पश्चिम बंगाल: वोटों की गिनती से पहले टीएमसी और बीजेपी के खेमे में क्या है हलचल?

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- Author, रूपसा सेनगुप्ता
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ बांग्ला, कोलकाता
- पढ़ने का समय: 9 मिनट
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के एक लंबे और ज़ोरदार दौर के बाद, 'परीक्षा' आख़िरकार ख़त्म हो गई है और अब नतीजों का इंतज़ार है.
वोटों की गिनती भले ही चार मई को होनी है, लेकिन पश्चिम बंगाल के राजनीतिक दल अभी से ही पूरे आत्मविश्वास से भरे हुए नज़र आ रहे हैं.
इससे पहले, उन्होंने कड़ी धूप और गर्मी के बीच एक ज़ोरदार चुनाव प्रचार किया. इस दौरान विरोधियों के ख़िलाफ़ अपने सबसे तेज़ चुनावी हथियार इस्तेमाल किए, वर्चुअल लड़ाइयों में हिस्सा लिया, और आम जनता को लुभाने की कोशिश में अपने निजी पहलू भी जनता के सामने पेश किए.
राज्य में चुनाव के संपन्न होने के बाद अब ये सियासी दल थोड़े आराम के मूड में आ गए हैं. अब वे बेसब्री से अपनी 'रिज़ल्ट' का इंतज़ार कर रहे हैं, ताकि पता चल सके कि वो कितनी सीटें जीत पाए हैं.

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इस बीच, चुनाव आयोग ने बंगाल में रिकॉर्ड वोटिंग के आंकड़े जारी किए. राज्य में पहले चरण में 93.19% और दूसरे चरण में 92.67% वोटिंग दर्ज की गई है. अक्सर चुनावी हिंसा को लेकर विवादों में रहने वाले बंगाल ने इस बार एक बिल्कुल अलग ही रुझान दिखाया है.
यह चुनाव काफ़ी हद तक शांतिपूर्ण रहा है, जो कि इसके आम तौर पर पुराने माहौल से बिल्कुल अलग है.
जहां पहला चरण कुछ इक्का-दुक्का घटनाओं को छोड़कर लगभग शांतिपूर्ण रहा, वहीं दूसरे चरण के दौरान नादिया, साउथ 24 परगना और हुगली जैसे ज़िलों में हुई छिटपुट झड़पों और आरोपों ने राजनीतिक तनाव को काफ़ी बढ़ाए रखा.
दोपहर होते-होते कोलकाता के भवानीपुर का माहौल काफ़ी गरम हो गया. यह राज्य की सबसे ज़्यादा चर्चित सीटों में से एक है, जहां ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधी टक्कर है.
अब जब पूरा राज्य बेसब्री से चुनावी नतीजों का इंतज़ार कर रहा है, तो बीबीसी बांग्ला ने राजनीतिक दलों से बात करके यह जानने की कोशिश की कि उनका मूड कैसा है.
जोश कैसा है?

फ़िलहाल सभी राजनीतिक खेमों में एक बात जो साफ़ तौर पर नज़र आ रही है, वह है नतीजों को लेकर हर किसी का ज़बरदस्त आत्मविश्वास.
दमदम उत्तर से चुनाव लड़ रहीं तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा, "मुझे पूरा भरोसा है. हम ही जीत रहे हैं."
बुधवार शाम को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के दफ़्तर में भी ऐसा ही आत्मविश्वास देखने को मिला.
पार्टी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने दावा किया, "हमने पहले चरण में ही 100 का आंकड़ा पार कर लिया था. बीजेपी 50 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी."
कुणाल घोष कोलकाता की बेलेघाटा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने एग्ज़िट पोल को भी सिरे से ख़ारिज कर दिया.
उन्होंने दावा किया, "याद है साल 2021 के एग्ज़िट पोल में क्या कहा गया था? वे ज़मीनी हक़ीक़त को नहीं दिखाते. ममता बनर्जी 235 से ज़्यादा सीटों के साथ फिर से सत्ता में लौटेंगी."
दूसरी ओर खड़गपुर सदर सीट से बीजेपी उम्मीदवार दिलीप घोष भी काफ़ी आत्मविश्वास से भरे नज़र आए.
उन्होंने कहा, "अभी सीटों की संख्या पर चर्चा करना समझदारी नहीं है. मैं बस इतना कह सकता हूँ कि बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी."

आसनसोल दक्षिण से बीजेपी उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल ने भारी संख्या में हुई वोटिंग का ज़िक्र करते हुए दावा किया कि चुनाव "पूरी तरह निष्पक्ष" हुआ है.
उन्होंने कहा, "वोटरों ने रिकॉर्ड संख्या में वोट डाले और मैं उनकी शुक्रगुज़ार हूँ. वोटिंग पूरी तरह पारदर्शी तरीक़े से हुई. हालाँकि टीएमसी धांधली के आरोप लगा रही है, लेकिन ऐसी कोई धांधली नहीं हुई. 4 मई को नतीजे चाहे जो भी आएँ, चाहे वे हमारे पक्ष में हों या न हों. मैं यही कहूँगी कि यह एक निष्पक्ष चुनाव था."
उनके चुनाव क्षेत्र में 23 अप्रैल को वोटिंग हुई थी. अग्निमित्रा पॉल अब काफ़ी हद तक तनावमुक्त नज़र आ रही हैं.
चुनाव प्रचार की वजह से शरीर को हुई थकान का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "मैंने काफ़ी पहले ही चुनाव प्रचार शुरू कर दिया था. इस बार मैं हर रोज़ 12 से 15 किलोमीटर पैदल चली. सारा काम निपटाने के बाद मैं शायद दिन में सिर्फ़ तीन से चार घंटे ही सो पाती थी. कई दिन तो इतनी देर भी नहीं."
"24 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग के बाद मैं जहाँ भी बैठती, मुझे पता भी नहीं चलता था और मैं सो जाती थी. मेरा शरीर पूरी तरह से थक चुका था."
बीजेपी की नेता ने कहा कि उन्हें नतीजों की कोई चिंता नहीं है.
इस बीच कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट भले ही शीर्ष दो स्थानों के लिए सीधे मुक़ाबले में नहीं दिख रहे हों, फिर भी अपने प्रदर्शन को लेकर इन दलों को भी अच्छी उम्मीद है.
मुर्शिदाबाद की बहरामपुर सीट से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि उन्हें जीत का पूरा भरोसा है. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय बलों की भारी तैनाती से यह सुनिश्चित करने में मदद मिली कि मतदाता सुरक्षित महसूस करें.
उन्होंने कहा, "लोग सत्ताधारी पार्टी से बेहद नाराज़ हैं और यह बात चुनावी नतीजों में स्पष्ट दिखाई देगी."

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इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा, "बंगाल के लोगों की बुद्धि, श्रेष्ठता और स्वतंत्र सोच पर शक करने की कोई वजह नहीं है. वे बहुत समझदार हैं. मेरा मानना है कि वे 'एसआईआर' के माहौल में गुमराह नहीं होंगे. जिस तरह से उन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है, उससे सभी पारंपरिक समीकरण गलत साबित होंगे. बस 4 मई का इंतज़ार कीजिए."
"कांग्रेस की ओर से, मैं यह कह सकता हूँ कि सरकार बनाने में किसी भी एक पार्टी का वर्चस्व नहीं होगा."
इस बीच कोलकाता के पानीहाटी से सीपीआईएम के उम्मीदवार, कलातन दासगुप्ता ने अपनी पार्टी की संभावनाओं को लेकर विश्वास जताया और कहा, "जब तक केंद्र में बीजेपी सत्ता में है, आप तृणमूल नेताओं को बाहर घूमते हुए देखेंगे. अगर वाम मोर्चा की सरकार बनती है तो टीएमसी और बीजेपी दोनों के भ्रष्ट नेता जेल के अंदर नज़र आएंगे."
बीबीसी से बात करते हुए सीपीआईएम नेता सुजान चक्रवर्ती ने मतदान प्रक्रिया पर बात करते हुए पुरानी यादें ताज़ा कीं.
उन्होंने कहा, "हमारे ज़माने में चुनाव एक त्योहार जैसा होता था. एक-दो छोटी-मोटी घटनाओं को छोड़कर, लोग शांति से वोट डालते थे. उस समय मैं स्कूल या कॉलेज में था. पोलिंग बूथ के बाहर कैंप लगे होते थे. जिनमें वाम मोर्चा के कैंप में 25-30 लोग होते थे और कांग्रेस के कैंप में भी लगभग उतने ही लोग होते थे. हम पूरे दिन आपस में बातचीत करते रहते थे."

सुजान चक्रवर्ती ने कहा, "कांग्रेस के कैंप में अच्छा खाना मिलता था और वे उसे हमारे साथ बांटते थे. हम अपनी चाय और मुड़ी (मुरमुरे) उनके साथ बांटते थे. वोट डालने के बाद लोग साइकिल पर सवार होकर आस-पड़ोस में घूमते थे और मतदान का जायज़ा लेते थे."
सुजान चक्रवर्ती ने आरोप लगाया, "उस समय इतनी ज़्यादा सुरक्षा की ज़रूरत नहीं पड़ती थी. लेकिन जब से तृणमूल सत्ता में आई, हालात बदल गए. अब मतदान डराने-धमकाने और डर के माहौल में होता है. हालाँकि इस बार कोई बड़ी घटना नहीं हुई, फिर भी चुनाव में त्योहार जैसा उत्साह नहीं दिखा."
उन्होंने आगे कहा, "भले ही कोई बड़ी घटना नहीं हुई, लेकिन चुनाव में त्योहार जैसा माहौल नहीं था. लोग डर के मारे वोट डालने आए थे."
भंगार से चुनाव लड़ रहे आईएसएफ़ नेता नौशाद सिद्दीकी ने मतदाताओं का शुक्रिया अदा किया कि उन्होंने एक ऐसे इलाक़े में शांतिपूर्ण मतदान किया, जो अक्सर हिंसा के लिए जाना जाता है.
उन्होंने मीडिया से कहा, "यह एक शांतिपूर्ण चुनाव था और मैं इसके लिए लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहूँगा."
कड़ा मुक़ाबला

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पश्चिम बंगाल में इस बार सबसे ज़्यादा मतदान दर्ज किया गया है. ऐसे में विश्लेषक इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या इसका फ़ायदा टीएमसी को मिलेगा जो 2011 से सत्ता में है या फिर यह उसके ख़िलाफ़ जाएगा.
इस बीच, बुधवार शाम को कई एजेंसियों के एग्ज़िट पोल के नतीजे सामने आए.
हालाँकि एग्ज़िट पोल के नतीजे अक्सर असल नतीजों से अलग होते हैं, फिर भी इन अनुमानों ने उस सबसे बड़े सवाल को और हवा दे दी है कि बंगाल का चुनाव कौन जीतेगा?
स्थानीय मीडिया से लेकर राष्ट्रीय मीडिया तक, सभी की नज़रें एग्ज़िट पोल के नतीजों पर टिकी हुई थीं.
इनमें से कई एग्ज़िट पोल के मुताबिक़ बीजेपी सरकार बनाने के लिए ज़रूरी जादुई आँकड़े तक पहुँच सकती है, जबकि कुछ ने संकेत दिया कि टीएमसी जीत सकती है, लेकिन जीत का अंतर ज़्यादा नहीं होगा.
ख़ास बात यह है कि बुधवार को चुनाव के दूसरे चरण के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पोलिंग बूथ का दौरा करते देखा गया.
उन्होंने अपनी सामान्य दिनचर्या से हटकर ऐसा किया, जिसे बीजेपी खेमे ने अपने ही तरीके से समझा.
हालाँकि, अपना वोट डालने के बाद ममता बनर्जी ने जीत का निशान दिखाया, जबकि उनकी पार्टी ने दावा किया कि एग्ज़िट पोल चाहे कुछ भी कहें, टीएमसी 200 से ज़्यादा सीटें ज़रूर जीतेगी.
दूसरी ओर बीजेपी के सुभेंदु अधिकारी ने भी ज़ोर देकर कहा कि उनकी पार्टी जीत की ओर बढ़ रही है.
'कौन जाने, कौन जीतेगा?'

मीडिया रिपोर्ट और एग्ज़िट पोल के विश्लेषण बताते हैं कि जहाँ सीटों की सटीक संख्या अभी भी अनिश्चित है, वहीं तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़ा मुक़ाबला होना लगभग तय है.
चुनाव के नतीजे न सिर्फ़ राजनीतिक गलियारों और विश्लेषकों के बीच, बल्कि पूरे राज्य में चाय की दुकानों, मोहल्लों और घरों में भी चर्चा का मुख्य विषय बन गए हैं.
दक्षिण कोलकाता के रहने वाले मित्रायु दासगुप्ता कहते हैं, "बचपन में मैंने लेफ्ट को देखा, स्कूल और कॉलेज के दिनों में टीएमसी को देखा, और अब मैं केंद्र में बीजेपी को देख रहा हूँ. हमारे पास ज़्यादा विकल्प नहीं हैं. देखते हैं क्या होता है."
कोलकाता के न्यू टाउन इलाक़े की रहने वाली दिया घोष ने बताया कि नतीजों का अंदाज़ा लगाने के लिए वह लगातार एग्ज़िट पोल देख रही हैं.
वह कहती हैं, "इस बार हालात कुछ अलग हैं. कल रात मैं टीवी पर एग्ज़िट पोल देख रही थी, लेकिन कुछ भी स्पष्ट नहीं है. कौन जीतेगा, कौन जाने?"
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.



































