मध्य प्रदेश: अपनों की मौत से सदमे में दलित परिवार, इंसाफ़ का इंतज़ार -ग्राउंड रिपोर्ट

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- Author, शुरैह नियाज़ी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, सागर से
मध्य प्रदेश के सागर ज़िले के बडोदिया नौनागिर गांव के अहिरवार परिवार के घर के बाहर सन्नाटा पसरा हुआ है. यह घर पिछले कुछ दिनों से राजनीति का केंद्र रहा है.
पिछले एक साल में इस दलित परिवार के तीन सदस्यों की मौत के बाद विपक्षी नेताओं के साथ ही मुख्यमंत्री भी गांव में आकर पीड़ित परिवार से मिल चुके हैं.
रघुवीर अहिरवार अपने परिवार के साथ गांव के आख़िरी छोर पर रहते आए हैं. उनके परिवार में पत्नी के अलावा तीन बेटे और एक बेटी थी. पिछले साल सबसे छोटे बेटे नितिन की हत्या कर दी गई थी.
उसके बाद हाल ही में रघुवीर के भाई राजेंद्र को समझौता के लिए बुलाया गया था जिसमें लड़ाई के बाद उनकी हत्या कर दी गई.
वहीं जब उनका शव लेकर वापस आ रहे थे तो संदिग्ध परिस्थिति में रघुवीर की बेटी अंजना की मौत हो गई. अंजना, परिवार में दो भाइयों के बाद तीसरे नंबर पर थी.
इस समय परिवार न सिर्फ सदमे में है बल्कि अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित भी है.
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हाल की घटना 25 मई की है जब अंजना के चाचा राजेंद्र की हत्या कर दी गई.
परिवार का दावा है कि, राजेंद्र को समझौते के लिए बुलाया गया था जब वह नहीं माने तो उन्हें इतना मारा गया कि उनकी मौत हो गई है. राजेंद्र, पिछले साल नितिन की हत्या के गवाह भी थे.
हत्याकांड की सुनवाई 20 जून से शुरू होने वाली थी. जानकारी के मुताबिक़, उन पर दबाव डाला जा रहा था कि वो अपनी गवाही में अभियुक्त पक्ष के ख़िलाफ़ कुछ न कहें.
मारपीट के बाद उन्हें स्थानीय अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसके बाद उन्हें भोपाल रेफर कर दिया गया. उनकी मौत रास्ते में ही हो गई. उनके शव का पोस्टमॉर्टम किया गया और जब उसे लेकर वापस आ रहे थे तो शव वाहन में सवार अंजना की भी वाहन से गिरने से मौत हो गई.
हालांकि पुलिस का भी कहना है कि अभी तक की जानकारी के मुताबिक़, वह अचानक गिरी और उसकी मौत हो गई.
हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि वह वाहन से कूद गई लेकिन इस बात की पुष्टि करने वाला कोई नहीं है. गिरने से लगी चोट की वजह से अंजना की मौत हो गई. यह हादसा लगभग गांव से 20 किलोमीटर दूर हुआ.
परिवार के आरोप

अंजना की मां राम सखी का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या की गई है.
उन्होंने बताया, "सबको मालूम था कि अंजना को हर बात पता थी. वह अपनी बात को कहना जानती थी इसलिए आरोपी भी उससे डरते थे. इसी वजह से उसकी हत्या कर दी गई."
इस मामलें में अंजना के भाई विष्णु ने बताया, "यह मामला 2019 से चला आ रहा है जब हमारी बहन के साथ छेड़छाड़ की गई थी. वह लोग लगातार दबाव बना रहे थे कि परिवार उस मामले में समझौता कर ले. लेकिन जब बात नही बनी तो पिछले साल 24 अगस्त 2023 को नितिन की हत्या कर दी गई. जब मां को पता चला तो वो भागे-भागे उस स्थान पर गई जहां पर उसे पीटा जा रहा था तो मां को पीटने के साथ ही निर्वस्त्र भी कर दिया गया."

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उन्होंने आगे बताया कि उसके बाद वो लोग घर पर आ गए और उन्होंने जमकर तोड़फोड़ की और घर में मौजूद घोड़े को पीटा जिसकी वजह से 15 दिन बाद उसकी मौत हो गई.
विष्णु गांव में मज़दूरी के साथ ही शादियों में अपने घोड़े को किराए पर देते हैं. विष्णु का आरोप है कि उनके परिवार के साथ अत्याचार करने वाले गांव के दबंग ठाकुर परिवार के लोग हैं. विष्णु ने बताया कि इस मामले में एक मुख्य अभियुक्त का नाम तक एफआईआर में नहीं है जिसे जोड़ा जाना चाहिए.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिवराज सिंह चौहान सरकार के दौरान मंत्री रहे एक कद्दावर नेता का संरक्षण उस अभियुक्त को हासिल है और वह उनके रिश्तेदार भी हैं.
आख़िर इसी परिवार को गांव के दबंग क्यों निशाना बना रहे हैं? इस सवाल पर विष्णु ने बताया, "हमारा परिवार गांव से अलग अपना जीवन यापन करता रहा है. परिवार किसी के भी पास नहीं जाता है लेकिन गांव के दबंग चाहते हैं कि हम उनके पास जाकर उनके सामने झुके और दूसरे लोगों की तरह डर कर रहें."
वही अंजना की मौत से पहले उसने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा था कि अभियुक्तों के घरों को तोड़ा जाना चाहिए और सभी आरोपियों को 24 घंटे के अंदर गिरफ्तार किया जाना चाहिए.
मामले की शुरुआत कहां से हुई?

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इस पूरे मामले की शुरुआत 2019 से हुई जब अंजना के साथ छेड़छाड़ की गई थी लेकिन पुलिस ने मामला मारपीट का दर्ज किया था. इसमें चार लोगों पर मामला दर्ज किया गया था. इसमें तीन लोग ठाकुर परिवार के थे और एक युवक रैकवार था. चारों को अग्रिम ज़मानत मिल गई थी. यह मामला अभी भी कोर्ट में चल रहा है. यह मामला 26 जनवरी, 2019 को दर्ज किया गया था.
परिवार का आरोप है कि उसके बाद उन लोगों पर लगातार दबाव बनाया जाता रहा.
लेकिन इस मामले में पिछले साल 24 अगस्त 2023 को गांव के बस स्टैंड के करीब अंजना अहिरवार के छोटे भाई नितिन की हत्या कर दी जाती है. जब मां उसे बचाने जाती है तो उन्हें भी निर्वस्त्र कर पीटे जाने का आरोप है.
उस समय पुलिस ने इस मामले में नौ नामजद अभियुक्तों के साथ ही चार दूसरे अभियुक्तों पर मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. इस मामले में अभी एक व्यक्ति को ज़मानत मिली है जबकि बाकी लोग अभी भी जेल में है.
वहीं परिवार के सदस्यों का आरोप है कि अभियुक्त उन पर लगातार दबाव बन रहे थे कि किसी भी तरह से उनके ख़िलाफ़ कोई बयान न दिया जाए.

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अब तक क्या कार्रवाई हुई, पुलिस क्या क्या कह रही है?
हाल के मामले में पुलिस ने अभी पांच लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज़ किया है. इनमें पुलिस के मुताबिक़, अभी तक सिर्फ एक गिरफ्तारी की गई है और दूसरे अभियुक्तों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा. जिनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज़ किया गया है उनके नाम फ़हीम खान, बबलू बेना, इसराइल बेना, टंटू क़ुरैशी और आशिक़ क़ुरैशी हैं.
वहीं, सागर के पुलिस अधीक्षक अभिषेक तिवारी ने बताया, "पुलिस ने इस पूरे मामले में टेक्निकल एविडेंस को लिया है. कई लोगों से पूछताछ की गई है और सभी को देखते हुए जांच कर रही है ताकि आगे की कारवाई की जा सके."
उन्होंने कहा कि अंजना की मौत के मामले में भी जांच की जा रही है और अभी जो प्रतीत हो रहा है कि वह गिर गई थी और सर पर चोट की वजह से उसकी मौत हो गई.
अभिषेक तिवारी ने आगे बताया, "सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. इसमें कई पक्ष हैं और लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि अभियुक्तों को सज़ा दिलाई जा सके. पुलिस इसमें किसी भी तरह की कोई कोताही नहीं बरत रही है. वही परिवार को पूरी तरह से सुरक्षा दी गई है."
इस मामले में जो बातें सामने आ रही हैं, उसके मुताबिक़, पीड़ित पक्ष के राजेंद्र जिनकी मौत हो गई है उनके ख़िलाफ 14 मामले दर्ज थे. इसमें चोरी, हत्या के प्रयास और बलवे का मामला है.
दूसरी तरफ़, अंजना के दूसरे नंबर के भाई के ख़िलाफ़ 7 मामले दर्ज़ हैं इसमें भी चोरी और हत्या के प्रयास का मामला भी है. इसके अलावा नितिन जिसकी हत्या पिछले साल कर दी गई थी उसके भी ख़िलाफ़ 7 मामले दर्ज़ थे जिसमें चोरी और बलवे का मामला था.

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अभियुक्त पक्ष का क्या कहना है?
पीड़ित पक्ष जिसे मुख्य अभियुक्त बता रहा है, उनका नाम अंकित सिंह ठाकुर है. उनका कहना है कि इस मामले से उनका या उनके परिवार का कोई लेना देना नहींं है.
उन्होंने कहा, "हमारे परिवार का कोई भी अपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. उसके बावजूद अब हमें यह परिवार हर मामले में जोड़ रहा है. पिछले साल नितिन की हत्या के मामले में 4 अभियुक्त अंकित सिंह ठाकुर के परिवार के हैं, जिनमें तीन लोग अभी भी जेल में हैं. एक व्यक्ति जो 77 साल के थे उन्हें भी इस मामलें मे अभियुक्त बता दिया गया. जबकि वो कुछ नहीं कर सकते. बड़ी मुश्किल में उन्हें कोर्ट से ज़मानत मिली."
अंकित ने आरोप लगाया कि पूरे गांव का माहौल इस परिवार ने ऐसा कर दिया है कि हर कोई डर के साए में जी रहा है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मसले पर विपक्षी कांग्रेस मामले को लगातार तूल दे रही है और गांव का माहौल बिगाड़ रही है.

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राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को गांव में पहुंच कर अंजना अहिरवार के परिवार से मिले. उनके साथ पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह भी थे जिन पर अभियुक्तों को संरक्षण देने का आरोप है.
उन्होंने आश्वासन दिया कि अभियुक्तों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जाएगी और पीड़ितों को पूरी तरह से सुरक्षा मिलेगी. उन्होंने गांव में पुलिस चौकी खोलने के भी आदेश दिए हैं.
हालांकि, विष्णु अहिरवार का कहना है, "मुख्यमंत्री ने किसी भी तरह का कोई आश्वासन नहीं दिया है. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि विचार करेंगे. हम चाहते हैं कि पूरी जांच सीबीआई से कराई जाए ताकि हमें इंसाफ मिले."
इससे पहले दो दिन में दो कांग्रेस नेता पीड़ितों के घर पहुंचे थे. सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जिन्होंने अंजना अहिरवार के अंतिम संस्कार में भी भाग लिया था. जब अंजना के भाई की हत्या हुई थी उस समय भी दिग्विजय सिंह गए थे.
वहीं, मंगलवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी परिवार से मिले. उन्होंने मांग की थी पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाए और पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए.
कांग्रेस ने भूपेंद्र सिंह को ले जाने पर एतराज़ जताया और सवाल किया कि भूपेंद्र सिंह को साथ ले जाकर मुख्यमंत्री पीड़ित परिवार को साथ देने गए थे या डराने गए थे.

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इस दौरान पीड़ित परिवार की बात जीतू पटवारी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी करवाई थी.
आज़ाद समाज पार्टी, भीम आर्मी के अध्यक्ष सुनील अस्तेय ने कहा है कि इस पूरे मामले में प्रशासन की नाकामी नज़र आ रही है.
उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड जैसे इलाक़ो में अभी भी उंची जाति के लोग दलितों को दबाते हैं और अगर उनकी बात नहीं मानी जाती है तो इस तरह से सबक़ सिखाया जाता है.
वहीं गांव के लोगों का मानना है कि आज भी गांव के दबंग लोगों के सामने दलित लोग जूते, चप्पल पहन कर नहीं जा सकते हैं.
सागर के कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद आनंद अहिरवार का कहना है कि इस इलाक़े में एफआईआर लिखवाने के लिए राजनीति रूप से सक्षम होना भी जरूरी है.
उन्होंने आरोप लगाया, "पुलिस किसे भी अभियुक्त बना सकती है और किसे भी पीड़ित बना सकती है. आप जितने राजनीतिक रूप से सक्षम होंगे उतना ही आप दबंगई कर सकते है और यही यहां पर भी हो रहा है."
अहिरवार परिवार के घर के बाहर एक पुलिस वाले को तैनात कर दिया गया है और सीसीटीवी कैमरे काम करने लगे हैं. सीसीटीवी कैमरे पिछले साल हुई हत्या के बाद से लगे हैं लेकिन उन्होंने काम करना बंद कर दिया था. फिलहाल यह परिवार अपने घर के सदस्यों के लिए इंसाफ़ चाह रहा है.
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