कल्पना सोरेन: सियासत में न होकर भी कैसे चर्चा के केंद्र में, आगे क्या होंगी चुनौतियां?

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- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी के लिए.
तारीख़ 4 मार्च
जगहः गिरिडीह
हरी किनारी वाली ऑफ़ व्हाइट साड़ी, माथे पर कुमकुम की बिंदी. कलाई में घड़ी. चेहरे पर आत्मविश्वास. कल्पना मुर्मू सोरेन ने किसी सियासी कार्यक्रम में पहली बार माइक पकड़ा.
उन्होंने एक दिन पहले ही अपना 48वां जन्मदिन मनाया था.
वो जब बोलने के लिए खड़ी हुईं, तब मंच पर मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के साथ कई मंत्री, विधायक और सांसद मौजूद थे. सामने सैकड़ों कार्यकर्ताओं की भीड़ थी.
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भाषण का असर

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कल्पना सोरेन ने माइक पकड़ा. मंच पर मौजूद और कार्यक्रम में शामिल लोगों के औपचारिक अभिवादन के बाद उन्होंने जैसे ही अपने भाषण की शुरुआत की, उनकी आवाज़ भरभरा गई. वे चुप हो गईं. फिर बोलना शुरू किया. आवाज़ फिर लड़खड़ाई. उनकी आंखों में आंसू थे.
यह देख सामने खड़ी भीड़ नारे लगाने लगी.
'जेल का ताला टूटेगा, हेमंत सोरेन छूटेगा.'
इस बीच कल्पना सोरेन ने चश्मा उतारा. नम आंखें पोछीं. भीड़ फिर वही नारे लगाने लगी.
कल्पना सोरेन बोलीं, "मैंने सोचा था कि मैं अपने आंसू को रोक लूंगी. लेकिन आप लोगों के प्यार को देखकर मुझे वो ताक़त मिल रही है, जो मैंने सपने में भी कभी नहीं सोची थी."
भीड़ फिर नारे लगाने लगी.
'जेल का ताला टूटेगा, हेमंत सोरेन छूटेगा.'
'हेमंत सोरेन मत घबराना, तेरे पीछे सारा ज़माना.'
वो फिर चुप हो गईं. नारेबाज़ी ख़त्म हुई तो उन्होंने बात आगे बढ़ाई.
कल्पना सोरन ने कहा, "हेमंत सोरेन जी का अपराध क्या है. क्या है हेमंत सोरेन जी का अपराध. क्या झारखंड के 1 लाख 36 हज़ार करोड़ रुपये केंद्र सरकार से मांगना अपराध है. क्या यहां की भावना के अनुरूप स्थानीय नीति बनाना, क्या ये अपराध है. कोविड के समय मज़दूरों को बसों से, ट्रेन से, हवाई जहाज़ से लाना, क्या ये अपराध था. क्या झारखंड के किसानों का ऋण माफ़ करना अपराध था."
पूरे 15 मिनट के भाषण के दौरान कल्पना सोरेन ने सरना धर्म कोड, ओबीसी आरक्षण समेत उन सभी विधेयकों और प्रस्तावों का ज़िक्र किया, जो हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्रित्व काल में पारित कराए गए थे.
उन्होंने हेमंत सोरेन की गिरफ़्तारी का ज़िक्र करके जनता से भावनात्मक तौर पर जुड़ने की कोशिश की.

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शिबू सोरेन से आशीर्वाद की तस्वीरें
इस कार्यक्रम से एक दिन पहले अपने जन्मदिन पर वो रांची जेल में बंद अपने पति पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलने गई थीं. उसके बाद वे अपने ससुर पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन और सास रुपी सोरेन से भी मिलीं. फिर सोशल मीडिया पर इस मुलाक़ात की तस्वीरें पोस्ट कीं.
यह लिखा कि वे 'गिरिडीह में जेएमएम के स्थापना दिवस समारोह में शिरकत करने वाली हैं. पिछले 18 साल में यह पहला मौका है, जब जन्मदिन पर हेमंत सोरेन साथ नहीं हैं.'
झारखंड की राजधानी रांची से क़रीब 200 किलोमीटर दूर गिरिडीह के झंडा मैदान में 4 मार्च की दोपहर जेएमएम के कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी और उनका भाषण चर्चा में है. आंखों में आंसू वाली उनकी तस्वीरें और वो वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.

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'हेमंत सोरेन की झलक'
मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने उनके साथ की एक तस्वीर अपने एक्स पोस्ट के साथ शेयर की है.
उन्होंने एक्स पर लिखा, "आज गिरिडीह में मेरी बेटी समान, कल्पना सोरेन जी को झामुमो के 51वें स्थापना दिवस समारोह में देख कर अपार खुशी हुई. उनके चेहरे पर जो उत्साह, दृढ़ता एवं आत्मविश्वास दिखा, उसमें कहीं न कहीं, हेमंत बाबू के शुरुआती दिनों की झलक स्पष्ट दिखाई दी."
"हालांकि, कुछ देर बाद, उनके संबोधन के दौरान भावनाओं का जो ज्वार उमड़ा, उसने हम सभी को यह सोचने को विवश कर दिया कि आख़िर हेमंत बाबू की ग़लती क्या थी. क्या झारखंड के आदिवासियों, मूलवासियों और आम लोगों की आवाज़ उठाना, उनके लिए विकास योजनाएं बनाना, उनके हितों की रक्षा करने का प्रयास करना इतना बड़ा अपराध है?"
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चंपाई सोरेन ने यह भी लिखा, "इतने अत्याचार सहने के बावजूद, मंच पर कल्पना बेटी की उपस्थिति ने यह तो तय कर दिया कि कोई भले ही कितनी भी साज़िशें रचे, एजेंसियों का दुरुपयोग करे, झामुमो कार्यकर्ताओं से जेलें भर दे, लेकिन झारखंड झुकेगा नहीं."

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क्या यह सभा उनकी सियासी एंट्री है?
वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र सोरेन मानते हैं कि उनकी एंट्री दरअसल पहले ही हो चुकी है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "हेमंत सोरेन के जेल जाने से एक दिन पहले वे उनके साथ विधायकों की बैठक में शामिल हो चुकी थीं. तब यह चर्चा भी चली कि वो हेमंत सोरेन की उत्तराधिकारी बन सकती हैं. लेकिन, सीता सोरेन के विरोध और अचानक बदली परिस्थितियों में उनका नाम मुख्यमंत्री पद के लिए नहीं आ सका. हेमंत सोरेन ने तब चंपाई सोरेन का नाम आगे कर तात्कालिक परिस्थितियों पर नियंत्रण कर लिया."
सुरेंद्र सोरेन ने यह भी कहा, "गिरिडीह की सभा कल्पना सोरेन का लॉन्चिंग पैड साबित होगी. बहुत संभव है कि वो लोकसभा का चुनाव लड़ें और अपने गठबंधन के दूसरे प्रत्याशियों के लिए भी चुनावी सभाएं करें. ऐसे में उनके आंसू बीजेपी के लिए नुक़सानदायक साबित हो सकते हैं."
वो कहते हैं, "बदली परिस्थितियों में अगर बीजेपी को कुछ सीटों का नुक़सान हो, तो किसी को आश्चर्य नहीं होगा. क्योंकि, हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद उनके पक्ष में सहानुभूति का माहौल है."

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कल्पना सोरेन से नेताओं के मिलने का सिलसिला
सियासत में सीधे तौर पर नहीं होने के बावजूद कल्पना सोरेन की सियासी हैसियत महत्वपूर्ण बनी हुई है.
अपनी 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' के सिलसिले में झारखंड पहुंचे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी कल्पना सोरेन से मिलने उनके आवास पर गए थे.
कांग्रेस और जेएमएम दोनों ने इस मुलाक़ात की तस्वीरें अपने-अपने सोशल मीडिया पर साझा की थीं.
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इसके कुछ दिनों बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप नेता अरविंद केजरीवाल ने कल्पना सोरेन को फ़ोन कर बातचीत की और अपना समर्थन जताया.
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इससे पहले चंपाई सोरेन की सरकार में मंत्री पद की शपथ लेने से पूर्व बसंत सोरेन (शिबू सोरेन के छोटे बेटे) समेत कई नेता कल्पना सोरेन से मिलने उनके आवास पर पहुंचे. वे उनसे मिलने के बाद शपथ लेने राजभवन गए.
बाद के दिनों मे सीपीएम नेता वृंदा करात ने भी कल्पना सोरेन के आवास पर जाकर उनसे मुलाक़ात की थी.

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गिरफ़्तारी के बाद हेमंत सोरेन...
हेमंत सोरेन देश के ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्हें ईडी ने पद पर रहते हुए हिरासत में लिया. इसके बाद वो राजभवन गए और अपना इस्तीफ़ा सौंपा. वहीं से उनकी गिरफ़्तारी भी हुई.
ईडी की रिमांड में रहने के दौरान कोर्ट से इजाज़त लेकर वे विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने गए. उन्होंने आदिवासियों को लेकर कई बातें कहीं और राज्यपाल को भी निशाने पर लिया.
हेमंत सोरेन ने विधानसभा में कहा, "हम जंगल से बाहर आकर इनके बराबर बैठ गए, तो इनके कपड़े मैले हो गए."
उनके इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और सुर्ख़ियां भी बना.
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अब वे न्यायिक हिरासत में रांची के बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में हैं.
मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने विधानसभा में कहा कि हमारी सरकार हेमंत सोरेन पार्ट टू है.
इधर, जेएमएम के कार्यकर्ता पूरे राज्य में 'न्याय मार्च' निकाल रहे हैं.
राज्य भर में हेमंत सोरेन की तस्वीर के साथ 'झारखंड झुकेगा नहीं' लिखे होर्डिंग लगाए गए हैं.
वे अभी भी जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हैं.
कल्पना सोरेन के सामने चुनौतियां

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सियासत में कल्पना सोरेन की एंट्री को लेकर जेएमएम ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. विश्लेषकों का मानना है कि किसी आधिकारिक घोषणा से पहले कल्पना सोरेन के नाम पर पार्टी से अधिक परिवार में सहमति बनानी होगी. यह उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है.
हालांकि, उनके देवर और चंपाई सोरेन सरकार में मंत्री बसंत सोरेन कहते हैं कि उनके परिवार में किसी बात को लेकर मतभेद नहीं है. लेकिन, शिबू सोरेन की बड़ी बहू और विधायक सीता सोरेन ने कई मौके पर कल्पना सोरेन का विरोध किया है. ऐसा कहा जाता है कि वो कहती रही हैं कि बड़ी बहू होने के नाते उनका पहला हक़ बनता है.
उन्हें मंत्रिमंडल में भी शामिल नहीं किया गया. ऐसे में सीता सोरेन को साधने में कल्पना सोरेन को परेशानी हो सकती है. सीता सोरेन की बेटियों ने दुर्गा सोरेन सेना (डीएसएस) बनाकर पहले से ही अपनी सक्रियता बना रखी है.
विपक्ष पहले से ही उनपर परिवारवाद और उनके पति हेमंत सोरेन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाता रहा है.
बीजेपी के प्रदेश प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने मीडिया से कहा कि कल्पना सोरेन की एंट्री से यह बात और साफ़ हो गई है कि शिबू सोरेन का परिवार सिर्फ़ परिवारवाद की राजनीति करता है. उन्हें आदिवासियों से कोई लेना-देना नहीं है.
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