मध्य प्रदेश: जबलपुर के बरगी डैम में 20 साल पुराना क्रूज़ डूबने से नौ की मौत, लोगों ने लापरवाही के आरोप लगाए

इमेज स्रोत, SHIV CHAUBEY
- Author, विष्णुकांत तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, जबलपुर से
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
मध्य प्रदेश के जबलपुर ज़िले के बरगी डैम में गुरुवार शाम एक पर्यटक क्रूज़ के डूबने से कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई है.
अधिकारियों के मुताबिक 22 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, और कम से कम आठ लोग अब भी लापता हैं.
सीएसपी बरगी अंजुल अयंक मिश्रा ने बताया, " हादसा अचानक ख़राब हुए मौसम और तेज आंधी तूफ़ान के बीच हुआ.''
उन्होंने कहा, ''एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना की एक टीम और प्रशासन के सभी लोग यहां मौजूद हैं और बचाव कार्य में लगे हुए हैं."
यह हादसा खमरिया टापू के पास 30 अप्रैल की शाम करीब साढ़े पांच बजे हुआ, जब मध्य प्रदेश पर्यटन का करीब 20 साल पुराना क्रूज़ डैम में डूब गया.
उस समय क्रूज़ में लगभग 35 पर्यटक और दो क्रू मेंबर सवार थे.
कैसे हुआ हादसा

इमेज स्रोत, SHIV CHAUBEY
क्रूज़ के पायलट महेश ने दावा किया है कि वह पिछले दस साल से क्रूज़ चला रहे हैं और पूरी तरह प्रशिक्षित और लाइसेंसधारी हैं.
उनके मुताबिक़ क्रूज़ में सभी सुरक्षा इंतजाम और पर्याप्त लाइफ़ जैकेट मौजूद थे, लेकिन तूफ़ान इतनी तेजी से आया कि यात्रियों को लाइफ़ जैकेट पहनने का मौका नहीं मिल सका.
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तूफ़ान इतना तेज था कि पानी में ऊंची लहरें उठ रही थीं और क्रूज़ आधा डूब चुका था. स्थानीय लोगों ने बताया कि मौसम अचानक बिगड़ा और कुछ ही मिनटों में हालात बेकाबू हो गए.
इस हादसे में जबलपुर स्थित आयुध निर्माणी खमरिया फैक्ट्री के कर्मचारी कामराज आर्य अपने परिवार के करीब 15 लोगों के साथ सैर के लिए आए थे.
उनके माता-पिता डैम के किनारे बैठे थे, जबकि वे अपनी पत्नी, भाभी और बच्चों के साथ क्रूज़ में सवार थे. कामराज और उनके एक बेटे को बचा लिया गया है लेकिन उनके परिवार के कई लोग अब भी लापता हैं.
स्थानीय विधायक नीरज सिंह ने कहा कि, "यह क्रूज़ कई वर्षों से संचालित हो रहा था और रोजाना पर्यटकों को सैर कराता था. फ़िलहाल सब लोग बचाव कार्य में लगे हुए हैं और हादसे के कारणों पर विस्तृत जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है."
लापरवाही के आरोप

इमेज स्रोत, SHIV CHAUBEY
क्रूज़ से बचाकर निकाली गईं संगीता कोरी ने बीबीसी से कहा कि उनके परिवार के छह लोग दिल्ली से जबलपुर घूमने आए थे.
उन्होंने कहा, "हम लोग खुशी मना रहे थे. करीब छह लोग हमारे साथ थे. क्रूज़ में घूमने का प्लान अचानक ही बना था. शाम करीब छह बजे क्रूज़ वापस लौट रहा था, तभी अचानक तेज आंधी आई और पानी भरने लगा."
उनके मुताबिक़ किसी भी पैसेंजर को क्रूज़ में चढ़ने से लेकर डैम में चलने तक किसी ने भी लाइफ़ जैकेट नहीं दी थी.
उन्होंने कहा "जब पानी तेजी से भरने लगा, तब जल्दबाजी में जैकेट दी गईं, जिससे छीना झपटी मच गई."
उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त नहीं थे.
उन्होंने कहा, "यह बहुत बड़ी लापरवाही है. यहां सिर्फ कमाई का जरिया बना रखा है. कोई सुरक्षा नहीं है, आखिर जिन लोगों को डैम में लेकर जा रहे हैं, उनकी जान सुरक्षित रहे इसकी जिम्मेदारी तो होनी चाहिए."
उन्होंने बताया कि क्रूज़ पर लोगों की संख्या को लेकर भी स्पष्टता नहीं थी. "करीब 30 वयस्क लोगों के टिकट कटे थे, लेकिन बच्चों के टिकट नहीं थे. कुल मिलाकर 40-45 लोग रहे होंगे, जिनमें करीब 12 बच्चे थे."
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों ने क्रूज़ पायलट को दिशा बदलने के लिए आवाज़ दी थी, लेकिन क्रूज़ चलाने वाले व्यक्ति ने ध्यान नहीं दिया.
उन्होंने कहा, "गांव के लोग इशारा कर रहे थे कि इधर मोड़ लो, अगर वो सुन लेते तो शायद बच सकते थे, लेकिन वह दूसरी तरफ ले जाने लगे और वहीं क्रूज़ पलट गया. चालक को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था"
संगीता ने कहा कि, "बाद में यात्रियों ने खुद ही स्टोर रूम तोड़कर लाइफ़ जैकेट निकालीं. मेरे भाई ने स्टोर रूम तोड़कर जैकेट निकाली और लोगों को फेंककर दी."
उनका कहना था कि अगर समय रहते जैकेट पहन ली जातीं या क्रूज़ को सही दिशा में मोड़ा जाता, तो हादसा टल सकता था.
चश्मदीदों ने क्या बताया

इमेज स्रोत, SHIV CHAUBEY
घटनास्थल के पास काम कर रहे मजदूरों की एक टोली सबसे पहले बचाव के लिए पहुंची.
इन्हीं में से एक सागर गुप्ता ने बीबीसी को बताया, " शाम में अचानक से तूफ़ान आया था और हम लोग काम बंद करके लौटने लगे थे. इसी दौरान हमें आवाज आई कि कोई डूब रहा है."
उन्होंने आगे कहा, "हम लोग 10 से 12 मजदूर वहां थे. सभी लोग लाइफ़ जैकेट और रस्सी लेकर पहुंचे. जिन्हें तैरना आता था वो सब पानी में तुरंत ही कूद गए थे. करीब 14 लोगों को हम सबने मिलकर बचाया और चार महिलाओं के शव भी पानी से निकालकर एम्बुलेंस तक पहुंचाए".
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उस समय पानी में तेज लहरें उठ रही थीं और हालात बेहद खराब थे.
सागर ने अफसोस जताते हुए कहा, "अगर थोड़ा और समय मिलता और मौसम के हालात ऐसे नहीं होते, तो हम और लोगों को बचा सकते थे."
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी श्याम ने बताया कि तूफ़ान शुरू होते ही उन्होंने काम बंद कर दिया था.
"हम लोग काम बंद कर दिए थे. हमारे ही बीच के एक व्यक्ति ने वीडियो बनाने के लिए मोबाइल निकाला था. उसी दौरान उसने देखा कि नाव डूब रही है. इसके बाद हमने चिल्लाकर सभी को बुलाया और बचाव के लिए काम शुरू कर दिया था".
उन्होंने बताया कि, "हम लोगों में से कई लोग तुरंत पानी में उतर गए. लाइफ़ जैकेट, ट्यूब और रस्सियों की मदद से लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की गई, लेकिन इन सबके बीच नाव पूरी तरह डूब गई थी"
इसी टोली में मौजूद अरविंद यादव ने बताया कि पानी में उतरना बेहद मुश्किल था, क्योंकि लहरें बहुत ऊंची थीं.
उन्होंने कहा, "हम लोगों ने ख़राब मौसम के बावजूद बचाव कार्य में देरी नहीं की थी. हम में से कई लोगों को पानी में काम करने का अनुभव था इसलिए कुछ लोगों को हम लोग बचा पाए".
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, आंधी-पानी से हो रही दिक्कतें

इमेज स्रोत, SHIV CHAUBEY
राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीमें मौके पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं. सेना के जवानों को भी बुलाया गया है.
अंधेरा और बीच में हुई बारिश के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कतें आई हैं लेकिन बड़ी टॉर्च और अन्य उपकरणों की मदद से तलाश जारी है.
ख़बर लिखे जाने तक बचाव दलों ने गैस कटर से क्रूज़ को काटकर एक व्यक्ति को बाहर निकाला है जो करीब तीन घंटे तक अंदर फंसे रहे थे.
डूबे हुए क्रूज़ को रस्सियों और जेसीबी की मदद से बाहर निकालने की भी कोशिश की जा रही है.
प्रशासन का कहना है कि लापता लोगों की तलाश के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा.
(जबलपुर से शिव चौबे की अतिरिक्त रिपोर्टिंग के साथ)
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
जबलपुर से शिव चौबे की अतिरिक्त रिपोर्टिंग के साथ































