अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले क्या हैं बाइडन और ट्रंप की चुनौतियाँ?

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- Author, सारा स्मिथ
- पदनाम, नार्थ अमेरिका एडिटर
ऐसा कम ही होता है कि सीक्वल ओरिजनल से बेहतर हो. हम कई बार कुछ कामयाब फ़िल्मों के बारे में सोचते हैं कि उसकी अगली कड़ी यानी सीक्वल नहीं बननी चाहिए थी.
अमेरिकी मतदाताओं की अगले साल होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर कुछ धारणाएं हो सकती हैं जो कि हो सकता है साल 2020 के मुक़ाबले जैसा ही हो. यानी अग्रणी भूमिका में पुराने किरदार ही हो सकते हैं. मतलब डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडन.
जो बाइडन ने अब इस बात की पुष्टि की है कि वो आने वाले चुनाव में डेमोक्रेट्स की तरफ़ से चुनाव लड़ेंगे, जबकि डोनाल्ड ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की दौड़ में पहले से ही सबसे आगे हैं.
ये एक ऐसी कहानी है जिसका अनुभव पहले ही किया जा चुका है और शायद बहुत कम लोग ही ऐसे होंगे जो इसे दोबारा देखना चाहते हैं.
बाइडन का नैरेटिव
एक हालिया सर्वे में पाया गया कि केवल 5% अमेरिकी चाहते हैं कि राष्ट्रपति बाइडन और पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप फिर से चुनाव में आमने-सामने दिखें. जबकि 38 प्रतिशत अमेरिकी चाहते हैं कि दोनों नेताओं में से कोई भी चुनाव में न उतरें.
जो बाइडन दोबारा राष्ट्रपति चुनाव की रेस में उतरे हैं क्योंकि उन्हें विश्वास है कि डोनाल्ड ट्रंप को सिर्फ़ वही हैं जो हरा सकते हैं.
इस रिपोर्ट में हम जानने की कोशिश करेंगे कि क्या सच में ट्रंप को केवल बाइडन ही हरा सकते हैं?
जिस चुनाव की रेस में एक मौजूदा राष्ट्रपति होते हैं, उस चुनाव को उनके चार साल के कार्यकाल पर जनमतसंग्रह के रूप में भी देखा जाता है.
बाइडन प्रशासन के पास नागरिकों को दिखाने के लिए नीतिगत उपलब्धियां हैं. इस अभियान के लिए उनका स्लोगन होगा "चलो काम ख़त्म को अंजाम तक पहुंचाओ."
लेकिन यह हैरान करने वाला है कि बाइडन के चुनाव अभियान के आधिकारिक लॉन्च ने चुनाव को इस रूप में पेश किया है जिसमें मुक़ाबला सक्षम और सनकी, नरम और गरम के बीच होने वाला है.
इसी तरह की "राष्ट्र की आत्मा के लिए लड़ाई" पिछली बार बाइडन की रणनीति के केंद्र में थी.
डोनाल्ड ट्रंप कैंपेन के वीडियो में दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन कैपिटल हिल में 6 जनवरी के दंगों के दृश्य को देखा जा सकता है जिसमें जो बाइडन 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' के अतिवाद की चेतावनी देते हैं और वह कहते हैं कि यह अमेरिकी लोकतंत्र के लिए ख़तरा है.

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'चुनाव में धांधली' जैसे दावे से ट्रंप को मदद मिलेगी?
पिछले दो सालों में हमने पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के 'झूठे दावों' को सुना है कि 2020 के चुनावों में उनके साथ धोखा हुआ था.
अगर ट्रंप 2024 के चुनाव में फिर से रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार बनते हैं तो वह अपने दावों को जारी रखेंगे.
फिर भी, चुनावी धोखाधड़ी के बारे में झूठ दोहराना निश्चित तौर पर पिछले साल (2022 के मध्यावधि चुनाव में) जीत का फ़ॉर्मूला नहीं था.
साल 2022 के मध्यावधि चुनावों में ट्रंप का समर्थन हासिल करने वाले ज़्यादातर हाई-प्रोफ़ाइल उम्मीदवार जिन्होंने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया था, उनका प्रदर्शन काफ़ी ख़राब रहा था.
इसके ठीक विपरीत डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस के उन चुनावों में अमेरिकी सीनेट पर नियंत्रण रखते हुए अपेक्षा से कहीं बेहतर परिणाम हासिल किए थे.
चुनाव में इस प्रदर्शन की वजह से इस बात की पुष्टि हो गई थी कि राष्ट्रपति बाइडन को अपनी ही पार्टी के भीतर से किसी बड़ी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ेगा.

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गर्भपात का मुद्दा
डेमोक्रेट्स के पक्ष में जाने वाला सबसे बड़ा मुद्दा गर्भपात का था.
गर्भावस्था को ख़त्म करने के संवैधानिक अधिकार को पलटने के ख़िलाफ़ मतदाताओं में एक बड़ी हलचल पैदा हुई है.
दो-तिहाई अमेरिकी लगातार बताते रहे हैं कि उन्हें लगता है कि गर्भपात क़ानूनी और सुलभ होना चाहिए.
अमेरिकी चुनाव में 18 महीने का समय है और राष्ट्रपति बाइडन बार-बार गर्भपात के मुद्दे का ज़िक्र करेंगे.
लॉन्च वीडियो में राष्ट्रपति बाइडन ने रिपब्लिकन पार्टी के धुर समर्थकों पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के सामने विरोध करते एक वीडियो फ़ुटेज के आधार पर ये आरोप लगाया कि वे हेल्थकेयर के मामले में अपने फै़सले को महिलाओं पर थोप रहे हैं.
रिपब्लिकन कई दशकों बाद गर्भपात विरोधी अपनी स्थिति को बिना अधिक ब्योरा दिए आगे बढ़ा सकते थे. अब गर्भपात पर प्रतिबंध का समर्थन करने वाले उम्मीदवारों को लग रहा है कि इसका चुनाव में नुक़सान हो सकता है.
ट्रंप बनाम बाइडन - किसके पक्ष में क्या
रिपब्लिकन-नियंत्रित राज्य प्रतिबंधात्मक क़ानूनों को बढ़ावा दे रहे हैं, लेकिन पार्टी के रणनीतिकार राष्ट्रीय स्तर पर इसके प्रभाव को लेकर परेशान हैं.
लेकिन राष्ट्रपति बाइडन की स्थिति कमज़ोर बनी हुई है.
उनकी रेटिंग ऐतिहासिक रूप से कम हुई है. 42% लोग उनके प्रदर्शन का समर्थन करते हैं, जबकि 52% लोग राष्ट्रपति के रूप में उनके कामकाज को ख़ारिज करते हैं.
पहले कार्यकाल में इतने अलोकप्रिय होने के मामले में अब तक रोनल्ड रीगन के बाद डोनल्ड ट्रंप ही थे.
जो भी रिपब्लिकन उम्मीदवार बाइडन को चुनौती देगा वो ज़ाहिर तौर पर 80 साल के राष्ट्रपति को एक नाकाबिल बुज़ुर्ग उम्मीदवार के तौर पर पेश करेगा (भले ही ट्रम्प उनसे केवल चार साल ही छोटे हों).
हाल के एक वीडियो में राष्ट्रपति बाइडन की काफ़ी ऐसी झलकियां दिखी हैं जिनमें वो जान-बूझ कर ख़ुद को ऊर्जावान दिखा रहे हैं. वीडियो की एक फ़ुटेज में वो दौड़ते हुए भी देखे जा सकते हैं.
लेकिन ऐसे तिकड़मों को वो चुनाव तक कितना बरक़रार रख पाएंगें ये देखने वाली बात होगी.
अमेरिका में बढ़ती महंगाई और दक्षिणी सीमा पार करने वाले प्रवासियों की रिकॉर्ड संख्या जैसे मुद्दों को बाइडन के विरोधी भुनाने की कोशिश करेंगे. इन मुद्दों से रिपब्लिकन पार्टी का आधार मज़बूत होने की पूरी संभावना है.
डेमोक्रेट्स समर्थकों को राष्ट्रपति बाइडन वैसे नहीं खींचते जैसे ट्रंप और उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी फ़्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसैंटिस रिपब्लिकन समर्थकों को खींचते हैं.
बाइडन के कैंपेन से लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने की संभावना ही डेमोक्रेट्स और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच उनकी साख बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका है.
आख़िरकार पिछले चुनाव में ये तरीका ही काम आया था, और बाइडन उम्मीद करेंगे की इस बार भी चुनाव परिणाम पहले चुनाव के जैसे ही हों.
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