पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में टीएमसी नेताओं पर लगे आरोपों को लेकर छिड़ा सियासी संग्राम

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    • Author, प्रभाकर मणि तिवारी
    • पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24-परगना ज़िले में बांग्लादेश की सीमा से सटे संदेशखाली गाँव का नाम बीते पाँच जनवरी से पहले बहुत कम लोग ही जानते होंगे.

पाँच जनवरी को तृणमूल कांग्रेस के नेता शाहजहाँ शेख़ के घर छापामारी के लिए गई ईडी की टीम पर पार्टी समर्थकों के हमले के बाद पहली बार यह इलाक़ा सुर्ख़ियों में आया था.

लेकिन शाहजहाँ शेख़ और उसके दो ताक़तवर सहयोगियों के कथित अत्याचारों और यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ गाँव की महिलाओं के विरोध के चलते कालिंदी नदी के किनारे बसा यह गाँव अचानक सुर्ख़ियों में आ गया है.

तृणमूल कांग्रेस नेताओं के घरों और मुर्गी पालन केंद्र पर नाराज़ महिलाओं के हमले और आगजनी के बाद अब संदेशखाली राज्य का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है.

इस घटना की गूँज अब राजधानी कोलकाता ही नहीं बल्कि देश की राजधानी दिल्ली तक पहुँच गई है. संदेशखाली मामले में शुरुआती दौर में चुप्पी साधने और पार्टी के एक नेता को निलंबित करने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस ने भी आरोपों का जवाब दिया है.

संदेशखाली में फैली अशांति

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पार्टी ने स्थानीय नेताओं के ख़िलाफ़ उठने वाले आरोपों को बंगाल विरोधी प्रचार बताया है.

तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने पार्टी के नेताओं के ख़िलाफ़ लगे आरोपों को ख़ारिज कर दिया है.

उन्होंने बुधवार को पत्रकारों से कहा, "राष्ट्रीय महिला आयोग के प्रतिनिधियों ने इलाक़े का दौरा करने के बाद कहा है कि उनको बलात्कार या महिलाओं को जबरन उठाने संबंधी कोई शिकायत नहीं मिली है. लेकिन इसके बावजूद बीजेपी और सीपीएम सुनियोजित तरीक़े से बंगाल विरोधी प्रचार कर रही है."

ममता सरकार की मंत्री शशि पांजा ने सवाल किया कि क्या मणिपुर की घटना के बाद गृह मंत्री ने इस्तीफ़ा दिया था? उनका आरोप था कि बीजेपी नेता नफ़रत फैला रहे हैं.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संदेशखाली में फैली अशांति के लिए ईडी और बीजेपी को ज़िम्मेदार ठहराया है.

संवेदनशील इलाका

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ममता बनर्जी ने गुरुवार को विधानसभा में कहा, "ईडी शाहजहाँ शेख़ को निशाना बना कर संदेशखाली में घुसी थी. उसी समय से अल्पसंख्यकों और आदिवासियों के बीच गड़बड़ी फैलाई गई थी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने वहाँ अपना ठिकाना बनाया है."

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इलाक़ा वैसे भी संवेदनशील है. वहाँ बाहरी लोग मुँह पर मास्क पहन कर गड़बड़ी फैला रहे हैं.

दूसरी ओर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी पार्टी के छह सांसदों की टीम के साथ शुक्रवार को संदेशखाली का दौरा करेंगे. इनमें पाँच महिला सांसद शामिल हैं. ये लोग गाँव की महिलाओं से बातचीत करेंगे.

इस बीच, सीपीएम की केंद्रीय समिति की सदस्य देवलीना हेंब्रम के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को संदेशखाली का दौरा किया. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर चौधरी भी शुक्रवार को इलाक़े के दौरे पर जाएंगे.

पुलिस ने बुधवार को बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार के नेतृत्व में संदेशखाली जाने की कोशिश करने वाले नेताओं को बहुत पहले टाकी में ही रोक दिया.

शाहजहाँ शेख़ पर आरोप

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पुलिस वालों और पार्टी समर्थकों के बीच हुई धक्का मुक्की में सुकांत के बेहोश हो जाने बाद उनको पहले बशीरहाट अस्पताल में ले जाया गया और वहां से कोलकाता लाकर एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया.

स्थानीय महिलाओं ने शाहजहाँ शेख़ और उसके दो सहयोगियों—शिव प्रसाद उर्फ़ शिबू हाजरा और उत्तम सर्दार पर स्थानीय लोगों की ज़मीन जबरन हड़पने और महिलाओं के साथ अत्याचार और बलात्कार जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं.

हालाँकि पुलिस का कहना है कि उसे ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है. हालाँकि महिलाओं ने मीडिया के सामने इन नेताओं पर ये आरोप लगाए थे.

सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ ही पुलिस ने भी बलात्कार के आरोपों को निराधार बताते हुए इसे ज़मीन की लीज के एवज दो साल से पैसों का भुगतान नहीं होने से उपजी नाराजगी क़रार दिया है.

लेकिन इसके साथ ही पार्टी छवि को हुए नुक़सान की भरपाई की क़वायद में जुट गई है.

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क्योंकि शाहजहाँ के शार्गिद और तृणमूल कांग्रेस नेता उत्तम सर्दार की गिरफ़्तारी और उन्हें पार्टी से छह साल के लिए निलंबित करने के बाद विपक्ष का हमला और तेज़ हुआ.

सीपीएम के एक पूर्व विधायक के साथ एक बीजेपी नेता को भी हिंसा उकसाने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया है.

पहले राज्य महिला आयोग की एक टीम ने गाँव का दौरा किया. उसके बाद राष्ट्रीय महिला आयोग की एक टीम भी मौक़े का दौरा कर चुकी है.

इस बीच, सरकार ने प्रदर्शन कर रही महिलाओं से बात कर उसका दुख-दर्द जानने के लिए एक डीआईजी की अगुवाई में 10-सदस्यीय टीम का गठन किया है, जो गाँव का दौरा कर महिलाओं से बातचीत कर चुकी है.

फ़िलहाल यह गाँव एक ऐसे क़िले में तब्दील हो गया है, जहाँ पुलिस प्रशासन की मर्जी के बिना परिंदा तक पर नहीं मार सकता.

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विपक्ष के नेताओं या किसी भी भी बाहरी व्यक्ति को गाँव की सीमा से बहुत पहले ही रोक दिया जाता है. गांव तक जाने के रास्ते में जगह-जगह पुलिस के बैरिकेड लगे हैं.

वहाँ जाँच के बाद ही वाहनों और लोगों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाती है. बाहरी व्यक्तियों की आवाजाही रोकने के लिए गाँव के 19 संवेदनशील इलाक़ों में धारा 144 लागू कर दी गई है.

पहले पूरे इलाक़े में निषेधाज्ञा लगाई गई थी. लेकिन हाईकोर्ट की ओर से इसे ख़ारिज किए जाने के बाद अब 19 संवेदनशील इलाक़ों में इसे लागू किया गया है.

संदेशखाली तक पहुँचने के लिए इन इलाक़ों से होकर ही गुज़रना पड़ता है.

स्थानीय महिलाओं का आरोप है कि तृणमूल नेताओं की इस तिकड़ी ने गाँव वालों को डरा-धमका कर कौड़ियों के मोल उनकी ज़मीन ख़रीद ली है.

क्या कहना है महिलाओं का

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कई मामलों में तो उनके पैसे भी नहीं दिए गए हैं.

इसके साथ ही गाँव के लोगों को तृणमूल नेताओं की ज़मीन और खेत पर काम कराया जाता है लेकिन मज़दूरी या तो नहीं दी जाती या फिर नाममात्र की दी जाती है. पैसे मांगने पर उनकी पिटाई की जाती है.

एक महिला नाम नहीं छापने की शर्त पर बताती हैं, "महिलाओं को मीटिंग के नाम पर रात को 12 बजे पार्टी के दफ़्तर में बुला कर बिठाए रखा जाता था. वहाँ नहीं जाने या विरोध करने पर हमारे पति का तबादला कहीं दूर करा देने या देख लेने की धमकी दी जाती थी."

एक अन्य महिला बताती हैं कि यहाँ तृणमूल की इस तिकड़ी का इस क़दर आतंक है कि गाँव की महिलाएँ सूरज ढलने के बाद बाहर निकलने से डरती हैं.

इन महिलाओं ने गाँव के दौरे पर पहुँचे राज्यपाल सीवी आनंद बोस के सामने भी यही शिकायत दोहराई.

कैसे शुरू हुआ था मामला

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने संदेशखाली की घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से 20 फरवरी तक इस पर रिपोर्ट मांगी है. इस मामले की अगली सुनवाई उसी दिन होगी.

अदालत दो अलग-अलग मामलों पर सुनवाई करेगी. इनमें से पहला मामला गाँव वालों की ज़मीन पर जबरन कब्ज़े से संबंधित है दूसरा महिलाओं के यौन उत्पीड़न के आरोप से.

यह पूरा मामला बीते महीने राशन घोटाले के सिलसिले में तृणमूल कांग्रेस नेता शाहजहाँ शेख़ के घर ईडी के छापे से शुरू हुआ था.

तब कथित तौर पर पार्टी समर्थकों के हमले में ईडी के तीन अधिकारी घायल हो गए थे. शाहजहाँ उसी दिन से फ़रार हैं. वे वर्ष 2006 में सीपीएम में शामिल हुए थे.

राज्य में निजाम बदलने के बाद वर्ष 2012 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था.

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उन्हें उत्तर 24-परगना ज़िला तृणमूल प्रमुख ज्योतिप्रिय मल्लिक का क़रीबी माना जाता है. फ़िलहाल राशन घोटाले में पूर्व मंत्री मल्लिक भी ईडी की हिरासत में हैं.

सरकार की ओर से गठित 10-सदस्यीय जाँच समिति ने भी गाँव का दौरा कर महिलाओं से बातचीत की है.

बारासात रेंज के डीआईजी सुमित कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि अब तक मिली चार शिकायतों में से किसी में रेप का कोई आरोप नहीं हैं.

अब तक ऐसी कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है. उन्होंने भरोसा दिया कि ऐसी कोई शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

संदेशखाली में तृणमूल कांग्रेस नेताओं पर कथित अत्याचार और यौन उत्पीड़न के आरोपों के साथ ही महिलाओं का आंदोलन अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है.

राजनीति मुद्दा

संदेशखाली में बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी प्रदर्शनकारियों के साथ.

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इमेज कैप्शन, संदेशखाली हिंसा के ख़िलाफ़ 10 फ़रवरी को बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता में राज्यपाल आवास के बाहर मीडिया को संबोधित किया.

तमाम विपक्षी दलों ने इसके लिए सत्तारूढ़ पार्टी को कठघरे में खड़ा करते हुए संदेशखाली अभियान शुरू किया है. लेकिन किसी को भी इलाक़े में नहीं जाने दिया गया है.

सीपीएम तो गाँव में हिंसा भड़काने के आरोप में अपने पूर्व विधायक निरापद सरकार की गिरफ़्तारी के विरोध में सोमवार को इलाक़े में 12 घंटे बंद तक बुला चुकी है.

दूसरी ओर, बीजेपी भी इस मुद्दे पर काफ़ी आक्रामक है. कोलकाता से दिल्ली तक उसके तमाम नेता इस मुद्दे पर राज्य सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को घेरने में जुटे हैं.

विधानसभा में इस मुद्दे पर हंगामे और वॉकआउट के बाद विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी समेत छह विधायकों को निलंबित किया जा चुका है.

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने मंगलवार को बशीरहाट में पुलिस अधीक्षक के दफ़्तर के सामने धरना दिया था.

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उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि संदेशखाली की घटना से साफ़ है कि बंगाल में अपराध का किस कदर राजनीतिकरण हो चुका है. इसलिए वहाँ जाने से रोका जा रहा है ताकि असली तस्वीर सामने नहीं आ सके.

उन्होंने बांग्लादेश से सटे टाकी होते हुए संदेशखाली जाने का प्रयास किया था. लेकिन पुलिस ने उनको ऐसा करने से रोक दिया.

पुलिस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की के दौरान ही मजूमदार बेहोश हो गए. उनको पहले बशीरहाट अस्पताल ले जाया गया. वहाँ से फिर उनको कोलकाता भेजा गया.

सीपीएम के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम कहते हैं कि संदेशखाली की घटना से स्पष्ट है कि संदेशखाली की महिलाएँ अब तृणमूल कांग्रेस के समर्थन वाले गुंडों के अत्याचारों के ख़िलाफ़ खुल कर सामने आ गई हैं.

दूसरी ओर, ममता बनर्जी सरकार के मंत्री पार्थ भौमिक ने इलाक़े का दौरा करने के बाद पत्रकारों से कहा, "हम 18 फरवरी को यहाँ (संदेशखाली) आएँगे. लीज़ पर ली गई ज़मीन के एवज में पैसा नहीं मिलने के कारण लोगों में कुछ नाराज़गी है. हम उन पैसों का भुगतान कराएँगे. महिलाओं के साथ रेप और शारीरिक अत्याचार के आरोप निराधार हैं."

ममता बनर्जी ने क्या कहा?

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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहली बार संदेशखाली की घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि पुलिस उचित कार्रवाई कर रही है. कुछ दोषियों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

सरकार ने सीआईडी की डीआईजी सोमा दास मित्र के नेतृत्व में एक 10-सदस्यीय जाँच टीम का गठन किया है जो महिलाओं से बातचीत करेगी.

संदेशखाली के तृणमूल कांग्रेस विधायक सुकुमार महतो ने भी महिलाओं के शारीरिक अत्याचार और बलात्कार के आरोपों को बेबुनियाद बताया है.

कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष दावा करते हैं, "संदेशखाली में अब शांति है और परिस्थिति नियंत्रण में है. बीजेपी और सीपीएम कुछ इलाक़ों में गड़बड़ी फैलाने का प्रयास कर रही है. अगर स्थानीय लोगों की कोई शिकायत होगी तो पुलिस, प्रशासन और पार्टी उसके निपटारे के लिए ज़रूरी क़दम उठाएगी."

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