इस्तीफ़ा देकर टीएमसी में फिर लौटे जितेंद्र तिवारी, कहा- सीएम से मांग लूंगा माफ़ी : प्रेस रिव्यू

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी

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पश्मिच बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के अंदर उठापटक जारी है. पार्टी में लगातार इस्तीफ़े दिए जा रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में पार्टी के तीन विधायक इस्तीफ़ा दे चुके हैं.

वहीं, पार्टी में भी इस टूटफूट को रोकने की पूरी कोशिश की जा रही है.

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक इस्तीफ़ों की झड़ी इसी बीच गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के लिए तब राहत की ख़बर आई जब विधायक जितेंद्र तिवारी इस्तीफ़ा देकर फिर से पार्टी में लौट आए.

जितेंद्र तिवारी ने शुक्रवार को पार्टी से इस्तीफ़ा देने की घोषणा कर दी थी. वो पहले से चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की भी आलोचना करते रहे हैं.

लेकिन, उन्होंने अगले ही दिन अपना इस्तीफ़ा वापस ले लिया. जितेंद्र तिवारी ने राज्य सरकार में मंत्री अरूप बिस्वास से मुलाक़ात के बाद कहा, ''मैं टीएमसी के साथ हूं और मैं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से माफ़ी मांग लूंगा.

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जितेंद्र तिवारी के पार्टी में लौटने की वजह बीजेपी सांसद बाबुल सुप्रियो को भी बताया जा रहा है. बाबुल सुप्रियो जितेंद्र तिवारी के बीजेपी में आने का विरोध कर रहे थे. उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट लिखकर भी अपना विरोध जताया था.

वहीं, ममता के बेहद ख़ास रहे शुभेंदु अधिकारी, विधायक बनश्री मैती और शीलभद्र दत्ता टीएमसी से इस्तीफ़ा दे चुके है.

दो दिनों के बंगाल दौरे पर अमित शाह

अमित शाह

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शुक्रवार आधी रात को कोलकाता पहुँचे. वो दो दिनों तक पश्चिम बंगाल में रहेंगे. शाह शनिवार को मेदिनीपुर में रैली करने के बाद रविवार को शांतिनिकेतन में रोड शो करेंगे.

अख़बार नवभारत टाइम्स के अनुसार बीजेपी कार्यकर्ताओं ने जय श्रीराम के नारों के साथ ज़ोर शोर से उनका स्वागत किया. बिहार के बाद अब पूरे देश की निगाहें पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव पर टिक गई हैं और बीजेपी काफ़ी पहले से ही बंगाल चुनावों की तैयारी में जुट गई है.

राज्य में हुए हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों को देखते हुए अमित शाह का यह दौरा काफ़ी अहम माना जा रहा है. इस तरह की अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि इस दौरान सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में काफ़ी उठापटक हो सकती है.

टीएमसी की एक विधायक बनश्री मैती ने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है. इससे पहले ममता के बेहद ख़ास रहे शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को विधायक पद से इस्तीफ़ा दिया था और फिर पार्टी भी छोड़ दी है.

एक और विधायक शीलभद्र दत्ता ने भी इस्तीफ़ा दे दिया है. प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस और अन्य दलों के 10-12 विधायक बीजेपी में शामिल होंगे.

एक और विधायक जितेंद्र तिवारी ने भी इस्तीफ़ा दे दिया था लेकिन फिर वो वापस तृणमूल कांग्रेस में लौट आए हैं.

इस बीच शुक्रवार शाम को मुख्यमंत्री ममत बनर्जी ने अपने आवास पर एक बैठक की. इसमें पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी शामिल हुए.

ममता ने बैठक में कहा कि बाग़ियों का पार्टी छोड़ना चिंता की बात नहीं है. ममता का कहना था, "राज्य के लोग टीएमसी के साथ हैं. चुनाव में वहीं ऐसे लोगों को माक़ूल जवाब देंगे.''

उन्होंने कहा कि 'जिनको जाना हो, जा सकते हैं. इससे पार्टी की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा.'

मुख्यमंत्री ने पार्टी के नेताओं से आम लोगों के बीच इस बात का प्रचार करने को कहा कि कुछ नेता सत्ता के लालच में पाला बदल रहे हैं.

टीएमसी के प्रवक्ता सौगत राय कहते हैं कि 'बाग़ियों का पार्टी छोड़ कर जाना अच्छी बात है. टीएमसी के और भारी बहुमत के साथ सत्ता में लौटने पर ऐसे लोगों के पास हाथ मलने के अलावा कोई चारा नहीं होगा.'

मणिपुर की महिला पुलिस अधिकारी ने पुलिस पदक लौटा दिया

थौनाओजम बृंदा

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अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस मणिपुर नारोकोटिक्स और सीमावर्ती मामलों की पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक थौनाओजम बृंदा ने शुक्रवार को अपना मुख्यमंत्री पुलिस पदक वापस कर दिया है.

उन्हें यह पदक वीरता और ड्रग्स के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ने के लिए 13 अगस्त 2018 को देशभक्त दिवस के मौक़े पर दिया गया था. उन्होंने साल 2018 में लुखोसेई जोउ नाम के एक हाई प्रोफ़ाइल ड्रग माफ़िया और उनके सहयोगियों को भारी मात्रा में ड्रग्स के साथ गिरफ़्तार किया था. उस समय ड्रग्स की क़ीमत क़रीब 28 करोड़ बताई गई थी.

जोउ चंदेल ज़िले के एक प्रभावशाली बीजेपी नेता भी हैं और उस समय वो चंदेल ज़िला स्वायत्तशासी परिषद के अध्यक्ष थे. लेकिन एनडीपीएस कोर्ट ने जोउ और छह अन्य को बरी कर दिया. इसी के बाद पुलिस अधिकारी ने अपना पदक लौटा दिया.

मुख्यमंत्री एन बीरेन के नाम लिखे पत्र में पुलिस अधिकारी बृंदा ने कहा कि एनडीपीएस अदालत ने बीजेपी की नेता लुखोसेई जोउ और छह अन्य लोगों को बरी कर दिया है जिनका उस मामले में नाम आया था.

बृंदा ने आगे लिखा, "इस मामले में एनडीपीएस अदालत की जाँच और अभियोग को असंतोषजनक समझा गया है. मुझे नैतिक रूप से यह महसूस हुआ कि मैंने अपनी ड्यूटी देश की आपराधिक न्याय प्रणाली के इच्छानुसार नहीं निभाई है. मैं ख़ुद को सीएम के ज़रिए दिए गए सम्मान के लायक़ नहीं समझती हूं, इसलिए राज्य के गृह विभाग को पदक लौटा रही हूं, ताकि उसे अधिक योग्य और वफ़ादार पुलिस अधिकारी को दिया जा सके."

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