इंदौर, सबसे साफ़ शहर: 'मेरा बच्चा पाँच महीने का था, पानी ने जान ले ली', दूषित पानी से कई मौतें

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- Author, समीर ख़ान
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए, इंदौर से
लगातार सात सालों तक देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा हासिल करने वाले मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा में नर्मदा नदी की पाइपलाइन में ड्रेनेज लाइन का पानी मिल जाने से सप्लाई का पानी गंदा हो गया.
स्थानीय पत्रकारों ने बताया कि इंदौर के इस इलाके में अब तक14 लोगों की मौत हुई है. वहीं राज्य सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आज माना है कि आठ-नौ मौतें हुई हैं.
मामने की जांच के लिए राज्य सरकार ने एक कमिटी का गठन किया है.
दूषित पानी से बीमार कई लोगों को अलग-अलग सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती किया गया है.
लेकिन दस दिन से ज़्यादा समय हो जाने के बाद भी भागीरथपुरा के सभी इलाक़ों पीने का साफ़ पानी नहीं पहुंचा है और न ही इंदौर का नगर निगम इस बात का पता लगा पाया है कि ये गंदा पानी सप्लाई के पानी में कहां पर मिला.

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इस मामले पर मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, "करीब 1400 से 1500 लोग प्रभावित हुए थे, जिनमें से 198 लोग अस्पताल में भर्ती हैं. अभी दो और लोगों को भर्ती कराया गया है. कुछ लोगों को डिस्चार्ज भी किया गया है."
उन्होंने कहा, "स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और नगर निगम का पूरा अमला लगा हुआ है. छोटी से छोटी समस्या के समाधान की कोशिश की जा रही है. एक-एक व्यक्ति की हालत की मॉनिटरिंग की जा रही है."
मौतों के आंकड़े पर कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, "मेरे पास सरकारी आंकड़ा चार लोगों की मौत का है, लेकिन यहां घूमने के दौरान 8-9 लोगों की मौत की जानकारी मिली है."
वहीं, जब कैलाश विजयवर्गीय भागीरथपुरा पहुंचे तो उन्हें स्थानीय लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा.
वो बाइक पर हालात का जायज़ा लेने पहुंचे. जहां लोगों ने इलाके के ख़राब हालात को लेकर उनसे सवाल किए. लेकिन वो वहां रुके नहीं और बाइक से ही आगे बढ़ गए.
एक स्थानीय महिला ने कहा, "ड्रेनेज लाइन पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है. पीने के पानी की लाइन से इसे जोड़ा जा रहा है, लेकिन इसे देखने वाला कोई नहीं है. पिछले डेढ़ साल से हम परेशान हैं. शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है."
महिला ने बताया कि उनके यहां 10-12 लोग बीमार हुए हैं.
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पीड़ितों ने क्या बताया?

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दूषित पानी की वजह से मारे गए पांच महीने के अव्यान साहू के पिता सुनील साहू ने बीबीसी को बताया कि उनके परिवार में माता पिता के साथ पत्नी और दस साल की पुत्री है.
सुनील साहू कुरियर का काम करते हैं.
पांच महीने पहले ही उनके यहां अव्यान ने जन्म लिया था.
उन्होंने कहा, ''माँ के दूध के अलावा बच्चे को बाहर के दूध में पानी मिलाकर दिया जाता था. यह पता नहीं था कि नर्मदा का पानी दूषित है. जब बाहर के लोगों ने बताया की कई बच्चे बीमार हैं, तब पता चला कि नर्मदा का पानी दूषित है.''
उन्होंने बताया, ''अचानक 26 दिसंबर को बच्चे को दस्त की शिकायत हुई, जिसके बाद उस मोहल्ले के ही एक डॉक्टर को दिखाया लेकिन दवाई के बाद भी उसे फ़र्क नहीं हुआ. लगातार दस्त होने के चले 29 दिसंबर की शाम जब उसकी हालत ख़राब हुई तो उसे डॉक्टर के यहां लेकर पहुंचे तो डॉक्टर ने चेक कर बताया कि देर हो चुकी है. अव्यान की मृत्यु हो गई है.''
उन्होंने कहा कि अब तक कोई भी सुध लेने नहीं आया है. प्रशासन को ध्यान देना चाहिए कि किसी और के साथ ऐसा ना हो. जो भी दोषी हैं, उन पर सख़्त कारवाई होनी चाहिए.
टेलरिंग का काम करने वाले संजय यादव ने बताया, ''दूषित पानी पीने से मेरी 69 वर्षीय मां को 26 दिसंबर की शाम से उल्टी-दस्त शुरू हो गए. उन्हें दवा दी गई लेकिन जब कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा तो क्लॉथ मार्केट अस्पताल में इलाज कराया गया. लेकिन 22 घंटे के इलाज के बाद उनकी मौत हो गई.''
संजय यादव ने बताया कि उनका 11 महीने का बच्चा अब भी भर्ती है. उसकी हालत कुछ सुधरी है लेकिन दस्त अब भी हो रहे हैं. उनका पड़ोसी भी बीमारी है.
उन्होंने बताया कि अभी तक प्रशासन का कोई शख़्स हालात की पड़ताल करने नहीं आया है. पानी अभी तक ख़राब आ रहा है.
भागीरथपुरा में ही रहने वाले रेलवे से रिटायर्ड 76 साल के नंदलाल पाल की बेटी सुधा पाल ने बताया कि उनके पिता को दो तीन दिन से उल्टी-दस्त लग रहे थे. उन्हें वर्मा अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नहीं आया.
सुधा पाल ने बताया कि संक्रमण से 30 दिसंबर को उनके पिता की मौत हो गई.

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सुधा पाल ने बताया कि अब भी घर में दूषित पानी आ रहा है. दिखने में पानी ख़राब नहीं है लेकिन इसमें से बदबू आ रही है.
50 साल की सीमा प्रजापत की भी दूषित जल पीने से 29 दिसंबर की मौत हो गई थी
उनके पुत्र अरुण प्रजापत ने बताया, ''28 दिसंबर की रात को माँ ने परिवार के साथ खाना खाया था. लेकिन 29 दिसंबर की सुबह उनकी तबीयत ख़राब हो गई. उन्हें उल्टी-दस्त होने लगे."
अरुण प्रजापत उन्हें अस्पताल ले जाने लगे लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई.
उन्होंने कहा, ''पानी कड़वा तो था लेकिन पता नहीं था जानलेवा है. अब उबाल कर पी रहे हैं. मेरी भी तबीयत ख़राब हो रही है. पड़ोस में भी बच्ची बीमार हुई. लोग बीमार हैं लेकिन यहां पानी की कोई सुविधा नहीं है. वही पानी पीना पड़ रहा है. अब तक हमारी गली में तो कोई नहीं आया. सिर्फ पार्षद आए थे. उन्हें बताया कि पानी की समस्या है. गंदा पानी आ रहा है लेकिन वो दोबारा लौट कर नहीं आए.''
कैलाश विजयवर्गीय ने मानी ग़लती

इंदौर में दूषित पानी से हुुई मौत के मामले में नगर प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने माना कि ग़लती हुई है.
इंदौर के जिस इलाक़े में दूषित पानी से हाहाकार मचा हुआ है, वह भागीरथपुर क्षेत्र इंदौर विधानसभा क्षेत्र में आता है. यहां से भारतीय जनता पार्टी के विधायक कैलाश विजयवर्गीय हैं.
मध्य प्रदेश के नगर प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के तहत ही इंदौर नगर निगम आता है. पानी की सप्लाई की ज़िम्मेदारी निगम की है.
विजयवर्गीय ने बीबीसी से कहा, ''ये घटना दुर्भाग्यपूर्ण है. ये नगर निगम के ज़ोन के अधिकारी और कर्मचारियों की ग़लती से हुआ है. जब दूषित पानी सप्लाई के बारे में पता चला तो कर्मचारियों को अनाउसमेंट करना चाहिए था, लोग ये पानी नहीं लें. उन्हें पानी के टैंकर लगाना था. ग़लती उनकी थी इसलिए उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है. मुख्यमंत्री ने एक जाँच कमिटी बनाई है. जिसने भी लापरवाही की है उसे बख़्शा नहीं जाएगा.'''

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सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये देने की घोषणा गई है.
इसी इलाक़े में रहने वाली सपना पाल ने बताया कि अभी कोई समस्या का समाधान नहीं निकला है.
सिर्फ़ ओरआरएस बांटा जा रहा है. उन्होंने बताया कि उनकी गली में भी एक शख़्स की डायरिया से मौत हुई है. अब भी लोग अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं.
कांग्रेस ने भी बनाई जांच कमिटी

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मध्य प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी इंदौर के दूषित जल मामले में अस्पताल पहुंचकर बीमारों से मुलाक़ात की.
उन्होंने कहा कि इंदौर जहरीला पानी पी रहा है.
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने भी इस मामले में एक जांच कमिटी बनाई है. जिसमें पूर्व मंत्री सहित विधायकों को शामिल किया गया है.
इस बीच, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 31 दिसंबर को उन अस्पतालों का दौरा किया जहां दूषित पानी पीने से बीमार भगीरथपुरा के लोग भर्ती हैं.
उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा में दूषित पानी से जुड़े मामले में 40 हज़ार से ज़्यादा लोगों की स्क्रीनिंग की गई है.
इनमें से अस्पताल में भर्ती हुए 221 लोगों में से 50 अब ठीक होकर घर लौट गए हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















