हेमंत सोरेन सरकार को गिराने की साजिश पर झारखंड में सियासी गर्मी तेज़

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी के लिए
झारखंड पुलिस ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार गिराने की साजिश में कथित तौर पर शामिल तीन लोगों को गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया है.
गिरफ़्तार लोगों में से एक शख़्स विधानसभा चुनाव लड़ चुका है. पुलिस का दावा है कि इन लोगों ने सरकार को अस्थिर करने की साजिश में शामिल होने की बात स्वीकार कर ली है. इस मामले में रांची के कोतवाली थाना में एक रिपोर्ट दर्ज कराई गई है.
इसके बाद राज्य में सियासी तपिश बढ़ गई है. यहां सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और उसकी सहयोगी कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने राज्य में विपक्ष की भूमिका निभा रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर यह साजिश रचने का आरोप लगाया है. वहीं, बीजेपी इस पूरे मामले को फैब्रिकेटेड बता रही है.
इस बीच झारखंड पुलिस का दावा है कि गिरफ़्तार लोगों के ख़िलाफ़ पार्याप्त साक्ष्य हैं. रांची पुलिस ने इस संबंध में एक बयान जारी किया है.
पुलिस ने अपने बयान में कहा, "हमने कांग्रेस विधायक कुमार जयमंगल उर्फ अनूप सिंह की लिखित शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की है. इस मामले में रांची निवासी अभिषेक कुमार दुबे, और बोकारो के अमित सिंह व निवारण प्रसाद महतो गिरफ़्तार किए गए हैं."

इमेज स्रोत, Ravi Prakash/BBC
कौन हैं जिन्हें गिरफ़्तार किया गया
पुलिस का कहना है, "इन लोगों के ख़िलाफ़ राजद्रोह और कुछ अन्य धाराओं मे रिपोर्ट दर्ज की गई है. तीनों लोगों ने राजनीतिक लोगों से संपर्क कर नकद राशि उपलब्ध कराने की कोशिश में शामिल होने की बात स्वीकार कर ली है. इनसे बरामद दस्तावेज़ों और इलेक्ट्रानिक उपकरणों की जांच प्रक्रिया जारी है."
पुलिस द्वारा गिरफ़्तार किए गए निवारण प्रसाद महतो बोकारो सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं. उन्हें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी 'हम' ने टिकट दिया था. हालांकि, उन्होंने अपनी फेसबुक प्रोफाइल में बीजेपी नेताओं के साथ तस्वीरें लगा रखी हैं.
अमित सिंह की भी बीजेपी नेताओं के साथ कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. वहीं अभिषेक दुबे के के परिजनों का दावा है कि वे छोटी-मोटी ठेकेदारी करते हैं. इन तीनों लोगों के परिजन उनके निर्दोष होने का दावा कर रहे है.
रांची पुलिस के मुताबिक इन लोगों को एक होटल में छापामारी करके गिरफ़्तार किया गया है. पुलिस ने उस होटल की सीसीटीवी फुटेज हासिल कर ली है. ऐसे में संभव है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ़्तारियां हों और कुछ नई जानकारियां सामने आएं.

इमेज स्रोत, ANI
इस बीच पुलिस द्वारा कोर्ट में दाख़िल दस्तावेज़ों के आधार पर स्थानीय मीडिया में ख़बर है कि इस मामले में गिरफ़्तार निवारण प्रसाद महतो और अमित सिंह ने झारखंड विधानसभा के सदस्यों इरफान अंसारी, उमाशंकर अकेला एवं अमित यादव ने 15 जुलाई को एक ही फ्लाइट से दिल्ली की यात्रा की थी.
हालांकि, विधायक इरफान अंसारी ने कहा है कि वे अपने साथी विधायकों के साथ अपने बीमार पिता को देखने दिल्ली गए थे, उनका टिकट निर्दलीय विधायक अमित यादव ने कराया था और वे भी अपनी पत्नी के इलाज के लिए दिल्ली जा रहे थे.
जिन तीन विधायकों की दिल्ली यात्रा करने की जानकारी सामने आ रही है, उनमें इरफ़ान अंसारी और उमाशंकर अकेला कांग्रेस के विधायक हैं. जबकि अमित यादव निर्दलीय हैं. वे पहले बीजेपी में थे लेकिन पिछले चुनाव में बीजेपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया. तब वे निर्दलीय लड़े और जीते.

इमेज स्रोत, Ravi Prakash/BBC
जेएमएम का आरोप
वहीं, सत्ताधारी जेएमएम के केंद्रीय महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि बीजेपी यहां मध्य प्रदेश और कर्नाटक मॉडल की तर्ज पर सरकार गिराने की साजिश रच रही है. राजस्थान में उनकी दाल नहीं गली, तो वे झारखंड सरकार गिराने की कोशिश मे लग गए लेकिन उनकी चाल विफल हो गई.
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा, "बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने अपने सार्वजनिक बयानों में हेमंत सोरेन की सरकार गिराने का दावा किया था. लेकिन, झारखंड की जनता और हमारी सरकार में शामिल कांग्रेस और आरजेडी के विधायक बिकाऊ नहीं हैं. इसलिए बीजेपी की दाल यहां नहीं गलने वाली है."
उल्लेखनीय है कि झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने दुमका उपचुनाव के वक्त कहा था कि दुमका में बीजेपी की जीत के बाद झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार गिर जाएगी. तब कांग्रेस के ज़िलाध्यक्ष ने दुमका में उनके ख़िलाफ़ पुलिस रिपोर्ट दर्ज करायी थी. वह सीट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छोड़ दी थी. इस कारण उपचुनाव हुआ. उसमें हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन ने जीत हासिल की.

इमेज स्रोत, Ravi Prakash/BBC
कांग्रेस और राजद के आरोप
झारखंड सरकार में शामिल कांग्रेस और आरजेडी भी इस मुद्दे पर जेएमएम के साथ खड़ी नजर आ रही है. दोनों पार्टियों के नेताओं ने इसे बीजेपी की साजिश क़रार दिया है.
झारखंड कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने बीबीसी हिंदी से कहा कि भारतीय जनता पार्टी पूरे देश मे जनता द्वारा चुनी गई सरकारों को अस्थिर करने प्रयास करती रही है. उसी कड़ी में यह एक नई घटना है लेकिन झारखंड में उनके मंसूबे पूरे होने वाले नहीं हैं.
वहीं आरजेडी नेता और झारखंड सरकार के मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने कहा कि हमारे सहयोगी विधायक बिकाऊ नहीं है, इसलिए बीजेपी ऐसी साजिश में नाकाम होगी.

इमेज स्रोत, ANI
बीजेपी ने की जांच की मांग
वहीं विपक्षी बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बयान जारी करने की मांग की है.
उन्होंने रांची में एक प्रेस कांफ्रेस कर कहा कि गिरफ़्तार लोग ठेका मजदूर या छोटे-मोटे व्यवसायी हैं. पुलिस उन्हें बेवजह फंसा रही है.
बाबूलाल मरांडी ने कहा, "मुख्यमंत्री को इस मामले की जांच हाईकोर्ट के मौजूदा जज की अध्यक्षता में एक एसआइटी गठित तक करानी चाहिए और मनगढ़ंत कहानी बनाने के दोषी पुलिस अधिकारियों को भी दंडित करना चाहिए."
"सच का सामने आना जरूरी है, क्योंकि पुलिस ने गिरफ़्तार लोगों के ख़िलाफ़ राजद्रोह की धाराएं लगाई हैं. अगर इस मामले में सच्चाई है तो डीजीपी ने क्यों नहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस किया. इतने गंभीर मामले में तो कायदे से उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस करना चाहिए था."

इमेज स्रोत, Ravi Prakash/BBC
झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा के 30, कांग्रेस के 16, आरजेडी के एक विधायक हैं. यहाँ इन तीनों पार्टियों की गठबंधन सरकार है.
इनके अलावा बीजेपी के 25, आजसू पार्टी के 2, माले और एनसीपी के एक-एक, 2 निर्दलीय तथा जेवीएम (पी) के 3 विधायक हैं, जिनमें से एक बाबूलाल मरांडी बीजेपी और दो कांग्रेस में शामिल हो गए थे.
वैसे अभी यह मामला विधानसभा अध्यक्ष के कोर्ट में लंबित है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














