अरशद नदीम के गांव का हाल: माँ की ख़ुशी, नीरज के लिए दुआएं और रूसी ट्रैक्टर

इमेज स्रोत, SHAHID SAEED MIRZA/AFP via Getty Images
- Author, फ़ुरक़ान इलाही, मुनज़्ज़ा अनवार
- पदनाम, बीबीसी उर्दू, पाकिस्तान से
“जैसे ही पता चला कि अरशद ने मेडल जीत लिया है मैं क्या बताऊं कि मुझे कितनी ख़ुशी हुई… मुझे इतनी ख़ुशी हुई कि मेरा दिल किया कि मेरा बेटा मेरे सामने हो और मैं उसे गले लगाऊं.”
पाकिस्तान के लिए पेरिस ओलंपिक खेलों में जैवलिन थ्रो में गोल्ड जीतने के बाद अरशद नदीम की माँ की ख़ुशियों का ठिकाना नहीं था. अरशद पाकिस्तान के लिए दशकों बाद कोई भी ओलंपिक मेडल जीतने वाले खिलाड़ी बन गए हैं.
अरशद नदीम की मां रज़िया परवीन का कहना है, “मैं बहुत दुआएं करती थी और मेरे दिल की ख़्वाहिश थी कि मेरा बेटा मेडल जीतकर पाकिस्तान का नाम रौशन करे.”
जैसे ही अरशद नदीम ने पेरिस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता उन्होंने अपने बेटे के लिए अल्लाह का शुक्र अदा करने की नमाज़ पढ़ी.

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मेरे बेटे ने न केवल हमारी मुराद पूरी की बल्कि पाकिस्तानियों से भी जो वादा किया था वह भी पूरा किया और पाकिस्तान का नाम रौशन किया.”
उनकी मां ने बताया कि आज सुबह फ़ोन पर अरशद को कहा, “अरशद मैं तुमसे बहुत ख़ुश हूं, तुमने मेरा दिल आज बहुत बड़ा कर दिया है.”
इसके अलावा रज़िया परवीन ने पाकिस्तानी मीडिया से बात करते हुए नीरज चोपड़ा के बारे में भी बात की .
उन्होंने कहा, “वो मेरे बेटे जैसा है. वो नदीम का दोस्त भी है और भाई भी है.”
रज़िया परवीन ने कहा, “हार और जीत तो किस्मत का खेल है. वो भी मेरा बेटा है और अल्लाह उसे भी कामयाब करे. उसे भी मेडल जीतने की तौफ़ीक अदा करें.”
रात भर जश्न चला

इमेज स्रोत, Getty Images
अरशद नदीम का संबंध पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मियां चुन्नू नामक जगह से है. उनके पिता राजमिस्त्री हैं जिन्होंने हर क़दम पर अपने बेटे का हौसला बढ़ाया है.
बीबीसी की टीम जब सुबह लगभग आठ बजे मियां चुन्नू में अरशद के घर पहुंची तो उस समय अरशद और नीरज की प्रेस कॉन्फ़्रेंस चल रही थी और सब लोग बहुत ध्यान से उन्हें सुन रहे थे.
अरशद के भाई ने बताया कि वह रात भर जगे रहे हैं, “यहां पूरी रात आतिशबाज़ी होती रही है और जश्न का माहौल था.”
इस वक़्त अरशद के घर के बाहर ऐसा लगता है कि जैसे एक शादी का समां है और बस दूल्हे का इंतज़ार है. टेंट और कुर्सियां लगाई जा रही थीं, ढोल बाजे वाले भी मौजूद थे जबकि रिश्तेदार और पास के गांव से लोग बधाई देने आ रहे थे.
अरशद के बड़े भाई शाहिद अज़ीम का कहना था, “यह मेरे भाई का दिन था और ख़ुदा को उसे नवाज़ना था.”
इस सवाल के जवाब में कि अरशद का मुक़ाबला किसके साथ था, शाहिद अज़ीम का कहना था, “अरशद नदीम का मुक़ाबला अरशद नदीम के साथ था क्योंकि जितने दूसरे खिलाड़ी थे वह सभी अच्छे थे.”
“मैंने अरशद से कहा था कि अगर 90 मीटर से ज़्यादा थ्रो करोगे तो मेडल आपका है और अगर 90 से कम थ्रो करोगे तो मेडल किसी और का है.”
वह बताते हैं कि अरशद से जो उनकी बातचीत हुई उसमें अरशद ने उन्हें बताया कि वह 92 मीटर से भी ज़्यादा थ्रो कर सकते थे. फिर 92.57 मीटर पर जाकर भला लगा और वह उस पर ख़ुश हैं.
गाँव का रशियन ट्रैक्टर

इमेज स्रोत, Reuters
अरशद नदीम को इस खेल में आगे जाने के लिए ज़रूरी साज़ोसामान पर बहस कई सालों से जारी है और अब तक इस बारे में कोई उत्साहजनक ख़बर सामने नहीं आई.
अरशद नदीम ने मार्च में बीबीसी को बताया था कि उनके पास एक ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की जैवलिन है जो इस समय ख़राब हालत में है. दूसरी और उनके प्रतिद्वंद्वी भारत के नीरज चोपड़ा के लिए सरकार ने टोक्यो ओलंपिक से पहले 177 जैवलिन ख़रीदे थे.
उन्होंने बताया था, उस जैवलिन की क़ीमत 7 से 8 लाख के क़रीब है जिसके लिए कोशिश की जा रही है.
संसाधनों की कमी के बारे में अरशद के बड़े भाई शाहिद अज़ीम कहते हैं, “हमें पता था कि अरशद को संसाधन की नहीं, दुआओं की ज़रूरत है.”
शाहिद बताते हैं कि अरशद को “हम गांव में रूसी ट्रैक्टर कहते हैं क्योंकि अल्लाह ने उसमें बहुत ताक़त दे रखी है.”
इस बात को समझाते हुए वह कहते हैं, “बाक़ी जितने भी ट्रैक्टर होते हैं उन सब की वज़न खींचने की एक हद होती है मगर रूसी ट्रैक्टर की कोई हद नहीं होती. इसके पीछे जितना भी वज़न लगा दो वह खींच कर ले जाता है.”
अरशद के दूसरे भाई शाहिद नदीम बताते हैं कि उन्हें यह तो उम्मीद थी कि उनका भाई गोल्ड मेडल लेकर आएगा लेकिन उन्होंने यह नहीं सोचा था कि वह इतिहास भी रच देगा.
हर खेल में माहिर पर जैवलिन को ही क्यों चुना?

गोल्ड मेडल जीतने के बाद नीरज चोपड़ा और तीसरे नंबर पर आने वाले ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स के साथ प्रेस कॉन्फ़्रेंस में अरशद नदीम ने जैवलिन में अपने अब तक के सफ़र के बारे में भी बात की.
उनका कहना था, “नीरज की तरह मैंने गांव से शुरुआत की और पहले क्रिकेट खेली. मेरी क्रिकेट की गेम बड़ी अच्छी थी और मैं बहुत अच्छा गेंदबाज़ था” मगर फिर उन्हें क्रिकेट छोड़ने पड़ी.
अरशद बताते हैं, “इसी तरह मेरी फ़ुटबॉल और कबड्डी की गेम भी बड़ी अच्छी थी.” उन्होंने बैडमिंटन भी खेली लेकिन फिर सब छोड़कर स्कूल लेवल पर एथलेटिक्स शुरू कर दी और कई खेलों में क़िस्मत आज़माई.
अरशद बताते हैं कि उस वक़्त उन्हें क्रिकेट में ही आगे जाने का शौक़ था मगर “क्रिकेट में आगे जाकर टीम में नाम और जगह बनाना बड़ा मुश्किल था.”
वह बताते हैं कि फिर एक दिन उनके कोच रशीद अहमद साक़ी ने उन्हें कहा, “यार, कोई एक खेल पकड़ो. तुम्हारी शारीरिक बनावट अच्छी है, तुम जैवलिन की तरफ़ आओ”
और इस तरह उनका एथलेटिक्स का सफ़र शुरू हुआ.
सन 2016 में गुवाहाटी में नीरज के साथ पहले मुक़ाबले में उन्होंने 78.33 मीटर के साथ पाकिस्तान का रिकॉर्ड तोड़ा था.
वहीं से उन्हें शौक़ हुआ और उन्हें लगा कि वो मेहनत करेंगे तो आगे बढ़ सकते हैं.
क्रिकेट के अच्छे खिलाड़ी

इमेज स्रोत, EPA-EFE/REX/Shutterstock
अरशद नदीम के करियर में दो कोच रशीद अहमद साक़ी और फ़ैयाज़ हुसैन बुख़ारी की अहम भूमिका है.
रशीद अहमद साक़ी ख़ानिवाल डिस्ट्रिक्ट एथलेटिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष होने के अलावा ख़ुद एथलीट रहे हैं. वह अपने इलाक़े में होनहार एथलीटों का संरक्षण और उत्साह बढ़ाने में आगे आगे रहे हैं.
सन 2021 में रशीद अहमद साक़ी ने बीबीसी के पत्रकार अब्दुल रशीद शकूर से बात करते हुए बताया था कि अरशद नदीम जब छठी-सातवीं क्लास के छात्र थे तभी से उन्हें वह जानते हैं.
उन्होंने कहा था, “उस ज़माने में उनका ध्यान क्रिकेट पर ज़्यादा हुआ करता था और वह क्रिकेटर बनने के लिए बहुत गंभीर भी थे लेकिन साथ ही को एथलेटिक्स में भी दिलचस्पी से हिस्सा लिया करते थे. वह अपने स्कूल के बेहतरीन एथलीट थे.”
रशीद अहमद साक़ी कहते हैं, “मेरा अरशद नदीम के परिवार से भी अच्छा रिश्ता है. मुझे याद है कि एक दिन उनके पिता मेरे पास आए और कहा कि अरशद नदीम अब आपके हवाले है, यह आपका बेटा है. "
"मैंने उनकी ट्रेनिंग की ज़िम्मेदारी ली और पंजाब के विभिन्न एथलेटिक्स मुक़ाबलों में हिस्सा लेने के लिए भेजता रहा. अरशद ने पंजाब यूथ फ़ेस्टिवल और दूसरे राज्य स्तरीय मुक़ाबलों में अच्छी कामयाबी हासिल की.”
वह कहते हैं, “वैसे तो अरशद नदीम शॉट पुट, डिस्कस थ्रो और दूसरे इवेंट्स में भी हिस्सा लेते थे लेकिन मैंने उनके लंबे क़द को देखकर उन्हें जैवलिन थ्रो के लिए तैयार किया.”
रशीद अहमद साक़ी बताते हैं, “मैंने अरशद नदीम को ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान एयर फ़ोर्स भेजा लेकिन एक हफ़्ते बाद ही वापस बुला लिया. इस दौरान पाकिस्तान आर्मी ने भी अरशद नदीम में दिलचस्पी ली बल्कि एक दिन आर्मी की गाड़ी आई और उसमें मौजूद एक कर्नल साहब मेरे बारे में पूछ रहे थे.”
साक़ी उस दिन के बारे में बताते हैं, “मैं घबरा गया कि क्या माजरा है? लेकिन जब उन्होंने अरशद नदीम की बात की तो मेरी जान में जान आई. कर्नल साहब बोले, अरशद नदीम को आर्मी में दे दें लेकिन मैंने इनकार कर दिया. कर्नल साहब ने वजह पूछी तो मैंने बताया कि आप लोग इसकी ट्रेनिंग मिलिट्री अंदाज़ में करेंगे. बहरहाल, उसके बाद मैं अरशद नदीम को ‘वापडा’ (वॉटर ऐंड पावर डेवलपमेंट अथॉरिटी) के ट्रायल्स में भेजा जहां वह सेलेक्ट हो गए.”
मियाँ चुन्नु से शुरू हुआ सफर

अरशद नदीम शादीशुदा हैं और उन्हें एक बेटा और एक बेटी है.
रशीद अहमद साक़ी ने बताया था, “मैं अरशद नदीम को मज़ाक़ में कहता था कि ओलंपिक में शामिल होने का सपना पूरा हो जाए तो फिर शादी करना लेकिन आपको पता ही है कि गांव में शादियां कम उम्र में और जल्दी हो जाया करती हैं.”
अरशद नदीम का सफ़र मियां चुन्नू के घास वाले मैदान से शुरू हुआ जो उन्हें इंटरनेशनल मुक़ाबलों में ले गया.
अरशद नदीम के कोच फ़ैयाज़ हुसैन बुख़ारी हैं जिनका संबंध पाकिस्तान ‘वापडा’ से है.
फ़ैयाज़ हुसैन बुख़ारी ने बीबीसी उर्दू से बात करते हुए कहा था, “अरशद नदीम एक समझदार एथलीट हैं जो बहुत जल्दी सीखने की कोशिश करते हैं. जो काम एक आम एथलीट छह माह में करता है अरशद वह काम एक माह में कर लेते हैं.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















