राजस्थान: दलित मजदूर के आईआईटी से पढ़े अधिकारी बेटे ने की खुदकुशी, सुसाइड नोट में लिखा...

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- Author, मोहर सिंह मीणा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए,नीमकाथाना राजस्थान से लौट कर
साल 2019 में आईआईटी कानपुर से इकोनॉमिक्स में बीएससी ग्रेजुएट. साल 2021 में राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) की आरएएस भर्ती की मेन्स परीक्षा दी.
साल 2022 में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की आईएएस भर्ती की मेन्स परीक्षा दी. साल 2023 में राजस्थान सरकार में ग्राम विकास अधिकारी पद पर चयन.
साल 2023 में लगातार दूसरी बार यूपीएससी सिविल सर्विस की मेन्स परीक्षा दी.
यह उपलब्धि है मनरेगा मज़दूर और ईंट भट्टों पर छिटपुट काम करने वाले माता-पिता के बेटे और तीन बहनों के बड़े भाई 25 साल के ललित बेनीवाल की,जिनका शव बीते 18 फरवरी को उनके घर से बरामद हुआ.
22 फरवरी की दोपहर का समय है. नीमकाथाना-अजीतगढ़ रोड पर बने थोई पुलिस थाने में घूंघट ओढ़े एक महिला को तीन लड़कियां सहारा देते हुए प्रवेश करती हैं.
भाव रहित चेहरे, धीमे-धीमे आगे की ओर बढ़ते क़दम और खामोश आंखों से ही उनके दिल का हाल बताया जा सकता है.
यह महिला ललित बेनीवाल की मां आंची देवी हैं और साथ चल रही लड़कियां पूजा,अन्नू और अनीता बहनें.
ये सब ललित बेनीवाल की खुदकुशी के मामले में हुई एफ़आईआर के पांचवें दिन पुलिस को अपना बयान दर्ज कराने आई हैं.
आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुजर रहे हैं तो भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.
गबन की एफ़आईआर

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थोई थाने से क़रीब बारह किलोमीटर दूर चीपलाटा ग्राम पंचायत है. गांव की मुख्य सड़क के बाएं ओर ग्राम पंचायत कार्यालय है.
इसी ग्राम पंचायत में ललित बेनीवाल ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) पद पर 19 अप्रैल 2023 से यानी बीते दस महीनों से कार्यरत थे.
अजीतगढ़ पंचायत समिति के तहत इस पंचायत में बीते दिनों वित्त वर्ष 2021-2022 और 2022-2023 के दौरान हुए लेन-देन और कार्यों की ऑडिट हुई. जिसमें पांच लाख बीस हज़ार और ग्यारह रुपये के सरकारी पैसे की अनियमितता सामने आई.
ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर अजीतगढ़ ब्लॉक डेवलपमेंट अधिकारी (बीडीओ) अजय सिंह के मौखिक आदेश पर ललित बेनीवाल ने थोई थाने में पंद्रह फ़रवरी को चीपलाटा सरपंच मनोज गुर्जर और पूर्व सरपंच बीरबल गुर्जर के ख़िलाफ़ सरकारी पैसे के गबन की एफ़आईआर दर्ज करवाई.
कहा जा रहा है कि एफ़आईआर दर्ज होने की सूचना के बाद सरपंच बीरबल और अन्य लोगों ने ललित बेनीवाल को डराया, धमकाया और मानहानि का केस दर्ज कराने की धमकी दी.
एफ़आईआर दर्ज होने के बाद अठारह फरवरी की सुबह ललित बेनीवाल के घर से उनका शव बरामद हुआ.
मौके से पुलिस को नौ पेज का सुसाइड नोट मिला है. जिसमें डराने-धमकाने, ग़लत तरह से काम करने का दबाव बनाने, सरकारी आईडी का ओटीपी लेकर लाखों रुपए निकालने के साथ सरकारी पैसे के गबन और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं.
घटना के बाद परिजनों की शिकायत पर थोई थाने में पंचायत क्लर्क जगदेव, ठेकेदार पोखर, सरपंच मनोज गुर्जर, पूर्व सरपंच बीरबल गुर्जर, पूर्व ग्राम सेवक नरेंद्र प्रताप, अजीतगढ़ विकास अधिकारी और मंगल के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करवाई है.
‘हमें लगा पढ़ाई कर रहा है’
थोई थाने से क़रीब आठ किलोमीटर दूर झाड़ली गांव की कच्ची-पक्की संकरी और ख़ामोश गलियों से होते हुए हम गांव के अंदर पहुंचते हैं.
मुख्य सड़क के दाईं ओर टेंट लगाए कुछ लोग बीते पांच दिन से शोक सभा में बैठे हुए हैं. एक टेबल पर रखी ललित बेनीवाल की तस्वीर पर फूल मालाएं चढ़ाई गई हैं.
शोक सभा के ठीक पीछे पक्के बने छोटे-छोटे घरों में से दो कमरों का एक घर है ललित बेनीवाल का.
किचन के बगल में बने छोटे से कमरे की सीमेंट से बनी खिड़की टूटी हुई है. इसी कमरे से ललित बेनीवाल की आत्महत्या के बाद शव बरामद हुआ.
शोक सभा में बैठी ललित की तीन बहनों में सबसे बड़ी पूजा नज़र झुकाए भरे हुए गले से कहती हैं, "सत्रह फरवरी की शाम भैया लाइब्रेरी से मुझे लेकर घर आए वह उस दौरान बहुत परेशान थे. मैंने कहा कि भैया नौकरी छोड़ दे, हमें तू खुश चाहिए."
"रात में मैंने कहा कि भैया हम तुझे अकेले नहीं छोड़ेंगे हम इसी कमरे सोएंगे. लेकिन, उसने हमें ऐसा दिलासा दिया कि जैसे अब वह बिल्कुल टेंशन फ्री है. हम सब सो गए. मम्मी देर रात जगी तो तब ललित कुछ लिख रहा था. मम्मी ने पूछा तो बोला कि मैं पढ़ रहा हूं, तू जा कर सो जा. सुबह करीब चार बजे की बात है."
ललित की मां आंची देवी कहती हैं,"मैं चार से पांच बजे तक उठ जाती हूं. मैं तीन बजे उठी तब वो शायद फ़ोन पर बात कर रहा था. मैं चार बजे उठी तब देखा तो वह कमरे में टेबल पर बैठा हुआ कुछ लिख रहा था."
"मैं ललित को बाबू बोलती हूं. मैंने कहा कि सो जा तो बोला कि ठीक है सो जाता हूं. यह अंतिम बात थी हमारी. हमें लगा वो पढ़ रहा है लेकिन वो सुसाइड नोट लिख रहा था."
बहन पूजा ने कहा, "मैं सुबह उठी तो देखा कमरे में लाइट जल रही थी. मैंने गेट बजाया कि भैया खोलो-खोलो लेकिन नहीं खोला. फिर मम्मी आई और खिड़की से देखा तो भैया लटका हुआ था."
"हमें कुछ समझ नहीं आया और हम गेट खिड़की तोड़ने की कोशिश कर रहे थे, इतने में गांव वाले इकट्ठा हो गए. भैया को अस्पताल ले गए वहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया."
परिजन के आरोप

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"भैया हमें भी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ने और ईमानदारी से चलने के लिए उत्साहित करते थे. भैया ने हमेशा ईमानदारी से काम किया उसका नतीजा यह हुआ है."
यह कहते हुए अन्नू का गला भर आता है.
अन्नू कहती हैं, "एफ़आईआर होने के बाद से ही बहुत तनाव में रहने लगे थे. उनको धमकियां दी जा रही थीं. वह बहुत डिप्रेशन में रहने लगे थे. उस रात उन्होंने खाना भी नहीं खाया था. वो सुसाइड नहीं कर सकते, उनसे करवाया गया है. हमारे भैया नहीं हमारे लिए पूरी दुनिया थे वो, हमसे हमारा भगवान छीन लिया गया है."
वहीं मां आंची देवी कहती हैं, "महीने भर से ज्यादा परेशान था. लेकिन,वो घर वालों से छुपाता था. "
"एक दिन मेरे गले लग कर रोया था. बोला कि मैं नौकरी छोडूंगा बहुत परेशान हो गया. वह कहता था कि नौकरी ही छोड़ देने की इच्छा होती है. वह ग़लत कागज़ों पर साइन करवाते हैं और भ्रष्टाचार करते हैं."
वहीं ललित की बहन अन्नू ने बताया, "मेरे भैया को मानसिक रूप से बहुत टॉर्चर किया गया है. पूर्व सरपंच बीरबल गुर्जर, वर्तमान सरपंच मनोज कुमार और अजीतगढ़ विकास अधिकारी ने बहुत टॉर्चर किया है."
"भैया को छुट्टी नहीं दी. इस्तीफा देने गए तो इस्तीफा नहीं लिया. कुछ दिन के लिए मेडिकल लीव ली थी, उस दौरान भी उन्हें काम करने के लिए बुला लिया जाता था. "
'आरोप बेबुनियाद'

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चीपलाटा सरपंच, पूर्व सरपंच, पंचायत कर्मचारी समेत सभी एफ़आईआर होने के बाद से ही फ़रार हैं.
चीपलाटा गांव के पूर्व सरपंच बीरबल गुर्जर के बेटे मनोज गुर्जर वर्तमान सरपंच हैं. दोनों अपने घर पर नहीं थे लेकिन मनोज के छोटे भाई राहुल गुर्जर ने इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए आरोपों को बेबुनियाद बताया है.
राहुल ने सरकारी पैसे के गबन के आरोपों पर बताया, "वर्ष 2021-2022 और 2022-2023 की ऑडिट में कुछ कमियों को गबन का नाम दिया गया है. जबकि, गबन नहीं है. हमारे पास इसके बिल हैं."
"बिल को रिकॉर्ड पर लाने का काम तत्कालीन वीडीओ नरेंद्र प्रताप सिंह ने किया था. और यहां से उनके तबादले के बाद उन्होंने सारा डेटा पंचायत समिति में जमा करवा दिया था.
राहुल कहते हैं, "नरेंद्र के तबादले के बाद ललित बेनीवाल ने यहां ज्वॉइन किया. अजीतगढ़ के बीडीओ ने दबाव बनवा कर ललित से एफ़आईआर दर्ज करवा दी. जबकि, उनको बाद में मालूम हुआ कि यह गबन नहीं हैं. हमारे पास बिल हैं. हम खुद चाहते हैं कि इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. यदि हम गलत पाए जाते हैं तो बिल्कुल कार्रवाई होनी चाहिए."
ओटीपी मांग कर सरकारी खाते से ग्यारह लाख रुपए खाते से निकाले गए. इस आरोप पर राहुल कहते हैं,
"बिल्कुल सकारात्मक प्रक्रिया के तहत ही ओटीपी मांगा गया था. जिस काम के पेमेंट के लिए ओटीपी मांगा गया था, वो काम तीन महीने पहले ही ग्राउंड पर हो चुका है."
अभियुक्त विकास अधिकारी क्या बोले

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ललित के सुसाइड मामले में एफ़आईआर में अजीतगढ़ बीडीओ को भी नामजद किया गया है.
एफ़आईआर के बाद सरकार ने अजीतगढ़ वीडीओ अजय सिंह को एपीओ (फील्ड पोस्टिंग से हटा दिया है) बना दिया है.
अजय सिंह पर आरोप हैं कि सरपंच के परेशान करने की शिकायत के बाद भी उन्होंने ललित का तबादला नहीं किया. काम का दबाव बनाते थे और इस्तीफा भी नहीं लिया.
अजय सिंह अपने ऊपर लगे इन आरोपों पर कहते हैं, "ललित ने अक्टूबर में भी इस्तीफा दे दिया था. लेकिन इस्तीफा स्वीकार करने का अधिकार सीईओ ज़िला परिषद को होता है. इसलिए मैंने यहां से प्रकरण बना कर सीईओ को भेज दिया. सीईओ ने ललित को बुलाया और बातचीत की जिसके बाद ललित ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया.
विकास अधिकारी कहते हैं, "दूसरी बार उन्होंने पंद्रह तारीख को मौखिक तौर बोला कि मैं रिजाइन करना चाहता हूं क्योंकि सरपंच मुझे परेशान करते हैं. लेकिन, ललित ने मुझे कभी लिखित में नहीं दिया कि सरपंच या पूर्व सरपंच ने उन्हें किस तरह परेशान किया है."
ट्रांसफर नहीं करने के आरोप पर वो कहते हैं, "पंचायती राज विभाग के नियमानुसार प्रखंड विकास पदाधिकारी के पास ग्राम विकास अधिकारी को ट्रांसफर करने की पावर नहीं है. प्रधान की अध्यक्षता में दस सदस्यों की स्टैंडिंग कमेटी ट्रांसफर करती है. 19 तारीख को स्टैंडिंग कमेटी की मीटिंग बुलाई थी. मैंने कहा कि ललित मैं प्रधान को बोल दूंगा कि ट्रांसफर करवा देंगे."

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छुट्टियां नहीं देने के आरोप पर अजय सिंह कहते हैं, "छुट्टियां उन्होंने मांगी और उनको छुट्टियां भी दी गई हैं. दस जुलाई से 25 सितंबर के बीच 78 दिनों तक वह छुट्टियों पर रहे थे."
" चयनित होने के बाद उन्होंने बतौर पहली पोस्टिंग 19 अप्रैल 2023 को चीपलाटा पंचायत में ग्राम विकास अधिकारी पद पर ज्वाइन कर लिया. जिसके बाद वह दस जुलाई से 25 सितंबर तक 78 दिनों तक यूपीएससी मेन्स पेपर की तैयारी के लिए छुट्टियों पर चले गए."
"19 अप्रैल से लेकर 18 फरवरी तक दस महीने यानी कि 300 दिन की नौकरी में उन्होंने 101 दिन की छुट्टी ली है. जबकि,शनिवार,रविवार और सरकारी छुट्टियां अलग थीं."
गैर क़ानूनी तरीक़े से पैसे निकाले जाने पर अजय सिंह बताते हैं, "मैंने उन्हें फ़ोन कर कहा भी था कि पंचायत की ऑडिट में फाइनेंशियल इश्यू आ रहे हैं. इसलिए कोई ट्रांजेक्शन मत करना. मेरे मना करने के बाद भी उन्होंने ट्रांजेक्शन के लिए ओटीपी बता दिया."
अब तक क्या कार्रवाई हुई
ललित की खुदकुशी मामले में एफ़आईआर दर्ज होने के बाद पीड़ित परिवार के बयान दर्ज हो गए हैं. लेकिन, सभी अभियुक्त अभी तक पुलिस गिरफ़्त से बाहर हैं.
अजीतगढ़ के डिप्टी एसपी राजेंद्र सिंह थोई थाने में बीबीसी से कहते हैं, "अठारह फरवरी को सात नामजद अभियुक्तों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर लिखी गई है. मौके से सुसाइड नोट मिला है, मोबाइल जब्त किया है. पीड़ित परिवार के बयान लिए गए हैं."
वह कहते हैं कि, "सबूत इकट्ठा कर रहे हैं. जल्दी ही मुलजिम को गिरफ्तार किया जाएगा. सुसाइड नोट और परिजनों के आरोप हैं कि अभियुक्तों की ओर से परेशान और धमकाया जा रहा था, ग़लत तरह से उनसे ओटीपी लेकर पैसों का ट्रांजेक्शन किया गया है. जांच कर रहे हैं, जो भी इसमें और अभियुक्त बनेंगे उन्हें भी गिरफ़्तार किया जाएगा."
पंद्रह तारीख़ को ललित ने सरपंच और पूर्व सरपंच के ख़िलाफ़ सरकारी पैसे के गबन की एफआईआर दर्ज करवाई. उस जांच में क्या हुआ.
बीबीसी के इस सवाल पर डिप्टी एसपी कहते हैं, "ऑडिट के दौरान पकड़ में आई पांच लाख रुपए के गबन की एफ़आईआर दर्ज करवाई थी. ललित के बयान हो गए थे. उस मामले में भी रिकॉर्ड लिए जा रहे हैं और जांच जारी है."

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समाज सेवी गीगराज जाडोली इस पूरे घटनाक्रम में पीड़ित परिवार के साथ कागजी कार्रवाई में साथ दे रहे हैं. वह कहते हैं, "यह सुसाइड नहीं है यह सुनियोजित हत्या है. पुलिस प्रशासन ने सात दिन में कार्रवाई का आश्वासन दिया है."
"यदि ठीक से काम नहीं करते हैं तो सात दिन बाद प्रदेश भर में आंदोलन किया जाएगा. एट्रोसिटी एक्ट में एफ़आईआर दर्ज होते ही पुलिस की पहली प्राथमिकता बनती है कि अभियुक्तों की गिरफ्तारी हो. लेकिन, वो नहीं हुआ."
गीगराज कहते हैं, "अब तक मुआवज़ा नहीं मिला है. आरोपियों की गिरफ्तारी, पचास लाख मुआवजा, एक सरकारी नौकरी की सरकार से मांग की गई है. हमने 23 फ़रवरी को कलेक्टर और एसपी को भी ज्ञापन सौंप कर अभियुक्तों की गिरफ्तारी की मांग की है."
परिवार की हालत कैसी है

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ललित का दो कमरों का छोटा सा घर है. घर में ज़रूरी सामान के नाम पर दो चारपाई, किचन का सामान और कपड़े हैं. लेकिन, दीवारों में बनी लमारियों में खूब सारी किताबें रखीं हैं.
ललित की बहन अन्नू बताती हैं, "भइया इस नौकरी से खुश नहीं थे लेकिन पारिवारिक स्थितियों को देखते हुए उन्होंने ज्वाइन कर लिया था. वह तो यूपीएससी से आईएएस बनना चाहते थे."
ललित अपने छह सदस्यों के परिवार को संभाल रहे थे.
ललित की मां आंची देवी मनरेगा मजदूरी करती हैं. पिता हीरालाल बेनीवाल पांच साल पहले पैरालिसिस से पीड़ित हो गए थे, बीते साल कुछ ठीक हुए तो पंजाब में ईंट भट्टों पर छुटपुट काम कर रहे हैं. ललित की तीनों बहनें पढ़ाई कर रही हैं. ललित पर ही पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी.

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ललित के परिवार और उनको जानने वाले कहते हैं कि, "ललित इस बार यूपीएससी क्लियर कर लेते. हमारे गांव ने एक आईएएस खो दिया है."
उनकी तीनों बहनें सरकारी स्कूल से पढ़ाई के साथ स्कूल टॉपर रही हैं.
ललित की सबसे छोटी बहन अनीता सीकर से नीट की तैयारी कर रही हैं. दूसरी बहन अन्नू ने राजस्थान विश्वविद्यालय के महारानी कॉलेज से डिस्टिंक्शन के साथ ग्रेजुएशन किया है और वह अब यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं.
जबकि, तीसरी बहन पूजा ने बीएससी किया है और अब बीएड कर रही हैं.
झाड़ली गांव के ही प्रमोद एक निजी स्कूल में टीचर हैं. दशकों से ललित के परिवार को जानते हैं.
कहते हैं,"बेहद मुश्किलों से मां-पिता ने बच्चों को पढ़ाया है. आर्थिक परेशानी को कभी पढ़ाई में आड़े नहीं आने दिया."
"ललित गांव के युवाओं के लिए आदर्श थे और उनसे प्रेरणा लेते थे. ललित को सभी भावी आईएएस के रूप में देखते थे. हमने एक ईमानदार आईएएस खो दिया है."
घटना के बाद से चीपलाटा का माहौल

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थोई थाने से क़रीब बारह किलोमीटर दूर चीपलाटा पंचायत मुख्यालय पर अब ताला लटका हुआ है. गांव में इस घटना की चर्चा हर किसी की जुबान पर है.
क़रीब आठ सौ घरों के गांव चीपलाटा में एक पेड़ के नीचे बैठे बुजुर्ग ताश खेल रहे थे. वह इस घटना पर बात करने से इनकार कर देते हैं. लेकिन, इस घटना को दुखद बताते हैं.
पंचायत कार्यालय के पास सरकारी स्कूल है. इसी स्कूल के सामने रोड़ किनारे एक रेहड़ी पर दुकान चलाते हैं पूरन सिंह.
62 साल के पूरन सिंह कहते हैं, "उस बच्चे के साथ बहुत ग़लत हुआ है. गांव में हर जगह यही चर्चा है कि सरपंच और इन सबने यहां भ्रष्टाचार किया है."
वह कहते हैं, "उस घटना के बाद से पंचायत कार्यालय बंद है. तब से यहां किसी को नहीं देखा. लेकिन, पुलिस वाले ज़रूर रोज आ रहे हैं."
चीपलाटा गांव के बाजार में एक चाय की दुकान पर कुछ लोग बैठे हुए थे. उनमें ही एक पूर्व सरपंच महावीर प्रसाद मीणा थे. वह कहते हैं, "यह बेहद दुखद घटना हुई है. लोगों में आक्रोश है कि एक ग़रीब परिवार के बच्चे को परेशान किया."
'मैंने कोई गलत नहीं किया है आज तक.'

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ललित 9 पेज के अपने सुसाइड नोट में लिखा हैं, 'मैं पंद्रह तारीख को पंचायत समिति अजीतगढ़ में रिजाइन लेटर देने गया था. क्योंकि मैं चीपलाटा पंचायत में इस नौकरी से बहुत स्ट्रेस में रहता हूं.उन्होंने कहा कि पहले एफ़आईआर कराओ फिर प्रधान से ट्रांसफर की बात करता हूं. मैं पहले से ही बहुत डरा हुआ था और डिप्रेशन में था.'
''मैंने ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर 5,20,011 रुपए के भ्रष्टाचार की रिपोर्ट दर्ज करवा दी. पूर्व सरपंच बीरबल ने फोन कर कहा कि मैं मानहानि का केस करूंगा. लेकिन, मुझे नहीं पड़ना इन सब कोर्ट, पुलिस के चक्कर में.''
''पूर्व सरपंच, क्लर्क जगदीश और पोकर ठेकेदार ने ओटीपी के जरिए पेमेंट कर दिया. काम तो ग्राउंड पर हो गया था लेकिन उसकी फाइल तैयार नहीं की थी, सभी फाइल मुझे बनानी पड़ रही हैं.''

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उन्होंने लिखा था, ''जल्दबाजी में पेमेंट करवाया क्योंकि उन्हें पता था कि ऑडिट के चक्कर में अकाउंट फ्रीज होने वाला है. जबकि, सबको लग रहा है कि मैंने लालच में पेमेंट करवाया है. लेकिन, हर जगह मुझे ही बदनाम किया गया है.''
''अब मुझसे प्रेशर हैंडल नहीं होता. मैं ने बीडियो को बोला कि ट्रांसफर करा दो या रिजाइन ले लो.''
'मैं आईआईटी ग्रेजुएट हूं, यूपीएससी करते करते ग्राम विकास अधिकारी जॉब में फंस गया और न अब मुझसे यूपीएससी हो रही है.’
ललित ने अपने सुसाइड नोट के अंत में अपनी बहनों को संबोधित करते हुए लिखा है कि, 'जो मैं नहीं कर पाया, वो तुम तीनों कर के दुनिया को दिखाना. मैं नहीं लड़ पाया, तुम खूब लड़ना, खूब आगे बढ़ना...'
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