एलन मस्क की टेस्ला 15 सालों में कैसे दुनिया की टॉप कंपनियों में हुई शामिल?

एलन मस्क

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टेस्ला के मालिक एलन मस्क सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर खरीदना चाहते हैं और इस कारण लगातार सुर्खियों में बने हुए है. इसके लिए उन्होंने 43 अरब डॉलर की पेशकश की है.

साल 2018 में टेस्ला अपनी सस्ती इलेक्ट्रिक कार, मॉडल 3 के उत्पादन का विस्तार कर रही थी.

लेकिन इसमें गंभीर समस्याएं थीं, तिजोरी तेज़ी से खाली हो रही थी और कंपनी दिवालिया होने की कगार पर थी. कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के तौर पर एलन मस्क दिन में 22-22 घंटे फैक्ट्री में गुज़ार रहे थे.

बाद में एक इंटरव्यू में एलन मस्क ने भी खुद माना कि कंपनी ख़त्म होने वाली थी.

लेकिन दो साल में हालात बदले. कार बाज़ार में उतरी भी नहीं थी और कंपनी के शेयर आश्चर्यजनक रूप से बढ़ रहे थे. इनमें 50 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई. 2020 में लगातार चार तिमाही में कंपनी को प्रॉफिट हुआ. कोरोना महामारी के दौर में जब कार कंपनियां सेमीकंडक्टर की कमी से जूझ रही थीं, टेस्ला रिकॉर्ड प्रॉफिट कर रही थी.

2021 में कंपनी का बाज़ार मूल्य 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक हो गया और एपल, माइक्रोसॉफ्ट, एल्फ़ाबेट, अमेज़न के बाद टेस्ला दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों की सूची में शुमार हो गई. कार कंपनियों में, ये सबसे तेज़ी से 1 ट्रिलियन के आंकड़े तक पहुंची थी और ब्रांड वैल्यू के मामले में भी सबसे बड़ी बन गई थी.

उत्पादन के मामले में टेस्ला, टोयोटा, फॉक्सवैगन, फोर्ड और होन्डा जैसी कंपनियों से काफी पीछे थी, लेकिन इसका मूल्य टोयोटा, फॉक्सवैगन और होन्डा से कुल मूल्य से अधिक हो गया था. यानी दो साल पहले ख़त्म होने की स्थिति में रही टेस्ला, दुनिया की सबसे बड़ी कार कंपनी बन गई.

तो दुनिया जहान में इस बार पड़ताल ये कि टेस्ला दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार कंपनी कैसे बनी. पड़ताल ये भी कि टेस्ला के शेयरों की क़ीमत इतनी अधिक क्यों है?

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एलन मस्क पर यक़ीन

जैनी पॉट्स आईटी कंसल्टेंट हैं और ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में रहती हैं. वो खुद को एलन मस्क का फैन बताती हैं.

वो कहती हैं, "कुछ साल पहले मेरे दोस्तों ने मुझसे कहा था कि आपकी नज़र टेस्ला पर होनी चाहिए. उस वक्त मुझे एलन मस्क या टेस्ला के बारे में कुछ पता नहीं था. मेरे दोस्तों ने कहा कि पेपाल पेमेंट कंपनी के पीछे मस्क ही थे."

1971 में दक्षिण अफ्रीका के प्रीटोरिया में जन्मे मस्क की मां कनाडाई मूल की थीं और पिता अफ्रीकी मूल के. साइंस फिक्शन से प्यार करने वाले मस्क छोटी उम्र में पिता के साथ अमेरिका आ गए थे.

1995 में 25 साल की उम्र में मस्क ने ज़िप2 नाम की एक कंपनी बनाई, इसे उन्होंने तीन साल बाद बेच दिया. इसके बाद 1999 में एक्स डॉट कॉम नाम की कंपनी बनाई जिसका विलय पीटर थील की कंपनी कॉन्फिनिटी में हो गया. इसका नाम बदल कर पेपाल कर दिया गया, जिसे बाद में ईबे ने खरीद लिया.

जैनी कहती हैं, "मैंने टेस्ला और एलन मस्क के बारे में पढ़ना शुरू किया, मैं उनके बारे में जितना जान रही थी मेरी दिलचस्पी उतनी ही बढ़ रही थी."

पीटर थील

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इमेज कैप्शन, पीटर थील ने 1998 में कन्फिनिटी नाम की कंपनी बनाई थी जिसके ज़रिए टैबलेट जैसे एक डिवाइस पाम पायलट नाम पर पैसों का लेनदेन किया जा सकता था. बाद में इसका विलय एलन मस्क के एक्स डॉट कॉम के साथ हो गया. कुछ वक्त बाद कंपनी ने अपना नाम बदला और पेपाल रख लिया. पीटर इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने. बाद में देढ़ अरब डॉलर में ईबे ने पेपाल को खरीद लिया.

2002 में मस्क ने अंतरिक्ष अनुसंधान और अंतरिक्ष पर्यटन के क्षेत्र में काम करने के लिए स्पेस एक्स बनाई. बाद में सुरंग बनाने वाली बोरिंग कंपनी और इंसानी दिमाग में चिप लगाने की संभावना पर अनुसंधान करने के लिए न्यूरालिंक बनाई.

2003 में जब मस्क स्पेस एक्स में लगे थे, उनके दोस्त मार्टिन एबरहार्ड और मार्क टारपेनिंग इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला खड़ी कर रहे थे. इसके लिए निवेश की व्यवस्था मस्क कर रहे थे. बाद में वो कंपनी के बोर्ड के चेयरमैन बने.

तकनीक में दिलचस्पी होने के कारण मस्क की रूचि उत्पादन में थी. 2007, 2008 में अपनी पहली कार बना रही थी टेस्ला खस्ताहाल हो गई. एबरहार्ड ने कंपनी छोड़ दी और मस्क कंपनी के सीईओ और प्रोडक्ट आर्किटेक्ट बन गए.

जैनी कहती हैं, "मुझे अपनी कार बेहद पसंद है. कार में बैठने पर आपको न तो कोई बटन दबाना है और न ही कोई चाभी लगानी है. कार को पता चल जाता है कि आप आ गए हैं. ब्रेक दबाइए और गियर बदलिए, कार स्टार्ट हो जाएगी. बंद करने के लिए एसलेरेटर से अपना पैर उठाइए या फिर गियर स्टिक पर बना बटन दबाइए. ये बेहद आसान है."

2017 में टेस्ला ने सस्ती इलेक्ट्रिक कार मॉडल थ्री बाज़ार में उतारी. क़रीब 29 लाख (40 हज़ार डॉलर) की ये कार एक बार चार्ज करने पर 5,020 किलोमीटर तक जा सकती है.

जैनी पॉट्स ने करीब 85 हज़ार अमेरिकी डॉलर में कार खरीदी. इससे पहले उनके पास एक जीप थी जिसकी कीमत मॉडल थ्री से आधी थी. जून 2021 में 10 लाख की बिक्री का आंकड़ा पार करने वाली ये दुनिया की पहली इलेक्ट्रिक कार थी.

जैनी कहती हैं, "कार में इलेक्ट्रिक मोटर है जो आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले कंबस्चन इंजन से अलग है. तो इसकी सर्विस का खर्च लगभग शून्य है. हां, टायर बदलने पर खर्च करना पड़ता है."

टेस्ला की बैटरी

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इमेज कैप्शन, टेस्ला की 100 मेगावाट की लीथियम आयन बैटरी

ऑस्ट्रेलिया में टेस्ला अपनी बैटरी तकनीक का भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है. 2017 में कंपनी ने यहां विशाल लीथियम आयन बैटरी लगाई. इसे बनाने की कहानी भी दिलचस्प है.

जैनी कहती हैं, "दक्षिण ऑस्ट्रेलिया का एक इलेक्ट्रिक ग्रिड, सोलर और हवा से बिजली बनाने को लेकर मुश्किलें झेल रहा था. इस कारण पूरे राज्य बिजली गुल हो जाती थी. ये बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था. एलन मस्क ने ट्विटर पर कहा कि वो 100 दिनों में यहां बैटरी लगाएंगे और ऐसा न हुआ तो वो इसे मुफ्त में देंगे. राज्य सरकार ने प्रोजेक्ट को मंज़ूरी दी. 30 सितंबर 2017 को काम शुरू हुआ और 60 दिनों में काम पूरा हो गया."

100 मेगावॉट क्षमता की ये बैटरी उस वक्त दुनिया की सबसे बड़ी लीथियम आयन बैटरी थी. ये एक ग्रिड सिस्टम पर आधारित थी और इसमें वही तकनीक थी जो टेस्ला के कारों में होती है. इससे बेहद प्रभावित जैनी ने टेस्ला में निवेश करने का फ़ैसला किया.

एलन मस्क

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उत्पादन और कंपनी का मूल्य

क्रिस्टोफ़र रॉसबाक़ जे. स्टर्न एंड कंपनी में मैनेजिंग पार्टनर और चीफ़ इंवेस्टमेंट ऑफ़िसर हैं. वो निवेश के बारे में सलाह देते हैं.

वो कहते हैं, "एलन मस्क विज़नरी हैं और करिश्माई व्यक्तित्व के मालिक हैं. उन्होंने टेस्ला को दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार कंपनी बनाया. वो इंडस्ट्री के उन लोगों में हैं जिन्होंने पहला कदम उठाने का जोखिम लिया है. लेकिन इसका नाता शेयरों से नहीं होना चाहिए."

बीते वक्त में टेस्ला के मूल्य में दस गुना तक बढ़ोतरी हुई है. इसके शेयरों की कीमत 50 डॉलर से बढ़कर 1,000 डॉलर तक हुई है और बाज़ार मूल्य 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक हो गया है.

क्रिस्टेफ़र कहते हैं, "टेस्ला के शेयरों में बबल है मतलब इसकी कीमत जितनी होनी चाहिए उससे कहीं ज़्यादा है. मुझे नहीं लगता कि कंपनी के बेसिक वैल्यूशन या प्रॉफिट करने की काबिलियत की दलील से इसे सही ठहराया जा सकता है."

तो फिर कंपनी के शेयरों में और इसके मूल्य में इतनी बढ़त क्यों? क्रिस्टोफ़र समझाते हैं कि कुछ लोग टेस्ला को गूगल और अमेज़न की तरह तकनीकी कंपनी मानते है, जो सही नहीं है. वो इसे सामान बनाने वाली कंपनी कहते हैं.

वो कहते हैं, "टेस्ला कार बनाती है, इसमें ज़्यादा लागत होती है. कंपनी को दूसरे उत्पादकों की तरह कार में लगने वाले पुर्जे खरीदने होते है, बैटरी बनानी होती है. ऐसे में गूगल, अमेज़न और फेसबुक के मुकाबले उसका प्रॉफिट मार्जिन कम होता है."

टेस्ला के शेयर

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क्रिस्टोफ़र के अनुसार दूसरी कार कंपनियों के साथ टेस्ला के शेयरों की तुलना की जाए तो इसकी कीमतें अवास्तविक है. 2021 में टेस्ला ने नौ लाख से अधिक कारें बनाई जबकि टोयोटा ने 76 लाख से ज़्यादा, फ़ॉक्सवैगन 83 लाख से ज़्यादा और होन्डा ने 45 लाख से ज़्यादा कारें बनाईं.

वो कहते हैं, "अगर टेस्ला के कारों की बिक्री और आय को देखें तो 2020 में ये 31 अरब डॉलर थी और 2021 में बढ़कर 53 अरब से अधिक हो गई. कंपनी अगर कार उत्पादन के मामले में टोयोटा या फ़ॉक्सवैगन की बराबरी करे, तो भी इसके शेयरों की क़ीमत को अवास्तविक कहना ही सही होगा."

जानकार मानते हैं कि कार सेक्टर में टेस्ला सबसे सस्ती बैटरी बनाती है. इससे कार की क़ीमत पर फर्क तो पड़ता है लेकिन इस क्षेत्र में दूसरी कंपनियां टेस्ला को चुनौती देने को तैयार हैं. और फिर आज से 25 साल बाद स्थिति क्या हो ये किसी को नहीं पता.

क्रिस्टोफ़र कहते हैं, "अगर आप कार इंडस्ट्री के भविष्य के बारे में सोच रहे हैं तो आपको मानना होगा कि सड़कों पर कारें कम होंगी और कार पूल अधिक होगा. ये भी संभव है कि सड़कों पर ड्राइवरलेस पॉड्स हों. हालांकि इसके लिए भी व्यवस्था कोई न कोई कंपनी ही करेगी, लेकिन वो टेस्ला या फ़ॉक्सवेगन की तरह कार कंपनी होगी या गूगल की तरह सॉफ्टवेयर कंपनी, इसका अंदाज़ा लगाना अभी मुश्किल है. टेस्ला के संसाधन और उसके काम को देखें तो ऐसा नहीं लगता कि वो ये काम करेगी."

वीडियो कैप्शन, क्या आप में ये कर पाने की हिम्मत है?

निवेश और भविष्य

मैलकम मैक्पार्टलिन एगॉन एसेट मैनेजमेन्ट नाम की एक कंपनी में इंवेसटमेंट मैनेजर हैं.

इस कंपनी ने टेस्ला में उस वक्त 15 करोड़ डॉलर का निवेश किया जब कंपनी मॉडल 3 के उत्पादन को लेकर मुश्किलों से जूझ रही थी.

वो कहते हैं, "उस वक्त कंपनी के, खुद के लिए फंड की व्यवस्था करने और उसके भविष्य को लेकर चिंता जताई जा रही थी. जब हमें इस बात के संकेत दिखे कि कंपनी अपनी मुश्किलों से पार पा लेगी तो हमने इसमें निवेश किया."

इसके बाद से टेस्ला ने न केवल अपनी मुश्किलों को हल किया बल्कि बाज़ार में एक नई कार भी उतारी.

लेकिन फिर टेस्ला ने खुद को एक नई चुनौती दी. 2020 में निवेशकों की सालाना बैठक में मस्क ने कहा कि सस्ती कार बनाने के लिए वो तीन साल के भीतर बड़े पैमाने पर बैटरी में लगने वाले, बैटरी सैल का उत्पादन शुरू करेंगे.

मैलकम कहते हैं, "टेस्ला के बारे में हमने यही जाना है कि कंपनी कभी-कभी अपने लिए बड़े उद्देश्य बना लेती है, जिसे पूरा कर पाना उसके लिए संभव नहीं हो पाता. भले की इसमें देरी हो लेकिन जो उत्पाद वो बनाती है वो बढ़िया होते हैं. मैं उनके वादों पर भरोसा नहीं करता, लेकिन उत्पादों पर करता हूं."

टेस्ला निवेशकों की बैठक

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इमेज कैप्शन, 2020 में टेस्ला ने 4680 नाम के एक नया बैटरी सेल बनाने की घोषणा की. कंपनी के अनुसार ये पहले के सेल से बड़ी थी और उसके मुक़ाबले छह गुना अधिक पावर दे सकती थी. फरवरी 2022 में कंपनी ने कहा कि उसने अपनी नई पायलट फैक्ट्री में 10 लाख 4680 बैटरी सेल बना लिए हैं और अपने मॉडल वाई कार में इस नई तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए तैयार है.

मैलकम मानते हैं कि इनोवेशन को लेकर टेस्ला के काम के तरीके को देखा जाए तो कंपनी प्रति कार अपना फायदा बढ़ा सकती है. और शायद टेस्ला के शेयरों का मूल्य ज़्यादा होने की यही वजह हो.

कंपनी का कहना है कि 2023 तक वो 25 हज़ार डॉलर वाली इलेक्ट्रिक कार बाज़ार में उतारेगी जो संभवत: ड्राइवरलेस होगी. और फिर आने वाले वक्त में कंपनी दूसरों के लिए भी बैटरी बना सकती है.

वो कहते हैं, "आप मोटे तौर पर इसे दो हिस्सों में देख सकते हैं. बिजली स्टोर करने के लिए पावर ग्रिड और इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए बैटरी, जैसा उसने ऑस्ट्रिलिया में किया और घरों के लिए स्टोरेज बैटरी. सतत उर्जा के भविष्य के लिहाज़ से ये महत्वपूर्ण होगा."

लेकिन मेलकम, टेस्ला के अपने कुछ शेयर्स अब बेच रहे हैं. ऐसा करने की उनकी वजह भी स्पष्ट है.

वो कहते हैं, "एक पोर्टफोलियो में किसी एक कंपनी के शेयर की कीमत ज़्यादा बढ़ने पर वो पूरे पोर्टफोलिया का बड़ा हिस्सा बन जाता है. इससे जोखिम बढ़ता है, जिसे कम करने के लिए हम इसके शेयर बेच रहे हैं और पैसा दूसरी कंपनियों में लगा रहे हैं. कोई भी पोर्टफोलिया मैनेजर ऐसा ही करेगा."

टेस्ला की कारें

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टेस्ला के सामने चुनौती

अंजन कुमार कंसल्टेंसी कंपनी फ्रॉस्ट एंड सुलिवन में रीसर्च मैनेजर हैं. वो मानते हैं कि पूरी कार इंडस्ट्री में टेस्ला इनोवेशन के मामले में दूसरों से कहीं आगे है.

वो कहते हैं, "उत्पादन बढ़ाना सबसे मुश्किल काम होता है, ख़ासकर किसी नई तकनीक के साथ. कार कंपनी के तौर पर टेस्ला की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि उसने बैटरी कारें बनाई और इसमें प्रॉफिट दर्ज किया."

2003 में शुरूआत करने के बाद से टेस्ला का सफर देखने लायक रहा है. हालांकि टेस्ला अकेली कंपनी नहीं जो इलेक्ट्रिक कार बाज़ार में आगे रहना चाहती है.

वो कहते हैं, "टेस्ला की काबिलियत उसका सॉफ्टवेयर था. बाद में कंपनी ने खुद को परिभाषित किया और इंजीनियरिंग कंपनी बनी. अब वो उत्पादन में भी आगे है. लेकिन दूसरी तरफ रिवियन, फिस्कर और बाइटन जैसी नई पीढ़ी की इलेक्ट्रिक कार कंपनियां भी हैं जो सॉफ्टवेयर और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के मामले में अच्छे हैं."

बड़े पैमाने पर उत्पादन करने की टेस्ला की क्षमता के कारण वो दूसरों से एक कदम आगे है. हालांकि अंजन कुमार मानते हैं कि इलेक्ट्रिक कार सेक्टर बेहतर तरक्की करे इसके लिए टेस्ला को दूसरे प्रतियोगियों की ज़रूरत है.

अंजन कुमार कहते हैं, "आप पाएंगे की दुनियाभर में क़रीब दो अरब कारें सड़कों पर हैं. लेकिन इनके मुक़ाबले इलेक्ट्रिक कारों की संख्या केवल 1 करोड़ है. टेस्ला अकेले बाज़ार की ज़रूरतों को पूरा नहीं कर सकेगी. बाज़ार और उपभोक्ता के लिए ये ज़रूरी है कि टेस्ला के अलावा मर्सिडीज़ बेन्ज़, बीएमडब्ल्यू, फ़ॉक्सवैगन, ऑडी, फोर्ड, टोयोटा, ह्यूनडे सभी इलेक्ट्रिक कारें बनाएं."

रिवियन

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इमेज कैप्शन, 2009 में अस्तित्व में आई अमेरिकी कार कंपनी रिवियन अमेज़न के साथ मिलकर इलेक्ट्रिक पिकअप डिलीवरी वैन बना रही है.

लेकिन टेस्ला महत्वाकांक्षी है. कंपनी टेक्सस, बर्लिन और शंघाई में फैक्ट्रियां बना रही है और 2020 की अपनी इम्पैक्ट रिपोर्ट में उसने अपने लिए 2030 तक हर साल 2 करोड़ इलेक्ट्रिक कारें बनाने का लक्ष्य रखा है.

अंजन कुमार कहते हैं कि इन सभी कोशिशों में कंपनी इलेक्ट्रिक कारें बनाने का दांव खेल रही है जिसमें बड़ा जोखिम हो सकता है.

वो कहते हैं, "टेस्ला के बारे में हमने यही जाना है कि कंपनी कभी-कभी अपने लिए बड़े उद्देश्य बना लेती है, जिसे पूरा कर पाना उसके लिए संभव नहीं हो पाता. भले की इसमें देरी हो लेकिन जो उत्पाद वो बनाती है वो बढ़िया होते हैं. मैं उनके वादों पर भरोसा नहीं करता, लेकिन उत्पादों पर करता हूं."

मैलकम मानते हैं कि इनोवेशन को लेकर टेस्ला के काम के तरीके को देखा जाए तो कंपनी प्रति कार अपना फायदा बढ़ा सकती है. और शायद टेस्ला के शेयरों का मूल्य ज़्यादा होने की यही वजह हो.

कंपनी का कहना है कि 2023 तक वो 25 हज़ार डॉलर वाली इलेक्ट्रिक कार बाज़ार में उतारेगी जो संभवत: ड्राइवरलेस होगी. और फिर आने वाले वक्त में कंपनी दूसरों के लिए भी बैटरी बना सकती है.

अंजन कुमार कहते हैं, "काल्पना में ही सही लेकिन अगर हम मानें कि इलेक्ट्रिक कारें नाकाम हों जाएंगी तो क्या होगा. अगर अचानक हाइड्रोजन फ्यूल सेल में कोई बड़ी खोज हो जाए तो ये तकनीक टेस्ला के पास नहीं है. टोयोटा और मर्सिडीज़ जैसे कार उत्पादक अलग-अलग तकनीकों पर काम कर रहे हैं, वो इलेक्ट्रिक कारों के साथ-साथ फ्यूल सेल और हाइब्रिड कारें बना रहे हैं. इस मामले में टेस्ला पीछे है."

वीडियो कैप्शन, रोबोट्स लेंगे इंसानों की जगह

लौटते हैं अपने सवाल पर- एलन मस्क की टेस्ला कम वक्त में दुनिया की टॉप इलेक्ट्रिक कार कंपनी कैसे बनी और आगे इसका भविष्य क्या है?

इस बात में शक़ नहीं कि ये एक महत्वाकांक्षी कंपनी है जिसके पास कारगर तकनीक है. पहली बार कंपनी ने 2020 में लगातार चार तिमाही में प्रॉफिट दर्ज किया और 2021 में पहली बार साल में 9 लाख तीस हज़ार कारें बेचीं.

लेकिन कंपनी का भविष्य क्या वाकई सुनहरा है इसे लेकर चर्चा अभी ख़त्म नहीं हुई है. इनोवेशन के मामले में कंपनी को अपने प्रतियोगियों से आगे रहना है, सस्ती कार बनानी है, अपना उत्पादन बढ़ाना है और नए बाज़ार तलाशने हैं.

ये थोड़ा मुश्किल तो है, पर असंभव नहीं. और ये भी सच है कि आने वाले वक्त में टेस्ला बड़ी खिलाड़ी रहे न रहे इलेक्ट्रिक कार के मैदान में नए खिलाड़ी उसके प्रतिद्विंदी बनेंगे और उसे कड़ी चुनौती भी देंगे.

प्रोड्यूसर - मानसी दाश

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