पेरिस ओलंपिक: कौन हैं वो खिलाड़ी जो दिला सकते हैं भारत को मेडल

नीजर चोपड़ा

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इमेज कैप्शन, भारत ने ओलंपिक में अब तक 35 पदक जीते हैं. जिनमें निशानेबाज़ अभिनव बिंद्रा (2008) और नीरज चोपड़ा (2021) व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता हैं.

क्या भारत के खिलाड़ी पेरिस ओलंपिक में टोक्यो ओलंपिक से बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे?

क्या नीरज चोपड़ा फिर से गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच सकेंगे?

क्या वो भारत के पहले ऐसे खिलाड़ी बन पाएंगे जिसने दो बार एकल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया हो?

अब तक, भारत ने ओलंपिक में 35 पदक जीते हैं. जिनमें निशानेबाज़ अभिनव बिंद्रा (2008) और नीरज चोपड़ा (2021) ही व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता हैं.

क्या भारत के पहलवान, पिछले साल के कुश्ती विवाद को पीछे छोड़कर एक बार फिर देश के लिए मेडल जीत पाएंगे?

ये सभी सवाल खेल प्रेमियों के दिमाग में हैं?

2020 टोक्यो ओलंपिक में भारत ने सात पदक जीते थे जो ओलंपिक में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है.

ऐसे में अब भारत का लक्ष्य होगा अपने मेडल्स की संख्या को डबल डिजिट यानी 10 से ज़्यादा करना

लेकिन विश्लेषकों के मुताबिक़ पेरिस ओलंपिक में ये मुक़ाम हासिल करना भारतीय दल के लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी. भाला फेंक में मौजूदा चैंपियन नीरज चोपड़ा को छोड़ दें तो बाक़ी एथलीट अपनी-अपनी स्पर्धाओं में शीर्ष दावेदार नहीं हैं.

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सबसे अच्छा मौका

पीवी सिंधु

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इमेज कैप्शन, पीवी सिंधु ने 2016 के रियो ओलंपिक में रजत पदक और 2020 टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था.
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पोडियम फ़िनिश देखने की भारत की उम्मीदें काफी हद तक नीरज पर निर्भर हैं.

उनके अलावा चिराग शेट्टी और सतविकसाईराज रणकीरेड्डी की बैडमिंटन जोड़ी से भी भारत को काफ़ी उम्मीदें हैं.

हालांकि नीरज, 90 मीटर तक भाला नहीं फेंक पाए हैं लेकिन टोक्यो ओलंपिक के बाद भी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है. अगर फ़िटनेस भी उनका साथ देती है तो मौजूदा फ़ॉर्म के लिहाज़ से उनके पास इतिहास बनाने का सुनहरा मौक़ा है.

इससे पहले केवल बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु और पहलवान सुशील कुमार ही भारत के दो ओलंपियन रहे हैं जिन्होंने लगातार दो पदक जीते हैं.

सिंधु ने 2016 के रियो ओलंपिक में रजत पदक और 2020 टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था.

वहीं पहलवान सुशील कुमार ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में कांस्य और फिर 2012 लंदन ओलंपिक में रजत पदक जीता था.

चिराग शेट्टी और सतविकसाईराज रणकीरेड्डी की बैडमिंटन जोड़ी का प्रभुत्व 90 के दशक के अंत में टेनिस की महान भारतीय जोड़ी लिएंडर पेस और महेश भूपति की याद दिलाता है. वे एक ऐसी जोड़ी हैं जिनके पास पदक जीतने का सुनहरा मौक़ा है.

पीवी सिंधु फ़िलहाल अपने सर्वश्रेष्ठ दौर में नहीं हैं और उनको एक मुश्किल ड्रॉ भी मिला है. अगर वो शुरुआती कठिन दौर पार कर लेती हैं तो उनका अनुभव उनको मेडल तक पहुंचाने में मदद कर सकता है.

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शूटिंग

सिफ़त कौर

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इमेज कैप्शन, निशानेबाजों में सिफ़त कौर (50 मीटर थ्री पोजीशन) से पदक की सबसे ज़्यादा उम्मीदें हैं.

निशानेबाजों में सिफ़त कौर (50 मीटर थ्री पोजीशन), संदीप सिंह (10 मीटर एयर राइफ़ल) और ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर (पुरुषों की 50 मीटर राइफ़ल) से पदक की सबसे ज़्यादा उम्मीदें हैं.

भारत को इससे पहले आख़िरी बार निशाने बाज़ी में ओलंपिक मेडल गगन नारंग ने 2012 के लंदन ओलंपिक में दिलाया था. उन्होंने तब कांस्य पदक हासिल किया था.

इस बार गगन नारंग, भारत के शेफ डी मिशन हैं.

कुश्ती

अंशू मलिक

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इमेज कैप्शन, इस बार अंशू मलिक, अंतिम पंघाल और अमन सहरावत को भारत का सबसे अच्छा दांव माना जा रहा है.

पिछले साल कुश्ती संघ और भारत के कई नामी पहलवानों के बीच हुए विवाद ने भारत की ओलंपिक तैयारियों पर ख़ासा असर डाला.

लंबे समय तक कोई राष्ट्रीय कैंप नहीं लग पाया और पहलवान कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले पाए.

हलांकि इस बार अंशू मलिक, अंतिम पंघाल और अमन सहरावत को भारत का सबसे अच्छा दांव माना जा रहा है.

वहीं टोक्यो खेलों की रजत पदक विजेता, भारोत्तोलक मीराबाई चानू पिछले कुछ समय से चोट और फॉर्म से जूझ रही हैं. ऐसे में क्या वो अपनी सफलता दोहरा पाएंगी, इस पर सवालिया निशान हैं.

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भारत की कमज़ोर कड़ी

प्रधानमंत्री के साथ ओलंपिक के खिलाड़ी

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भारत के 117 सदस्यीय दल में से एथलेटिक्स में 29, निशानेबाजी (शूटिंग) में 21 और हॉकी में 19 सदस्यों की टीम ओलंपिक खेलने पेरिस पहुंची है.

इन 69 एथलीटों में से 40 नवोदित खिलाड़ी हैं. यानी मोटे तौर पर, भारत के इन नवोदित खिलाड़ियों के लिए बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना खेल दिखाने का ये पहला मौक़ा होगा.

फिर ऐसे अनुभवी खिलाड़ी भी हैं जो संभवत: अपना आख़िरी ओलिंपिक खेल रहे हैं जैसे बैडमिंटन खिलाडी पीवी सिंधु, टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना, टेबल टेनिस खिलाड़ी अचंता शरथ कमल और हॉकी गोलकीपर पीआर श्रीजेश जैसे खिलाड़ी.

टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन कर कांस्य पदक जीता था.

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने 41 सालों बाद कोई ओलंपिक मेडल जीता था.

लेकिन इस बार पुरुष हॉकी टीम बहुत अच्छे फ़ॉर्म में नहीं है.

हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में भारतीय टीम ने सभी पांच गेम गंवाए और प्रो लीग में भी संघर्ष किया.

इसके अलावा भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, अर्जेंटीना, न्यूजीलैंड और आयरलैंड जैसी मज़बूत टीमों वाले ग्रुप में रखा गया है. अगर टीम को इस पूल से शीर्ष चार में जगह बनानी है तो ग़लती की कोई गुंजाइश नहीं है.

वहीं महिला हॉकी टीम पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफ़ाई भी नहीं कर पाई.

मुक्केबाजों और पहलवानों के पास मैच प्रेक्टिस की कमी है तो वहीं निशानेबाज़ी में भारत का प्रदर्शन पिछले ओलंपिक्स में मिला जुला सा रहा है.

वही ट्रैक एंड फील्ड एथलीटों, ने अच्छा प्रदर्शन किया है. विशेषकर अविनाश साबले ने, जिन्होंने तीन हज़ार मीटर स्टीपलचेज़ में हाल ही में अपना सर्वश्रेष्ठ समय 8:09.91 निकाला है, लेकिन अब भी सात अंतरराष्ट्रीय धावक ऐसे हैं जिन्होंने इससे बेहतर समय हासिल किया है.

कुल मिलाकर ट्रैक एंड फ़ील्ड में बाक़ी एथलीटों का भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, अंतरराष्ट्रीय स्तर से बहुत पीछे है. तो कम से कम इन प्रतिस्पर्धाओं में तो भारत के लिए मेडल की उम्मीद कम ही है.

(पीटीआई के वरिष्ठ पत्रकार अमनप्रीत सिंह से बातचीत पर आधारित)

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