झारखंड: सीएम हेमंत सोरेन रांची में विधायकों के साथ कर रहे हैं बैठक, बीजेपी ने की राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग

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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रांची पहुंच गए हैं. अब से कुछ देर पहले रांची स्थित सरकारी आवास पर बैठक करते हुए सोरेन की तस्वीरें सामने आई हैं.
सोरेन को मनी लॉन्ड़्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के सामने पूछताछ के लिए पेश होना था लेकिन वो पेश नहीं हुए. सोमवार को ये जानकारी भी नहीं हो पा रही थी कि वो कहां हैं. इसके बाद राजनीतिक बयानबाज़ी का दौर शुरू हो गया था. बीजेपी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग उठाई है.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सोरेन आधी रात के बाद झारखंड की राजधानी रांची स्थित अपने सरकारी आवास पर पहुंचे.
सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा और सत्ताधारी गठबंधन के सभी विधायकों को कहा गया है कि वो रांची से बाहर न जाएं. अभी मुख्यमंत्री सोरेन विधायकों के साथ बैठक कर रहे हैं. इस बैठक में उनकी पत्नी कल्पना सोरेन भी मौजूद हैं.
सोरेन ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को एक ईमेल भेजा है और कहा है कि वो 31 जनवरी (बुधवार) को दोपहर एक बजे अपने आवास पर बयान दर्ज कराएंगे.
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जब बीजेपी ने किया मुख्यमंत्री के 'लापता' होने का दावा
सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने सोमवार को ही बताया था कि मुख्यमंत्री निजी काम से दिल्ली में हैं. मगर ईडी की टीम जब सोरेन के दिल्ली आवास पर पहुँची तो वहाँ वह नहीं मिले.
इसके बाद विपक्षी दल बीजेपी ने दावा किया कि झारखंड के सीएम 'लापता' हैं. बीजेपी ने मंगलवार को सीएम की 'गुमशुदगी' का एक पोस्टर जारी किया.
इस पोस्टर में बीजेपी ने हेमंत सोरेन की कद-काठी का ब्योरा देते हुए कहा है कि जानकारी देने वाले को 11 हज़ार इनाम दिया जाएगा.
सोरेन की पार्टी ने सोमवार रात को बयान जारी कर कहा, ''29 जनवरी और 31 जनवरी को सीएम सोरेन को जिला मुख्यालय में उपस्थित होकर योजनाओं से जुड़े स्वीकृति पत्र वितरित करने थे. मगर इन सबके बीच ईडी सोरेन के दिल्ली स्थित घर पर सैकड़ों जवानों के साथ पहुंची. ये विधि सम्मत महसूस नहीं होता है. आख़िर ईडी को ऐसी क्या जल्दीबाज़ी थी कि दो दिन इंतज़ार ना कर सकी. जबकि एक हफ्ते पहले ही सात घंटे की पूछताछ की थी.''
उधर, झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष बाबूलाल मारंडी ने कहा है, ''हेमंत सोरेन इस राज्य के मुख्यमंत्री हैं और लोग बता रहे हैं कि वो परसों रात से ही लापता हैं. अगर राज्य के इंटेलीजेंस और पुलिस को भी नहीं पता कि वो कहां हैं तो ये बहुत गंभीर मामला है.''
इस बीच राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने डीजीपी और गृह सचिव को राजभवन बुलाया है.
वहीं बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि झारखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने का यह सही मौक़ा है.

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मुख्यमंत्री आवास के पास धारा 144
झारखंड में मुख्यमंत्री आवास, राजभवन और ईडी के दफ़्तर के 100 मीटर के दायरे में सीआरपीसी की धारा 144 लगा दी गई है.
धारा 144 लगाने के आदेश में कहा गया है कि कुछ दलों और संगठनों की ओर से धरना प्रदर्शन और रैली निकालने की सूचना है, जिसे देखते हुए ये फ़ैसला लिया गया है.
बीबीसी के सहयोगी पत्रकार रवि प्रकाश के अनुसार, ये दावा किया जा रहा है कि सीएम सोरेन ने ईडी अधिकारियों को एक ईमेल भेजा है.
इस मेल में उन्होंने ईडी को बताया है कि वे 31 जनवरी को दोपहर एक बजे पूछताछ के लिए ख़ुद ईडी दफ़्तर जाएंगे.
इससे पहले दिल्ली में सोरेन के दिल्ली स्थित घर पर जब ईडी की टीम पहुंची तो वहां से कुछ दस्तावेज़ मिले.
सोरेन के ना मिलने पर ईडी ने आवास से इन दस्तावेज़ों ज़ब्त किया और उनकी एक बीएमडब्लयू कार भी सीज़ कर ली और ड्राइवर को भी साथ ले गई.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया कि सोरेन के दिल्ली वाले घर से एसयूवी के साथ 36 लाख रुपये भी मिले हैं.

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राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
बीजेपी इस मामले में सोरेन को घेर रही है और उन पर गंभीर आरोप लगा रही है.
बीजेपी नेता दुष्यंत गौतम ने कहा है कि ईडी सिर्फ़ उन लोगों को गिरफ़्तार करेगी, जिन्होंने अपराध किया है.
वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि बीजेपी ईडी का दुरुपयोग कर रही है.
आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा है कि बीजेपी जिससे डरती है उससे लड़ने के लिए ईडी, आईटी और सीबीआई को आगे कर देती है.
वो बोले, ''देखा है कि ज़ुल्म में कितनी ताक़त है और आने वाले दिनों में भी देखेंगे. ये ज़रूर लग रहा है कि दिल्ली का शासक बहुत कमज़ोर है, बहुत परेशान है. इसलिए तोड़-फ़ोड़, एजेंसी सबका इस्तेमाल करके देख लो. जब राजनीतिक अवसान निकट आता है तो इस तरह के फैसले होते हैं.''
नौकरी के बदले ज़मीन लेने से जुड़े कथित घोटाले में ईडी की टीम तेजस्वी यादव और लालू यादव से भी मंगलवार को पूछताथ कर रही है.
आरजेडी से अलग हुई जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि अगर आरजेडी को लगता है कि ईडी का समन राजनीतिक प्रतिशोध है तो न्यायपालिका है, वो अदालत का रुख कर सकते हैं.

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किस मामले में हेमंत सोरेन से ईडी पूछताछ करना चाहती है?
ईडी कथित ज़मीन घोटाले से जुड़े मामले में सोरेन से पूछताछ करना चाहती है.
ईडी हेमंत सोरेन को सात बार समन जारी कर पेश होने के लिए कह चुकी है.
मगर सोरेन सातवीं बार भी ईडी के सामने पेश नहीं हुए. ईडी ने इसे अपना अंतिम समन बताया था. सोरेन को पहला समन 14 अगस्त 2023 को जारी हुआ था.
हेमंत सोरेन ने ईडी को लिखी चिट्ठी में कहा- एक बार पूछताछ में शामिल होकर संपत्ति की जानकारी दे चुका हूं, यह वैध तरीक़े से अर्जित की गई है. अब कुछ भी जानना हो तो चिट्ठी के ज़रिए पूछा जा सकता है.
सोरेन ने झारखंड हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी ईडी की कार्रवाई को लेकर याचिका दायर की थी. मगर सोरेन को राहत नहीं मिली.
तीन जनवरी को अवैध ख़नन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में सोरेन के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद पिंटू की संपत्तियों पर ईडी की छापेमारी की ख़बरें आईं.
अभिषेक प्रसाद ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा था, ''हाँ मेरे पास माइन्स हैं लेकिन इनको चलाने की अनुमति मुझे पूर्व सीएम रघुबर दास के कार्यकाल के दौरान मिली थी."
नवंबर 2022 में भी सोरेन से ईडी ने कथित अवैध ख़नन से जुड़े मामले में पूछताछ की थी. इसी मामले में जुलाई 2022 में सोरेन के क़रीबी पंकज मिश्रा को ईडी ने गिरफ़्तार किया था.
हेमंत सोरेन ने अतीत में बीजेपी पर आरोप लगाया था, ''2019 से झारखंड की झामुमो सरकार को गिराने की कोशिशें बीजेपी करती रही है और जब कहीं से सफलता हाथ नहीं लगी तो ईडी के अफसरों को काम पर लगा दिया गया.''

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ईडी की कार्रवाई: आँकड़े किस ओर इशारा करते हैं?
संसद में जुलाई 2023 में सरकार ने बताया कि प्रीवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए के तहत ईडी ने 3,110 केस बीते तीन सालों में दर्ज किए गए.
- 2022-23: 949 केस
- 2021-22: 1180 केस
- 2020-21: 981 केस
वहीं फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट यानी फेमा के तहत बीते तीन सालों में 12 हज़ार 233 से ज़्यादा केस दर्ज किए गए.
- 2022-23: 4,173 केस
- 2021-22: 5,313 केस
- 2020-21: 2,747 केस
सितंबर 2022 में इंडियन एक्सप्रेस ने ईडी के दर्ज किए केसों पर एक रिपोर्ट की थी.
इस रिपोर्ट के मुताबिक़, 18 सालों के रिकॉर्ड को देखा जाए तो ईडी ने जिन 147 नेताओं से पूछताछ की या गिरफ्तारी की, उनमें 85 फ़ीसदी नेता विपक्ष के थे.
वहीं सीबीआई के रडार पर रहे 200 नेताओं में से 80 फ़ीसदी विपक्षी नेता थे. इन 18 सालों में केंद्र में बीजेपी और कांग्रेस दोनों की सरकारें रही हैं.
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