चीन और अमेरिका के बीच इस 'सफ़ेद सोने' को लेकर कहां मची है होड़

अटाकामा के लीथियम के भंडार

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    • Author, सेसीलिया बारिया
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ संवाददाता

दुनिया सतत ऊर्जा यानी ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ रही है और इसके लिए दुनिया की निगाहें जिस चीज़ पर टिकी हैं उसके बड़े भंडार लैटिन अमेरिका के तीन देशों में हैं.

अर्जेंटीना, चिली और बोलीविया दुनिया का वो 'लीथियम ट्रायंगल' है जहां लीथियम के दुनिया के आधे से अधिक भंडार हैं. इस कारण दुनियाभर की सरकारों और निवेशकों का ध्यान लैटिन अमेरिका के इस हिस्से पर है.

भविष्य की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने वाला ये खनिज इलेक्ट्रिक कारों (बैटरी से चलने वाली गाड़ियों) के लिए बनने वाली बैटरी में लगता है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लीथियम का बाज़ार लगातार बढ़ रहा है और कई खिलाड़ी अब इस मैदान में अपने पैर जमाना चाहते हैं.

अमेरिका और चीन जैसे मुल्क भी इस महत्वपूर्ण खनिज पर क़ब्ज़ा जमाने की कोशिश में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते.

जानेमाने थिकटैंक विल्सन सेंटर के लैटिन अमेरिका कार्यक्रम के निदेशक बिन्यामिन गेदन कहते हैं, "दुनिया नई ऊर्जा की तरफ़ बढ़ रही है और इसके लिए ज़रूरी खनिज पर क़ब्ज़े को लेकर विश्व की बड़ी शक्तियों के बीच होड़ मची है. इस समय लैटिन अमेरिका इस 'नए युद्ध' का मैदान बन गया है."

"चीन इस मामले में पहले ही शुरूआत कर चुका था जबकि अमेरिका इसमें पीछे रह गया था. लेकिन अब वो चीन के मुक़ाबले पीछे नहीं रहना चाहता."

चीन और अमेरिका

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चीन की कोशिशें

चीनी कंपनियां सालों से दुनिया के हर कोने में 'सफ़ेद सोने' के नाम से जाने जाने वाले इस खनिज की तलाश की कोशिश कर रही हैं.

इसके लिए उन्होंने लैटिन अमेरिका के उन देशों में भी बड़ा निवेश किया है, जहां दुनिया में मौजूद लीथियम के भंडारों का क़रीब 60 फ़ीसदी मौजूद है.

अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 के आंकड़ों के मुताबिक़ दुनिया में 860 लाख टन के लीथियम भंडारों का पता चला है.

इसमें सबसे बड़े भंडार बोलीविया में हैं. इसके बाद इस लिस्ट में अर्जेन्टीना, चिली, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और मेक्सिको हैं.

जहां लीथियम के खनन और बड़े पैमाने पर इसके उत्पादन में चिली आगे है, वहीं मेक्सिको भी 17 लाख टन के अपने सीमित लीथियम भंडार के साथ उत्तर अमेरिका के इस बाज़ार में बड़ा खिलाड़ी बनता जा रहा है.

भौगोलिक रूप से ये अमेरिका और कनाडा के नज़दीक है और बैटरी से चलने वाली कारों के उत्पाद का केंद्र बनता जा रहा है.

हाल के दिनों में टेस्ला और बीएमडब्ल्यू जैसे बड़े कार निर्माताओं ने मेक्सिको में अपनी फ़ैक्ट्रियां बनाई हैं.

मेक्सिको के राष्ट्रपति आंद्रे मैनुएल लोपेज़ ओब्राडोर ने इसी साल पुष्टि की थी कि टेस्ला कार की फ़ैक्ट्री मॉन्टेरे में बनेगी और अमेरिका के टेक्सस से क़रीब तीन घंटे की दूरी पर होगी.

इसी साल फ़रवरी में बीएमडब्ल्यू ने कहा था कि वो साल 2027 से अपनी नई कार का उत्पादन मेक्सिको के सैन लुई पोतोसी में अपनी फ़ैक्ट्री में करेगा. ये फ़ैक्ट्री साल 2019 में बनाई गई थी.

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इन देशों में हैं लीथियम के बड़े भंडार -

  • बोलीविया - 210 लाख टन
  • अर्जेंटीना - 193 लाख टन
  • चिली - 96 लाख टन
  • ऑस्ट्रेलिया - 64 लाख टन
  • चीन - 51 लाख टन
  • कांगो - 30 लाख टन
  • कनाडा - 29 लाख टन
  • जर्मनी - 27 लाख टन
  • मेक्सिको - 17 लाख टन
  • ब्राज़ील - 4.7 लाख टन

स्रोत- अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे

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लीथियम के भंडार

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अमेरिका की नाराज़गी

बीते साल मार्च में अमेरिका के सदर्न कमांड की प्रमुख जनरल लॉरा रिचर्डसन ने संसद की आर्म्ड सर्विसेज़ कमेटी के सामने कहा कि चीन लैटिन अमेरिका में निवेश बढ़ा रहा है.

उन्होंने चेतावनी दी, "चीन आर्थिक और कूटनीतिक स्तर पर और तकनीक, सूचना और सैन्य मौजूदगी के मामले में लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई देशों में अपने पांव पसार रहा है."

उन्होंने कहा, "ये इलाक़ा खनिजों से भरा है और मुझे इस बात की चिंता है कि हमारे विरोधी इसका फायदा उठा सकते हैं. ऐसा लग रहा है कि वो इस इलाक़े में निवेश कर रहा है, लेकिन असल मायनों में वो यहां के संसाधनों का दोहन कर रहा है."

उन्होंने अर्जेन्टीना, बोलीविया और चिली के दक्षिण अमेरिका के 'लीथियम ट्रायंगल' के बारे में कहा कि "इसे लेकर चीन बेहद आक्रामक रुख़ अपनाए हुए है और लीथियम के क्षेत्र में वो ज़मीनी स्तर पर उन्नत तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है."

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चीन का क्या कहना है?

जिस समय अमेरिका और दूसरे देश ऊर्जा के क्षेत्र में पारंपरिक ऊर्जा (हाइड्रोकार्बन) के स्रोतों से मुक्त होने की राह पर निकलने की योजना बना रहे हैं, चीन इस राह पर पहले ही चल पड़ा है.

उसकी नज़र पहले ही लीथियम नाम के इस महत्वपूर्ण खनिज पर है जो आने वाले वक्त में वैश्विक बाज़ार के लिए बेहद अहम साबित होने वाला है.

चीन ने साल 2001 से ही एक दीर्घकालिक योजना बना ली थी. अपनी 10वीं पंचवर्षीय योजना में उसने सतत ऊर्जा को अपनी अहम प्राथमिकता माना था और 2002 से ही इलेक्ट्रिक कारें बनाने की योजना में निवेश शुरू कर दिया था.

इसी साल जनवरी में चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्री वांग ग्वांगहुआ ने सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के साथ एक इंटरव्यू में कहा, "कई खनिजों के मामले में चीन की निर्भरता काफी हद कर विदेशों पर है. अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति बदली तो इसका असर उसकी आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है."

साल 2016 में चीन की सरकार ने राष्ट्रीय खनिज संसाधन योजना पेश की थी जिसमें उसने रणनीतिक तौर पर अहम 24 खनिजों के नाम शामिल किए थे. इसमें तेल, प्राकृतिक गैस, कोयला और शेल गैस समेत लोहा, तांबा, एल्यूमिनियम, सोना, निकल, कोबाल्ट, लीथियम समेत कई और खनिज शामिल हैं.

इस योजना के अनुसार, ये खनिज "राष्ट्र की रक्षा और देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए ज़रूरी हैं, साथ ही उभरते व्यापार के लिए भी रणनीतिक तौर पर ज़रूरी हैं."

लीथियम बैटरी

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लैटिन अमेरिका में चीन के निवेश में तेज़ी

एक तरफ़ चीन दक्षिण अमेरिका के मुल्कों में खनन से जुड़े बिज़नेस में अपना निवेश बढ़ा रहा है तो दूसरी तरफ़ 'लीथियम ट्रायंगल' के ये देश भी स्थानीय इंडस्ट्री के विकास में चीन की उन्नत तकनीक और बड़े निवेश का फ़ायदा लेना चाहते हैं.

  • इसी साल फ़रवरी में चीन की तीन कंपनियों (सीएटीएल, बीआरयूएनपी, सीएमओसी) ने बोलीविया की सरकारी कंपनी के साथ लीथियम के लिए एक अरब डॉलर का समझौता किया है. इस प्रोजेक्ट के तहत साल 2025 तक यहां से बड़े पैमाने पर लीथियम का निर्यात हो सकेगा.
  • लीथियम के खनन को लेकर अर्जेंन्टीना और चीन के बीच रिश्ते बीते सालों में बेहद गहरे हो गए हैं. अकेले साल 2022 में चीन की नौ कंपनियों ने अर्जेन्टीना के सल्टा, काटामर्का और जुजुरी में अलग-अलग परियोजनाओं में निवेश की घोषणा की.
  • बीते साल जून में चीन की एक कंपनी ने अर्जेंन्टीना की एक सरकारी कंपनी के साथ लीथियम कार्बोनेट की दो फैक्ट्रियों के लिए समझौता किया था. चीन की ये कंपनी फ़ॉक्सवैगन और गिली के लिए बैटरी बनाती है.
  • इसी साल लीथियम के खनन के लिए भी चीन की एक कंपनी मे अर्जेन्टीना में भारी निवेश की घोषणा की है. वहीं कार बनाने वाली चीनी कंपनी चेरी ऑटोमोबाइल ने भी बैटरी गाड़ियों के उत्पादन के लिए अर्जेंन्टीना में 40 करोड़ डॉलर के निवेश की घोषणा की है.
  • बीते साल जनवरी में चिली सरकार ने चीन की कंपनी के साथ लीथियम खनन के लिए समझौता किया. इसके तहत ये कंपनी 80 हज़ार टन लीथियम का खनन कर सकेगी. कई और चीनी कंपनियां यहां के अंतोफ़गास्ता में बन रहे लीथियम इंडस्ट्रियल पार्क में बड़ा निवेश करने की घोषणा कर चुकी हैं.
शी जिनपिंग

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विश्व की शक्तियों के बीच संघर्ष

थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल में एड्रिएन आर्श लैटिन अमरिका सेंटर में एसोसिएट प्रोफ़ेसर पेपे ज़ांग कहते हैं, "अहम खनिजों और सतत ऊर्जा से जुड़े तकनीक के मामले में अमेरिका वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मज़बूत करना चाहता है. इस मामले में लीथियम अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी और भू-राजनीतिक तौर पर प्रतिद्वंदिता का मुद्दा बन गया है."

चीन इस मामले में तेज़ी से काम कर रहा है. पेपे ज़ांग कहते हैं कि इस मामले में चीन का लैटिन अमेरिका और इसके आसपास के मुल्कों में निवेश बेहद महत्वपूर्ण है

2020 और 2021 में चीन ने इस क्षेत्र में क़रीब 1.1 अरब डॉलर का निवेश किया था, लेकिन इस साल ये आंकड़ा बढ़ सकता है.

एक शोधकर्ता का कहना है, "अकेले जनवरी में तीन चीनी कंपनियों ने बोलीविया में एक अरब डॉलर के निवेश की बात की है."

इसी सप्ताह ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुई इनासियो लूला डी सिल्वा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत के लिए बुधवार को चार दिवसीय दौरे पर चीन पहुंचे हैं. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय व्यापार के कम से कम 20 समझौतों पर हस्ताक्षर होने हैं.

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"राष्ट्रीय सुरक्षा" का मसला

चीन की तरह अमेरिका ने भी रणनीतिक कारणों से खनिजों की सप्लाई चेन में अपनी जगह सुनिश्चित करने को अपनी प्राथमिकता में रखा है.

बीते साल अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक बयान जारी कर कहा, "कई तरह की आधुनिक तकनीक के लिए महत्वपूर्ण खनिज अहम हो जाते हैं और हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक तरक़्क़ी के लिए बेहद ज़रूरी हैं."

जो बाइडन ने अपने बयान में जिन खनिजों का ज़िक्र किया उसमें लीथियम और कोबाल्ट जैसे खनिज शामिल हैं. उन्होंने लिखा कि कंप्यूटर से लेकर घरेलू उपकरणों के उत्पादन में तो इनकी ज़रूरत होती ही है, इलेक्ट्रिक कारों के लिए बैटरी, पनचक्की और सोलर पैनलों की तकनीक में भी ये बेहद ज़रूरी होते हैं.

बाइडन ने लिखा कि दुनिया के तक़रीबन सभी मुल्क परंपरागत ऊर्जा के इस्तेमाल में कमी लाकर अक्षय ऊर्जा के स्रोतों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहे हैं.

ऐसे में ये माना जा सकता है कि आने वाले दशकों में इनकी वैश्विक मांग में 400 से 600 फ़ीसदी की बढ़ोतरी होगी.

वहीं बैटरी तकनीक के लिए बेहद अहम लीथियम और ग्रेफ़ाइट की मांग "चार हज़ार फ़ीसदी या उससे भी अधिक हो सकती है."

लीथियम के भंडार

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अमेरिका और चीन के बीच रस्साकशी

बिन्यामिन गेदन कहते हैं कि चीन और अमेरिका के बीच इस रस्साकशी में चीन अमेरिका से आगे दिखता है.

वो कहते हैं, "चीन इस मामले में एक क़दम आगे है क्योंकि चीनी सरकार बैटरी के उत्पादन के लिए लैटिन अमेरिका में भारी निवेश के लिए तैयार है. जबकि अमेरिका का पूरा ध्यान अमेरिकी कंपनियों के लिए खनिज ख़रीदने पर है ताकि वो सतत ऊर्जा का उत्पादन कर सके."

ऐसे में लैटिन अमेरिका के देशों के पास दो तरह के विकल्प मौजूद हैं. ऐसा संभव है कि सीधे तौर पर खनिज का निर्यात करने की बजाय उन्हें चीन का सौदा बेहतर लगे.

बिन्यामिन गेदन कहते हैं, "लेकिन अमेरिका भी इस मामले में चीन से आगे निकलना चाहता है. हालांकि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि दक्षिण अमेरिका, अमेरिका और चीन जैसी दो बड़ी शक्तियों के बीच की इस दौड़ में फंस गया है."

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