अनिल देशमुख: गिरफ़्तारी के बाद 6 नवंबर तक ईडी रिमांड में भेजे गए

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- Author, बीबीसी टीम मराठी
- पदनाम, .
मुंबई की एक सेशन कोर्ट ने मंगलवार को राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को छह नवंबर तक के लिए प्रवर्तन निदेशालय की रिमांड में भेज दिया है.
ईडी ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को सोमवार को गिरफ़्तार किया था. सोमवार की सुबह वह अचानक ईडी कार्यालय में पेश हुए थे जहां नौ घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया. उन्हें प्रीवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 19 के तहत गिरफ़्तार किया गया.
इसके बाद उन्हें मंगलवार को मुंबई की सेशन कोर्ट में पेश किया गया था. कोर्ट में दिवाली की छुट्टी को देखते हुए उन्हें हॉलिडे कोर्ट में पेश किया गया था.
मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक सामग्री बरामद होने और इस मामले में पुलिस अधिकारी सचिन वाझे की भूमिका और उनके आरोपों के बाद महाराष्ट्र के गृह मंत्री रहे अनिल देशमुख को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.
इस मामले में अनिल देशमुख के दो निजी सहायक संजय पलांडे और कुंदन शिंदे को पहले ही गिरफ़्तार किया जा चुका है.

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जुलाई महीने में ईडी ने संजीव पलांडे और कुंदन शिंदे की हिरासत की मांग करते हुए 14 दावे किए थे. इन दावों में कहा गया था-
- अनिल देशमुख इस साजिश के मुख्य सूत्रधार हैं.
- संजीव पलांडे ने पूछताछ के दौरान कहा था कि आईपीएस अधिकारियों के तबादले के पीछे अनिल देशमुख ही हैं.
- सभी लेनदेन नकद में किए गए थे.
- संजीव पलांडे और कुंदन शिंदे की भूमिका बिचौलिए की थी.
- यह सारा पैसा प्रदेश के गृह मंत्री अनिल देशमुख के पास जा रहा था.
- अनिल देशमुख का परिवार प्रत्यक्ष तौर पर 11 कंपनियों में साझेदारी रखता है जबकि जांच में अप्रत्यक्ष रूप से 13 कंपनियों में साझेदारी की बात सामने आयी है.
- अनिल देशमुख की अप्रत्यक्ष रूप से स्वामित्व वाली कंपनी से प्रत्यक्ष स्वामित्व वाली कंपनी में पैसों के लेन-देन का पता चला है.
- यह मनी लॉन्ड्रिंग का ही एक रूप है.
- सचिन वाझे के मुताबिक उन्हें कुछ मामलों में अनिल देशमुख से सीधे आदेश मिल रहे थे.
- सचिन वाझे ने बताया है कि अनिल देशमुख के कहने पर उन्होंने कुंदन शिंदे को 4.70 करोड़ रुपये दिए.
- अनिल देशमुख के श्रीसाईं शिक्षण संस्था को 4.18 करोड़ रुपये दिए गए, भुगतान करने वाली दिल्ली की कंपनियां केवल काग़ज़ों पर मौजूद हैं.
- हवाला के ज़रिए पैसा दिल्ली से नागपुर लाया गया था.
- अनिल देशमुख को बार मालिकों से 4.70 करोड़ रुपये की रिश्वत मिली.
- अनिल देशमुख के बेटे ऋषिकेश देशमुख के ज़रिए दिल्ली की कंपनियों को पैसा देकर साईं शिक्षण संस्था को पैसा डायवर्ट किया गया.

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अनिल देशमुख से जुड़े मामले में कब क्या हुआ
- 21 मार्च को दिल्ली पुलिस के कमिश्नर परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा था.
- पांच अप्रैल को अनिल देशमुख ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया
- 10 मई को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया
- 26 जून को अनिल देशमुख को पहला समन
- 29 जून को अनिल देशमुख को दूसरा समन मिला
- पांच जुलाई को तीसरा समन जारी किया गया
- 16 जुलाई को पूछताछ के लिए चौथा समन जारी किया गया
- 17 अगस्त को पूछताछ के लिए पांचवां समन
- दो सितंबर को देशमुख ने बांबे हाईकोर्ट में समन रद्द करने की मांग की
- 29 अक्टूबर को बांबे हाईकोर्ट ने अनिल देशमुख की समन रद्द करने की याचिका खारिज
- एक नवंबर को अनिल देशमुख पूछताछ के लिए ईडी के सामने पेश हुए
- दो नवंबर को अनिल देशमुख गिरफ़्तार

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नवाब मलिक के आरोप
अनिल देशमुख की गिरफ़्तारी पर इन दिनों लगातार अपने बयानों से चर्चित नवाब मलिक ने आलोचना की है. उन्होंने कहा है कि अनिल देशमुख को भी ठगा गया है.
उन्होंने कहा, "देशमुख पर आरोप लगाने वाले परमबीर सिंह फ़रार है. आरोप लगाने वाला फ़रार है, जिन पर आरोप है वो जांच में सहयोग कर रहे हैं और उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया है."
मलिक ने आरोप लगाया है कि यह राजनीति के चलते उठाया गया क़दम है और इसका उद्देश्य को सरकार को बदनाम करने के लिए नेताओं को धमकाना है.
नवाब मलिक ने परमबीर सिंह के भागने पर सवाल उठाया है.
उन्होंने कहा, "परमबीर हवाई या समुद्र रास्ते से भागे हैं तो यह दोनों मार्ग केंद्र के अधीन आते हैं. अगर वे सड़क मार्ग से गए हैं तो जहां से वे जा सकते हैं उन तीन राज्यों में बीजेपी सत्ता में है."
तो क्या परमबीर को भगाने में मदद मिली है, नवाब मलिक ने इस सवाल के जवाब में कहा कि भाजपा को झूठे आरोप लगाकर सरकार को बदनाम करने की कोशिश का जवाब देना होगा.

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संजय राउत का बयान
इस पूरे मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि अनिल देशमुख की गिरफ़्तारी दुर्भाग्यपूर्ण है.
उन्होंने कहा, "अनिल देशमुख कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे थे. मेरी राय में यह गिरफ़्तारी क़ानून और नैतिकता के आधार पर उचित नहीं है."
संजय राउत ने यह कहा कि जब महानिदेशक स्तर का कोई अधिकारी देश छोड़ता है तो वह केंद्र सरकार के समर्थन के बिना नहीं भाग सकता.
उन्होंने यह भी कहा कि पूछताछ या जांच करने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन पूछताछ के लिए पहली बार पेश होने पर ही गिरफ़्तार करना ग़लत है.
संजय राउत ने कहा, "महा विकास अघाड़ी गठबंधन के नेताओं को प्रताड़ित किया जा रहा है. अजित पवार पर भी कार्रवाई की गई है. क्या बीजेपी के लोगों के पास कोई संपत्ति नहीं है या वे सभी क़ानूनी तौर पर बनाए गए हैं?"
संजय राउत ने यह भी कहा है कि बीजेपी नेताओं के ख़िलाफ़ ईडी से शिकायत की गई लेकिन उन नेताओं पर तो कुछ नहीं हुआ.
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क्या कह रहे हैं बीजेपी नेता
वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने अनिल देशमुख सहित महाविकास अघाड़ी सरकार की आलोचना की है.
बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने कहा है कि 'यह 100 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी का मामला है, अब जानकारी सामने आएगी कि ये पैसे किसके खाते में गए हैं. अनिल देशमुख के बाद अनिल परब पर कार्रवाई होगी.'
बीजेपी विधायक रामकदम ने कहा है कि 'पूर्व गृहमंत्री की गिरफ़्तारी से मामला ख़त्म नहीं हो जाता, तीनों पार्टियों में किस नेता को वसूली में कितना हिस्सा मिला है, जब तक यह स्पष्ट नहीं हो जाता है, तब तक मामला ख़त्म नहीं होगा. हम महाराष्ट्र को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.'
वहीं बीजेपी विधायक अतुल भाटखलकर ने कहा है कि यह तय करना ज़रूरी है कि अनिल देशमुख को किसने गृहमंत्री बनाया, उनके साथ कौन था और उसे कितना हिस्सा मिला.
भाटखलकर ने यह भी कहा कि इस वसूली कांड में अभी केवल मोहरा गिरफ़्तार हुआ है.
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अनिल देशमुख ने क्या कहा
अनिल देशमुख पिछले कुछ दिनों से छिपे हुए थे. ईडी ने उनकी तलाशी के लिए मुंबई और नागपुर स्थित उनके घरों पर छापे मारे थे. पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने आरोप लगाया था कि अनिल देशमुख ने सचिन वाजे के लिए प्रति माह 100 करोड़ रुपये वसूली करने का लक्ष्य रखा था.
इस मामले में अनिल देशमुख ने गिरफ़्तारी से ट्विटर पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने अपने वीडियो में कहा है कि मैंने ईडी का जांच में सहयोग किया है. लेकिन मीडिया में ख़बरें चलायी जा रही हैं कि मैं सहयोग नहीं कर रहा. मैंने ने उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दी हूई है. फ़ैसले के बाद मैं ईडी कार्यालय जाऊंगा.
अनिल देशमुख ने यह भी कहा कि वह ईडी कार्यालय में पेश हुए जबकि उन पर आरोप लगाने वाले देश छोड़कर भाग चुके हैं.
उन्होंने कहा, "परमबीर सिंह के कहने पर सचिन वाजे ने मुझपर आरोप लगया है. एक जेल में है और दूसरा भाग चुका है. लेकिन ऐसे लोगों के आरोपों पर मुझे और मेरे परिवार को परेशान किया जा रहा है."
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