क्यों लग रही है इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग और क्या हैं बचने के तरीके?

ओला की इलेक्ट्रिक स्कूटर

इमेज स्रोत, MANJUNATH KIRAN/AFP via Getty Images

इमेज कैप्शन, इस साल मार्च में पुणे में एक नई ओला एस1 प्रो इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लग गई. इस घटना का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया. घटना के बाद कंपनी ने कहा कि कंपनी गुणवत्ता का पूरा ख़्याल रखने को लेकर प्रतिबद्ध है, वो इस घटना को गंभीरता से लेती है और मामले की जांच कर रही है. [सांकेतिक तस्वीर]

देश में इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने की कई घटनाओं के बाद सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस तरह के मामलों की जांच के लिए एक्सपर्ट कमिटी बनाने की बात की है और कहा है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के गुणवत्ता को लेकर जल्द दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे.

गडकरी ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक ट्वीट कर कहा, "बीते दो महीनों में इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने की कई घटनाएं सामने आई हैं. ये दुर्भाग्यपूर्ण कि इन हादसों में कुछ लोगों की जान गई है और कई घायल हुए हैं. सरकार ने मामलों की जांच करने और सुधार के लिए कदम सुझाने के लिए एक एक्सपर्ट कमिटी का गठन किया गया है."

उन्होंने लिखा, "रिपोर्ट मिलने के बाद नियमों का पालन न कर रही कंपनियों के लिए आदेश जारी किए जाएंगे. जल्द ही इलेक्ट्रिक वाहनों की गुणवत्ता को लेकर दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे. अगर कोई कंपनी नियमों का उल्लंघन करेगी तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा, साथ ही उसे डिफेक्टिव स्कूटर वापस मंगाने के लिए कहा जाएगा."

गडकरी ने लिखा कि कंपनियां जल्द से जल्द कदम उठाएं और डिफेक्टिव स्कूटर (गड़बड़ी वाले स्कूटर) वापस बुलाना शुरू करें.

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भारत समेत दुनिया के कई मुल्कों में सरकार इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री को समर्थन दे रही है. भारत में कई प्रदेशों की सरकारें इसके लिए सब्सिडी भी देती है, लेकिन इससे जुड़े हादसों के कारण इसे लेकर अब चिंता जताई जा रही है.

आग लगने के हादसे

इसी सप्ताह हैदराबाद के निज़ामाबाद में घर पर चार्ज करते वक्त बैटरी स्कूटर में धमाके से 80 साल के एक बुज़ुर्ग की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए थे. बीते साल भर से पावर यूज़िंग रीन्यूएबल एनर्जी (प्योर ईवी) कंपनी की इलेक्ट्रिक स्कूटर का इस्तेमाल कर रहे उनके बेटे ने इसके लिए 'ख़राब क्वालिटी' की बैटरी को ज़िम्मेदार ठहराया था.

इससे पहले वारंगल में रोड के किनारे खड़ी की गई इसी कंपनी के एक स्कूटर में आग लग गई थी.

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इसी साल मार्च में एक और हादसे में महाराष्ट्र के पुणे में एक ओला इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लग गई थी. इसी दिन वेलूर में एक इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लगने की घटना हुई.

इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लगने का एक और बड़ा हादसा नासिक में उस वक्त हुआ जब स्कूटरों की एक खेप फैक्ट्री से बाहर ले जाई जा रही थी. इसी साल अप्रैल में जितेंद्र ईवी कंपनी के गेट के सामने ई-स्कूटरों में आग लग गई और 20 स्कूटर जल कर खाक़ हो गए.

अप्रैल में ही तमिलनाडु में ओकिनावा की एक दुकान में आग लग गई थी. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आग सबसे पहले दुकान के भीतर खड़ी एक स्कूटर में लगी थी.

इलेक्ट्रिक स्कूटरों से जुड़े इन हादसों को लेकर 31 मार्च को नितिन गडकरी ने लोकसभा में कहा था कि हो सकता है कि ये हादसे अधिक गर्मी के कारण हुए हों. हालांकि उन्होंने कहा था कि इस संबंध में एक्सपर्ट कमिटी की रिपोर्ट का अभी इंतज़ार है.

उनका कहना था कि ये गंभीर मामला है और इस तरह की हर घटना के कारणों को जानने के लिए फोरेंसिक जांच के आदेश दिए गए हैं और इसके पीछे तकनीकी कारणों का पता चलने के बाद सरकार इस दिशा में ज़रूरी कदम उठाएगी.

वीडियो कैप्शन, हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन

इलेक्ट्रिक स्कूटर में इस्तेमाल होनेवाली तकनीक

आज के वक्त में मोबाइल फ़ोन से लेकर लैपटॉप, इलेक्ट्रिक कार और इलेक्ट्रिक स्कूटर अधिकतर लीथियम आयन बैटरी पर चलते हैं.

सामान्य भाषा में समझें तो एक आम लीथियम आयन बैटरी में एक तरफ़ कैथोड होता है और दूसरी तरफ़ एनोड होता है. इनके बीच में इलेक्ट्रोलाइट नाम का केमिकल होता है. बैटरी चार्ज करते वक्त धातु के आयन कैथोड से एनोड की तरफ़ जाते हैं और किसी डिवाइस जुड़ने पर उल्टी दिशा में बहते हैं. इस प्रक्रिया में वो फ्री आयन बनाते हैं जो या तो कैथोड की तरफ या फिर ऐनोड की तरफ जमा होते हैं.

स्कूटर में इस्तेमाल होने वाली बैटरी दरअसल एक बैटरी नहीं होती बल्कि सैंकड़ों बैटरियों का एक समूह होता है जिसे एक साथ पैक किया गया होता है. इसलिए इन्हें बैटरी नहीं, बैटरी पैक कहते हैं.

ब्यूरो ऑफ़ एनर्जी एफिशिएंसी के अनुसार इस तरह की बैटरी पैक में एक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम लगा होता है जो बैटरी पैक में मौजूद सभी लीथियम आयन बैटरियों से जुड़ा होता है. ये बैटरी पैक का वोल्टेज मापता है और देखता है कि एक वक्त में कितना चार्ज बैटरी पैक से निकल रहा है. इसमें तापमान का पता लगाने के लिए सेन्सर्स लगे होते हैं जो लगातार बैटरी का तापमान मापते रहते हैं. ये सिस्टम बैटरी में आग लगने और घमाके की आशंका को कम करता है.

इसके अलावा बाज़ार में लीड एसिड बैटरी भी इस्तेमाल होती है लेकिन लीथियम आयन बैटरी के मुक़ाबले ये अधिक वक्त तक नहीं चलती.

सोशल मीडिया स्क्रीनग्रैब

आग लगने का क्या कारण है?

इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने के सही कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है.

ओकिनावा की डीलरशिप में हुए हादसे के बाद कंपनी ने अपनी शुरूआती जांच मे कहा था कि आग के लिए इमारत में हुआ शॉर्ट सर्किट ज़िम्मेदार था न कि किसी स्कूटर की बैटरी.

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार घटना के बाद कंपनी ने अपने 3,215 प्रेज़ प्रो इलेक्ट्रिक स्कूटर वापस बुला लिए हैं. ये पहली बार है जब देश में किसी इलेक्ट्रिक स्कूटर उत्पादक ने दुर्घटना के बाद अपने स्कूटर वापिस बुलाए हैं.

कंपनी का एक बयान जारी कर कहा है कि ढीले कनेक्टर्स या किसी तरह के नुकसान के लिए बैटरी की जांच की जाएगी और कंपनी इसे मुफ्त में बदलेगी.

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अप्रैल के पहले सप्ताह में फाइनेशियल एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट में कहा था कि इलेक्ट्रिक बैटरी पैक में अनियंत्रित तरीके से आग लगने को थर्मल रनअवे कहते हैं.

एक जानकार के हवाले से अख़बार ने लिखा कि जब भी एक सेल से एनर्जी आती या जाती है तो उस प्रक्रिया में गर्मी पैदा होती है. चूंकि एक बैटरी पैक में सौ तक बैटरियां एक साथ होती हैं इसलिए जो गर्मी पैदा होती है वो इतनी अधिक होती है कि इससे थर्मल रनअवे का ख़तरा बना रहता है. हालांकि मैनुफैक्चरिंग एरर के कारण भी थर्मल रनअवे का ख़तरा हो सकता है.

वहीं इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार लीथियम आयन बैटरियां कम तापमान में बेहतर काम करती हैं जबकि ऊंचे तापमान वाले इलाक़ों में बैटरी पैक का तापमान बढ़ सकता है. ये बढ़ कर 90 से 100 डिग्री तक जा सकता है इससे आग लगने का ख़तरा हो सकता है.

सीएनबीसी में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार मेलबर्न में मौजूद ईवी फ़ायरसेफ़ के प्रोजेक्ट निर्देशक एमा सुट्क्लिफ़ कहती हैं कि लीथियम आयन बैटरी में आग लगे तो उस पर काबू पाना मुश्किल होता है क्योंकि वो तेज़ी से और अधिक गर्मी के साथ जलती हैं और इसे बुझाने में अधिक पानी लगता है.

लाइव हिंदुस्तान में छपी एक रिपोर्ट में एक्सपर्ट ने कहा है कि इस तरह के बैटरी पैक में प्लास्टिक कैबिनेट का इस्तेमाल होता है जो गर्मी से पिघलने लगती है. ऐसा होने पर इसमें लगे सर्किट पिघलने लगते हैं और आग लगने का ख़तरा पैदा हो जाता है.

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क्या-क्या सावधानी बरतें- 10 बातें?

  • सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के लिए जो नियम लागू किए हैं उनके अनुसार इस तरह का कोई सॉकेट आउटलेट ज़मीन से कम से कम 800 मिलीमीटर ऊपर होना चाहिए.
  • कनेक्टर को वाहन से जोड़ने के लिए किसी एडॉप्टर या कॉर्ड एक्सटेंशन का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.
  • ओकिनावा और प्योर ईवी ने लीथियम आयन बैटरी को लेकर जो सुरक्षा नियम बताए हैं उसके अनुसार इन बैटरियों को रूम टेम्परेचर मे रखा जाना चाहिए.
  • स्कूटर के इस्तेमाल के कम से कम 45 मिनट बाद तक उसे चार्ज नहीं किया जाना चाहिए.
  • बैटरी जिस जगह चार्ज की जाए वो जगह वेन्टिलेटेड, साफ़ और सूखी हो. ये जगह आग या फिर हीट सोर्सेस से कम से कम दो मीटर दूर हो.
  • बैटरी को धूप में चार्ज न करें. उसे गीले कपड़े या सॉल्वेंट या क्लीनर से साफ न करें.
  • बैटरी चार्ज करते वक्त चार्जर को बैटरी के ऊपर न रखें.
  • अगर स्कूटर धोएं तो इस बात का ध्यान रखें कि उसमें बैटरी न हो. बैटरी की जगह पूरी तरह सूखने पर ही बैटरी लगाएं.
  • बैटरी को पांच घंटे से अधिक चार्ज न करें, यानी रातभर या दिनभर बैटरी को चार्ज के लिए न लगाएं.
  • अगर बैटरी डिस्टार्ज हो गई हो या उसे नुकसान हुआ है तो उसे चार्ज न करें.

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