झारखंडः नए मुख्यमंत्री ने ले ली शपथ, फिर हैदराबाद क्यों भेजे गए जेएमएम और कांग्रेस विधायक?

झारखंड के विधायक

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    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

शुक्रवार को रांची के गवर्नर हाउस में चंपाई सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और इसके कुछ ही घंटों के भीतर कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के 38 विधायकों ने हैदराबाद के लिए उड़ान भरी. इन सभी विधायकों को हैदराबाद में एक ही रिज़ॉर्ट में रखा गया है.

कथित ज़मीन घोटाले में गिरफ़्तार झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफ़े और नए मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के शपथ ग्रहण के बीच क़रीब 42 घंटों का समय रहा.

इस दौरान रांची में राजनीतिक हलचलें तेज़ रहीं. राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने चंपाई सोरेन को बहुमत से अधिक विधायकों का समर्थन पत्र होने के बावजूद दो बार लौटा दिया. आख़िरकार उन्होंने गुरुवार देर रात चंपाई को फिर बुलाया और शुक्रवार को 12 बजकर15 मिनट पर शपथ लेने का समय दिया.

राज्य में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), कांग्रेस और राजद की गठबंधन सरकार है. गठबंधन का दावा है कि उसके पास 47 विधायकों का समर्थन है. गुरुवार देर रात गठबंधन ने एक वीडियो जारी किया जिसमें 43 विधायकों को मौजूद दिखाया गया. लोकतांत्रिक इतिहास में शायद ये पहली बार हुआ हो जब विधायकों ने स्वयं अपनी गिनती की और फिर उसका वीडियो जारी किया.

81 सीटों वाली झारखंड विधानसभा में बहुमत के लिए 42 विधायकों की ज़रूरत है. गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत है. 5-6 फ़रवरी को झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है जिसमें राज्यपाल के अभिभाषण के बाद कभी भी फ्लोर टेस्ट हो सकता है.

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उन्हें अपने लोगों पर विश्वास नहीं: मरांडी

राजनीतिक विश्लेषकों की राय में गठबंधन को डर है कि कहीं पूर्व में मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र की तरह ही झारखंड में भी विधायकों को तोड़कर सरकार को ना गिरा दिया जाए, इसलिए विधायकों को राज्य से बाहर भेज दिया गया है.

वहीं विपक्षी बीजेपी का कहना है कि उसने सरकार बनाने या गठबंधन के विधायकों को अपनी तरफ खींचने की कोई कोशिश नहीं की है.

बीबीसी से बात करते हुए झारखंड में बीजेपी के प्रमुख और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा, “बीते दो दिनों में हमने कोई गतिविधि नहीं की है. कांग्रेस और जेएमएम को डर है कि कहीं उसके नाराज़ विधायक पार्टी से अलग ना हो जाएं इसलिए ही उन्होंने विधायकों की घेराबंदी की है और उन्हें राज्य के बाहर भेज दिया है.”

मरांडी कहते हैं, “उन्हें अपने लोगों पर विश्वास नहीं हैं इसलिए अपने विधायकों को लेकर गए हैं. बीजेपी को अपने विधायकों पर विश्वास है इसलिए ही हमारे विधायक स्वतंत्र हैं.”

मरांडी दावा करते हैं कि बीजेपी ना ही झारखंड में सरकार बनाने को लेकर उतावली है और ना ही कोई ऐसी गतिविधि कर रही है.

मरांडी कहते हैं, “हम सरकार बनाने को लेकर बिल्कुल भी उतावले नहीं हैं. कहीं किसी ने सुना भी नहीं होगा कि हम ऐसा कोई प्रयास कर रहे हैं. गुरुवार को हमने पार्टी की अपनी बैठक की है जिसमें मिशन 2024 की तैयारियों पर चर्चा की गई है. लेकिन अगर उनके लोग उनसे नाराज़ हों और कहीं कोई भाग जाए तो हम पर ये आरोप नहीं लगाया जा सकता कि हमने उनके विधायकों को भगाया.”

झारखंड में बीजेपी के प्रमुख और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी

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बहुमत लूटने का हो रहा है प्रयास: कांग्रेस

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वहीं कांग्रेस इस डर को खुलकर ज़ाहिर करती है. झारखंड में कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने बीबीसी से कहा, “हमारे पास स्पष्ट बहुमत है लेकिन हमें आशंका है कि हमारे बहुमत को लूटने का प्रयास हो रहा है. शपथ दिलाने में भी देरी हुई है. बीजेपी बात साफ सुथरी करती है लेकिन इनके मन में, इनके पेट में क्या है? ये पहले भी बहुमत को लूटते रहे हैं, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में ये ऐसा कर चुके हैं. हमारा डर स्वभाविक है. बीजेपी बहुमत को लूटने का हर संभव प्रयास कर सकती है.”

बीबीसी से बात करते हुए हैदराबाद के रिजॉर्ट में मौजूद एक विधायक ने कहा, “हम कुल 38 विधायक यहां हैं. हमारे नेतृत्व ने हमें यहां रुकने का आदेश दिया है तो हम रुक रहे हैं, जब तक लौटने के लिए ना कहा जाएगा हम यहीं हैं.”

ये विधायक कहते हैं, “जेएमएम और कांग्रेस के विधायक यहां नेतृत्व के आदेश पर हैं. लेकिन एक डर तो है ही. डकैती और चोरी में अंतर होता है. डकैती सामने से होती है, पता चलता है कि डकैत घुसा है. लेकिन जब चोर घुस जाता है तो पता नहीं चलता है कि चोर घुस गया है. बस उसी चोरी के डर से हम यहां हैं.”

विधायकों को अभी ये नहीं बताया गया है कि वो कब तक हैदराबाद में रहेंगे. हालांकि विधानसभा का विशेष सत्र बुला लिया गया है. विधायक अब हैदराबाद से सत्र में शामिल होने के लिए रांची पहुंचेंगे.

गठबंधन में भले ही डर हो लेकिन विश्लेषक मानते हैं कि बीजेपी मौजूदा राजनीतिक हालात में शायद ही सरकार को गिराने की कोशिश करे.

हेमंत सोरेन

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महागठबंधन को क्या है डर?

वरिष्ठ पत्रकार और रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष सुरेंद्र सोरेन कहते हैं, “सरकार गिराना या विधायकों को तोड़ने का प्रयास करना बीजेपी के लिए भी फायदेमंद नहीं रहेगा, अब वक्त कम है, अब सरकार तोड़ने और बनाने पर मेहनत करने से ज्यादा बीजेपी का फ़ोकस अगले लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में पूरी ताक़त से जाना है. हमें नहीं लगता कि इस समय बीजेपी कांग्रेस या जेएमएम को तोड़ने की कोशिश कर रही है.”

हालांकि सुरेंद्र सोरेन भी मानते हैं कि महागठबंधन के नेताओं के मन में ये डर है कि बीजेपी कांग्रेस और जेएमएम के विधायकों से संपर्क कर सकती है.

सोरेन कहते हैं, “गठबंधन को डर के साथ-साथ एकजुटता भी ज़ाहिर करनी पड़ी है. ये बीजेपी का डर अकारण नहीं है, बीजेपी पहले भी कई राज्यों में कांग्रेस और गठबंधन की सरकारों को गिरा चुकी है.”

हालांकि झारखंड में मौजूदा सरकार को अस्थिर करना आसान नहीं होगा. झारखंड में गठबंधन के पास संख्या बल है और एकजुटता है.

झारखंड में सत्ताधारी गठबंधन टूट की संभावना को खारिज करते हुए सुरेंद्र सोरेन कहते हैं, “झारखंड में जेएमएम और कांग्रेस का अपना वोट बैंक है, ऐसे में नेता भले खिसक जाए, वोट बैंक खिसकाना आसान नहीं है. यही वजह है कि जेएमएम के नेता इस तरह का ख़तरा नहीं ले रहे हैं, अगर विधायक ख़तरा उठाकर बीजेपी का रुख़ करते भी हैं तो यह उनके लिए आत्मघाती साबित हो सकता है.”

झारखंड के विधायक

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पहले भी बाहर भेजे गए थे विधायक

झारखंड में जेएमएम छोड़कर बीजेपी में जाने वाले किसी नेता के राजनीतिक रूप से कामयाब होने का कोई बड़ा उदाहरण भी नहीं हैं.

सुरेंद्र सोरेन कहते हैं, “हेमलाल मुर्मु जेएमएम के बड़े नेता थे और बीजेपी में चले गए थे. पिछले साल ये फिर से जेएमएम में वापस आ गए. बीजेपी में रहते हुए हेमलाल कई चुनाव हार गए. झारखंड में जेएमएम नेताओं में ये डर रहता है कि पार्टी छोड़ने के बाद जनता उन्हें खारिज कर सकती है.

हालांकि, झारखंड में ये पहली बार नहीं है जब इस तरह से विधायकों को बाहर भेजा गया है. झारखंड साल 2000 में बिहार से अलग हुआ था और एक राज्य के रूप में अस्तित्व में आया था.

गठबंधन का समर्थन कर रहे वामपंथी दल सीपीआईएम (एल) के विधायक विनोद सिंह कहते हैं, “इससे पहले भी विधायकों को कई बार बाहर भेजा जा चुका है. इस बार तो बस से गए हैं, ऐसा भी समय था जब हेलीकॉप्टरों से विधायकों को उठा लिया गया था. समय का तकाजा है कि इस बार विधायकों को हैदराबाद भेजा गया है, लेकिन इससे अच्छा संदेश नहीं गया है.”

विनोद सिंह ने कहा, “हमारी पार्टी और हमारी प्रतिबद्धता की वजह से जब पिछली बार विधायक रायपुर भेजे गए थे तब भी हमसे जाने के लिए नहीं कहा गया था और अब जब हैदराबाद भेजे गए हैं, तब भी हमसे नहीं कहा गया है. मैं रांची में हूं और फ्लोर टेस्ट में सरकार को समर्थन देने जा रहा हूं.”

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