ईडी: प्रवर्तन निदेशालय क्या है जो कर रहा है सोनिया गांधी से पूछताछ

प्रवर्तन निदेशालय

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    • Author, प्रशांत शर्मा
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी आज प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश होंगी. इससे पहले कोविड के कारण सोनिया गांधी एजेंसी के सामने पेश नहीं हो पाई थीं.

इससे पहले इसी मामले में ईडी ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से भी पांच दिनों में 50 घंटे अधिक समय तक पूछताछ की थी.

ईडी ने कुछ समय पहले शिवसेना सांसद संजय राउत को भी तलब किया था. कुछ ही समय पहले उसने अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीस से भी मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में पूछताछ की थी.

प्रवर्तन निदेशालय क्या है? ये कब बना, और क्यों बना? पढ़िए प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के काम से जुड़े सवालों के जवाब-

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प्रवर्तन निदेशालय को कब और क्यों बनाया गया ?

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प्रवर्तन निदेशालय या ईडी एक बहुअनुशासनिक संगठन है जो आर्थिक अपराधों और विदेशी मुद्रा क़ानूनों के उल्लंघन की जांच के लिए भारत सरकार द्वारा बनाया गया है.

इस निदेशालय की स्थापना 01 मई, 1956 को आर्थिक कार्य विभाग के नियंत्रण में एक प्रवर्तन इकाई के रूप में हुई थी, साल 1957 में इस इकाई का नाम बदलकर 'प्रवर्तन निदेशालय' कर दिया गया था. ये भारत सरकार की एक आर्थिक ख़ुफ़िया एजेंसी की तरह काम करता है.

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किस विभाग के अंतर्गत काम करता है ईडी?

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शुरुआत में ईडी वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के अधीन था लेकिन साल 1960 से ये भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के नियंत्रण में काम करता है.

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ईडी का मुख्यालय और अन्य दफ़्तर कहाँ हैं?

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ईडी का मुख्यालय दिल्ली में है. प्रवर्तन निदेशक नई दिल्ली में अपने मुख्यालय के साथ प्रवर्तन निदेशालय के प्रमुख होते हैं.

ईडी के पांच क्षेत्रीय कार्यालय भी है जो मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली और चंडीगढ़ में है. इन क्षेत्रीय कार्यालयों के प्रमुख प्रवर्तन निदेशालय के विशेष निदेशक होते है जो अपने क्षेत्र में आने वाले प्रवर्तन निदेशालय के सभी ज़ोनल और सब ज़ोनल कार्यालयों का काम देखते है.

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ईडी किन क़ानूनों के तहत और कैसे काम करता है?

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ईडी मुख्यतः पांच कानूनों के तहत काम करता है.

प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्डरिंग एक्ट , 2002(पीएमएलए): यह एक आपराधिक क़ानून है जिसे मनी लॉन्डरिंग (धन शोधन) को रोकने के लिए उससे प्राप्त या शामिल संपत्ति को जब्त करने के लिए तथा उससे जुड़े मामलों के लिए अधिनियमित किया गया है.

ईडी इस क़ानून के इस्तेमाल से धन शोधन के अपराधों की जांच करता है. संपत्ति की कुर्की, जब्ती की कार्रवाई और मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में शामिल व्यक्तियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलना इसमें प्रमुख है.

विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम,1999 (फेमा): यह क़ानून विदेशी व्यापार और भुगतान की सुविधा से संबंधित क़ानूनों को एकीकृत और संशोधित करने और भारत में विदेशी मुद्रा बाज़ार के व्यवस्थित विकास और रखरखाव को बढ़ावा देने के लिए अधिनियमित किया गया है.

प्रवर्तन निदेशालय फेमा के उल्लंघन के दोषियों की जांच करता है और इसमें शामिल राशि का तीन गुना तक जुर्माना लगा सकता है.

भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम,2018 (एफ.ई.ओ.ए): यह क़ानून उन आर्थिक अपराधियों को ध्यान में रखकर बनाया गया था जो आर्थिक अपराध करने बाद भारत से भाग जाते है. ईडी इसी क़ानून के तहत ऐसे अपराधियों को वापस भारतीय क़ानून की प्रक्रिया में लाने का काम करता है.

निरस्त विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973: इस क़ानून को भारत में विदेशी भुगतानों पर नियंत्रण लगाने और विदेशी मुद्रा का सदुपयोग करने के लिया बनाया गया था. यह वर्तमान में लागू नहीं है पर अधिनियम के तहत 31.05.2002 तक जारी कारण बताओ नोटिस का उल्लंघन होने पर ईडी कार्रवाई करता है.

विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी अधिनियम 1974: इस क़ानून के तहत ईडी को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम,1999 (फेमा) के उल्लंघनों के संबंध में निवारक निरोध (प्रिवेंटिव डिटेंशन) के मामलों को प्रायोजित करने का अधिकार है.

राहुल और सोनिया गांधी

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ईडी के अधिकार और शक्तियां क्या हैं ?

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ईडी को कालाधन के कारोबार में लिप्त व्यक्तियों को गिरफ्तार करने उनपर मुक़दमा चलाने के अलावा अपराधिक कार्यों से प्राप्त संपत्ति को जब्त करने का अधिकार प्राप्त है.

किसी भी पुलिस स्टेशन में यदि एक करोड़ रूपये से अधिक की आय अर्जित करने सम्बंधित आपराधिक मामला होता है तो ऐसी स्थिति में ईडी कार्रवाई करता है.

पैसो की हेरा-फेरी के मामले में भी ईडी संपत्ति की तलाशी, कुर्की और ज़ब्ती का आदेश कर सकता है.

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क्या ईडी की विशेष अदालतें होती हैं?

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प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्डरिंग एक्ट की धारा 4 के तहत दंडनीय अपराध की सुनवाई के लिए, केंद्र सरकार उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से एक या उससे अधिक सत्र न्यायालय को विशेष न्यायालय के रूप में नामित कर सकती है.

प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्डरिंग एक्ट के तहत गठित की गई न्यायालय को "पीएमएलए कोर्ट" भी कहा जाता है.

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