अरविंद केजरीवाल को किस शराब नीति के कारण ईडी ने बुलाया

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दिल्ली की पुरानी आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश हो सकते हैं.
सोमवार को इस मामले में आप नेता मनीष सिसोदिया की जमानत ख़ारिज होने के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दो नवंबर को पेश होने के लिए कहा था.
दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार के नेताओं- मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को दिल्ली शराब नीति से जुड़े मामले में गिरफ़्तार किया जा चुका है.
ईडी ने इस मामले में दाखिल अपने आरोपपत्रों में कई बार केजरीवाल के नाम का उल्लेख किया है.
दिल्ली सरकार की शराब नीति को लेकर सीबीआई इस साल अप्रैल में केजरीवाल से पूछताछ कर चुकी है. लेकिन सीबीआई की एफ़आईआर में केजरीवाल को अभियुक्त नहीं बनाया गया था.
अब जबकि ईडी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बुलाया है तो बुधवार को आम आदमी पार्टी की नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने आशंका जताई है कि उन्हें गिरफ़्तार किया जा सकता है.
उन्होंने कहा, "हर तरफ़ से ख़बर आ रही है कि दो नवंबर को जब उनको बुलाएंगे तो ईडी उनको भी गिरफ़्तार कर जेल में डाल देगी."
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वहीं पार्टी प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज का कहना है कि केंद्र सरकार आम आदमी पार्टी को खत्म कर देना चाहती है.
उधर राघव चड्ढा ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा कि ईडी के ज़रिए निशाना बनाने की कड़ी में अरविंद केजरीवाल आख़िरी नाम नहीं हैं, उनके बाद केंद्र सरकार कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों और बड़े नेताओं को भी लपेटे में लेगी.

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दिल्ली की नई आबकारी नीति पर विवाद
दिल्ली सरकार ने एक नई आबकारी नीति (आबकारी नीति 2021-22) नवंबर 2021 में लागू किया था.
नई आबकारी नीति लागू करने के बाद दिल्ली का शराब कारोबार निजी हाथों में आ गया था.
शराब की सभी दुकानें निजी हाथों में चली गई थीं.
दिल्ली सरकार ने इसका तर्क दिया था कि इससे इस कारोबार से प्राप्त होने वाले राजस्व में वृद्धि होगी.
दिल्ली सरकार की यह नीति शुरू से ही विवादों में रही. लेकिन जब यह विवाद बहुत बढ़ गया तो नई नीति को ख़ारिज करते हुए सरकार ने जुलाई 2022 में एक बार फिर पुरानी नीति को ही लागू कर दिया.
तो आखिर सरकार की नई नीति में ऐसा क्या था जिससे यह विवादों में घिर गई थी.
दरअसल इसकी शुरुआत दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार की उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, आर्थिक अपराध शाखा नई दिल्ली, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को भेजी गई रिपोर्ट से हुई.
यह रिपोर्ट 8 जुलाई 2022 को भेजी गई थी.
इसमें एक्साइज डिपार्टमेंट के प्रभारी होने के नाते सिसोदिया पर उपराज्यपाल की मंज़ूरी के बिना नई आबकारी नीति के ज़रिए फ़र्ज़ी तरीक़े से राजस्व कमाने के आरोप लगाए गए हैं.
रिपोर्ट में बताया गया कि कंपनियों को लाइसेंस फ़ीस में 144.36 करोड़ की छूट दी गई थी.
रिपोर्ट के मुताबिक़ कोरोना के समय शराब विक्रेताओं ने लाइसेंस शुल्क माफ़ी के लिए दिल्ली सरकार से संपर्क किया. सरकार ने 28 दिसंबर से 27 जनवरी तक लाइसेंस शुल्क में 24.02 प्रतिशत की छूट दे दी.
रिपोर्ट के मुताबिक़ इससे लाइसेंसधारी को अनुचित लाभ पहुंचा, जबकि सरकारी ख़ज़ाने को लगभग 144.36 करोड़ रुपये का नुक़सान हुआ.
जबकि अधिकारियों के मुताबिक़, लागू हो चुकी नीति में किसी भी बदलाव से पूर्व आबकारी विभाग को पहले कैबिनेट और फिर उप-राज्यपाल के पास अनुमति के लिए भेजना होता है. कैबिनेट और उप-राज्यपाल की अनुमति के बिना किया गया कोई भी बदलाव ग़ैर-क़ानूनी कहलाएगा.

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मनीष सिसोदिया की गिरफ़्तारी
यह रिपोर्ट सीबीआई को भेजी गई जिसके आधार पर मनीष सिसोदिया को गिरफ़्तार किया गया.
मनीष सिसोदिया पर विदेशी शराब की क़ीमतों में बदलाव करने और प्रति बीयर 50 रुपये आयात शुल्क हटाकर लाइसेंस धारकों को अनुचित फ़ायदा पहुंचाने का आरोप था.
पुडुच्चेरी की पिक्सी इंटरप्राइजेज़ प्राइवेट लिमिटेड ने एयरपोर्ट ज़ोन में खोली गई 10 शराब दुकानों के लाइसेंस अधिकार जीते थे, लेकिन कंपनी एयरपोर्ट अधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल करने में कामयाब नहीं रही. सरकार ने लाइसेंस की बोली के लिए जमा किए गए 30 करोड़ रुपए कंपनी को वापस कर दिए.
रिपोर्ट में कहा गया कि ये दिल्ली आबकारी नियम, 2010 का उल्लंघन है. अगर कोई आवेदक लाइसेंस के लिए औपचारिकताएं नहीं पूरी कर पाता तो उसकी जमा राशि ज़ब्त हो जाती है.
सिसोदिया पर कमीशन लेने के आरोप लगे, कहा गया कि इन पैसों का इस्तेमाल पंजाब विधानसभा चुनाव में हुआ.

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संजय सिंह की गिरफ़्तारी
इसी साल अक्टूबर (2023) में आम आदमी पार्टी नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह को भी ईडी ने कथित शराब घोटाला मामले में गिरफ़्तार किया है.
संजय सिंह का नाम कथित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की चार्जशीट में सामने आया था. ये चार्जशीट पिछले साल दायर की गई थी.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कथित शराब घोटाला मामले में अभियुक्त से गवाह बने दिनेश अरोड़ा के बयान के बाद संजय सिंह की गिरफ़्तारी हुई है.
दिनेश अरोड़ा, दिल्ली के चर्चित रेस्तरां कारोबारी हैं और उनके हौज़ खास में कैफ़े हैं. वे नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सदस्य भी हैं.
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि दिनेश अरोड़ा ने ईडी को बताया कि संजय सिंह के कहने पर उन्होंने मनीष सिसोदिया को 82 लाख रुपये दिए, जिसका इस्तेमाल दिल्ली विधानसभा चुनावों में किया गया.
यह मामला फिलहाल कोर्ट में है और मनीष सिसोदिया के साथ संजय सिंह जेल के अंदर हैं. अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पेशी है.
अगर उनकी भी गिरफ़्तारी होती है तो दिल्ली में आम आदमी पार्टी के सामने नेतृत्व को लेकर एक बहुत बड़ा संकट पैदा हो जाएगा.
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