वो टैटू जिसने मनु भाकर को पेरिस ओलंपिक में मेडल जीतने के लिए प्रेरित किया

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- Author, सौरभ दुग्गल
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी पंजाबी के लिए
टोक्यो ओलंपिक 2020 के दौरान ख़राब प्रदर्शन से जूझने वाली भारतीय शूटर मनु भाकर ने खुद को प्रेरित रखने के लिए अपनी गर्दन के पीछे 'स्टिल आई राईज़' का टैटू गुदवा रखा है.
और 2024 में वो पेरिस ओलंपिक में खेल रही थीं और पोडियम में थीं.
पेरिस ओलंपिक में मेडल जीतने वाली भारत की पहली महिला शूटर बनकर मनु भाकर ने इतिहास रच दिया है.
उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता और इसके साथ ही उन्होंने पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत के लिए पदक का खाता भी खोला.
कई वर्ल्ड कप की विजेता रहीं मनु भाकर को 'स्टिल आई राईज़' टैटू बनवाने की प्रेरणा कवियित्री और मानवाधिकार कार्यकर्ता माया एंजेलो की कविता से मिली, जिसका शीर्षक भी यही है.
यह मशहूर कविता लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत रही है. मुश्किलों और हताशा के समय में यह लोगों को फिर से उठ खड़ा होने के लिए प्रेरणा देती है.
भारत की ओलंपियन शूटर मनु भाकर ने इस कविता से प्रेरणा ली है और अब वो ओलंपिक मेडल की विजेता हैं.
पेरिस ओलंपिक 2024: पदक तालिका यहां देखें
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साल 2023 में बीबीसी पंजाबी के खेल मामलों के सहयोगी पत्रकार सौरभ दुग्गल ने चंडीगढ़ में एक निजी कार्यक्रम के दौरान भारतीय शूटर मनु भाकर से मुलाक़ात की थी.
इस दौरान मनु ने उनसे माया एंजेलो की कविता के शीर्षक से लिए गए 'स्टिल आई राईज़' टैटू और टोक्यो ओलंपिक के दौरान अपने निराशाजनक प्रदर्शन के बारे में बात की थी.

करियर में उतार चढ़ाव
पेरिस ओलंपिक में 25 मीटर शूटिंग और 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड में भी हिस्सा लेने जा रहीं मनु भाकर ने उस दौरान कहा था, "सफलता और असफलता एक खिलाड़ी की ज़िंदगी का अहम हिस्सा होते हैं. लेकिन सबसे अहम बात ये है कि करियर में आ रहे उतार-चढ़ाव से हम कैसे निपटते हैं और दोबारा उठ खड़ा होने के लिए खुद को कैसे तैयार करते हैं."
मनु पिछले साल आर्यन मान फ़ाउंडेशन के एक कार्यक्रम के लिए चंडीगढ़ आई थीं. इसी कार्यक्रम में उनसे मेरी मुलाक़ात हुई थी.
अपने टैटू के बारे में उन्होंने कहा था, "स्टिल आई राईज़ - केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि यह एक फ़ेनोमिना है अपने मुश्किल दौर में खुद को साबित करने का."
"ये शब्द मेरे लिए प्रेरणा के स्रोत हैं. ये मेरे दृढ़ निश्चय को और बढ़ाते हैं, चाहे जितनी असफलता मिले, मुझे भरोसा है कि मैं फिर से उठ खड़ी होऊंगी."
16 साल की उम्र में ही मनु भाकर कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय खिलाड़ी बन गई थीं.
साल 2018 में गोल्ड कोस्ट गेम्स में उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता था.
एक टीनेज शूटिंग स्टार के रूप में हरियाणा की इस शूटर ने 2020 के टोक्यो ओलंपिक (कोविड की वजह से इसे 2021 में आयोजित किया गया था) से पहले वर्ल्ड कप खेलों में नौ स्वर्ण और दो रजत पदक जीते थे.
वर्ल्ड कप के प्रदर्शन को देखते हुए मनु भाकर को टोक्यो ओलंपिक में मेडल का मज़बूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन अपने पसंदीदा 10 मीटर एयर पिस्टर एकल प्रतियोगिता में वो उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सकीं.
मिश्रित टीम प्रतियोगिता में भी वो कामयाब नहीं हुईं और 25 मीटर पिस्टल प्रतियोगिता के फ़ाइनल में भी नहीं पहुंच पाईं.
ओलंपिक के बाद मनु मुश्किल दौर से गुजरीं और टोक्यो खेलों में निराशाजनक प्रदर्शन के लिए उन्हें आलोचना भी झेलनी पड़ी.
इसके बाद उन्होंने नेशनल स्क्वाड से भी अपना स्थान गंवा दिया.

कभी हार न मानने की प्रेरणा
टोक्यो ओलंपिक से पहले मनु भाकर ने 11 वर्ल्ड कप मेडल जीते थे. लेकिन इन खेलों के बाद वो अपने पुराने फ़ॉर्म में आने के लिए जूझ रही थीं.
इसी साल उन्होंने वर्ल्ड कप में 25 मीटर पिस्टल शूटिंग प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता और टीम कैटेगरी में वर्ल्ड चैंपियनशिप (2022, 23) में दो मेडल जीते थे.
अपने मौजूदा खेल करियर में उतार-चढ़ाव पर अपने अनुभव साझा करते हुए मनु ने कहा था, "जब आप गिरावट के दौर में होते हैं तो बस एक ही बात रहती है कि आप कभी भी हार न मानें और बड़ी सफलता हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करना जारी रखें."

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रविवार को पेरिस ओलंपिक में पदक जीतने के बाद, अब पेरिस में उनकी नज़र 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल प्रतियोगिता और 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड प्रतियोगिता पर होगी.
बीते साल मनु ने कहा था, "टोक्यो में जो कुछ हुआ उससे उबरने में मुझे मुश्किलों का सामना करना पड़ा. लेकिन मुझे भरोसा था कि मैं ज़रूर वापसी करूंगी, मैं फिर से खड़ी होऊंगी."
"मैं 'स्टिल आई राईज़' शब्द से खुद को जोड़ सकती हूं और मेरे शूटिंग करियर का यह मर्म भी है. 'स्टिल आई राईज़' मेरे लिए प्रेरणादायक है, इसलिए मैंने इसका टैटू बनवाने का निर्णय लिया."
मनु भाकर ने कहा, "मैं इसे गुदवाने की योजना कुछ समय से बना रही थी, लेकिन यह पर्मानेंट टैटू है, इसलिए मुझे कई बार सोचना पड़ा कि मैं इसे कहां गुदवाना चाहती हूं."
उन्होंने कहा, "मैं शरीर के ऐसे हिस्से पर टैटू नहीं बनवाना चाहती थी जहां वो स्पष्ट दिखे. समय के साथ इसे लगातार देखते हुए मैं इससे ऊब सकती थी, इसलिए मैंने सोचा कि इसे गर्दन पर पीछे की ओर बनवाया जाए."
"पिछले साल ही दिसंबर में मैंने यह टैटू बनवाया था. और मैं यही कहूंगी कि टोक्यो मेरे लिए अतीत है और मैं अभी भी आगे बढ़ रही हूं."
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