क्या 'हश-मनी' केस में डोनाल्ड ट्रंप का बचना अब मुश्किल है?

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- Author, मैडेलिन हापर्ट
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
क़रीब चार हफ़्ते तक डोनाल्ड ट्रंप न्यूयॉर्क की एक अदालत में चुपचाप बैठे रहे. दूसरी तरफ़ अभियोजकों ने ट्रंप के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला पेश किया. ये किसी भी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ पहला आपराधिक मामला है.
इस दौरान मैनहट्टन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी ऑफिस के वकीलों ने कई गवाहों को बुलाया. साथ ही मामले की पुष्टि के लिए गुप्त रूप से रिकॉर्ड की गई दर्ज़नों बातचीत और दस्तावेज़ पेश किए.
ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने साल 2016 में एक स्कैंडल से बचने के लिए एडल्ट फिल्म स्टार को चुप रहने के बदले में गुप्त रूप से पैसों का भुगतान किया था.
ट्रंप को डर था कि इस स्कैंडल से उनका राष्ट्रपति पद के लिए चल रहा अभियान पटरी से न उतर जाए.औपचारिक आरोप में कहा गया है कि ट्रंप के ऑर्गेनाइज़ेशन में इस भुगतान की एंट्री ग़लत तरीक़े से की गई थी. कोहेन को चेक दिया गया था और इसे क़ानूनी सेवा लेने के मद में बताया गया था.
ट्रंप ने कारोबारी रिकॉर्ड में हेराफेरी करने के 34 मामलों से इनकार किया है.
अब आगे की कार्यवाही में ट्रंप के वकील अपना बचाव पक्ष पेश करेंगे.
कानून के जानकारों का मानना है कि अभियोजन पक्ष ने अच्छा काम किया है. लेकिन वो इस बात को मानते हैं कि ठोस सबूतों और गवाहों के बावजूद भी ऐसे गंभीर मामले में सज़ा दिए जाने की कोई गारंटी नहीं है.
ब्रुकलिन की पूर्व अभियोजक जूली रैंडलमेन कहती हैं, ''सबूत तो हैं लेकिन क्या ये काफ़ी हैं? मुझे नहीं पता.''
वो आगे कहती हैं, ''इसके लिए जूरी के एक सदस्य की ज़रूरत होती है.''
इस मामले की शुरुआत कैसे हुई थी?

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हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप का ये केस उनके पूर्व वकील माइकल कोहेन को दिए गए पैसे के बारे में है. लेकिन अभियोजकों ने पहले हफ़्ते में उन घटनाओं पर बात की, जिसकी वजह से कोहेन ने एडल्ट फिल्म स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स को 130,000 डॉलर का भुगतान किया था.
उन्होंने 'नेशनल इन्क्वायरर' के पूर्व पब्लिशर डेविड पेकर से इसकी शुरुआती की.
पेकर ने ट्रंप टॉवर में हुई एक के बाद एक मुलाक़ातों के बारे में बताया. जहां पर वो, कोहेन और ट्रंप ने ये योजना बनाई थी कि कैसे ट्रंप के बारे में आ रही नकारात्मक स्टोरीज़ को दबाया जाए. ऐसी स्टोरीज़ में ट्रंप से जुड़ी यौन संबंध के आरोप भी शामिल थे.
मैनहट्टन के पूर्व अभियोजक लेंस फ्लेचर का कहना है कि, डेविड पेकर की गवाही प्रभावशाली थी.

फ्लेचर कहते हैं, ''इससे उनकी प्रतिष्ठा को कोई चोट नहीं पहुंची है. ऐसा लग रहा था कि वो वास्तव में ट्रंप के दोस्त के तौर पर शामिल हुए थे. ऐसे में मुझे लगता है कि वो एक निष्पक्ष गवाह के तौर पर सामने आए.''
इसके बाद, अभियोजकों ने पूरी कहानी की पुष्टि के लिए कई दूसरे गवाहों को बुलाया जिसमें ट्रंप के पूर्व सहयोगी होप हिक्स और स्टॉर्मी डेनियल्स के पूर्व अटॉर्नी कीथ डेविडसन शामिल हैं.
कोलंबिया लॉ स्कूल के प्रोफ़ेसर जॉन कॉफी अभियोजन पक्ष की तारीफ़ में कहते हैं, ''ये एक दिलचस्प नॉवेल की तरह है कि कैसे किरदार एक दूसरे से जुड़े हुए हैं.''
अभियोजकों ने अपनी कहानी को और मजूबती देने के लिए मीटिंग लॉग्स, रिकॉर्डिंग को आपस में कनेक्ट कर दिया. साथ ही एक ट्रंप टॉवर डोरमैन और प्लेबॉय मॉडल करेन मैकडॉगल को किए हश-मनी भुगतान को भी इससे जोड़ दिया.
स्टॉर्मी डेनियल्स की गवाही से क्या हासिल हुआ?

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अभियोजकों ने स्टॉर्मी डेनियल्स और दूसरे बहुप्रतीक्षित गवाहों को बुलाने के लिए कड़ी मेहनत की, कई हफ़्ते कहानी बुनने में और सबूत जुटाने में लगा दिए. वहीं ट्रंप के अटॉर्नी ने भी काफ़ी मेहनत की कि डेनियल्स की गवाही को सीमित किया जा सके.
अभियोजकों ने कहा था कि डेनियल्स से साल 2006 में नेवादा के एक होटल में ट्रंप के साथ हुए कथित मुलाक़ात पर सवाल करते हुए वो सावधानी बरतेंगे. जज जुआन मर्चन का कहना था कि इसके बावजूद वो कई बार भटकती हुई दिखीं.
वहीं ट्रंप ने यौन संबंध बनाने की बात से इनकार कर दिया.
कानून के जानकारों का मानना है कि डेनियल्स की गवाही जिस तरह से हुई उससे ट्रंप की टीम के लिए अपील के रास्ते खुल गए. वहीं कुछ ऐसे भी जानकार हैं जिनका कहना है कि डेनियल्स की गवाही से अभियोजक ये दिखा सकते हैं कि कि आख़िर क्यों ट्रंप उन्हें चुप कराने के लिए पैसे देने को बेचैन थे.
रैंडलमेन कहती हैं, ''वो कामुक ब्योरा देने लगीं, मुझे लगता है कि वो काफी आगे चली गई थीं. लेकिन अभियोजक पक्ष का तर्क ये है कि वो जितना अधिक कामुक ब्योरा देंगी, ट्रंप चाहेंगे कि इसे बंद कर दिया जाए.''
आखिरकार, डेनियल्स केवल इस बात की गवाही दे सकीं कि किस कारण उन्हें हश-मनी भुगतान किया गया था.

कोहेन ने अपना पक्ष रखा
लोगों की सांसें तब अटक गईं जब ट्रंप के पूर्व वकील और दोस्त जो अब दुश्मन बन चुके हैं, माइकल कोहेन को कटघरे में बुलाया गया.
कुछ लोगों का अनुमान था कि वो एक ऐसे शख़्स को सुनने जा रहे हैं जो पहले ट्रंप के वफादार थे और बाद में उन पर जुबानी हमले के लिए जाने गए.
लेकिन जब कोहेन ने बोलना शुरू किया तो सारी ऐसी आशंकाएं ख़त्म हो गईं. ट्रंप के साथ बिताए गए दशकों के अनुभव के बारे में बताते हुए कोहेन संयमित नज़र आए.
न्यूयॉर्क सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस डाएन किज़ल कहती हैं, ''वो नपे-तुले नज़र आए. उन्होंने ट्रंप के लिए किसी भी पूर्वाग्रह या दुश्मनी को ज़ाहिर नहीं होने दिया.''
ट्रंप के निजी वकील के तौर पर काम करने अपने 10 साल के अच्छे अनुभव के बारे में कोहेन ने बताया. साथ ही उन्होंने अपने ख़ामियों के बारे में भी बताया, जिसमें ट्रंप की तरफ़ से झूठ बोलना भी शामिल है, जिसका उन्हें पछतावा है.
कोहेन के शांत और संतुलित बर्ताव से अभियोजकों को फ़ायदा मिला. जिस तरह से ट्रंप की टीम ने कोहने को कमज़ोर क्रॉस-एग्जामिन किया उससे कोहेन की गवाही को विश्वसनीयता मिली है.

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जानकारों ने बीबीसी को बताया कि ट्रंप के वकील टॉड ब्लांच शुरुआत में अव्यवस्थित दिखे और पूछताछ में कभी-कभी लड़खड़ाते रहे.
लेकिन दूसरे दिन वो थोड़े बेहतर नज़र आए. उन्होंने कोहेन की गवाही में दिए गए ब्योरों पर सवाल उठाए, जैसे कि अक्टूबर 2016 में कोहेन का ट्रंप के बॉडीगार्ड को किया गया फोन कॉल, जिसमें कोहेन ने दावा किया है कि उन्होंने ट्रंप से गुप्त रूप से पैसे देने के बारे में बात की.
कोहेन की विश्वसनीयता पर उठते सवाल अभियोजन पक्ष के लिए सबसे बड़ी दिक्कत हैं. बचावपक्ष का तर्क ये है कि कोहेन एक सजायाफ्ता अपराधी हैं, जिन्होंने कांग्रेस से झूठ बोलने के अलावा कई अपराधों में दोषी ठहराए जाने के बाद जेल में भी कुछ वक्त बिताया है.
कोहेन अभियोजकों के लिए महत्वपूर्ण गवाह थे, वो ट्रंप की तरफ़ से दिए गए हश-मनी के बारे में गवाही दे सकते थे.
कोहेन का कहना था कि ट्रंप के पूर्व वित्तीय अधिकारी एलन वीसलबर्ग ने दिए गए पैसे को क़ानूनी सेवा लेने के मद में वर्गीकृत करने का फ़ैसला किया था. कोहेन ने कहा कि उन्होंने खुद ट्रंप को इस बात के लिए वीसलबर्ग से 'ओके' कहते हुए सुना है.
जैसा कि कोहेन ने बताया था, अभियोजकों ने दर्ज़नों चेक, बहीखाता और चालान भी सबूत के तौर पर पेश किया.
लेकिन कोहेन की बात सभी जूरी सदस्यों को प्रभावित नहीं कर सकती.
रैंडलमेन कहती हैं, ''आप एक ऐसे गवाह पर भरोसा कर रहे हैं, जिस पर दूसरों की अपेक्षा कई तरह के आरोप हैं. इससे मामले को साबित करना थोड़ा और कठिन हो जाता है.''
अभियोजन पक्ष की चुनौतियां
अभियोजन पक्ष के लिए कई दूसरी चुनौतियां भी हैं.
मैनहट्टन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी ऑफिस ने ट्रंप के आरोपों को घोर अपराध की श्रेणी में डाल दिया, ये कहते हुए कि रिकॉर्ड में हेराफेरी से वो एक दूसरे अपराध को छिपाना चाहते थे.
अब अपने केस को साबित करने के लिए अभियोजकों को ये साबित करना होगा कि ट्रंप ने कारोबारी रिकॉर्ड में जो हेरफेर किया है वो कैंपेन में मदद हासिल करने की नियत से किया है.
कई गवाहों ने इस बात की पुष्टि की है.
कोहेन ने कोर्ट को बताया, ''ऐसा करते वक्त वो अपनी पत्नी (मेलानिया) के बारे में नहीं सोच रहे थे. ये सब कैंपेन के लिए था.''
लेकिन अभियोजकों को इस बात को साफ-साफ दिखाना होगा.
डाएन किज़ल कहती हैं, '' अभियोजकों को इस भुगतान का इरादा दिखाना होगा कि ये कैंपेन के लिए ही किया गया है. कई घटनाओं को एक साथ देखना होगा और आपको इन घटनाओं के तार एक दूसरे से जोड़ने ही होंगे.''

फ्लेचर का कहना है कि अभियोजक इसमें कामयाब रहे हैं, गवाहों ने तर्क दिया है कि गुप्त रूप से जो भुगतान किया गया था, उसका मकसद ट्रंप के परिवार की सुरक्षा नहीं था.
फ्लेचर कहते हैं, ''ये सब चुनाव के लिए था. अगर मैं शर्त लगाता तो इस बात पर लगाता कि वो दोषी ठहराए जाएंगे. लेकिन ये इतना भी निश्चित नहीं है.''
जानकार मानते हैं, आख़िर में फ़ैसला जूरी के चयन पर निर्भर करता है.
अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं को व्यक्त करने वाले सैकड़ों लोगों में से 12 सदस्यों और 6 वैकल्पिक सदस्यों को बतौर जूरी चुना गया था. जिन्हें ट्रंप और इस मामले के बारे में जानकारी है.
किज़ल कहती हैं कि जूरी के सदस्य अक्सर अप्रत्याशित होते हैं. उनका कहना है, ''सिर्फ एक व्यक्ति भी तय कर सकता है कि अभियोजकों ने अपना मामला साबित नहीं किया है. अभियोजन पक्ष को सभी 12 जूरी सदस्यों को राजी करने की ज़रूरत है.''
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