झारखंड: हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन अचानक इतनी चर्चा में क्यों हैं?

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- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, रांची से
झारखंड के सबसे बड़े सियासी परिवार की मंझली बहू और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन पिछले कुछ दिनों से चर्चा में हैं.
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के प्रमुख शिबू सोरेन की इस बहू की अब तक की छवि अराजनीतिक रही है लेकिन राज्य में चल रही सियासी हलचल के बीच स्थानीय मीडिया में उनके नाम की चर्चा मुख्यमंत्री पद की प्रत्याशी के तौर पर भी की जा रही है.
इस कारण वे अचानक सुर्खियों में आ गई हैं. कल्पना सोरेन इस समय विधायक नहीं हैं लेकिन वो आज हुई विधायकों की बैठक में शामिल थीं. पार्टी की ओर फ़िलहाल उन्हें कोई राजनीतिक ज़िम्मेदारी देने के बारे में घोषणा नहीं हुई है.
लेकिन मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक उनके नाम की ख़ूब चर्चा है.
उनका मायका भी ओड़िशा के मयूरभंज जिले के उसी रायरंगपुर इलाके में है, जहां से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का नाता है.
वे बलहदा प्रखंड के तेंतला गांव की रहने वाली हैं. यह गांव रायरंगपुर अनुमंडल का हिस्सा है.
वे बहुभाषी हैं. संथाली, ओड़िया, हिंदी और अंग्रेजी जैसी भाषाओं पर भी उनकी खासी पकड़ है.
रांची में चलाती हैं प्ले स्कूल

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भारतीय सेना के रिटायर्ड अधिकारी अम्पा मुर्मू की पहली संतान कल्पना सोरेन की शुरुआती पढ़ाई बारीपदा के केंद्रीय विद्यालय से हुई है.
इसके बाद उन्होंने भुवनेश्वर के एक कालेज से बी-टेक की पढ़ाई की. बिजनेस मैनेजमेंट में रुचि के कारण उन्होंने एमबीए की भी डिग्री ली.
झारखंड में उनकी पहचान एक बिजनेस वूमेन और समाजसेविका के तौर पर भी है.
वे रांची में एक प्ले स्कूल की संचालिका हैं और एक निजी कंपनी की निदेशक भी हैं.
फरवरी 2006 में हेमंत सोरेन से शादी के बाद से वे रांची में रहती हैं.
हेमंत और कल्पना सोरेन के दो बेटे निखिल और अंश हैं, जिनकी सार्वजनिक अपीयरेंस काफी कम है.
वे अपने मां-पिता के साथ ही मुख्यमंत्री आवास में रहते हैं. उनकी तस्वीरें कभी-कभार तब मीडिया में आती हैं, जब वे अपने पिता के साथ किसी सार्वजनिक समारोह में शिरकत करें.
उनके दोनों बेटे अलग-अलग खेलों में भी हाथ आजमा रहे हैं और उन्हें कुछ पुरस्कार भी मिल चुके हैं. वे मीडिया से अलग रहते हैं.
हेमंत के हर कदम साथ...

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47 साल की कल्पना सोरेन की छवि भी कुछ-कुछ ऐसी ही है.
वे कभी कभी अपने पति के साथ सार्वजनिक समारोहों में शिरकत करती हैं. कभी ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं जिसमें वो हेमंत सोरेन को खाना खिलाती और उनके साथ पूजा करती भी नजर आती हैं.
मुख्यमंत्री पद की दूसरी बार शपथ लेने जाते वक्त साल 2019 में हेमंत सोरेन ने खुद गाड़ी चलायी और वे अगली सीट पर उनके साथ बैठी मुस्कुराती रहीं.
इसके बाद पारिवारिक समारोहों में वे अपने पति के साथ देखी जाती रही हैं. उनकी ऐसी ही कुछ तस्वीरें सार्वजनिक तौर पर और सोशल मीडिया में दिखाई देती हैं.
हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनने से पहले और उसके बाद भी वे कुछ समारोहों में मुख्य अतिथि के बतौर भी बुलायी जाती रही हैं. इस कारण उनकी अपनी सामाजिक पहचान भी है.
कल्पना ने जब कहा, 'पीछे नहीं हटूंगी'

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हालांकि, कल्पना सोरेन की कोई सियासी पहचान नहीं है. वोटिंग के दिन अपने पति के साथ जाकर वोट करने के अलावा जेएमएम के किसी कार्यक्रम में उन्हें नहीं देखा गया है.
गर्वनेंस में भी उनका हस्तक्षेप नहीं रहा है. वे अपना ज्यादातर वक्त अपने स्कूल या घर में ही बिताती रही हैं. परीक्षा के वक्त स्टूडेंट्स को टिप्स देते उनके कुछ इंटरव्यूज भी सार्वजनिक हैं, जिन्हें तब काफी पसंद किया गया था.
उनके करीबी लोगों ने बीबीसी से कहा कि सियासत में सक्रिय नहीं होने के बावजूद झारखंड के हस्तशिल्प और इससे जुड़े कारीगरों के विकास, आदिवासी कला-पेंटिंग्स और पर्यटन में उनकी खासी दिलचस्पी है.
वे अपने स्कूल में ब्लड डोनेशन के कार्यक्रम भी चलाती रही हैं. उनके एक कैंप में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे.
साल 2020 में एक इंटरव्यू में कल्पना सोरेन ने कहा भी था, “मैं राजनीति के बारे में कुछ नहीं कह सकती लेकिन अगर कभी पार्टी मेरे लिए कुछ तय करेगी, तो मैं पीछे नहीं हटूंगी. हेमंत जी से मेरी बातचीत कभी सियासी मुद्दों पर नहीं होती है. वे एक आइकन हैं और झारखंड के विकास के लिए काम कर रहे हैं. इसलिए हमारे नेता तो हेमंत सोरेन ही हैं.”
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