डोनाल्ड ट्रंप क्या जेल जा सकते हैं? जानिए ज़रूरी सवालों के जवाब

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- Author, रॉबर्ट ग्रीनाल
- पदनाम, बीबीसा न्यूज़
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर छह जनवरी 2021 को हुए कैपिटल हिल हिंसा के मामले में मुक़दमा चलाया जा रहा है.
रिपब्लिकन नेता ने किसी भी तरह के ग़लत काम में शामिल होने से इनकार किया है और इस केस को "मूर्खतापूर्ण" बताया है.
डोनाल्ड ट्रंप पहले से ही ज़रूरी फ़ाइलों को ग़लत तरीके से रखने और एक पोर्न स्टार को गुपचुप तरीक़े से पैसे का भुगतान करने जैसे दो मामलों में आरोप झेल रहे हैं.
इस मुक़दमे को लेकर उठ रहे कुछ ज़रूरी सवाल हम आपको बता रहे हैं.
ट्रंप पर आरोप क्या हैं?
ट्रंप 2020 का राष्ट्रपति चुनाव डेमोक्रेट नेता जो बाइडन से हार गए थे. उन पर अपनी हार के नतीजों को पलटने की साज़िश रचने का आरोप है.
उन पर चार अवैध काम करने का आरोप है-
- अमेरिका को धोखा देने की साज़िश
- सरकारी कार्यवाही को रोकने की साज़िश
- किसी सरकारी कार्यवाही में बाधा डालना
- नागरिकों के अधिकारों के ख़िलाफ़ साज़िश रचना
ये चारों आरोप चुनाव यानी तीन नवंबर 2020 के तुरंत बाद से लेकर 20 जनवरी 2021 यानी व्हाइट हाउस छोड़ने के दिन तक, लगभग दो महीने की अवधि में ट्रंप के काम से जुड़े हैं.
पहला आरोप वोटों को जुटाने, गिनती और सर्टिफ़ाई करने के काम में बाधा डालने के कथित प्रयासों को लेकर है.
दूसरा और तीसरा आरोप, इलेक्टोरल कॉलेज वोटों के सर्टिफ़िकेशन के काम में बाधा डालने की कथित कोशिशों से जुड़ा है, जिसके कारण कैपिटल हिल हमले को अंजाम दिया गया.
चौथा आरोप नागरिकों के वोट देने और उनके वोटों की गिनती के अधिकार में हस्तक्षेप करने के कथित कोशिशों को लेकर है.

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पिछले मामलों के मुताबिक़ इस बार आरोप कितने गंभीर?
यह ट्रंप के ख़िलाफ़ तीसरा मामला है और कुछ क़ानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह उनके ख़िलाफ़ लाया गया सबसे मज़बूत मामला नहीं है.
उन्हें इससे ज़्यादा बड़े क़ानूनी संकट का सामना करना पड़ सकता है.
हालांकि बीबीसी की उत्तर अमेरिकी संवाददाता सारा स्मिथ का कहना है कि आरोपों की गंभीरता के संदर्भ में ये सबसे गंभीर और अहम हैं.
ये पहली बार है, जब ट्रंप पर किसी ऐसे मामले में अभियोग चल रहा है, जो उन्होंने राष्ट्रपति रहते हुए किया. इस मामले में नतीजे ऐसे थे जो दुनिया के सामने थे, जैसा कि ट्रंप के अन्य केसों में नहीं है.
हालाँकि इस मामले की जांच के लिए सरकार की ओर से नियुक्त किए गए वकील जैक स्मिथ ने यूएस कैपिटल पर हमला करने वाली भीड़ को उकसाने के लिए ट्रंप पर आरोप लगाने से इनकार कर दिया. उनका कहना है कि यह "झूठ से प्रेरित था वो झूठ जो अभियुक्त की ओर से बोला गया."
पूर्व सरकारी वकील रेनाटो मैरिओती ने बीबीसी के शो बीबीसी टूडे में कहा, “ये अमेरिका के इतिहास में पहली बार है कि किसी पूर्व राष्ट्रपति पर इस तरह के अपराध के लिए अभियोग चलाया जाए. सत्ता का शांति पूर्ण हस्तांतरण ना करना एक अनोखा मामला था. ट्रंप चुनाव हारने के बाद भी सत्ता से हटना नहीं चाहते थे.”

आगे क्या होगा?
ट्रंप को गुरुवार को वॉशिंगटन डीसी में अदालत में पेश होना है. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वह व्यक्तिगत रूप से वहां जाएगे या रिमोटली पेश होंगे.
ट्रंप के ख़िलाफ़ जांच का नेतृत्व करने वाले सरकार के नियुक्त वकील जैक स्मिथ इससे मामले में "जल्दी सुनवाई" की मांग कर रहे हैं. लेकिन कई कारणों से मामले की जल्दी सुनवाई हो पाएगी ऐसे आसार नज़र नहीं आते.
उनके ख़िलाफ़ कई केस चल रहे हैं और कब कौन से केस का ट्रायल होगा यही तय करेगा कि इस केस में कितना वक़्त लगेगा. सभी केस एक ही समय में नहीं चलाए जा सकते.
इस बात के भी आसार काफ़ी कम हैं कि चुनाव के दौरान किसी मुख्य केस की सुनवाई हो. जल्द ही रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन होने वाला है, जब पार्टी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को औपचारिक रूप से चुनेगी.
मैरिओती बताते हैं अमेरिकी न्याय प्रणाली में मुक़दमे के लिए अधिक समय देने के कई तरीक़े हैं.
तो ये काफ़ी हद तक संभव है कि ट्रंप एक बार और राष्ट्रपति चुन लिए जाएं और फिर ये ट्रायल शुरू हो.

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क्या ट्रंप जेल जा कर चुनाव लड़ सकेंगे
77 साल के ट्रंप दोषी पाए गए तो उन्हें कड़ी सज़ा मिलने की संभावना है.
मामले की सुनवाई के लिए जज तान्या चटकन को नियुक्त किया गया है. तान्या चटकन की नियुक्ति ओबामा प्रशासन ने की थी. उन्हें ऐसे जज के रूप में जाना जाता है जो कड़ी सज़ा देते हैं.
अतीत में छह जनवरी के अन्य मामलों में उन्होंने कड़ी सज़ा दी है.
ज़रूरी दस्तावेज़ों के मामले में ट्रंप पर अधिकतम 20 साल की सज़ा की तलवार लटक रही है.
अमेरिकी क़ानून के तहत यदि किसी व्यक्ति पर आपराधिक आरोप लगे हों, या भले ही वह जेल में हों तो भी उसे राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने से कोई नहीं रोक सकता.
हालांकि सवाल ये है कि मतदाता ऐसे उम्मीदवार को वोट देना चाहेंगे या नहीं.
अमेरिका के इतिहास में कम से कम दो लोग आपराधिक केस में दोषी क़रार दिए जाने के बाद भी राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ चुके हैं.
1920 में समाजवादी उम्मीदवार यूजीन डेब्स, जिन्हें 1918 के एक युद्ध-विरोधी भाषण के लिए दोषी ठहराया गया था. उन्होंने पहले विश्व युद्ध के दौरान भाषण दिया था जिसके कारण उन पर राजद्रोह का केस चलाया गया था.
धोखाधड़ी के एक मामले के दोषी ठहराए गए लिंडन लारूश ने मिनेसोटा की एक जेल में सज़ा काटते हुए 1992 में चुनाव लड़ा था.

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ट्रंप अगला चुनाव जीते तो वे अपनी सज़ा माफ़ कर देंगे?
कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यदि ट्रंप को दोषी ठहराया गया और वो चुनाव जीत गए तो बहुत हद तक संभव है कि वो ख़ुद की सज़ा माफ़ कर देंगे.
यह संभावित परिस्थिति अमेरिका में पहले कभी देखी नहीं गई है और ना ही इससे जुड़े कोई नियम हैं, जिसका अर्थ है कि सुप्रीम कोर्ट को इसमें हस्तक्षेप करने की ज़रूरत पड़ सकती है.
अगर मामला उनके राष्ट्रपति बनने के बाद भी चलता रहा तो वो मामले को ख़ारिज करने की भी कोशिश कर सकते हैं.
ट्रंप के रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार अर्कांसस के पूर्व गवर्नर आसा हचिंसन ने एनबीसी नेटवर्क को बताया कि दोनों ही स्थिति संभव हैं लेकिन उन्होंने कहा कि ख़ुद को माफ़ करने के प्रावधान का ज़िक्र "संविधान में नहीं है."
उन्होंने कहा कि ऐसा क़दम "अनुचित" होगा.
हालाँकि ट्रंप के एक दूसरे रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी विवेक रामास्वामी ने कहा है कि राष्ट्रपति चुने जाने पर वो ख़ुद ट्रंप को माफ़ कर देंगे.
ट्रंप के सबसे मुख्य रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी माने जा रहे रॉन डेसेंटिस ने सीएनएन को दिए इंटरव्यू में कहा था कि ट्रंप का जेल जाना "देश के लिए अच्छा" नहीं होगा.
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