रोहित वेमुला की मां ने बीबीसी से पुलिस और अपने बेटे की जाति के बारे में क्या कहा?

रोहित वेमुला
इमेज कैप्शन, रोहित वेमुला की मां वी.राधिका
    • Author, वी. शंकर
    • पदनाम, बीबीसी तेलुगू के लिए

हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के शोध छात्र रोहित वेमुला ने आठ साल पहले आत्महत्या कर ली थी. उन्होंने दलित होने के चलते उत्पीड़न का आरोप लगाया था.

उनकी आत्महत्या के बाद आठ साल बाद वे एक बार सुर्ख़ियों में हैं, क्योंकि तेलंगाना पुलिस ने अदालत को दी गई क्लोज़र रिपोर्ट में कहा गया है कि रोहित वेमुला दलित नहीं थे और उनकी आत्महत्या के लिए कोई दोषी नहीं है.

इस मामले में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों के विरोध प्रदर्शन के चलते तेलंगाना सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा है.

तेलंगाना डीजीपी कार्यालय ने घोषणा की है कि इस मामले में दोबारा सुनवाई की जाएगी.

हालांकि, रोहित वेमुला की मां राधिका वेमुला पुलिस की जांच के तरीक़ों पर सवाल उठाती हैं. उनका कहना है कि यह सब एक साज़िश है.

बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में राधिका ने कहा कि उनकी लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक उनके बेटे की आत्महत्या के लिए ज़िम्मेदार सभी लोगों को सज़ा नहीं मिल जाती है.

आगे पढ़िए उनके साथ किए गए सवाल-जवाब.

'पुलिस रोहित की जाति कैसे निर्धारित कर सकती है?'

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इमेज कैप्शन, रोहित वेमुला की मां आज भी सिलाई कर जीविका चला रही हैं.

बीबीसी : रोहित को गए हुए आठ साल हो गए हैं, आपने ये वक्त कैसे बिताया है?

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समाप्त

राधिका वेमुला : ये सभी दिन बुरे दिन रहे हैं. पुलिस की ओर से दी गई ताज़ा रिपोर्ट तो और भी परेशान करने वाली है. छात्र मामले को बंद कर कोर्ट में रिपोर्ट सौंपने को लेकर चिंतित हैं. इसने मुझे भी बहुत परेशान किया. तुरंत हम तेलंगाना के सीएम से मिले. वह न्याय भी करेंगे. उन्होंने पॉजिटिवली कहा कि मामले को दोबारा खोला जाएगा. उस मुक़दमे के साथ-साथ मैंने उस समय छात्रों पर दर्ज मुक़दमे भी रद्द करने का अनुरोध किया था. सीएम ने इस पर गौर करने और न्याय करने का वादा किया.

बीबीसी : कोर्ट में सौंपी गई उस रिपोर्ट के बारे में आप क्या कहती हैं जिसमें कहा गया है कि रोहित एससी नहीं हैं?

राधिका वेमुला : ये सभी झूठे आरोप हैं. पुलिस वास्तव में जाति का निर्धारण कैसे कर सकती है? कास्ट सर्टिफिकेट की जांच में पुलिस की क्या भूमिका है? हमने 2017-18 में ही कलेक्टर को रिपोर्ट दी थी. 2019, 2020, 2021 में कोरोना के नाम पर जांच नहीं हुई. वास्तविक जांच पूरी हुए बिना इसका निर्णय कैसे होगा? ये सब बीजेपी की साज़िश से हो रहा है.

रोहित एमएससी एंट्रेंस टेस्ट में पूरे भारत में पांचवें स्थान पर रहे. जेआरएफ़ में दो बार क्वालिफाई किया. उसके सर्टिफ़िकेट फर्ज़ी नहीं हैं.

मैं हर बात जनता के सामने रखूंगी. लोग नोटिस करेंगे. उसे दलित नहीं मानना एक राजनीतिक साज़िश है. हम सच्चे दलित हैं. हम ग़लत नहीं हैं.

'ये सब लोगों को गुमराह करने की कोशिश है'

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इमेज कैप्शन, बीबीसी से बात करतीं रोहित वेमुला की मां

बीबीसी : पुलिस कह रही है कि रोहित एससी नहीं है, उसने आत्महत्या इसलिए की क्योंकि उसे चिंता थी कि मामला खुल जाएगा?

राधिका वेमुला : अगर रोहित एससी नहीं है तो उसे यूनिवर्सिटी में दाखिला कैसे मिला? क्या उसके प्रमाणपत्रों की जांच के बाद ही उसे प्रवेश दिया गया? ये सब लोगों को गुमराह करने की कोशिश है. रोहित की मृत्यु एक दलित के रूप में हुई. उसे विश्वविद्यालय से निलंबित भी दलित होने के चलते किया गया था. मृत्यु के बाद जाति को दोष देना बहुत ग़लत है.

बीबीसी : रोहित की जाति के बारे में गुंटूर कलेक्टर, गुरजला तहसीलदार द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर पुलिस का कहना है कि वह वड्डेरा जाति का है?

राधिका वेमुला : कैसे तय करें? क्या उन्हें मुझसे नहीं पूछना चाहिए? क्या उनको मेरा तर्क नहीं सुनना चाहिए? गाचीबोवली पुलिस ने मुझसे कभी पूछताछ नहीं की. रोहित की मृत्यु के बाद कांतिलाल दांडे को गुंटूर का कलेक्टर घोषित किया गया जबकि रोहित को दलित माना गया था. अब आठ साल बाद फिर से झूठा प्रचार कर रहे हैं कि वह एससी नहीं हैं.

बीबीसी : आपने रोहित मामले में न्याय की मांग करते हुए देश का दौरा किया. लेकिन अब आपको जिस न्याय की उम्मीद थी वह नहीं मिली?

राधिका वेमुला : चुनाव के दौरान साज़िश चल रही है. राहुल गांधी ने कहा कि अगर वह सत्ता में आए तो न्याय करेंगे. तो अब ये कोशिश उन्हें किनारे करने की कोशिश का ही हिस्सा है.

बीबीसी : क्या आपको लगता है कि मामले के दोबारा खुलने के बाद रोहित को न्याय दिलाने के लिए कोई जांच होगी?

राधिका वेमुला : मुझे निश्चित रूप से उम्मीद है कि इस बार न्याय होगा. अगर जांच बीजेपी और बीआरएस के लोगों के बिना चलती है तो पूरा न्याय होगा.

बीबीसी : आप किस न्याय की उम्मीद करती हैं?

राधिका वेमुला : रोहित वेमुला की मौत के लिए ज़िम्मेदार सभी लोगों को सज़ा मिलनी चाहिए. जिससे दलित छात्रों पर हमला करने वाले लोगों में डर होना चाहिए.

'एक न एक दिन रोहित वेमुला एक्ट आएगा'

रोहित वेमुला

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बीबीसी : रोहित घटना के बाद भी आईआईटी जैसी जगहों पर कई लोगों पर हमले हुए. आप उन्हें कैसे देखती हैं?

राधिका वेमुला : मैं रोहित के साथ जो हुआ वो किसी और के साथ ना हो, इसलिए लड़ रही हूं. भारत के सभी छात्र मेरे लिए रोहित जैसे हैं. मैंने एक बच्चा खो दिया. उम्मीद है कि किसी और को नहीं खोएंगे.

बीबीसी : आपकी पारिवारिक स्थिति कैसी है?

राधिका वेमुला : दिन ऐसे ही गुज़र रहे हैं. मैं सिलाई कर रही हूं. मेरे छोटे बेटे राजा ने कुछ समय तक उच्च न्यायालय में वकालत की लेकिन इससे परिवार को ज़्यादा मदद नहीं मिली. वह फ़िलहाल एक छोटी नौकरी कर रहा है.

बीबीसी : आप लोग रोहित वेमुला एक्ट की मांग कर रहे हैं, क्या है ये?

राधिका वेमुला : मुझे उम्मीद है कि एक दिन यह क़ानून आएगा. इसके ज़रिए दलित बच्चों पर होने वाले अन्याय को रोका जाएगा. इसलिए मैं चाहती हूं कि यह क़ानून बने.

क्या था रोहित वेमुला की आत्महत्या का मामला

रोहित वेमुला

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17 जनवरी 2016 को हैदराबाद विश्वविद्यालय के पीएचडी छात्र रोहित वेमुला ने आत्महत्या कर ली थी. रोहित आम्बेडकर छात्र संघ के सदस्य थे.

आत्महत्या करने से पहले रोहित वेमुला और उनके चार दोस्तों को यूनिवर्सिटी ने हॉस्टल से निकाल दिया था.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के एक सदस्य ने इन छात्रों पर हमले का आरोप लगाया था. हालांकि, यूनिवर्सिटी की पहली जांच में आरोप निराधार पाया गया, जिसके बाद रोहित और उसके अन्य साथियों को बरी कर दिया गया था.

इसके बाद विश्वविद्यालय को नया कुलपति मिल गया और उनके कार्यकाल में बिना कोई ठोस कारण बताए पुराना फ़ैसला वापस ले लिया गया. फिर रोहित और उसके दोस्तों को विश्वविद्यालय के छात्रावासों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया.

इसके बाद सिकंदराबाद से बीजेपी सांसद बंडारू दत्तात्रेय (वर्तमान में हरियाणा के राज्यपाल) ने तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति इरानी को पत्र लिखा था. उन्होंने यूनिवर्सिटी को 'देशद्रोही' कहा था और इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी.

दत्तात्रेय के पत्र के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने विश्वविद्यालय को एक पैनल गठित करने का आदेश दिया, जिसने रोहित वेमुला और अन्य छात्रों को निलंबित करने का फ़ैसला किया.

इस पत्र का हवाला देते हुए आंबेडकर छात्र संघ ने आरोप लगाया कि दत्तात्रेय के पत्र के बाद विश्वविद्यालय में समस्याएं शुरू हुईं, जिसके बाद कुछ और दलित छात्रों ने सामाजिक भेदभाव के कारण आत्महत्या कर ली.

इस मामले में बंडारू दत्तात्रेय के ख़िलाफ़ आत्महत्या का मामला दर्ज किया गया था. इसके साथ ही उनके ख़िलाफ़ एससी-एसटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है.

हालांकि बाद में मीडिया से बात करते हुए दत्तात्रेय ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि उनके द्वारा लिखे गए पत्र का रोहित वेमुला की आत्महत्या से कोई लेना-देना नहीं है.

यदि आपको आत्महत्या के विचार आ रहे हैं या आपकी जानकारी में किसी और के साथ ऐसा होता है, तो आप भारत में आसरा वेबसाइट या वैश्विक स्तर पर बीफ्रेंडर्स वर्ल्डवाइड के ज़रिए सहयोग ले सकते हैं.

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