौन संबंध बनता है. डेनियल्स कहती हैं कि इससे वो कांप उठीं और फिर वहां से चली गईं.
हालांकि, पहली नज़र में ये मामला कभी भी इस बारे में नहीं था कि उस गोल्फ़ रिसॉर्ट होटल कमरे में क्या हुआ था क्या नहीं.
इसके बजाए अपराध, इस कहानी को छिपाने के लिए किया गया था.
2016 के चुनाव से कुछ समय पहले माइकल कोहेन ने डेनियल्स को एक लाख तीस हज़ार डॉलर का भुगतान किया था. कोहेन, डोनाल्ड ट्रंप के क़रीबी रहे हैं और उनके वकील थे.
अभियोजन पक्ष के वकीलों का आरोप क्या है?
अभियोजकों का आरोप है कि इस कहानी को मतदाताओं से छिपाने के लिए पोर्न स्टार को चुप रहने के बदले में गुप्त रूप से पैसों का भुगतान किया गया था.
अभियोजकों का दावा था कि चुनाव के क़रीब आने के साथ ही ट्रंप का कैंपेन, पहले से ही ''एक्सेस हॉलीवु़ड'' टेप के जारी होने से परेशानी में था. इसमें ट्रंप ये दावा करते हुए दिखाई दे रहे थे कि अपनी प्रसिद्धि के कारण वो महिलाओं के साथ कुछ भी कर सकते हैं.
ऐसे में डेनियल्स का अपनी कहानी के साथ सामने आना ट्रंप के कैंपेन को और नुकसान पहुंचा सकता था. अभियोजन पक्ष का दावा है कि चुनाव की तारीखों को देखते हुए ये समझा जा सकता है कि आख़िर क्यों स्टॉर्मी डेनियल्स की चुप्पी को खरीदना ट्रंप के लिए ज़रूरी था.
उदासीन क्यों हैं अमेरिकी?
इस मुक़दमे को लेकर लोगों की उदासीनता को कुछ लोग इतना हैरानी भरा नहीं मानते, जितना की ये लग रहा है.
सबसे पहले, डोनाल्ड ट्रंप एक ऐसी शख़्सियत हैं जिनका आक्रोश भड़काने का लंबा इतिहास रहा है. बदनामी उनके ब्रांड का एक हिस्सा रही है और उन्होंने कोई गलत काम किया है या नहीं, इस बात पर लोगों की अलग-अलग राय है.
दूसरी बात ये है कि अमेरिकी मतदाता यौन मामलों को लेकर उतने संवेदनशील नहीं हैं, जितना कुछ लोग सोचते हैं. ये बात इसी तरह के एक और यौन संबंध से जुड़े आरोपों से साबित होता है.
बिल क्लिंटन के वक्त में व्हाइट हाउस में सीनियर पॉलिसी से जुड़े रहे बिल गाल्स्टन फिलहाल ब्रूकिंग इंस्टीट्यूशन में सीनियर फैलो हैं.
वो बताते हैं, ''अगर आप मुझसे ये पूछ रहे हैं कि मैं ओवल ऑफिस या उसके आसपास में हुए सेक्स स्कैंडल से जुड़े मामलों से परिचित हूं, तो मैं बिल्कुल हूं.''
उन्होंने कहा कि 1990 के दशक में राष्ट्रपति क्लिंटन पर लगे आरोपों और ट्रंप पर चल रहे मुक़दमे के बीच काफी समानताएं हैं. क्लिंटन पर आरोप था कि उन्होंने व्हाइट हाउस की इंटर्न मोनिका लेविंस्की के साथ सेक्स स्कैंडल को छिपाने के लिए झूठ बोला था.
गाल्स्टन कहते हैं, ''मैं सियासी गलियारे के दोनों पक्षों की बहसों में शामिल था. लोग सोच रहे थे कि आख़िर आक्रोश कहां है?''
उस समय के सर्वेक्षणों और हालिया सर्वेक्षणों में काफी समानताएं हैं. उस वक्त केवल 15% लोगों ने कहा था कि वो क्लिंटन के महाभियोग परीक्षण को टेलीविजन पर बारीकी से देख रहे थे और एक तिहाई से कुछ अधिक लोगों ने कहा था कि वो इस केस में ''कुछ ही चीज़ें'' देख रहे थे.
ये ट्रंप से जुड़े सर्वे जैसा ही है. साथ ही ट्रंप के मुक़दमे को टेलीविजन पर दिखाया भी नहीं जा रहा है.
बिल क्लिंटन को अमेरिकी सीनेट ने बरी कर दिया था. तो क्या डोनाल्ड ट्रंप को भी भले ही अमेरिकी क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम से छूट न मिले लेकिन अमेरिकी लोगों से ऐसी ही छूट मिल सकती है?
गाल्स्टन कहते हैं, ''कुछ अमेरिकी ये देख रहे होंगे और कह रहे होंगे, 'उन्होंने सेक्स के बारे में झूठ बोला है और इसमें क्या नई बात है?'.''
वो कहते हैं, ''ये एक ऐसी लंबी ऐतिहासिक घटनाओं में से एक है, जिसमें उन पापों को सामान्य बनाया गया, जिन्हें पहले घातक माना जाता था.''
शायद अमेरिकी मतदाताओं का ध्यान यौन आरोपों और कामुक ब्योरे पर है, जिसकी वजह से मामला उदासीन लगने लगा है.
ट्रंप के ख़िलाफ़ आए मामलों में ये मामला कमज़ोर है

इमेज स्रोत, Reuters
ये देख सकते हैं कि मैनहट्टन मुक़दमा डोनाल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ सामने आए चार आपराधिक मामलों में से सबसे कमज़ोर है.
आरोप है कि डेनियल्स को चुप रहने के बदले में गुप्त रूप से पैसों का भुगतान माइकल कोहेन ने किया था. ट्रंप के ऑर्गेनाइज़ेशन में इस भुगतान की एंट्री ग़लत तरीक़े से की गई थी. कोहेन को चेक दिया गया था और इसे ''हश-मनी'' भुगतान की जगह क़ानूनी सेवा लेने के मद में बताया गया था.
एक सामान्य अपराध में चुनाव को अनुचित तरीके से प्रभावित करने की कथित कोशिश के कारण इसे बेहद गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है.
इस मुक़दमे के गुण-दोष और सफलता की संभावनाओं को लेकर कानूनी राय में मतभेद है.
ख़ासकर, बात जब अमेरिका में निर्वाचित अभियोजकों का हो. ये धारणा इस तथ्य से भी बढ़ी है कि मैनहट्टन अटॉर्नी एल्विन ब्रैग ने ट्रंप के ख़िलाफ़ अपनी पिछली कानूनी लड़ाइयों पर खुलेआम अभियान चलाया.
यहां तक कि गाल्स्टन कहते हैं,''इस बात को नकारना बहुत मुश्किल है कि पक्षपात नहीं होता है.''
ये एक ऐसी चिंता है जिसका ट्रंप पूरा फायदा उठाते हैं. कोर्ट की सीढ़ियों से वो आरोप लगाते हैं कि वो सत्तावादी उत्पीड़न के शिकार हैं. ये सब आरोप एक ऐसे शख़्स लगा रहे हैं जिन पर 2020 के चुनाव के नतीजों को पलटने की कोशिश का आरोप लगा है, साथ ही जो चुनावी धोखाधड़ी के झूठे दावे करना जारी रखते हैं.
इन सब चीज़ों में से सबसे अहम बात ये है कि डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक गति, इन कानूनी चुनौतियों से धीमी होने की संभावना नहीं है. ''हश-मनी'' केस डोनाल्ड ट्रंप पर चल रहे चार आपराधिक मामलों में से एक है, जिसकी सुनवाई 5 नवंबर के चुनाव से पहले होने की संभावना है.
ट्रंप के ख़िलाफ़ सबसे गंभीर मामले, 6 जनवरी को हुए कैपिटल दंगे और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों को संभालने से जुड़े मामले हैं.
वहीं ट्रंप पर लगे सेक्सुअल स्कैंडल मामले कानूनी तर्कों पर आधारित हैं.
अब नतीजे चाहे जो भी हो ट्रंप इसका इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर सकते हैं. बरी किए जाने को जबरन फंसाए जाने के तौर पर देखा जाएगा, वहीं अगर सज़ा मिलती है तो इससे ट्रंप अपने समर्थकों के बीच ''शहीद'' बन सकते हैं.
हालांकि, कुछ सर्वे से ये पता चलता है कि अगर ट्रंप को दोषी ठहराया जाता है तो कुछ समर्थक अपने वोट पर पुनर्विचार कर सकते हैं.
ट्रंप की रैली

इमेज स्रोत, Reuters
फ़ैसला नज़दीक है, इस बीच ट्रंप ने गुरुवार को न्यूयॉर्क के ब्रोंक्स में एक रैली की. यहां पर 80% काले लोग या हिस्पैनिक हैं.
ये अमेरिका के सबसे लोकतांत्रिक इलाकों में से एक है, यहां पर ट्रंप को सुनने जो स्थानीय आए वो अपने उम्मीदवार को लेकर उत्साहित नज़र आए.
ब्रोंक्स में पली बढ़ी रोजाह वॉटसन मैनहट्टन में काम करती हैं, वो मुझसे कहती हैं कि ट्रंप की ये धमकी कि वो दूसरे कार्यकाल में अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट को अपने हिसाब से झुकाएंगे, जो बाइडन पर मुक़दमा चलाएंगे और 6 जनवरी के दंगाइयों को क्षमा कर देंगे, उनके उत्साह का कारण थे.
वो कहती हैं, ''ये घर की सफाई जैसा है. ये तो होना ही चाहिए थे.''
जब उनसे पूछा गया कि वो किसी मजबूत नेता की तलाश में हैं तो उनका जवाब था: ''हां, बिलकुल.''
ट्रंप शब्द लिखी टोपी पहनी हुई 'टीके' इस बात से सहमत नज़र आती हैं.
वो कहती हैं, ''न्याय व्यवस्था पहले से ही ख़राब है. मैं नहीं चाहती कि वो तानाशाह की तरह हो लेकिन कभी-कभी आपको मुखर होना पड़ता है.''
क्या आपराधिक सज़ा की वजह से उन्हें दोबारा सोचना होगा?
उनका कहना था, ''नहीं, स्टॉर्मी के बारे में जो आरोप उन पर लग रहे हैं, वो उनका निजी जीवन है. उनके निजी जीवन से बाहर निकल जाओ.''
इस मुक़दमे की सबसे बड़ी विडंबना ये है कि चुप रहने के लिए दी गई रक़म असल में कुछ और ही निकली. स्टॉर्मी डेनियल्स की कहानी, अब राजनीतिक और कानूनी इतिहास में दर्ज़ हो चुकी है.
इसका नतीज़ा ये निकलेगा कि 12 सामान्य पुरुष और महिला, न्यूयॉर्क की एक कोर्ट में एक बेहद अमीर शख़्स पर फ़ैसला सुनाएंगे. उनका फ़ैसला कुछ भी हो सकता है.
लेकिन क्या इंसाफ़ का पहिया घूमने से डोनाल्ड ट्रंप विनम्र हो जाएंगे? ऐसा लगता नहीं है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)


















