मीराबाई चनू: वेटलिफ़्टिंग में जिन पर है भारत के लिए मेडल की उम्मीदों का भार

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इमेज कैप्शन, वेटलिफ़्टर मीराबाई चनू लगातार दो साल तक बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर की विजेता रही हैं

टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतने वालीं वेटलिफ़्टर मीराबाई चनू बुधवार को पेरिस ओलंपिक में 49 किग्रा भार वर्ग में खेलने के लिए उतरेंगी.

चनू और भारत को उम्मीद है कि वो दो ओलंपिक मेडल जीतने वाली भारत की पहली भारोत्तोलक बनेंगी.

मीराबाई चनू उन वेटलिफ़्टरों में शामिल रही हैं जो 200 किलों से ज़्यादा का वज़न उठाती रही हैं.

चनू ने 2022 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में 201 किग्रा (88 किग्रा और 113 किग्रा) उठाया था.

उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में 202 किग्रा (87 किग्रा और 115 किग्रा) वज़न उठाकर रजत पदक जीता था.

ऐसे में चनू ये प्रदर्शन दोहराने में कामयाब होंगी तो उन्हें सिल्वर या ब्रॉन्ज़ मेडल मिल सकता है.

अगर वो पांच किलोग्राम का सुधार कर लेंगी तो उनके खाते में गोल्ड भी जा सकता है.

लगातार दो बार 'बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर' अवॉर्ड की विजेता

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इमेज कैप्शन, मीराबाई चनू लगातार दो बार बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड जीतने वालीं पहली महिला खिलाड़ी हैं.

वेटलिफ़्टर मीराबाई चनू लगातार दो साल तक बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर की विजेता रही हैं. उन्होंने 2021 और 2022 में लगातार दो सालों में यह अवार्ड जीता था.

2022 में बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर सम्मान लेते वक्त मीराबाई चनू ने लड़कियों के खेल में जाने और वेटलिफ़्टिंग करने की चुनौतियों को लेकर कहा था, "कुछ लोग कहते हैं कि वेटलिफ़्टिंग में जाने से लड़कियों की बॉडी ख़राब होती है लेकिन मैं पहले भी ऐसी थी और अब भी ऐसी हूं. हमें इस सोच को बदलना होगा. जब से लड़कियां मेडल लाई हैं काफ़ी बदलाव आया है. परिवार भी बहुत चिंतित होता था लेकिन अब काफ़ी बदलाव आए हैं."

बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड की शुरुआत साल 2019 में हुई थी.

इसका उद्देश्य विश्व स्तर पर खेल के क्षेत्र में अपने नाम की छाप छोड़ने वाली भारतीय महिला खिलाड़ियों को सम्मानित करना और उनके जीवन की चुनौतियों की कहानियों को सामने लाना है.

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मीराबाई चनू का सफ़र कैसे रहा?

वीडियो कैप्शन, मीराबाई चानू: बाँस से वेटलिफ्टिंग की प्रैक्टिस करने से देश के लिए मेडल जीतने का सफ़र

मीराबाई चनू का अब तक का सफ़र उतार-चढ़ाव से भरा रहा है.

चनू के लिए सबसे बुरे दिनों में एक दिन 2016 के रियो ओलंपिक में था जब उनके नाम के आगे 'डिड नॉट फ़िनिश' लिखा हुआ था.

इसका ऐसा असर हुआ कि मीराबाई चनू डिप्रेशन में चली गईं और उन्हें मनोवैज्ञानिक की मदद लेनी पड़ी.

इसके बाद मीराबाई चनू ने खेल को अलविदा कहने का मन बना लिया था लेकिन फिर उन्होंने आख़िर तक हार नहीं मानी और 2017 में हुई वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप में 194 किलोग्राम उठाकर गोल्ड जीता.

चनू 22 साल में ऐसा करने वाली पहली भारतीय बन गई थीं.

मीराबाई चनू ने कौन से मेडल जीते हैं?

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इमेज कैप्शन, टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने के बाद ख़ुशी का इज़हार करतीं मीराबाई चनू
  • टोक्यो ओलंपिक 2020- सिल्वर
  • विश्व चैंपियनशिप 2022- सिल्वर
  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2022- गोल्ड
  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2014- सिल्वर
  • विश्व चैंपियनशिप 2017- गोल्ड
  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2018- गोल्ड
  • एशियन चैंपियनशिप 2020- कांस्य

कैसे बनीं वेटलिफ़्टर?

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इमेज कैप्शन, चनू ने अपनी आइडल कुंजुरानी के पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़कर 2016 में 192 किलोग्राम वज़न उठाया.
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देश के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में चाय बेचने वाले पिता के घर में पैदा हुईं मीराबाई चनू को अपने करियर के शुरुआती दौर में बहुत अधिक आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा.

मणिपुर की राजधानी इंफाल से 200 किलोमीटर दूर छोटे से गांव में आठ अगस्त 1994 को जन्मीं मीराबाई चनू ने बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्स वूमन ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड के लिए दिए इंटरव्यू में बताया था, ''गांव में हम सबको पहाड़ी से पानी और लकड़ी लानी पड़ती थी. मेरे भाई कई चक्कर लगाते थे और सामान ढोकर लाते थे, लेकिन मैं एक ही चक्कर में सब कर लेती थी.''

''एक बार मैंने एक वेटलिफ़्टिंग हॉल देखा जहां हर कोई प्रैक्टिस कर रहा था और चिल्ला रहा था. मुझे अच्छा लगा और मेरी रुचि जाग गई.''

मीराबाई चनू के लिए ये सफ़र आसान नहीं था क्योंकि उन्हें वेटलिफ़्टर बनने के लिए अपने माता-पिता को मनाना था.

चनू ने ज़िद नहीं छोड़ी और आखिर में उनकी जीत हुई. इस तरह से चनू ने बिना ख़ास सुविधाओं वाले गांव में बाँस से ही प्रैक्टिस शुरू की.

इस दौरान भारतीय वेटलिफ़्टर कुंजुरानी देवी उनकी आदर्श बन गई थीं.

गांव में ट्रेनिंग सेंटर नहीं होने के कारण चनू 50-60 किलोमीटर दूर ट्रेनिंग के लिए जाया करती थीं.

इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और वो 11 साल में अंडर-15 चैंपियन बन गई थीं और 17 साल में जूनियर चैंपियन बन गईं.

वीडियो कैप्शन, भारत के जेवलिन थ्रो खिलाड़ी नीरज चोपड़ा पेरिस ओलंपिक के फ़ाइनल में पहुंच गए हैं.

धीरे-धीरे अपनी मंज़िल की तरफ़ बढ़ रहीं चनू की ज़िंदगी में वो दिन आया जब उन्होंने सुर्खियां बटोरीं.

चनू ने इतनी मेहनत की कि उन्होंने अपनी आइडल कुंजुरानी के पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़कर 2016 में 192 किलोग्राम वज़न उठाया.

वर्ल्ड चैंपियनशिप के अलावा, मीराबाई ने टोक्यो ओलंपिक और ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीता है.

वेटलिफ्टिंग के अलावा मीरा को डांस का भी शौक़ है. बीबीसी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था, "मैं कभी-कभी ट्रेनिंग के बाद कमरा बंद करके डांस करती हूं और मुझे सलमान ख़ान पसंद हैं."

कभी गांव में चूल्हा जलाने के लिए लकड़ियां ढोने वालीं मीराबाई अब वेटलिफ़्टिंग में भारत की उम्मीदों का भार उठा रही हैं.

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