सरबजोत सिंह: युद्ध में एक हाथ खोने वाले हंगरी के शूटर से कैसे प्रेरित होते हैं कांस्य पदक विजेता

सरबजोत सिंह

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    • Author, सौरभ दुग्गल
    • पदनाम, बीबीसी पंजाबी के लिए

अंबाला के दीन गांव में जन्में 22 वर्षीय सरबजोत सिंह ने मंगलवार को मनु भाकर के साथ मिलकर पेरिस ओलंपिक के 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता है.

दक्षिण कोरिया के साथ हुए तीसरे स्थान के एक रोमांचक मैच में भारतीय जोड़ी ने बढ़िया प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया है.

सरबजोत सिंह के कोच अभिषेक राना ने जीत के बाद बताया कि कैसे सरबजोत को हंगरी के शूटर कारोली टाकास की कहानी ने बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए हमेशा से प्रेरित किया है.

अभिषेक राना ने बताया, "मैंने महेश्वर नाम के एक मोटिवेशनल स्पीकर ने कारोली का क़िस्सा सुना था. एक ग्रेनेड धमाके में एक दायां हाथ खोलने के बावजूद कारोली ने बाएं हाथ से शूटिंग करना सीखा था. इसके बाद उन्होंने ओलंपिक में शूटिंग प्रतिस्पर्धा में गोल्ड जीता. मुझे ये कहानी हमेशा से प्रेरित करती रही है. इस कहानी से मैंने सीखा कि ज़िंदगी में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, दृढ़ निश्चय के साथ आप अपने लक्ष्य को पा सकते हैं. मैं हमेशा सरबजोत को यही क़िस्सा सुनाता रहता हूँ. ये कहानी उन्हें हमेशा मोटिवेट करती रही और अपने उद्देश्य पर फोकस बनाए रखने में मदद करती है."

10 मीटर एयर पिस्टल के एकल मुकाबले के फ़ाइनल में न पहुँचने के बाद सरबजोत काफ़ी दुखी थे.

अभिषेक राना कहते हैं, "ऐसा लग रहा था कि उनके चेहरे से मुस्कान ग़ायब हो गई है. शाम को मैंने उन्हें प्रेरित किया और एक बार फिर हंगरी के उस महान शूटर का क़िस्सा सुनाया. इसका असर भी हुआ और वो मिक्स्ड इवेंट के लिए क्वालीफ़ाई कर गया. कांस्य पदक के मुकाबले से पहले मैंने सरबजोत सिंह को एक ही चीज़ बताई - सबकुछ भूल जाओ और अपने लक्ष्य पर फोकस रखो. जमकर शूट करो."

सरबजोत सिंह साल 2016 में अभिषेक राना के पास कोचिंग के लिए उनकी अंबाला स्थित एकेडमी में आए थे.

पहले ही साल यानी 2017 में सरबजोत सिंह ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था. तभी से शूटिंग में सरबजोत से काफ़ी उम्मीदें की जाने लगीं थीं.

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कुरुक्षेत्र गुरुकुल में पढ़ने वाले और यहां से खेलों की दुनिया में कदम रखने वाले अभिषेक कहते हैं, "इसके बाद, सरबजोत सिंह ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. राष्ट्रीय स्तर पर उनका दबदबा रहा.उनका मानसिक तौर पर मज़बूत रहना और कड़ी लगन ही उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह है."

उन्होंने कहा, "गुरुकुल के माहौल में रहने की वजह से अनुशासन और डिजिटल दुनिया से ध्यान न भटकने देना ही प्राथमिकताएं थीं. मैंने अपने प्रशिक्षण में यही अनुशासन सिखाया. मुझे वो समय याद है जब सरबजोत ने अपने फ़ोन में पपी (ऑनलाइन गेम) डाउनलोड किया था. उसके कुछ दिनों बाद ही सरबजोत के माता-पिता ने बताया कि वो इसपर बहुत ज़्यादा समय बीता रहा है. मैं झट से उस ऐप को हटाया और ये सुनिश्चित किया कि उसका ध्यान कहीं न भटके."

अभिषेक राणा खुद भी साल 2007 और 2009 में भारत की जूनियर टीम का हिस्सा रहे लेकिन वह ख़ास छाप नहीं छोड़ पाए और साल 2011 में बाहर हो गए. इसके बाद उन्होंने साल 2016 में शूटिंग एकेडमी शुरू करने का फ़ैसला किया.

अभिषेक राणा कहते हैं, "जो सपना में स्वयं पूरा नहीं कर सका वो मैं अपने सिखाए शूटरों के ज़रिए पूरा करना चाहता था. सरबजोत सिंह ने मेरे ओलंपिक ड्रीम पूरा किया है. ये मेरे लिए एक अहम लम्हा है. सरबजोत की ओलंपिक यात्रा में कई लोगों का योगदान है."

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कौन थे कारोली टाकास

कारोली टाकास साल 1938 में सेना में सार्जेंट के पद पर रहते हुए हंगरी की पिस्टल शूटिंग टीम का हिस्सा थे. लेकिन उनके दाएं हाथ में एक ग्रेनेड फटने से हाथ पूरी तरह बेकार हो गया. अस्पताल में महीनों बिताने के बाद टाकास ने बाएं हाथ से शूट करना सीखा. हालांकि, उन्होंने इस बारे में किसी को जानकारी नहीं होने दी. उन्होंने 1948 में 38 साल की उम्र में ओलंपिक में हिस्सा लिया था.

टाकास ने हंगरी की पिस्टल शूटिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लिया. वह वर्ल्ड चैंपियनशिप में ऑटोमैटिक पिस्टल इवेंट जीतने वाली हंगरी की टीम का भी हिस्सा रहे. 1940 और 1944 में विश्व युद्ध की वजह से ओलंपिक नहीं हुए लेकिन 1948 में टाकास ने रैपिड-पिस्टल इवेंट में क्वॉलिफ़ाई किया. उस समय उनकी उम्र 38 साल थी.

वीडियो कैप्शन, मनु भाकर ने एक ही ओलंपिक में दो मेडल हासिल कर इतिहास रच दिया है.
पेरिस ओलंपिक

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सरबजोत सिंह के पिता

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सरबजोत सिंह के पिता जितेंदर सिंह ने अपने बेटे को मेडल मिलने पर कहा, "हम मनु और सरबजोत को मेडल मिलने पर बेहद ख़ुश हैं. सबसे पहले तो मैं गुरुद्वारे जा रहा हूँ. उसके बाद हम अपने गांव में बड़ा जश्न करेंगे."

जितेंदर सिंह ने बताया कि न तो उन्होंने और न ही सरबजोत सिंह की मां ने उनका मैच नहीं देखा है.

उन्होंने कहा, "आज बहुत खुशी हुई, बेटे ने ओलंपिक का मेडल जीत लिया है. हमारी बहुत बधाई."

सरबजोत सिंह और मनु भाकर की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बधाई दी है.

पीएम मोदी ने लिखा, "ओलंपिक के 10 मीटर एयर पिस्टल टीम इवेंट में ब्रॉन्ज़ जीतने के लिए मनु भाकर और सरबजोत सिंह को बधाई. दोनों ने बढ़िया स्किल और टीम वर्क दिखाया. भारत आज आनंदित है."

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