मनीष सिसोदिया की जांच: दिल्ली शराब नीति से जुड़े कुछ अहम सवालों के जवाब

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- Author, प्रेरणा .
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दिल्ली की शराब नीति से जुड़े मामले में सीबीआई ने सोमवार सुबह 11 बजे दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को तलब किया था. सिसोदिया का दावा था कि सीबीआई उनके ख़िलाफ़ फर्ज़ी केस बनाकर उन्हें गिरफ़्तार करने की तैयारी में है.
उन्होंने कहा कि ये सब कुछ केंद्र सरकार के इशारे पर हो रहा है क्योंकि वो नहीं चाहती कि आने वाले दिनों में सिसोदिया गुजरात चुनाव प्रचार करने के लिए जाएं.
सिसोदिया सीबीआई के दफ़्तर गए और उनसे क़रीब नौ घंटे तक पूछताछ की गई. पूछताछ के बाद जब वे बाहर निकले तो मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि उनके ख़िलाफ़ सारे केस फर्ज़ी हैं.
वहीं सीबीआई ने एक प्रेस रिलीज़ जारी कर सिसोदिया के आरोपों का खंडन किया है. लेकिन सीबीआई कभी सिसोदिया के घर पर छापेमारी, तो कभी उनसे जवाब-तलब क्यों कर रही है?
सीबीआई की जांच का आधार क्या है?

सीबीआई की जांच की बुनियाद वो एफआईआर की कॉपी है जिसे एजेंसी ने दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की है.
जांच एजेंसी ने बीते 19 अगस्त को मनीष सिसोदिया और 14 अन्य लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की थी. इनमें तत्कालीन एक्साइज़ कमिश्नर समेत तीन अफ़सर, दो कंपनियां और नौ कारोबारी शामिल थे.
जांच एजेंसी का आरोप है कि नई शराब नीति लागू होने के बाद जहां सरकारी ख़ज़ाने को नुक़सान हुआ. वहीं मामले में अभियुक्तों ने लाइसेंसधारी शराब विक्रेताओं को अनुचित लाभ देने के इरादे से नई शराब नीति में मन मुताबिक बदलाव किए गए.
एफ़आईआर में बताया गया है कि सिसोदिया के क़रीबी सहयोगी बड्डी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमित अरोड़ा, दिनेश अरोड़ा और अर्जुन पांडे, लाइसेंस धारकों से पैसे लेकर अभियुक्तों और सरकारी कर्मचारियों तक पहुंचाते थे.

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नई शराब नीति में घोटाले का पता कैसे चला?

8 जुलाई, साल 2022 को दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार ने उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, आर्थिक अपराध शाखा, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को एक रिपोर्ट भेजी थी.
ये रिपोर्ट पब्लिक डोमेन में नहीं है, लेकिन इंडियन एक्सप्रेस, न्यूज़लॉन्ड्री जैसे तमाम मीडिया संस्थानों ने विश्वस्त सूत्रों के हवाले से बताया है कि इसमें एक्साइज डिपार्टमेंट के प्रभारी होने के नाते सिसोदिया पर उपराज्यपाल की मंज़ूरी के बिना नई आबकारी नीति के ज़रिए फर्ज़ी तरीके से राजस्व कमाने के आरोप लगाए गए हैं.
मुख्य सचिव की रिपोर्ट में क्या था?

कंपनियों की लाइसेंस फ़ीस में 144.36 करोड़ की छूट दी गई
रिपोर्ट के मुताबिक़ कोरोना के समय शराब विक्रेताओं ने लाइसेंस शुल्क माफ़ी के लिए दिल्ली सरकार से संपर्क किया. सरकार ने 28 दिसंबर से 27 जनवरी तक लाइसेंस शुल्क में 24.02 प्रतिशत की छूट दे दी.
"इससे लाइसेंसधारी को अनुचित लाभ पहुंचा, जबकि सरकारी ख़ज़ाने को लगभग 144.36 करोड़ रुपये का नुक़सान हुआ''.
जबकि अधिकारियों के मुताबिक़, लागू हो चुकी नीति में किसी भी बदलाव से पूर्व आबकारी विभाग को पहले कैबिनेट और फिर उप-राज्यपाल के पास अनुमति के लिए भेजना होता है. कैबिनेट और उप-राज्यपाल की अनुमति के बिना किया गया कोई भी बदलाव गैर-क़ानूनी कहलाएगा.

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लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ पहुंचाना
मनीष सिसोदिया पर विदेशी शराब की क़ीमतों में बदलाव करने और प्रति बीयर 50 रुपये आयात शुल्क हटाकर लाइसेंस धारकों को अनुचित फ़ायदा पहुंचाने का आरोप था.
एक्साइज़ विभाग ने कंपनी को वापस किए 30 करोड़
पुडुच्चेरी की पिक्सी इंटरप्राइजेज़ प्राइवेट लिमिटेड ने एयरपोर्ट ज़ोन में खोली गई 10 शराब दुकानों के लाइसेंस अधिकार जीते थे, लेकिन कंपनी एयरपोर्ट अधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल करने में कामयाब नहीं रही. सरकार ने लाइसेंस की बोली के लिए जमा किए गए 30 करोड़ रुपए कंपनी को वापस कर दिए.
रिपोर्ट में कहा गया कि ये दिल्ली आबकारी नियम, 2010 का उल्लंघन है. अगर कोई आवेदक लाइसेंस के लिए औपचारिकताएं नहीं पूरी कर पाता तो उसकी जमा राशि ज़ब्त हो जाती है.
सिसोदिया पर कमीशन लेने के आरोप लगे, कहा गया कि इन पैसों का इस्तेमाल पंजाब विधानसभा चुनाव में हुआ.

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रिपोर्ट मिलने के 15 दिनों के भीतर ही उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफ़ारिश करते हुए गृह मंत्रालय को पत्र लिखा.
यहीं से इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों की एंट्री हुई और मामले ने राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया.
चौतरफ़ा हमलों के बीच 30 जुलाई, 2022 को सिसोदिया ने नई आबकारी नीति को वापस लेने की घोषणा कर दी, लेकिन दिल्ली में जब पहले से एक शराब नीति थी, तो सरकार को नई नीति लाने की ज़रूरत क्यों महसूस हुई?
क्या थी नई आबकारी नीति और इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी?

साल 2020 में दिल्ली सरकार ने शराब माफ़ियाओं पर नकेल कसने और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से नई शराब नीति प्रस्तावित की.
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- 17 नवंबर, 2021 को दिल्ली में नई आबकारी नीति लागू कर दी गई.
- नई आबकारी नीति के तहत दिल्ली को 32 ज़ोन में बांटा गया. इनमें 30 एमसीडी, 1 एनडीएमसी और कैंटोनमेंट क्षेत्र, 1 दिल्ली एयरपोर्ट का ज़ोन था. ज़ोन के हिसाब से शराब की दुकानें तय की गई थीं.
-एमसीडी के प्रति ज़ोन में जहां 27 शराब की दुकानें खुलनी थीं, वहीं एनडीएमसी और कैंटोनमेंट क्षेत्र में 29 और दिल्ली एयरपोर्ट ज़ोन में 10.
- शराब पीने की उम्र 25 से घटाकर 21 कर दी गई.
- शराब के कारोबार से दिल्ली सरकार ने ख़ुद को अलग करते हुए सभी दुकानें निजी हाथों में सौंप दीं.
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- L1 (भारतीय शराब की थोक बिक्री के लिए मिलने वाला लाइसेंस) की फ़ीस 5 करोड़, L7 (निजी क्षेत्र में भारतीय शराब की ख़ुदरा बिक्री के लिए मिलने वाला लाइसेंस) की फ़ीस 11.18 करोड़ रखी गई.
- अनिवार्य एमआरपी के बजाय शराब के रेट ख़ुद तय करने की स्वतंत्रता दी गई.
- शराब की कोई भी नई दुकान नहीं खोली जाएगी. होटलों के बार, क्लब्स और रेस्तरां को रात तीन बजे तक खुला रखने की छूट दी गई.
नई नीति के कई प्रावधान तो अभी लागू होने बाकी ही थे कि इसके पहले मुख्य सचिव ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी और दिल्ली शराब नीति सवालों के घेरे में आ गई.

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सिसोदिया दोषी पाए गए तो क्या कार्रवाई होगी?

सुप्रीम कोर्ट के वकील कमलेश मिश्रा कहते हैं, ''फ़िलहाल ये पूरा मामला केवल मुख्य सचिव की रिपोर्ट पर आधारित है. अभी तक कोई मुख्य गवाह या सबूत एजेंसी के हाथों नहीं लगा है."
"अगर मामला कुछ बनेगा भी तो सिसोदिया पर प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन ऐक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है और वो तीन से 10 साल के लिए जेल जा सकते हैं, हालांकि वर्तमान में इसकी गुंजाइश नज़र नहीं आती.''
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टाइमलाइन के ज़रिये समझिए कब-कब क्या हुआ?

04 सितंबर, 2020 - नई शराब नीति से जुड़े सुझावों के लिए सिसोदिया ने आबकारी आयुक्त रवि धवन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया.
13 अक्टूबर, 2020 - विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट दिल्ली सरकार को सौंपी. रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में रखा गया. सरकार ने दावा किया कि 14 हज़ार 761 लोगों ने अपने सुझाव सरकार को भेजे.
05 फ़रवरी, 2021 - तत्कालीन शराब नीति के सभी पहलुओं, विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट, हितधारकों और आमलोगों की राय के गहरे अध्ययन के लिए दिल्ली सरकार ने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन और राजस्व मंत्री कैलाश गहलोत की अध्यक्षता में मंत्रियों के एक समूह का गठन किया.
22 मार्च, 2021 -सिसोदिया की अध्यक्षता वाले इस समूह ने राज्य कैबिनेट को अपनी सिफ़ारिशें सौंपी. नई आबकारी नीति को मंज़ूरी दी.
15 अप्रैल, 2021 - तत्कालीन उपराज्यपाल अनिल बैजल को भेजा गया. उन्होंने कुछ सुझाव देते हुए सरकार को नीति की फिर से जांच करने और उचित संशोधन करने की सलाह दी.
17 नवंबर, 2021 - दिल्ली सरकार ने सुझावों का मानते हुए नई आबकारी नीति लागू कर दी.
8 जुलाई, 2022 - दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार ने उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें सिसोदिया पर "कमीशन" और ''रिश्वत'' के बदले शराब विक्रेता लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ देने का आरोप लगाया गया. मुख्य सचिव ने आर्थिक अपराध शाखा को भी रिपोर्ट सौंपी.
22 जुलाई, 2022 - उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश करते हुए गृह मंत्रालय को पत्र लिखा.
30 जुलाई, 2022 - नई आबकारी नीति को वापस लेने की घोषणा. अगले छह महीने के लिए पुरानी शराब नीति को दोबारा लागू किया.
6 अगस्त, 2022 - नई आबकारी नीति को लागू करने में लापरवाही बरतने के आरोप में पूर्व आबकारी आयुक्त आरव गोपी कृष्ण सहित दिल्ली के आबकारी विभाग के 11 एक्साइज़ अधिकारियों को उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने निलंबित किया.
17 अगस्त, 2022 - सीबीआई ने सिसोदिया और 14 अन्य लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की. इनमें तत्कालीन एक्साइज़ कमिश्नर समेत तीन अफ़सर भी शामिल थे. इनके ख़िलाफ़ आपराधिक साज़िश रचने और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं.
19 अगस्त,2022 - सिसोदिया के घर सीबीआई की छापेमारी. सात राज्यों के कुल 21 ठिकानों पर छापेमारी की गई.
23 अगस्त, 2022 - समाचार एजेंसी पीटीआई ने अपने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया कि दिल्ली की आबकारी नीति में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया.
28 सितंबर, 2022 - इंडोस्पिरिट के मैनेजिंग डायरेक्टर समीर महेंद्रू, बिज़नेसमैन और आम आदमी पार्टी के पदाधिकारी विजय नायर को ईडी ने गिरफ्तार किया.
8 अक्टूबर, 2022 - ईडी ने दिल्ली, हैदराबाद और पंजाब सहित 35 ठिकानों पर छापेमारी की.
10 अक्टूबर, 2022 - सीबीआई ने शराब कारोबारी अभिषेक बोइनपल्ली को गिरफ़्तार किया.

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