निकी हेली के बाहर होने से ट्रंप को फ़ायदा होगा या बाइडन को

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- Author, हॉली होंडेरिच
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
निकी हेली का 2024 में अमेरिका की राष्ट्रपति बनने का ख़्वाब रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवार बनने से पहले ही टूट गया.
राष्ट्रपति चुनाव के लिए चुने जाने वाले उम्मीदवारों की दौड़ से निकी हेली ने बाहर होने का फ़ैसला किया है. वह रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी की रेस में डोनाल्ड ट्रंप को चुनौती दे रही थीं लेकिन टिक नहीं पाईं.
निकी हेली ने अपना चुनाव प्रचार ख़त्म करने का एलान उसी तरह किया, जैसे उनके प्रचार के कुछ अंतिम हफ़्ते बीते थे... यानी डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी देते हुए.
निकी हेली ने कहा, ''अब ये डोनाल्ड ट्रंप पर है कि वो हमारी पार्टी और पार्टी से बाहर ऐसे लोगों के वोट भी हासिल करें, जिन्होंने उनका समर्थन नहीं किया था. मुझे उम्मीद है कि वो ऐसा करेंगे.''
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में निकी हेली के बाहर होते ही अब मुक़ाबला रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बाइडन के बीच है.
चार साल बाद दोनों नेता एक बार फिर आमने-सामने हैं.
ऐसे में अब सवाल ये है कि निकी हेली के जो समर्थक थे, अब वो किस ओर जाएंगे? क्या वो ट्रंप को चुनेंगे या फिर वो बाइडन की तरफ़ जाएंगे?


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ख़ास बातें
- अमेरिका में द्विदलीय लोकतांत्रिक व्यवस्था है. दो पार्टियां हैं- रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक
- इन दोनों दलों से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार कौन होगा, इसके लिए प्राइमरी और कॉकस होते हैं
- प्राइमरी और कॉकस चुनाव अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की पहली सीढ़ी है
- प्राइमरी और कॉकस में दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता और समर्थक हिस्सा लेते हैं

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निकी हेली के समर्थक किधर जाएंगे?
अब लौटते हैं सवाल के जवाब पर. निकी हेली के राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ से बाहर हो जाने पर उनके समर्थक किस ओर जाएंगे?
दक्षिण कैरोलाइना की पूर्व गवर्नर हेली का समर्थन करने वाले ट्रंप-विरोधी रिपब्लिकन और निर्दलीयों की संख्या बहुत बड़ी नहीं है. ये छोटा सा समूह ट्रंप को राष्ट्रपति पद के नॉमिनेशन से बाहर नहीं कर पाता.
सुपर ट्यूज़्डे में ट्रंप को मिली जीत इस बात पर और बल देती है.
लेकिन निकी हेली के समर्थन में यही लोग और इनके साथ, कॉलेज एजुकेटर्स, सब-अर्बन वोटर अगर मिल जाएं तो ये संख्या अहम हो सकती है. यही वो समूह है, जिसने हेली को दो प्राइमरी जितवाए.
ऐतिहासिक रूप से इन समूहों को चुनाव में एक बड़ी ताक़त माना जाता है जो चुनाव प्रभावित कर सकते हैं.
जानकारों का मानना है कि अपने जिन मतदाताओं को निकी छोड़ चुकी हैं, अब वो राष्ट्रपति के चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे.
रिपब्लिकन रणनीतिकार केविन मैडेन का कहना है, ''ये वो मतदाता हैं, जो इस चुनाव का फ़ैसला करेंगे.''

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ट्रंप बाइडन का रुख़ और जानकारों की राय
ट्रंप और बाइडन भी ये बात जानते हैं. ऐसे में जब निकी हेली ने उम्मीदवारी से पीछे हटने का एलान किया तो ट्रंप और बाइडन दोनों की तरफ़ से प्रतिक्रियाएं आईं और इसमें अलग-अलग तरीक़े से मतदाताओं से अपील की गई.
बाइडन ने निकी हेली को बधाई दी और उनके समर्थकों को संबोधित किया. बाइडन ने इन समर्थकों के लिए अपने चुनावी अभियान में जगह होने की बात कही.
ट्रंप ने निकी हेली को कोई रियायत नहीं दी लेकिन उनके मतदाताओं से कहा कि वो ''अमेरिका के इतिहास के सबसे महान आंदोलन'' में हिस्सा लें.
जानकारों का कहना है कि निकी हेली के मतदाता मुख्य तौर पर तीन श्रेणियों में बाँटे जा सकते हैं-
- ट्रंप विरोधी
- निर्दलीय
- रिपब्लिकन पार्टी के वफ़ादार

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पहली श्रेणी के मतदाता यानी ट्रंप को बिल्कुल ना पसंद करने वालों के मामले में रुख़ साफ़ है. ये लोग ट्रंप की पहुँच से दूर ही रहेंगे.
चुनावी अभियान के दौरान इंटरव्यू में इन मतदाताओं ने निकी हेली को पसंद किए जाने की वजह समझाते हुए बताया था कि वो ट्रंप को पूरी तरह ख़ारिज करते हैं.
होल्ट मोरैन ने कहा, ''ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी में कैंसर हैं.''
होल्ट साउथ कैरोलाइना से रिपबल्किन हैं और जब 2016 में ट्रंप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बने तो उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी. वो कहते हैं- ट्रंप देश के लिए आपदा हैं.
चुनावी अभियान के दौरान इन मतदाताओं ने निकी हेली के बारे में कम बात की और ट्रंप के सामने खड़ी क़ानूनी चुनौतियां, 2021 कैपिटल हिल दंगे जैसी घटनाओं का ज़िक्र ज़्यादा किया.
कम ही लोगों ने सोचा था कि निकी हेली ट्रंप को हरा सकती हैं, फिर भी विरोध का इज़हार करते हुए इन मतदाताओं ने हेली को वोट किया. जानकारों का कहना है कि ये सच्चा विरोध था जो बताता है कि ट्रंप के लिए लोगों के मन में क्या है.
ऐसे वोटर्स ने डेमोक्रेटिक पार्टी के मन में कुछ उम्मीदें जगाई हैं.

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निकी हेली के समर्थकों का बाइडन के प्रति झुकाव
डेमोक्रेट्स रणनीतिकार सिमॉन रोज़ेनबर्ग ने कहा कि शुरुआती मतदान से जुड़े कुछ पोल्स बताते हैं कि निकी हेली के समर्थकों का एक बड़ा हिस्सा जो बाइडन के लिए वोट डाल सकता है.
कैरोलाइना में निकी हेली के समर्थकों में से 21 फ़ीसदी ने कहा कि वो उम्मीदवार चाहे जो भी हो, वो रिपब्लिकन उम्मीदवार के लिए वोट डालेंगे.
रोज़ेनबर्ग ने कहा, ''रिपबल्किन पार्टी के लिए ये ख़तरे का निशान है. रिपब्लिकन पार्टी बिखर चुकी है और हेली ने ये दिखा दिया है कि ये दरारें वैध और गंभीर बात हैं.''
अगर ट्रंप और उनके सहयोगियों की बात की जाए तो वो निकी हेली के मतदाताओं को अपनी ओर खींचने को लेकर अनिच्छुक दिखते हैं. ट्रंप पक्ष इसकी बजाय निकी हेली पर निजी हमले करते हुआ दिखता है.
यहां तक कि जब निकी हेली ने राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर होने का एलान किया तो ट्रंप ने कोई कसर नहीं छोड़ी.
ट्रंप ने निकी हेली की हार का मज़ाक उड़ाया और कहा कि वो 'फैशन का रिकॉर्ड बनाने के चक्कर में अपनी फजीहत' करवा रही हैं.
रोज़ेनबर्ग ने कहा कि राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो ये शुद्ध मूर्खता है, पार्टी अपने सहयोगियों के वोट हासिल किए बिना चुनाव नहीं जीत सकती.
हालांकि कुछ जानकारों ने भी चेताया है कि ट्रंप को लेकर जो आम नापसंदगी का माहौल है, इसका मतलब ये नहीं है कि ये लोग नवंबर में बाइडन को चुनेंगे. कट्टर संबंध इतनी आसानी से नहीं टूटते.

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डेमोक्रेटिक रणनीतिकार क्या कह रहे हैं?
डेमोक्रेटिक रणनीतिकार कैट मेडर ने कहा, ''अब हमारी राजनीति काफ़ी नस्ली हो गई है, जिसके बीच में बहुमत का बहुत मामूली फ़र्क़ होता है और जिसे अपने पाले में किया जा सकता है.''
अतीत में मुख्य राजनीतिक दलों के अंदर प्रतिद्वंद्वियों के मामले में ये बात सच रही है.
2008 में हिलेरी क्लिंटन ने जब राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी बराक ओबामा को सौंपी थी, तब उनके क़रीब एक तिहाई समर्थकों ने कहा था कि वो रिपब्लिक जॉन मैकेन को वोट देंगे. लेकिन जब चुनाव का दिन आया तो हिलेरी क्लिंटन के 82 फ़ीसदी समर्थकों ने बराक ओबामा के लिए वोट दिया.
निकी हेली अपने चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप पर भले ही निजी हमले करती रही हों लेकिन हेली ये भी दोहराती रहीं कि बाइडन ज़्यादा ख़तरनाक उम्मीदवार हैं.
ये कहकर निकी हेली ने रिपब्लिकन पार्टी के प्रति अपनी वफ़ादारी भी साबित कर दी कि उम्मीदवार चाहे कोई भी हो, वो पार्टी के लिए सोचती हैं.
रिपब्लिकन एक्सपर्ट विट आयरस ने कहा कि इस मामले में बाइडन की अपनी कमज़ोरियां भी अहम भूमिका निभाएंगी.
वो कहते हैं, ''हेली के बहुत से मतदाता बाइडन को भी पसंद नहीं करते हैं.'' विट ने राष्ट्रपति पद के लिए बाइडन की घटती अप्रूवल रेटिंग्स और मतदाताओं के बीच उनकी ज़्यादा उम्र का हवाला भी दिया.
निकी हेली के ज़्यादातर समर्थकों ने बीते महीनों में इंटरव्यू के दौरान ये बातें कही हैं. ये लोग ट्रंप से आगे निकलना चाहते हैं लेकिन ख़ुद को बाइडन के लिए वोट करते हुए भी नहीं देखते हैं.
ये लोग बाइडन को अर्थव्यवस्था और सरहद के मोर्चे पर ख़राब मानते हैं.

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समर्थकों के मन में क्या है?
ज़िंदगी भर रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े रहने वाले और निकी हेली के समर्थक टिम फर्गुसन ने कहा- बीते कई सालों में हमें दो बुरे लोगों में से एक कम बुरे को चुनना पड़ता है.
वो कहते हैं, ''मैं बाइडन के लिए वोट नहीं कर सकता. मैं फिर से ट्रंप के लिए वोट करूंगा और मैं इस बारे में अच्छा भी महसूस नहीं करता.''
फर्गुसन की ये नाराज़गी व्यापक तौर पर देखने को मिलती है.
फ़रवरी में मॉर्निंग कंसल्ट के पोल के मुताबिक़, अमेरिकी मतदाताओं में से 19 फ़ीसदी दोनों को नहीं चाहते हैं. ये लोग ट्रंप और बाइडन दोनों से नाख़ुश हैं.
कुछ जानकारों का कहना है कि इस रुख़ के कारण कई वोटर्स शायद ख़ुद वोट डालने भी ना जाएं.
मैडन कहते हैं कि ये ऐसा मुक़ाबला है, जो कोई नहीं चाहता था. ज़्यादा बड़ा जोखिम ये है कि मतदाता वोट डालने बाहर ही ना निकलें.
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बदलाव, यूक्रेन और ग़ज़ा का मामला... आज़ाद विचारों वाले मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है.
पोल्स ये बताते हैं कि ट्रंप जिन क़ानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, अगर उनमें से किसी मामले में वो दोषी क़रार दिए जाते हैं तो वो कुछ रिपब्लिकन वोटर्स को खो बैठेंगे.
इंडियाना से रिपब्लिकन जिम सुलिवन ने कहा कि वो बाइडन के लिए पार्टी लाइन से अलग नहीं जाएंगे.
जिम ट्रंप को भी पसंद नहीं करते हैं पर कोई विकल्प नहीं है. वो कहते हैं- बाइडन या ट्रंप, मैं इस वक़्त इसी कुश्ती में लगा हुआ हूं.
बाइडन और ट्रंप के मुक़ाबले में बस आठ महीने बाक़ी हैं. जानकारों का कहना है कि जिम जैसे वोटर्स किस ओर जाएंगे, ये कहना अभी जल्दीबाज़ी होगा.
मैडन कहते हैं- हर सवाल का असल जवाब बहुत मुश्किल रहने वाला है और हमें ये जवाब अभी तक पता नहीं है.
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