क्या झारखंड में हेमंत सोरेन बनाम नरेंद्र मोदी हो गया है लोकसभा चुनाव

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- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, रांची से, बीबीसी हिन्दी के लिए
''31 जनवरी, 2024 की काली रात देश के लोकतंत्र में नए तरीक़े से जुड़ी है. 31 जनवरी की रात को देश में पहली बार किसी मुख्यमंत्री या पूर्व-मुख्यमंत्री या किसी भी व्यक्ति की राजभवन के अंदर गिरफ़्तारी हुई. ऐसा मुझे लगता है इस षड्यंत्र को अंजाम देने में राजभवन भी शामिल रहा है. देश के लोकतंत्र में यह काला अध्याय है.''
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यह बात अपनी गिरफ़्तारी के बाद विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेते हुए कही थी.
उन्होंने कहा, "इस राज्य में कितने आदिवासी मुख्यमंत्रियों ने पांच साल पूरे किए. मुझे पता था कि ये मुझे भी पांच साल पूरा करने में रोड़े अटकाएंगे."
हेमंत सोरेन बोले, "प्रभु राम की प्राण प्रतिष्ठा हुई 22 जनवरी को. राम राज्य आ गया. पहला कदम बिहार में पड़ा. बेचारा एक पिछड़ा वर्ग के व्यक्ति की हत्या हो गई."
हेमंत सोरेन ने कहा, "आप जानते हैं. दूसरा कदम झारखंड पर पड़ा. एक आदिवासी मुख्यमंत्री को निगलने का प्रयास. चूंकि इस आदिवासी मुख्यमंत्री के शरीर में हड्डियां कुछ अधिक हैं. इसलिए, उस हड्डी को निकालने के लिए ईडी उसका डिसेक्शन करने में लगी है, ताकि कैसे हम उसको निगल जाएं. लेकिन, इतना आसान नहीं है. गलती से गले में फंस गया, तो पूरा का पूरा अंतड़ी फाड़ के निकालेगा."
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सोशल मीडिया पर वायरल
झारखंड के नए मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के विश्वासमत में भाग लेने आए हेमंत सोरेन करीब 24 मिनटों तक बोले.
इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर आदिवासियों, दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव के आरोप लगाए.
उनका यह भाषण तब सोशल मीडिया पर तो वायरल हुआ ही, मीडिया की सुर्ख़ियां भी बना.
ईडी द्वारा गिरफ़्तारी और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के बाद हेमंत सोरेन का वह पहला और अभी तक का इकलौता सार्वजनिक वक्तव्य था.

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गिरफ़्तारी से पहले का भाषण
इससे पहले 20 जनवरी को ईडी अधिकारियों की पूछताछ में शामिल होने के बाद उन्होंने देर शाम अपने सरकारी आवास के बाहर मौजूद कार्यकर्ताओं को संबोधित किया था.
तब उन्होंने अपने लोगों से गांव-गांव जाकर केंद्र की बीजेपी सरकार के कथित षड्यंत्र और झारखंड की अपनी सरकार की उपलब्धियों को जनता को बताने के लिए कहा था.
शायद उन्हें इस बात का अंदेशा था कि लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें गिरफ़्तार कर लिया जाएगा.
लिहाजा, वे अपने समर्थकों को इसके लिए तैयार कर उनमें जोश भर रहे थे.

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कल्पना सोरेन ने संभाला मोर्चा
अब यह मोर्चा उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने संभाल लिया है. उनकी कई सभाएं हुई हैं. उन्होंने जेएमएम के कार्यालय जाकर कई ज़िलों के कार्यकर्ताओं से मुलाक़ात भी की है.
उनकी अगुवाई में 21 अप्रैल को रांची में इंडिया गठबंधन दलों की रैली होने वाली है. इसके लिए बड़े नेताओं को न्योता भेजा गया है.
इस बीच उनकी भाभी सीता सोरेन जेएमएम छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गई हैं. बीजेपी ने उन्हें दुमका से पार्टी प्रत्याशी बनाया है. यह शिबू सोरेन की पारंपरिक सीट रही है.
वे आठ बार वहां के सांसद रहे हैं. इस साल वे चुनाव नहीं लड़ रहे. जेएमएम ने अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नलिन सोरेन को वहां से उम्मीदवार बनाया है. वे शिबू सोरेन की बड़ी बहू के खिलाफ मैदान में हैं.
दुमका के विधायक, राज्य सरकार के मंत्री और शिबू सोरेन के सबसे छोटे बेटे बसंत सोरेन उनके पक्ष और अपनी भाभी सीता सोरेन के ख़िलाफ़ वहां प्रचार में जुटे हैं. संभव है कि आने वाले दिनों में वहां शिबू सोरेन या कल्पना सोरेन की भी सभाएं हों.

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जेएमएम के पोस्टर बॉय हेमंत सोरेन
झारखंड मुक्ति मोर्चा 'झारखंड झुकेगा नहीं' का नारा देकर हेमंत सोरेन सरकार की उपलब्धियां और उनकी गिरफ़्तारी के मुद्दे पर चुनावी मैदान में उतर गया है.
मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन भी रांची के एक जेल में बंद हेमंत सोरेन से कई मुलाकातें कर चुके हैं.
वे, कल्पना सोरेन और बसंत सोरेन समेत जेएमएम के सारे नेता हेमंत सोरेन की गिरफ़्तारी के लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेताओं पर षड्यंत्र का आरोप लगा रहे हैं.
जेएमएम के केद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने भी मीडिया से कई दफा कहा है कि हेमंत सोरेन की गिरफ़्तारी से आदिवासियों में आक्रोश है. यह आक्रोश आसानी से वोट में बदलेगा और झारखंड की जनता बीजेपी के खिलाफ वोट करेगी. यह झारखंड की अस्मिता का सवाल है.

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क्या कह रही है बीजेपी
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी अपनी बैठकों में हेमंत सोरेन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे हैं.
वे इसके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों की भी चर्चा कर रहे हैं.
बाबूलाल मरांडी ने कहा, "हेमंत सोरेन और उनके परिवार ने आदिवासियों की ज़मीनें हड़पी हैं, जबकि प्रधानमंत्री मोदी गरीब कल्याण की योजनाएं लेकर आए. इससे देश के करोड़ों ग़रीबों की स्थिति सुधरी. 25 करोड़ लोग ग़रीबी रेखा से बाहर निकले. जनता यह समझती है."
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पक्ष-विपक्ष दोनों के लिए फ़ैक्टर बने हेमंत सोरेन
झारखंड में अभी तक के ट्रेंड से स्पष्ट है कि यहां का पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए हेमंत सोरेन एक बड़ा फ़ैक्टर बन चुके हैं.
वरिष्ठ पत्रकार चंदन मिश्र मानते हैं कि यह चुनाव भले ही लोकसभा का है. लेकिन नेताओं की अब तक की बयानबाज़ी ने इसे मोदी बनाम हेमंत सोरेन बना दिया है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "संथाल परगना इलाके में हेमंत सोरेन की गिरफ़्तारी का मुद्दा ज्यादा प्रभावी है. क्योंकि वहां के लोगों का झारखंड मुक्ति मोर्चा से भावनात्मक जुड़ाव रहा है. कोल्हान इलाके में भी इसका असर पड़ेगा. शिबू सोरेन से संथालियों का पुराना अफेक्शन है."
"बची बात हेमंत सोरेन की, तो वे इस चुनाव में बड़े फैक्टर हैं. बीजेपी उनपर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रही है. अब जेएमएम अपने वोटरों को उनके पक्ष में कितना समझा पाती है, रिज़ल्ट इस पर निर्भर करेगा. शहरी इलाक़ों में भले ही बीजेपी के वोटर हों लेकिन गांव के आदिवासियों में हेमंत सोरेन का मुद्दा कारगर साबित होगा."
वरिष्ठ पत्रकार और संथाल परगना से ताल्लुक़ रखने वाले सुरेंद्र सोरेन भी इससे इत्तेफाक रखते हैं. वे मानते हैं कि झारखंड में मुद्दा तो हेमंत सोरेन ही हैं.
सुरेंद्र सोरेन ने बीबीसी से कहा, "यह इस बात पर निर्भर करेगा कि जेएमएम इस मुद्दे को किस तरह जनता के बीच ले जाती है. अगर यह कारगर तरीके से लोगों के बीच ले जाया गया तो इसका असर पड़ेगा. झारखंड मुक्ति मोर्चा हेमंत सोरेन के जेल जाने के मुद्दे को जनता के बीच अगर ठीक से ले जाने में सफल हुई तो बीजेपी को नुक़सान उठाना पड़ सकता है."
सुरेंद्र सोरेन ने कहा, "लेकिन, अगर बीजेपी हेमंत सोरेन के कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे को जनता को समझा पाने में सफल हुई तो उसकी जीत पर कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा. वे पुराना इतिहास लौटा सकते हैं, जब बीजेपी 14 में से 12 सीटें जीत गई थी."
हालांकि, बीजेपी यह नहीं मानती. बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल नाथ शाहदेव कहते हैं कि अब जनता जागरूक हो चुकी है. वह अपना भला-बुरा समझती है.
प्रतुल नाथ शाहदेव ने बीबीसी से कहा, "हेमंत सोरेन कोई आंदोलन करके जेल नहीं गए हैं. उन पर लैंड ग्रैब के आरोप हैं और ईडी ने इस मामले में कोर्ट में कई दस्तावेज पेश किए हैं. इसलिए उन्हें किस बात की सहानुभूति मिलनी चाहिए."
"मुझे लगता है कि झारखंड के लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के नाम पर वोट देगे. इसलिए मुद्दा नरेंद्र मोदी और उनकी उपलब्धियां हैं, न कि हेमंत सोरेन, जो भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं. आप देखिएगा हम झारखंड की सभी 14 सीटें जीतेंगे."
वहीं, कांग्रेस के झारखंड प्रभारी गुलाम अहमद मीर कहते हैं कि झारखंड में हेमंत सोरेन के खिलाफ हुआ षड्यंत्र ही सबसे बड़ा मुद्दा है और यह चुनाव इसी मुद्दे पर लड़ा जाएगा.
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