झारखंडः क्यों चर्चा में हैं आईएएस किरण कुमारी पासी

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- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी के लिए
रविवार की सुबह छह बजे जब आईएएस किरण कुमारी पासी को प्रसव पीड़ा हुई, तो वे रांची से 350 किलोमीटर दूर गोड्डा के अपने सरकारी बंगले में थीं.
उन्होंने तय किया था कि वे वहीं पर अपने बच्चे को जन्म देंगी. लिहाज़ा, उन्हें सदर अस्पताल ले जाया गया. वहां मामूली ऑपरेशन के बाद उनके दूसरे बच्चे का जन्म हुआ.
दोनों स्वस्थ हैं. मंगलवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी. झारखंड कैडर की आईएएस किरण इन दिनों गोड्डा ज़िले की उपायुक्त (डीसी) हैं.
गर्भावस्था के दौरान भी वे स्थानीय डॉक्टरों की देखरेख में अपना इलाज करा रही थीं.
सरकारी अस्पताल में बच्चे को जन्म देना वैसे तो उनका नितांत व्यक्तिगत फ़ैसला था, लेकिन अब ये बात सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है.

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मुख्यमंत्री की बधाई
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक ने ट्वीट कर उन्हें इसके लिए बधाई दी है. मुख्यमंत्री ने उनके इस फ़ैसले को राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को सबल करने का क़दम मानते हुए डीसी किरण कुमारी पासी की प्रशंसा की है.
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उनकी सराहना करने वालों में स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिन नितिन मदन कुलकर्णी, गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे और महागामा की विधायक दीपिका पांडेय सिंह जैसे लोग भी शामिल हैं.
लोगों ने अपने-अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लिखा है कि अगर सभी आईएएस और नेता अपना और अपने परिजनों का इलाज सरकारी अस्पतालों में कराएं, तो स्वास्थ्य व्यवस्था में संपूर्ण सुधार हो सकता है. ऐसी ही पहल शिक्षा के क्षेत्र में भी की जानी चाहिए.
प्रसव के बाद की उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. यह फोटो उनके पति डॉक्टर पुष्पेंद्र सरोज ने ली थी. डॉक्टर पुष्पेंद्र सरोज गोड्डा ज़िले के ही एक कृषि महाविद्यालय में डीन हैं.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "गोड्डा में पोस्टिंग के बाद से ही वे (किरण) स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर कराने मे जुटी थीं. जनता तक यह मैसेज जाना चाहिए था कि सरकारी सिस्टम भी भरोसेमंद होता है. हमने अपने सिस्टम पर भरोसा किया है. यह पहले से तय था कि हमारे बच्चे का जन्म सरकारी अस्पताल में होगा."
"इसलिए हमने उन्हें यहां की डाक्टरों की देखरेख और परामर्श में ही रखा. हमने अपने बच्चे का नाम यश रखा है. उम्मीद है कि लोगों का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास और मज़बूत होगा."

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औसतन 700 प्रसव
गोड्डा सदर अस्पताल में पदस्थापित डॉक्टर प्रभा रानी प्रसाद ने डीसी किरण कुमारी पासी का ऑपरेशन किया था.
उन्होंने बताया कि वहां हर महीने औसतन 700 महिलाओं का प्रसव कराया जाता है. हालांकि, यहां सिर्फ़ पाँच डॉक्टरों की तैनाती है. इनमें से तीन शल्य चिकित्सक (सर्जन) हैं. पारा मेडिकल स्टाफ़ की भी कमी है. इसके बावजूद रोज़ औसतन 20-22 महिलाएं यहां अपने बच्चे को जन्म देती हैं.
डॉक्टर प्रभा ने बीबीसी से कहा, "ये पहला मौक़ा है जब किसी ज़िले की डीसी ने अपने प्रसव के लिए हमारे अस्पताल को चुना. हम इस कारण सतर्क थे और अब गौरवान्वित भी महसूस कर रहे हैं. हम उनके आभारी हैं क्योंकि उन्होंने हमपर भरोसा किया. आमलोगों को भी यह बात समझनी चाहिए और सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाना चाहिए. क्योंकि, हमारे यहां विशेषज्ञ डाक्टर हैं."

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100 बेड का अस्पताल
गोड्डा सदर अस्पताल को हाल ही में कायाकल्प पुरस्कार मिला है.
सिविल सर्जन डॉक्टर एसपी मिश्र ने बीबीसी से कहा कि 100 बेड के इस अस्पताल में डाक्टरों की संख्या निर्धारित क्षमता से कम है. इसके बावजूद मरीज़ों की देखरेख और उनकी सुविधाओं में कमी नहीं आने दी जाती है.
सुखजोरा गांव से वहां इलाज कराने पहुंची सलोनी कुमारी ने बीबीसी से कहा कि महिला वार्ड में डीसी को देखकर उनकी हिम्मत बढ़ी है. अब लगने लगा है कि बड़े लोग भी यहां इलाज कराने आते हैं.

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क्यों ख़ास है डीसी का सदर अस्पताल आना
महागामा की विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने बीबीसी से कहा, "पाँच सितारा अस्पतालों और महंगे प्रीमियम वाले स्वास्थ्य बीमा के दौर में किसी आईएएस अधिकारी ने अपने प्रसव के लिए सरकारी अस्पताल को चुना है, इसलिए यह बात ख़ास हो जाती है. इससे सरकारी सिस्टम पर लोगों का भरोसा और मज़बूत होगा. यह उनका साहसिक निर्णय है."

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