राजस्थान के झुंझुनू में दलित युवक की पिटाई के बाद मौत का पूरा मामला क्या है -ग्राउंड रिपोर्ट

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- Author, मोहर सिंह मीणा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, झुंझुनू के बलौदा गाँव से लौट कर
"मैं अकेली रह गई, मेरा साथी चला गया. मेरा लाड़ला, मेरे गले का हार था. मैंने छोटे से पालपोस कर बड़ा किया था. मैं तो यही चाहती हूं कि मुझे फांसी लगा दें या उन्हें फांसी लगा दें."
एक पेड़ के नीचे चारपाई के बगल ज़मीन पर हाथ जोड़े हुए बैठी रोती बिलखती पैंसठ साल की यह बुजुर्ग महिला राधा देवी हैं.
26 साल पहले राधा देवी के पति हडमान वाल्मीकि की मृत्यु के समय उनका सबसे छोटा बेटा रामेश्वर महज़ छह दिन का था. उन्होंने अकेले ही संघर्ष करते हुए रामेश्वर को पालापोसा और अब वही उनके बुढ़ापे का सहारा और साथी था.
बीती 14 मई के दिन रामेश्वर की उनके घर से चंद दूरी पर क़रीब छह घंटे तक कथित तौर पर लाठियों से बेरहमी से पीटते हुए हत्या कर दी गई.
उम्र के इस पड़ाव पर कमज़ोर शरीर, चेहरे पर झुर्रियां और बीते दस दिन से बुखार से जूझ रहीं राधा देवी अपने बेटे के हत्यारों को फांसी देने की मांग कर रही हैं.
बलौदा गांव की घटना

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राजस्थान की राजधानी जयपुर से क़रीब ढाई सौ किलोमीटर दूर झुंझुनू ज़िले में हरियाणा की सीमा के बेहद क़रीब बलौदा गांव है.
गांव की पक्की सड़कों से होते हुए सरकारी स्कूल के बगल से एक रेतीली राह पर एक किलोमीटर आगे गली के किनारे बना एक घर.
इसी घर की चार दीवारी के भीतर एक पेड़ के नीचे राधा देवी बैठी हुई हैं.
घर के ठीक पीछे कुछ दूरी पर एक गौशाला है, 26 साल के रामेश्वर साढ़े नौ हज़ार रुपये तन्ख्वाह की नौकरी करते थे. घर के दूसरी ओर कुछ दूरी पर सूरजमलजी की वीरान पड़ी एक हवेली है.
इसी हवेली में रामेश्वर की क़रीब छह घंटे तक लाठियों से बेरहमी से पिटाई कर हत्या कर दी गई थी.
अभियुक्तों का इतना ख़ौफ़ था गांव के कई युवा पिटते रहे लेकिन शिकायत नहीं की.
गांव के ही 25 साल के युवा मनीष कहते हैं, "इन अपराधियों ने आरबीएम नाम से ग्रुप बनाया हुआ है. कई अपराधी इसमें शामिल हैं, जो सभी मिल कर सभी अवैध काम करते हैं."
"यह आरोपी गांव में किसी को भी पीट देते थे. गांव के अंदर इन्होंने बहुत दहशत फैला रखी है."
खाना भी नहीं खाया

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घर के हालात इस परिवार की आर्थिक स्थिति बयां करते हैं. घर में रोज़मर्रा की ज़रूरत का पूरा सामान भी नहीं है. एक चारपाई पर कुछ बरतन रखे हैं, कुछ कपड़े और बंद पड़ा चूल्हा है.
रुआंसे गले से राधा देवी कहती हैं, "गौशाला से घर आया ही था. मैंने खाना खाने के लिए कहा तो बोला अभी आया हूं, कुछ देर में खाउंगा. फिर वह ठंडा पानी लेने टंकी के पास गया."
वो कहती हैं, "मुझे दस दिन से बुखार है. मैं कुछ देर के लिए आराम करने के लिए लेट गई. रामेश्वर बहुत देर तक नहीं आया, तब मैं देखने गई तो गांव के ही एक लड़के सुभाष ने बताया कि रामेश्वर को ठेके वाले ले गए."
"मैंने हाथ जोड़े कि मुझे ले चल कहां ले गए हैं. मैं खुद ही ढूंढने गई लेकिन किसी ने नहीं बताया मेरे रामेश्वर को कहां ले गए. थक हार कर लौट आई और तीन बजे चारपाई पर लेट गई."
हाथ से घर के दरवाजे की ओर इशारा करते हुए कहती हैं, "शाम को जब उठी तो देखा रामेश्वर ज़मीन पर पड़ा था. मैं रोने लगी तो सब इकट्ठे हो गए. सब ने मुझे पकड़ कर गेट बंद कर दिया."
"मेरा बेटा तो किसी से झगड़ता भी नहीं था. मेरे दो बच्चे कोटपूतली और सीकर में पांच-पांच हज़ार की मज़दूरी करते हैं."
रोते हुए कहती हैं, "मेरा रामेश्वर ही मेरे साथ रहता था, मेरे लाडले को क्यों मारा."
घटना के चश्मदीद ने क्या कहा?

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रामेश्वर को न्याय दिलाने के लिए झुंझुनूं कलेक्टर को ज्ञापन देकर लौटे ग्रामीणों में गांव के ही एक शख्स जेठूराम ने बताया कि रामेश्वर के साथ उन्हें भी ही किडनैप कर सुनसान हवेली पर ले जाया गया था.
जेठूराम बीबीसी को बताया, "14 मई के दिन सवा बारह बजे मैं सरकारी अस्पताल से दवाई लेकर आ रहा था. रामेश्वर गांव में टंकी से पानी ला रहा था, हम साथ थे."
"शराब ठेके वाले आए और हमें मोटर साइकिल पर बैठा कर जबरन सूरजमल की हवेली पर ले गए. उन्होंने जाते ही हवेली का दरवाजा बंद कर मुझसे दंड बैठक लगवाई और मुर्गा बना दिया."
वो बताते हैं, "वह पांच लोग थे. पांचों ने सौ-सौ लाठियां मारने की बात की और रामेश्वर के हाथ बांध कर ऊपर लटकाया. वह बेरहमी से कभी पैरों पर तो कभी लिटा कर रामेश्वर पर लाठियां बरसा रहे थे."
"उनमें से ही एक वीडियो बना रहा था, वह बिल्कुल बेखौफ थे. वे शाम करीब छह बजे तक पीटते रहे. बेहद बेरहमी से पीटा गया रामेश्वर को."
वो कहते हैं, "रामेश्वर की वहीं मौत हो गई थी. जब रामेश्वर को बेहोशी की हालत में ले गए तो मौका मिलते ही मैं हवेली से भाग आया."
जेठूराम कहते हैं, "पीटते हुए वो बोल रहे थे कि हमने बीस लाख रुपए देकर शराब का ठेका लिया है. तुम हमारे ठेके से शराब खरीदा करो. इन सभी को फांसी होनी चाहिए."
पिटाई के बाद रामेश्वर को हरियाणा ले गए

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झुंझुनूं ज़िला पुलिस अधीक्षक राजर्षि राज वर्मा ने बीबीसी को बताया, "जब रामेश्वर पिटाई से बेहोश हो गया तो अभियुक्त उसे नज़दीक ही हरियाणा के सतनाली में एक अस्पताल ले गए थे. रास्ते में ही मृतक की मौत हो गई, जिसके बाद शव को बलौदा में उनके घर छोड़ कर फरार हो गए थे."
गांव के ही मुकेश कहते हैं, "शाम को करीब साढ़े छह बजे मैं दुकान से सामान लेकर आ रहा था. रामेश्वर के घर के आगे एक गाड़ी में वह गांव के ही पांच लड़के थे, उन्होंने मुझे आवाज़ लगाई इधर आ तो मैं डर गया."
"उन्होंने कहा कि इसे उतरवा गाड़ी से, यह बेहोश हो गया है. इसके घर वालों को बता देना. मैंने डरते-डरते उतरवा कर इधर आ गया. मैंने उन लोगों से डरते हुए रामेश्वर को उतारा रामेश्वर के ऊपर बदन पर कपड़े नहीं थे."
रामेश्वर के भाई ने क्या कहा?

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रामेश्वर के बड़े भाई कालूराम कोटपूतली में रह कर मजदूरी करते हैं. घटना की जानकारी मिलने पर घर आए हैं.
वह कहते हैं, "रामेश्वर गौशाला में काम करने के साथ ही डफली बजाता था. गांव में किसी बड़े बुजुर्ग की मौत होती थी तो रामेश्वर को डफली बजाने के लिए बुलाते थे. वह खुशमिजाज़ और नाचने गाने का शौकीन था."
कालूराम भारी गले से कहते हैं, “मैं कोटपूतली में रामेश्वर की शादी के लिए रिश्ते की बात कर रहा था. लेकिन, इधर यह घटना हो गई.”
रामेश्वर अपने घर के पीछे गौशाला में करीब चार साल से काम करते थे.
गौशाला में काम करने वाली संतोष कहती हैं, "बहुत अच्छा बच्चा था. खूब गाना गाता और हंसी मज़ाक करता था. हम सुबह पांच बजे ही आ जाते थे. हम यहां चारा डालने और साफ़ सफ़ाई का काम करते हैं.”
रामेश्वर को याद कर संतोष रोने लगती हैं.
ठेके से शराब खरीदने का दबाव

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सूरजगढ़ से बलौदा गांव आने पर मुख्य सड़क पर ही गांव में शराब का ठेका है. राजस्थान आबकारी विभाग से इस शराब ठेके का लाइसेंस बलौदा गांव के ही सुशील कुमार के नाम पर है.
लेकिन, सुशील कुमार ने ठेका चलाने के लिए अवैध रूप से अभियुक्त चिंटू को दिया था. चिंटू अपराधी प्रवृति का है जिस पर सूरजगढ़ थाने में कई मुक़दमे दर्ज हैं.
चिंटू ग्रामीणों को ठेके से शराब खरीदने के लिए धमकाता और पिटाई करता था.
बलौदा ग्रामपंचायत है, इसके पंचायत कार्यालय के पास खड़े कालू शर्मा कहते हैं, "बीस दिन पहले इन्हीं लोगों ने जीतू और पवन को भी पीटा था और मुझे मुर्गा बनाया था. यह सब कहते थे कि हमारे ठेके से शराब खरीदो."
कालू शर्मा कहते हैं, "इन लोगों को सख़्त से सख़्त सजा होनी चाहिए. इन्होंने अभी उस लड़के को मारा है, फिर किसी और को मारेंगे."
एसपी राजर्षि राज वर्मा कहते हैं कि पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया है कि, "मृतक देसी शराब पीता था, शराब दुकान वालों (अभियुक्तों) को गुस्सा था कि वह ठेके से शराब क्यों खरीद कर नहीं पी रहा है. इस वजह से ही उसके साथ मारपीट की और उसकी मृत्यु हो गई."
"हमने हाथ जोड़े, पैर पड़े लेकिन नहीं छोड़ा"

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जेठू के बेटे मनीष कहते हैं, "मैं एक कार्यक्रम में गया हुआ था. वहां लोगों ने बताया कि मेरे पिता और रामेश्वर को लेकर गए हैं तो हम खाना छोड़ कर भागे."
"मैं और मेरी पत्नी हवेली पर गए तो वहां मेरे पिता को मुर्गा बनाया हुआ था. रामेश्वर के हाथ बांधे हुए थे, लाठी और बेल्ट से उनकी पिटाई कर रहे थे. मैं और मेरी पत्नी ने हाथ जोड़े और उनके पैर पड़े लेकिन उन्होंने बोला तुम जाओ अभी छोड़ देंगे कुछ देर में."
मनीष कहते हैं, "मैं गांव के लोगों के पास गया मदद मांगने लेकिन सभी ने कहा कि सूरजगढ़ जाओ पुलिस के पास. लेकिन, पुलिस थाने जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया. मुझे डर था कि पुलिस के पास गया तो यह न जाने क्या कर देंगे."
वह बताते हैं, "मेरे पिता को धमकी भी दी कि यदि हमारे ख़िलाफ़ बयान दिया तो गोली मार देंगे. मेरे पिता को हवेली से छोड़ दिया था."
गौशाला में काम करने वाली संतोष कहती हैं, "वह ग्यारह बजे गया था घर. दोपहर तीन बजे मुझे मालूम हुआ कि ठेके वाले रामेश्वर को उठा ले गए हैं. मैंने कई लोगों को फ़ोन कर कहा कि चलो छुड़ा लाते हैं, लेकिन कोई साथ चलने को तैयार नहीं हुआ."
टार्गेट पूरा न होने पर आबकारी विभाग लगाता है ज़ुर्माना

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राजस्थान आबकारी विभाग अलग-अलग शराब ठेकों के लिए एक तय राशि (गारंटी) में शराब बेचने का टार्गेट देता है. यदि उस राशि से कम बिक्री होती है तो विभाग ठेका संचालक पर पेनाल्टी लगाता है.
झुंझुनूं ज़िला आबकारी अधिकारी अमरजीत सिंह बीबीसी हिंदी को बताते हैं कि, "बलौदा गांव के शराब ठेके की पचास लाख रुपए (सालाना) गांरटी है. यानि कि विभाग के नियमानुसार शराब ठेकेदार यदि साल में पचास लाख रुपए की शराब नहीं बेचता है तो उस पर पेनाल्टी लगाई जाएगी."
बलौदा गांव में लाइसेंसी की जगह अवैध रूप से अभियुक्त चिंटू शराब ठेका चला रहा था. इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई, इस पर अमरजीत सिंह कहते हैं, "हमें इस बारे में जानकारी नहीं थी."
वह कहते हैं कि, "लाइसेंसी ने भी विभाग को इस बारे में नहीं बताया था. लेकिन, अब तीन दिन के लिए ठेका बंद करवाया है और लाइसेंस समाप्त करने के लिए कार्रवाई की जा रही है."
पुलिस की कार्रवाई

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बलौदा गांव में तीन अभियुक्तों के घरों पर अवैध निर्माण का दावा करते हुए 23 मई की शाम प्रशासन बुल्डोजर चलवा रहा था.
झुंझुनूं ज़िला पुलिस अधीक्षक राजर्षि राज वर्मा ने बीबीसी को बताया, "घटना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत ही ज़िले भर में स्पेशल टीम गठित कर 48 घंटों में ही मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया."
"इस मामले में छह मुख्य अभियुक्त हैं. पांच को गिरफ्तार और एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया है. एक अन्य अभियुक्त को भी मुल्जिम बनाया गया है. उसे भी जल्द गिरफ्तार करेंगे, वह वहां मौजूद था लेकिन सीधे तौर पर घटना में शामिल नहीं था."
एसपी वर्मा का कहना है कि राजस्थान पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही चार्जशीट पेश की जाएगी.
मृतक रामेश्वर के बड़े भाई 38 साल के कालू राम ने घटना के अगले दिन पंद्रह तारीख़ को सूरजगढ़ पुलिस थाने में चिंटू, प्रवीण कुमार, सुभाष, सुक्खो, प्रवीण, दिपेंद्र समेत अन्य के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करवाई थी.
पुलिस ने आईपीसी की धारा 143, 341, 323, 362, 342, 302, 201 और एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर अभियुक्त गिरफ्तार किए हैं.
अभियुक्तों ने घटना का वीडियो बनाय़ा, जो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद घटना सार्वजनिक हुई है.
घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है. कार्रवाई में देरी पर एसपी वर्मा कहते हैं, "घटना के बाद ही 16 तारीख़ को हमने गिरफ्तार किए हैं. वीडियो अभी दो दिन पहले सोशल मीडिया पर आया है."
घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रिया

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इस घटना पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया एक्स पर ट्वीट किया, “झुंझुनूं में शराब माफिया द्वारा एक दलित युवक की पीट पीट कर हत्या एवं उसका वीडियो बनाकर वायरल करना राजस्थान में सरकार और पुलिस के कमजोर होते इकबाल का प्रतीक है.”
“प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद दलितों के खिलाफ़ अपराध तेजी से बढ़े हैं. मीडिया में इमेज मेकिंग में व्यस्त राजस्थान सरकार इन घटनाओं को गंभीरता से ले एवं आगे इनकी पुनरावृति ना हो इसके लिए कार्य करे.”
आम आदमी पार्टी ने भी ट्वीट किया, “मोदी सरकार में दलितों के अधिकारों को छीना ही नहीं जा रहा बल्कि उनकी निर्मम हत्या तक की जा रही है.”
भीम आर्मी राजस्थान के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र हटवाल पीड़ित परिवार से मुलाकात करने पहुंचे. उन्होंने बीबीसी से कहा, “दलित समाज में इस घटना से रोष व्याप्त है. इस तरह घटना लगातार सामने आ रही हैं, इन पर रोक लगनी चाहिए इसलिए हम एक सख़्त कानून की मांग करते हैं.”
उन्होंने पीड़ित परिवार को पचास लाख रुपये मुआवज़ा और एक सरकारी नौकरी देने की मांग की.
कांग्रेस के झुंझुनूं ज़िला अध्यक्ष दिनेश सुंडा ने घटना पर बीबीसी से कहा, “राज्य की भाजपा सरकार ने अपराधियों को पकड़ लिया और इनकी संपत्ति पर बुल्डोजर चलाने की बात कह कर पल्ला झाड़ रही है. लेकिन, यह युवा अपराध कर क्यों रहे हैं. बेरोजगार युवा शराब पीने या व्यापार के दलदल में फंसता जा रहा है. केंद्र और राज्य की सरकार युवाओं के रोजगार और उन पर ध्यान नहीं दे रही है इसलिए अपराध बढ़ रहे हैं.”
भाजपा से झुंझुनूं ज़िला अध्यक्ष बनवारी लाल सैनी कहते हैं, “सरकार और पुलिस प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अपराधी गिरफ्तार किए हैं. कानून के आगे कोई बड़ा नहीं है, अपराधियों में कानून का खौफ़ होना चाहिए ताक़ि इस तरह की दुखद घटनाएं न हों. इसलिए अपराधियों को संदेश है कि कोई भी कार्रवाई संभव है.”
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