झारखंड: हेमंत सोरेन ने दिया सीएम पद से इस्तीफ़ा, चंपई सोरेन चुने गए नेता

चंपई सोरेन

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    • Author, रवि प्रकाश
    • पदनाम, रांची से बीबीसी हिंदी के लिए

झारखंड के सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं के मुताबिक हेमंत सोरेन ने राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है.

गठबंधन के विधायकों ने चंपई सोरेन को अपना नेता चुन लिया है. 67 साल के चंपई सोरेन सरायकेला के विधायक हैं. वो झारखंड मुक्ति मोर्चा के उपाध्यक्ष हैं.

सत्ताधारी गठबंधन के पांच विधायकों ने राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की.

सत्ताधारी गठबंधन के मुताबिक उनके पास 47 विधायकों का समर्थन है और 43 विधायकों के दस्तख़्त की चिट्ठी राज्यपाल को सौंपी गई है.

त्यागपत्र की पुष्टि करते हुए कांग्रेस नेता आलमगीर आलम ने बताया कि हेमंत सोरेन ने झारखंड मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. सत्ताधारी गठबंधन ने चंपई सोरेन को अपना नेता चुना है.

झारखंड की राजधानी रांची में राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात के बाद आलमगीर आलम ने बताया, “ हेमंत सोरेन ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. हमारे गठबंधन ने चंपई सोरेन जी का नाम नेता के रूप में पेश किया है. 43 विधायकों के हस्ताक्षर का पत्र हमने दिया है. हमारे पास 47 विधायकों का समर्थन है. राज्यपाल ने अभी शपथ ग्रहण के लिए समय नहीं दिया है. उन्होंने कहा कि पहले आपके पेपर को देख लेंगे फिर आपको समय देंगे.”

हेमंत सोरेन

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झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) सांसद महुआ मांझी के मुताबिक हेमंत सोरेन प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अधिकारियों की हिरासत में राजभवन पहुंचे. ईडी के अधिकारी बुधवार दोपहर सोरेन से पूछताछ के लिए मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ़्तारी की आशंका के बीच मंगलवार से मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा था कि अगर वो मुख्यमंत्री पद से हटे तो पत्नी कल्पना सोरेन को अपनी जगह नेता बना सकते हैं.

लेकिन, बुधवार को शाम को विधायक दल के नेता के तौर पर चंपई सोरेन का नाम सामने आया.

हेमंत सोरेन और बाकी विधायकों के राजभवन पहुंचने से पहले काफी राजनीतिक गहमागहमी देखने को मिली.

दोपहर बाद से ईडी के अधिकारियों ने घंटों तक हेमंत सोरेन से पूछताछ की. इस दौरान मुख्यमंत्री आवास के बाहर मीडिया का जमघट लगा हुआ था.

जेएमएम के कई विधायक भी वहां मौजूद थे. शाम के वक़्त सत्ताधारी गठबंधन के विधायक वहां जुटे. मीटिंग में चंपई सोरेन के नाम पर मुहर लगी.

इस बीच राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मुलाक़ात का समय लिया गया. विधायकों को रात नौ से साढ़े नौ बजे के बीच मुलाक़ात का वक़्त मिला.

इसके बाद मुख्यमंत्री आवास पर बसें मंगाई गई. रात साढ़े सात बजे के बाद सत्ताधारी गठबंधन के विधायक बसों में सवार होकर राजभवन पहुंचे.

चंपई सोरेन

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कांग्रेस और जेएमएम के नेताओं ने क्या बताया?

कांग्रेस विधायक राजेश ठाकुर ने कहा, "आज उन्होंने (हेमंत सोरेन ने) तय किया है कि वो इस्तीफा दे रहे हैं. और हमने अपना लीडर चंपई सोरेन को चुन लिया है और उसका दावा हम प्रस्तुत करेंगे. सारे विधायक हमारे साथ हैं."

इसके पहले झारखंड सरकार के मंत्री बन्ना गुप्ता ने बताया, "हम लोगों ने चंपई सोरेन जी को विधायक दल के नेता के रूप में चुन लिया है. हम महामहिम महोदय से निवेदन करने आए हैं कि उन्हें शपथ दिलाई जाए."

झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की सांसद महुआ मांझी ने बताया है कि सत्ताधारी गठबंधन के पास बहुमत है.

उन्होंने बताया, "मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अभी हिरासत में हैं.वो ईडी की टीम के साथ गवर्नर साहब के पास गए हैं. तमाम हमारे विधायक साथ में हैं. "

महुआ मांझी ने कहा, "अभी पांच विधायक ही अंदर गए हैं. शायद इस्तीफ़े के बाद सबको जाने दिया जाएगा. "

उन्होंने कहा, "विधायकों की बैठक में यही निर्णय हुआ है कि चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा."

हेमंत सोरेन

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हेमंत सोरेन ने क्यों दिया इस्तीफ़ा

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हेमंत सोरेन से बुधवार को ईडी अधिकारियों ने पूछताछ की. ये पूछताछ जमीन की कथित हेराफेरी के एक पुराने मामले में की जा रही है.

इसके लिए ईडी अधिकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भेजकर उनसे समय की मांग की थी. हेमंत सोरेन ने इन अधिकारियों को 31 जनवरी की दोपहर एक बजे अपने आवास पर बुलाया था.

ईडी ने इसी मामले में पिछले 20 जनवरी को भी उनसे पूछताछ की थी. तब यह कहा गया था कि पूछताछ पूरी नहीं हो सकी है.

इससे पहले ईडी के अधिकारी 29 जनवरी की सुबह मुख्यमंत्री के दिल्ली स्थित आवास पर भी गए थे लेकिन उनकी मुख्यमंत्री से मुलाक़ात नहीं हो सकी थी.

तब हेमंत सोरेन के कथित तौर पर लापता होने की भी खबरें चलीं. हालांकि, इसके अगले ही दिन हेमंत सोरेन रांची में नजर आए. सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लिया और विधायकों की बैठक में भी शामिल हुए.

ईडी ने कथित खनन घोटाले में भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछताछ कर उनका बयान दर्ज किया था. जबकि हेमंत सोरेन इन मामलों में प्राथमिक अभियुक्त नहीं हैं.

उनकी पार्टी ईडी पर केंद्र सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाती रही है.

अब कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ईडी से खुलकर क़ानूनी लड़ाई लड़ना चाहते हैं. इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने का निर्णय लिया है.

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