हेमंत सोरेन भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच क्या सियासी सहानुभूति बटोर रहे हैं?

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- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, रांची से, बीबीसी हिन्दी के लिए
"हमलोग चोर-उचक्के हैं क्या. क्या लगता है कि कोई हत्यारे हैं. कल दिया, आज आ गए. क्या हमारी व्यस्तता नहीं है. इतना ही संगीन गुनाह है, उनको लगता है, तो समन क्यों. सीधे आकर अरेस्ट कर लेना चाहिए."
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यह बात 3 नंवबर की शाम रांची से दूर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कही. वे वहां आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के समापन समारोह के मुख्य अतिथि थे.
छत्तीसगढ़ सरकार के इस कार्यक्रम के लिए वहां के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन्हें न्योता भेजा था.
उन्होंने कहा, "इस महोत्सव में शरीक होने का निमंत्रण मैंने पहले स्वीकार कर लिया था. हर चीज़ का एक शिष्टाचार है. हर चीज़ का एक व्यावहारिक आचरण है. मुझे लगता है कि ये भी ध्यान रहना चाहिए. आज हमारे राज्य में राष्ट्रपति महोदय आ रही हैं."
"जब सरकार को लेकर राज्य में उत्साह का माहौल रहता है, तो हमारे विपक्ष का एक सुनियोजित षड्यंत्र सामने आ जाता है. मैं समझता हूं कि ये ईडी का समन नहीं, बीजेपी के द्वारा उपयोग किया गया हथकंडा है."
सफेद कुर्ता-पायजामा और स्लेटी रंग की बंडी पहने हेमंत सोरन वहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) और भारतीय जनता पार्टी दोनों पर हमलावर रहे.
इसके बाद उन्होंने पहले से तय छत्तीसगढ़ सरकार के कार्यक्रम में हिस्सा लिया और चार्टर्ड विमान से देर रात रांची वापस लौट आए.

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ईडी का समन
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में गिरफ़्तार उनके विधायक प्रतिनिधि और कुछ दूसरे लोगों के कथित बयानों के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछताछ की ज़रूरत समझी. इसके बाद उन्हें पत्र भेजकर तीन नवंबर की सुबह अपने रांची कार्यालय में बुलाया.
ईडी का समन एक नवंबर की देर शाम विशेष दूत से उन्हें भेजा गया.
मुख्यमंत्री आवास में तैनात एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि उस पत्र के मिलने और मुख्यमंत्री से पूछताछ के लिए ईडी द्वारा मुक़र्रर वक्त के बीच बमुश्किल 36 घंटे का अंतर था.
अगली सुबह मुख्यमंत्री अपने पहले से तय कार्यक्रम में भाग लेने साहिबगंज चले गए. वहां से लौटने के बाद यूपीए विधायक दल की बैठक की.
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ईडी से तीन हफ़्ते का वक्त मांगा
इससे पहले साहिबगंज में लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्यपाल, बीजेपी और ईडी को निशाने पर लिया और अपने भाषण के दौरान पूरे वक्त आक्रामक बने रहे.
शाम में वे रांची लौटे और अपने सरकारी आवास पर यूपीए विधायक दल की बैठक की.
अगली सुबह उन्हें ईडी ने बुलाया था, लेकिन वे घर में ही रहे. दोपहर बाद वे घर से बाहर निकले और मुख्यमंत्री आवास के बाहर जमा समर्थकों की भीड़ को संबोधित किया.
अपने इस भाषण के दौरान भी वे आक्रामक बने रहे और बीजेपी पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया. तब उनके साथ उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी चंपई सोरेन और मिथिलेश ठाकुर भी मौजूद थे.
इसके बाद उन्होंने एक पत्र भेजकर ईडी से तीन हफ़्ते का समय मांगा और विशेष विमान से रायपुर चले गए. एयरपोर्ट जाने के लिए उनकी गाड़ियों का काफ़िला ईडी दफ़्तर के सामने से ही निकला.

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ईडी के पास मौजूद विकल्प
मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक़ 15 नवंबर तक वे काफ़ी व्यस्त हैं. उन्हें 10 नवंबर को कैबिनेट मीटिंग, 11 नवंबर को विधानसभा के विशेष सत्र और 15 नवंबर को झारखंड स्थापना दिवस समारोह में हिस्सा लेना है.
उस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी आने वाली हैं. लिहाज़ा, मुख्यमंत्री ईडी की पूछताछ में शामिल होने के लिए वक्त चाह रहे हैं.
ईडी अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के पत्र पर अपना आधिकारिक पक्ष नहीं रखा है. लिहाज़ा, यह पता नहीं है उनकी अगली कार्रवाई क्या होगी.
क़ानूनी जानकारों के मुताबिक़, ईडी चाहे तो उन्हें और वक्त दे सकती है या फिर नया समन भेजकर किसी दूसरी तारीख़ पर हाज़िर होने के लिए कह सकती है.
अगर वे फिर भी हाज़िर नहीं हुए तो ईडी के अधिकारी कोर्ट से उनकी गिरफ़्तारी वारंट की अपील कर सकते हैं. हालांकि, ऐसा करना आसान नहीं होगा, क्योंकि मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ पहले से कोई मामला लंबित नहीं है.
उनके ख़िलाफ़ न ही कोई एफ़आईआर है. ईडी कोर्ट में पहले से चल रहे मामलों में भी व्यक्तिगत तौर पर मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ कोई ठोस सबूत अब तक पेश नहीं कर सका है.
हालांकि ईडी ने इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान भी जारी नहीं किया है.

मुख्यमंत्री क्या कर सकते हैं
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चाहें तो ईडी के समन और पूरी कार्रवाई के ख़िलाफ़ अदालत का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं. उनके प्रवक्ताओं ने ऐसे संकेत भी दिए हैं.
हालांकि, उन्होंने कहा है कि वे किसी भी पूछताछ के लिए तैयार हैं, लेकिन इसका एक शिष्टाचार होना चाहिए. यह भी तय किया जाना चाहिए कि संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल चुनी हुई सरकारों को डराने के लिए ना हो.
क़ानूनी लड़ाई के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस पूरे मामले को जनता के बीच ले जा सकते हैं. वे ऐसा कर भी रहे हैं.
उन्होंने अपने वोटरों को यह समझाने की कोशिश की है कि बीजेपी उनके ख़िलाफ़ इसलिए साज़िश रच रही है क्योंकि वे आदिवासी हैं.


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सियासत तेज़
मुख्यमंत्री को ईडी के नोटिस के बाद राज्य की सियासत तेज़ हो गई है.
सत्तारूढ़ जेएमएम (झारखंड मुक्ति मोर्चा) ने 5 नवंबर को रांची में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है. वहीं बीजेपी के नेताओं ने मुख्यमंत्री से नैतिक आधार पर इस्तीफ़ा देकर जांच का सामना करने की मांग की है.
पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा, "झारखंड में भ्रष्टाचार की काठ से बनी सत्ता की नैया जांच एजेंसियों की लहरों के सामने हिचकोले खाकर बस डूबने ही वाली है. इसकी पतवार थामे सत्ता के मुखिया अब अंतिम दांव आज़माने की तैयारी में हैं."
"वो 11 नवंबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर एक बार फिर जन भावनाओं को आगे कर सहानुभूति कार्ड खेलने की तैयारी कर रहे हैं. लेकिन, उनके अहंकार का अंत होना निश्चित है. उन्हें इस्तीफ़ा देकर जांच का सामना करना चाहिए, न कि संवैधानिक एजेंसियों को डराने की कोशिश."
बहरहाल, झारखंड की सियासत के लिए आने वाले कुछ दिन महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.
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