मध्य प्रदेश में कमर और गर्दन की गहराई तक सड़क में जिन दो महिलाओं को दबाया गया, वे कौन हैं?

ममता पाण्डे

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    • Author, शुरैह नियाज़ी
    • पदनाम, भोपाल से, बीबीसी हिंदी के लिए

मध्य प्रदेश के रीवा ज़िले में रहने वाली ममता पांडेय को रुक-रुक कर वही ख़्याल आ रहा है, जिससे वो बीते रविवार के दिन गुज़री थीं.

एक ज़मीन विवाद के चलते उन्हें और उनकी जेठानी आशा पांडेय को सड़क पर कमर की गहराई तक मुरम से दबा दिया गया था. यानी कमर से नीचे का हिस्सा सड़क पर मुरम से दबा दिया गया था.

मुरम से दबी इन दोनों महिलाओं का वीडियो देखते-देखते सोशल मीडिया में वायरल हो गया था.

ममता इस समय रीवा के संजय गांधी ज़िला अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है.

उन्होंने इस घटना के बारे में बताया, ''घर पर कोई नहीं था और वो लोग हमारी ज़मीन से सड़क निकाल रहे थे. हमारा परिवार शुरू से उनका विरोध करता रहा है. उस दिन वो लोग अचानक डंपर में मुरम लेकर आ गए. इसलिये हम उन्हें रोकने के लिए डंपर के पीछे बैठ गए. उसके बाद ड्राइवर ने गेट खोलकर हमारे ऊपर मुरम डाल दी और हमें दबा दिया.''

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ममता इस घटना के बाद बेहोश हो गईं और गांव मे हल्ला होने के बाद जल्दी से लोग पहुंचे. उन्हें फावड़े की मदद से मुरम हटा कर बाहर निकाला गया.

उन्होंने उन पलों के बारे में बताया, ''मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मेरी जान जा रही है. अगर थोड़ी भी देरी होती तो शायद मैं बच नहीं पाती.''

इस घटना में आशा क़मर तक दब गई थीं लेकिन ममता पूरे गले तक मुरम के अंदर चली गई थीं.

ममता और आशा दोनों को अब भी यह डर सता रहा है कि उनकी जान लेने की कोशिश फिर से की जाएगी क्योंकि उन्होंने सड़क बनाने का विरोध किया था.

दोनों का कहना है कि उन लोगों ने उस समय धमकी दी थी कि उन्हें ज़िंदा नही छोड़ेंगे.

आशा पाण्डे

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आशा ने बताया कि जिस समय यह घटना हुई, उस समय वह लोग घर पर अकेले थे.

उन्होंने कहा, ''वे सड़क बनाने के लिए डंपर में मुरम भर कर पहुंच गए. उन्हें कहा गया कि इस मामले पर घर के पुरुष आने पर बात करेंगे. लेकिन वो लोग कुछ और सोच कर आए थे. वो कह रहे थे कि कुछ भी हो जाए रास्ता हम बनाएंगे चाहे उसके लिए हमारी जान लेनी पड़े.''

आशा कहती हैं कि अगर यह वीडियो सामने नहीं आता तो शायद वो लोग उनकी जान ले लेते और उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई भी नहीं होती.

क्या है पूरा मामला?

मध्य प्रदेश
इमेज कैप्शन, हनौता कोठार गांव जहां ये मामला हुआ

मामला रीवा ज़िले के हनौता कोठार गांव का है, जहां पर यह घटना घटी. अभियुक्त और पीड़ित दोनों ही एक ही परिवार से हैं.

लेकिन उनके बीच एक सड़क विवाद का विषय है. अभियुक्त पक्ष सड़क बनाना चाहता है जबकि पीड़ित पक्ष का कहना है कि यह उनकी ज़मीन है और वह किसी भी क़ीमत पर सड़क नहीं बनाने देंगे.

हालांकि यह मामला कोर्ट में भी चल रहा है. पीड़ित महिलाएं चाहती थीं कि कोर्ट का जो भी फ़ैसला आए उसके अनुसार, काम किया जा सकता है. लेकिन अभियुक्त पक्ष उस दिन ज़िद पर अड़ गया और मुरम से भरा डंपर लेकर आ गया. इसके बाद यह घटना घटी.

अभियुक्त पक्ष का क्या कहना है?

रीवा के पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह

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मामले में पांच अभियुक्तों में से चार की गिरफ़्तारी हो चुकी है. डंपर मालिक राजेश सिंह, चालक प्रमोद कोल और महिलाओं के रिश्तेदार विपिन को गिरफ़्तार किया गया है.

मंगलवार को अभियुक्त गोकर्ण प्रसाद पांडेय ने अदालत में आकर गिरफ़्तारी दी. एक अभियुक्त महेंद्र प्रसाद पांडेय की तलाश की जा रही है.

गोकर्ण प्रसाद पांडेय ने कहा कि उन पर झूठे आरोप लगाए गए हैं.

उन्होंने कहा, "डंपर में लाल मिट्टी हम अपने निजी काम के लिए ले जा रहे थे. इस दौरान हम लोग उस जगह पर थोड़ी मिट्टी डालकर आगे जाने वाले थे. तभी दोनों महिलाएं अचानक डंपर के पीछे आकर बैठ गईं. ड्राइवर उन्हें देख नहीं पाया और यह घटना हुई.''

उनका दावा है कि इस साझी ज़मीन पर दोनों का अधिकार है और उन लोगों को कोर्ट से न्याय ज़रूर मिलेगा.

रीवा के पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह ने बताया, ''इस मामले में फौरन कार्रवाई की गई और जितने भी अभियुक्त हैं किसी को भी छोड़ा नही जाएगा. पुलिस की टीम बचे हुये अभियुक्तों की तलाश कर रही है और उन्हें जल्द गिरफ़्तार कर लिया जाएगा.''

विपक्षी पार्टियों के निशाने पर राज्य सरकार

मोहन यादव

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इमेज कैप्शन, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (फाइल फोटो)

घटना को लेकर प्रदेश सरकार विपक्षी पार्टी और नेताओं के निशाने पर आ गई. बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले को उठाते हुये मुख्यमंत्री मोहन यादव से कहा है कि उन्हें अपना सिर शर्म से झुका लेना चाहिए.

टीएमसी ने लिखा, ''आई एनडीए की सरकार, लाई महिलाओं पर तीन गुणा अत्याचार''

मध्य प्रदेश

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मध्य प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी इस मामले पर सरकार को घेरा.

उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा,''इस घटना ने एक बार फिर भाजपा शासन की महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं. वैसे भी मध्य प्रदेश महिलाओं पर अत्याचार में पहले नंबर पर है. मुख्यमंत्री जी, क्या आपकी सरकार से ये बहनें उम्मीद रख सकती हैं कि इस घटना की निष्पक्ष और त्वरित जांच होगी. आपकी सरकार महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों को रोकने में बार-बार असफल हो रही है.''

घटना का वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ा और राजधानी भोपाल में शासन-प्रशासन सक्रिय हो गया. इसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले में अभियुक्तों पर सख़्त से सख़्त कारवाई करने की बात कही.

इस बीच राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मामले में पुलिस को एक पत्र लिख कर घटना के बारे में पूछा है. आयोग ने इस मामलें में प्रदेश के डीजीपी से तीन दिन के अंदर कारवाई रिपोर्ट देने को कहा है.

वैसे मध्य प्रदेश महिला अपराधों के मामलें में देश में नंबर एक स्थान रखता है.

नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरों के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि प्रदेश में महिला अपराध से जुड़े 30,673 मामलें रजिस्टर्ड किए गए.

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