भारत: हर 100 बच्चों में से पाँच बच्चे अपना पाँचवा जन्मदिन भी नहीं देख पाते

भारत में अधिकारियों का कहना है कि उत्तर भारत के एक राज्य के एक सरकारी अस्पताल में 100 से ज़्यादा बच्चों की मौत हो गई है. यह सरकारी अस्पताल राजस्थान के कोटा शहर में स्थित है.
राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अनुसार जेके लोन अस्पताल में पिछले सालों की तुलना में इस साल कम बच्चों की मौत हुई है.
गहलोत ने ट्वीट किया कि जेके लोन अस्पताल में इस साल 963 बच्चों की मौत हुई है जबकि साल 2015 में 1260, 2016 में 1193 बच्चों की मौत हुई तब राज्य में बीजेपी की सरकार थी. गहलोत के अनुसार साल 2018 में 1005 बच्चों की मौत हुई थी.
लेकिन, मुख्यमंत्री के इस बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. कहा जा रहा है कि इस तरह के आंकड़ों को पेश कर सरकार बच्चों की मौत को सामान्य घटना बताने की कोशिश कर रही है. इसी महीने गुजरात के शहर राजकोट के एक अस्पताल से भी 100 से ज़्यादा बच्चों के मारे जाने की ख़बर आई है.
कोटा से पहले बिहार में जून 2019 में एक्यूट इंसेफ़ेलाइटिस से 150 बच्चों की मौत हो गई थी.

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भारत में नवजात और बच्चों की मौत का ट्रेंड
नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे (2015-2016) के अनुसार भारत में नवजात शिशुमृत्यु दर 30 है यानी हर 1000 नए जन्म लेने वाले बच्चों में 30 बच्चों की मौत हो जाती है.
शिशु मृत्युदर 41 है और पाँच साल की उम्र से कम के बच्चों की मृत्यु दर 50 है. इसका मतलब है कि भारत में पैदा होने वाले हर 100 बच्चों में से पाँच अपने पाँचवे जन्मदिन से पहले ही दम तोड़ देते हैं. 82 फ़ीसदी से ज़्यादा की मौत शैशव अवस्था में हो जाती है.

लड़कों की तुलना में लड़कियां ज़्यादा मरती हैं
सरकार की एक दूसरी रिपोर्ट, सैम्पल रजिस्ट्रेशन रिपोर्ट (2016) के अनुसार पाँच साल से कम उम्र के बच्चों में लड़कों के मुक़ाबले लड़कियों की मृत्यु दर ज़्यादा है.
लड़कियों में ये दर 41 है जबकि लड़कों में ये दर 37 है. बिहार राज्य में लड़कियों और लड़कों की मृत्यु दर में सबसे ज़्यादा 16 अंकों का फ़ासला है.
5-14 साल के बच्चों में मृत्यु दर
साल 2016 में एसआरएस ने बताया कि 5-14 साल की उम्र में मृत्यु दर 0.6 है. बड़े राज्यों में केरल में 5-14 साल की उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 0.2 है और सबसे ज़्यादा झारखंड में 1.4 है.
नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे1(1992-93) से पाँच साल पहले नवजात मृत्यु दर 49 थी जो कि एनएफ़एसएस 4 (2015-16) में घट कर 30 हो गई है.
इस तरह 1992-93 से 2015-16 के बीच नवजात मृत्यु दर में 48 फ़ीसदी की कमी आई है. जबकि इसी दौरान पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 54 फ़ीसदी की कमी आई है.
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