तुर्की के शूटर यूसुफ़ डिकेक के इस अंदाज़ की वाहवाही क्यों होने लगी

इमेज स्रोत, Getty Images
30 जुलाई को जिस मैच में भारत की मनु भाकर और सरबजोत सिंह ने कांस्य पदक जीता, उसी मैच की एक तस्वीर दुनिया के कई देशों में चर्चा में बनी हुई है.
इस तस्वीर पर प्रतिक्रिया देने वाले कुछ लोग हैरत जता रहे हैं और कुछ सवाल उठा रहे हैं.
ये तस्वीर है तुर्की के 51 साल के शूटर यूसुफ़ डिकेक की, जिनके पेरिस ओलंपिक में दिखे अंदाज़ को लोग काफ़ी पसंद कर रहे हैं.
जिस मैच में मनु और सरबजोत ने कांस्य पदक जीता, उसी मैच में एक हाथ जेब में डाले और साधारण चश्मे के साथ यूसुफ़ और उनकी साथी सेव्वल इल्यादा तरहान ने रजत पदक जीता था.
मगर जिस तरह से 10 मीटर एयर पिस्टल के मिक्स डबल मैच में यूसुफ़ ने निशाना लगाया वो बाक़ियों से अलग था.

इमेज स्रोत, BBC
यूसुफ़ का ऐसे खेलना ख़ास क्यों
निशानेबाज़ी के एथलीट कानों में बड़े हेडफोन, निशाना लगाने में मदद करने वाला एक तरह का चश्मा लगाकर खड़े होते हैं.
जैसे- मूमन लेंस, ब्लाइंडर और ईयर प्रोटेक्टर.
इन चीज़ों को शूटिंग गेम के लिए ज़रूरी माना जाता है.
अमूमन निशानेबाज रोशनी कम करने के लिए आंख के ऊपर लगाई जाने वाली वाइज़र यानी एक किस्म की टोपी और बेहतर फोकस के लिए एक आंख पर ब्लाइंडर लगाते हैं.
मगर पेरिस ओलंपिक में तुर्की के निशानेबाज़ यूसुफ़ डिकेक इन सबके बग़ैर शूटिंग रेंज में उतरकर निशाना साधते हैं और सिल्वर मेडल जीतते हैं. हालांकि यूसुफ़ ने बहुत छोटे ईयर प्लग पहने हुए थे ताकि शोर से ध्यान ना भटके.
अब इस मैच के कई दिन बीतने के बाद भी यूसुफ़ की तस्वीरों पर आम इंसान से लेकर रईस कारोबारी एलन मस्क तक प्रतिक्रिया दे रहे हैं.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त

इमेज स्रोत, Getty Images
सोशल मीडिया पर छाया डिकेक का अंदाज़
यूसुफ़ के उलट उनकी पार्टनर तरहान बड़े एयर डिफेंडर और वाइज़र पहन कर खेल रही थीं.
उनकी चोटियां भी तुर्की के झंडे के लाल और सफेद रंग की डोरियों से बंधी थीं. हालांकि वो भी अपना एक हाथ जेब में रख कर निशाना साध रही थीं.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक यूजर ने लिखा,''तुर्की ने 51 साल के एक व्यक्ति को बिना स्पेशलाइज्ड लेंस, आई कवर और ईयर प्रोटेक्शन के भेजा और उसने सिल्वर मेडल जीत लिया.''
एक दूसरे यूजर ने लिखा,''कॉफी के लिए जा रहे थे तो शूटिंग के लिए रुक गए.''
एक व्यक्ति ने लिखा,'' एक दम कूल और रिलैक्स.''

इमेज स्रोत, Twitter
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के मालिक एलन मस्क ने एक ऐसे ट्वीट को रीपोस्ट किया है जिसमें उनके प्रतिद्वंद्वी फेसबुक, मेटा और लिंक्डइन की तुलना में यूसुफ़ को एक्स बताया गया है.
इस री पोस्ट में यूसुफ़ को एक्स के तौर पर दिखाया गया है जो बगैर स्पेशलाइज्ड लेंस और वाइज़र के साथ खेल रहे हैं. जबकि प्रतिद्वंद्वी निशानेबाज पूरे गियर के साथ मैदान में है.
फेसबुक पर दीपेंद्र नाम के यूज़र लिखते हैं, ''तुर्की के इस खिलाड़ी ने पूरी शानो शौकत से ओलंपिक में निशानेबाजी में सिल्वर मैडल जीता. पर मैं उसके इस तौर तरीके और अंदाज़ के सख्त ख़िलाफ़ हूं.''
''इतने बड़े आयोजन में निशानेबाजी करते समय कुछ मापदंड निर्धारित होते हैं, मसलन, आंखों में स्पेशल लेंस लगाना कानों में ईयर पैड लगाना और तमाम तरह की चीजें, इसने ऐसा कुछ भी नहीं किया. हालांकि, आप यह सब अपनाने के लिए किसी भी तरह से बाध्य नहीं होते हैं. उसने लीक से हटकर किया और सिल्वर भी जीता.''
वो लिखते हैं, ''मेरे आकलन के अनुसार अगर वह अपना एक हाथ जब में नहीं डालकर निशाना लगाता तो गोल्ड जीत जाता. अगली बार के लिए इस बात पर विशेष ध्यान दे.''

इमेज स्रोत, EPA
कौन हैं यूसुफ़ डिकेक
51 साल के यूसुफ़ कोई पहली बार ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले रहे हैं. वह 2008 से हर समर ओलंपिक में हिस्सा ले रहे हैं.
इस ओलंपिक के इंडिविजुअल ओलंपिक में यूसुफ़ 13 वें स्थान पर था.
लेकिन मिक्स्ड डबल में उन्हें मेडल जीतने में क़ामयाबी मिली.
अब वो 2028 में मेडल जीतने की उम्मीद कर रहे हैं.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर यूसुफ़ ने लिखा, ''उम्मीद करता हूं कि 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले ओलंपिक में गोल्ड आए.''
यूसुफ़ ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा, ''मैं बहुत खुश हूं कि तुर्की के लिए हम पहला ओलंपिक मेडल जीतने में सफल रहे. जिन करोड़ों लोगों ने दुआएं की, ये मेडल उन्हीं तुर्की के लोगों को समर्पित.''
यूसुफ़ ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपने कई वीडियो को एक साथ अपने इंस्टाग्राम पेज पर भी डाल रखा है.
इसमें टर्किश भाषा के मीम भी शामिल हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
क्या हैं नियम
ओलंपिक में शूटर को ये आज़ादी रहती है वो अपनी मर्जी के मुताबिक चीजें पहन कर प्रतियोगिता में आ सकते हैं.
प्रतियोगिता स्थल पर कई शूटर आंखों को रोशनी की चमक से बचान के वाइज़र पहने हुए दिखे जबकि दूसरी आंख में उन्होंने ब्लाइंडर लगा रखा था ताकि एक आंख से निशाना लगाने में ज्यादा ध्यान केंद्रित कर सकें.
यूसुफ़ की तरह गोल्ड मेडल जीतने वाली चीन के राइफल शूटर ल्यू युकून ने भी सिर्फ इयरप्लग लगा रहा था और उन्होंने कोई वाइजर या ब्लाइंडर नहीं पहना था.
इस ओलंपिक में यूसुफ़ के अलावा दक्षिण कोरियाई शूटर किम येजी के आत्मविश्वास की भी काफी चर्चा रही.
ओलंपिक गेम्स के सोशल मीडिया हैंडल से किम येजी और यूसुफ़ की तस्वीरों को साझा कर लिखा गया- ओलंपिक के शूटिंग स्टार, जिनकी ज़रूरत होने का हमें पता नहीं था.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












