नूंह में हिंसा की चिंगारी कैसे भड़की? ग्राउंड रिपोर्ट

नल्हड़ के शिव मंदिर के बाहर की सड़क, जहां सोमवार को भीड़ ने कई गाड़ियों में आगजनी की.
इमेज कैप्शन, नल्हड़ के शिव मंदिर के बाहर की सड़क, जहां सोमवार को भीड़ ने कई गाड़ियों में आगजनी की.
    • Author, अभिनव गोयल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
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  • 31 जुलाई को हरियाणा के नूंह में बजरंग दल ने धार्मिक यात्रा का आयोजन किया था
  • यात्रा में हरियाणा हजारों की संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया
  • यात्रा जब नूंह में मंदिर से आगे बढ़ी तो पथराव शुरू हो गया और देखते ही देखते भीड़ ने आगज़नी शुरू कर दी
  • भीड़ ने शहर की सड़कों और मंदिर के बाहर गोलियां भी चलाईं
  • बड़ी संख्या में लोग मंदिर में फंसे रहे, जिन्हें प्रशासन की मदद से बाहर निकाला गया
  • हिंसा में अब तक छह लोगों की मौत हुई, जिसमें दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं
  • अब तक 116 लोगों को गिरफ्तारी और 90 लोगों से पूछताछ की जा रही है
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आम दिनों में हरियाणा के नूंह ज़िले की जिन सड़कों पर चहल-पहल रहती थी, वहाँ इस वक़्त सन्नाटा पसरा हुआ है, गश्त करते हुए अर्धसैनिक बलों की आवाज़ें ज़रूर सुनी जा सकती हैं.

प्रशासन ने सड़कों से जली हुई गाड़ियों को भले उठा लिया हो, लेकिन उनके निशान पूरे शहर में फैले हुए हैं, जो सोमवार को भड़की सांप्रदायिक हिंसा की गवाही दे रहे हैं.

लोग पिछले तीन दिनों से कर्फ़्यू के चलते घरों में क़ैद हैं और दुकानों के बाहर ताले लटके हुए हैं, कर्फ्यू में पहली बार ढील शुक्रवार की दोपहर को दी गई.

नूंह में सांप्रदायिक हिंसा तो थम गई है, लेकिन आसपास के शहरों से रह-रहकर आगजनी की ख़बरें लगातार आ रही हैं, जिसके चलते शहर में तनाव अब भी क़ायम है.

सोमवार, 31 जुलाई को नूंह दिन भर जलता रहा, भीड़ में कुछ लोग तलवारें, डंडे और बूंदकें लहराते हुए नजर आए. हज़ारों लोग शहर में अपनी जान बचाने के लिए जहाँ-तहाँ भागते हुए दिखाई दिए.

ये दृश्य यहाँ के लोगों ने इससे पहले कभी नहीं देखे थे. आज़ादी के बाद पहली बार इस इलाक़े में भड़की सांप्रदायिक हिंसा ने नूंह के आपसी भाईचारे पर ऐसे काले धब्बे लगा दिए हैं, जिन्हें भुलाना और मिटाना आसान नहीं होगा.

सवाल है कि इतने बड़े पैमाने पर शहर में यह हिंसा क्या अचानक भड़की?

क्या यह कोई सोची-समझी साज़िश थी? यह कब और कैसे शुरू हुई? क्या प्रशासन को इसका अंदाज़ा था? क्या जान-माल की हानि को रोका जा सकता था?

नूंह में हिंसा

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सांप्रदायिक हिंसा कैसे शुरू हुई?

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जिस नूंह में सांप्रदायिक हिंसा भड़की, वह हरियाणा का एक ज़िला है जिसकी सीमा राजस्थान से लगती है, यह ज़िला उस बड़े क्षेत्र का हिस्सा है, जिसे मेवात कहा जाता है.

मेवात क्षेत्र में हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से आते हैं, जो मुस्लिम बहुल हैं.

यह इलाक़ा आर्थिक और सामाजिक रूप से तो ज़रूर पिछड़ा हुआ है लेकिन सांप्रदायिक हिंसा या दंगे जैसी खबरें, यहाँ से कभी नहीं आई लेकिन सोमवार को जो हुआ उसने सब कुछ बदल कर रख दिया है.

बात सबसे पहले घटनाक्रम की, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठन बजरंग दल की अगुवाई में 31 जुलाई को ब्रजमंडल (मेवात) जलाभिषेक यात्रा रखी गई थी.

तय कार्यक्रम के अनुसार इस यात्रा को नल्हड के शिव मंदिर से क़रीब 35 किलोमीटर दूर फ़िरोज़पुर झिरका के झिर मंदिर और वहाँ से क़रीब 30 किलोमीटर दूर पुनहाना के कृष्ण मंदिर पहुँचना था.

बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ने इस यात्रा में शामिल होने के लिए हरियाणा प्रांत के सभी ज़िलों से अपने कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं को बुलाया था.

यात्रा में शामिल पानीपत के रहने वाले बजरंग दल के कार्यकर्ता महेश कुमार ने बताया, “हम नूंह से करीब 180 किलोमीटर दूर पानीपत से सुबह छह बजे बस में 50 लोग चले. हम 11 बजे नल्हड के शिव मंदिर पहुँच गए. यहाँ हज़ारों की संख्या में लोग आए हुए थे. 12 बजे तक भंडारा और जलाभिषेक का कार्यक्रम चला.”

दोपहर के समय मंदिर के अंदर और बाहर भारी भीड़ थी. 50 से ज़्यादा बसें और कारें सड़कों पर खड़ी हुई थी और लोगों के आना जारी था.

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नूंह के नल्हड़ में मौजूद शिव मंदिर

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'आगे बढ़ते ही शुरू हुआ पथराव'

महेश के मुताबिक़, दोपहर 12.30 बजे ब्रजमंडल यात्रा फ़िरोज़पुर झिरका के झिर मंदिर के लिए रवाना हुई.

बसों और कारों में बैठकर लोगों ने निकलना शुरू कर दिया. यात्रा में सैकड़ों की संख्या में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे, लेकिन जैसे ही यात्रा क़रीब दो किलोमीटर आगे बढ़ी और मुख्य सड़क पर पहुँची, तो पथराव शुरू हो गया.

नूंह के स्थानीय निवासी मुस्तफ़ा ख़ान कहते हैं, “यात्रा में शामिल लोगों ने मुख्य सड़क पर पहुँचकर मोनू मानेसर ज़िंदाबाद के नारे लगाए, जिसके बाद हिंसा भड़क गई.”

सोशल मीडिया पर वायरल यात्रा के कई दूसरे वीडियो में भी कुछ लोग 'मोनू मानेसर जिंदाबाद' के नारे लगा रहे हैं.

नूंह के ही स्थानीय निवासी वसीम ख़ान कहते हैं कि लोगों में मोनू मानेसर को लेकर गुस्सा था और यात्रा में शामिल लोग धार्मिक नारे लगा रहे थे, जिसने माहौल खराब किया.

हिंसा के आरोपों पर मोनू मानेसर ने एक वीडियो जारी करके सफाई दी है. उन्होंने कहा, “मेवात के छोटे यू-ट्यूब वालों ने माहौल खराब किया है. पुलिस ने पहले ही पत्रकारों को कहा था कि मोनू मानेसर नहीं आएगा, उसके बाद भी लोकल यू-ट्यूबरों ने माहौल खराब किया.”

मोनू मानेसर ने कहा कि हिंसा से तीन दिन पहले जो वीडियो उन्होंने जारी की थी, उसमें 'एक शब्द भी गलत नहीं बोला था' और उन्होंने सिर्फ लोगों से बढ़-चढ़कर यात्रा में हिस्सा लेने की अपील की थी जो वे हर साल करते हैं.

जहाँ पथराव शुरू हुआ, वहाँ एक दुकान चला रहे संजय कुमार ने बताया, “क़रीब डेढ़ बजे बजरंग दल के लोग यहाँ दिखने लगे. अचानक पत्थरबाज़ी होने लगी और कुछ लोग तलवारें लेकर मेरी दुकान में भी घुस आए और तोड़फोड़ करने लगे. मेरे लड़कों ने मुश्किल से जान बचाई और भीड़ ने दुकान के बाहर खड़ी एक कार को आग लगा दी.”

दोपहर दो बजे नूंह की सड़कों पर आगजनी होने लगी. यात्रा में शामिल जो लोग आगे थे, वे मुख्य सड़क पर फँस गए और सैंकड़ों की संख्या में लोगों ने वापस मंदिर का रुख़ किया.

परिवार का आरोप है कि अभिषेक की मौत मंदिर की बाहर गोली लगने से हुई.
इमेज कैप्शन, परिवार का आरोप है कि अभिषेक की मौत मंदिर के बाहर गोली लगने से हुई.

गोलीबारी में मौत का आरोप

यात्रा में शामिल अनूप ने बताया, “जैसे ही हमें पता चला कि आगे माहौल ख़राब है, हमने वैसे ही बस को मंदिर की तरफ वापस मोड़ दिया. हमारे सामने गाड़ियाँ जलाई जा रही थी, गोलियाँ चल रही थी, जैसे-तैसे हम जान बचाकर मंदिर के पास पहुँचे.”

चश्मदीदों के मुताबिक़ दोपहर को शुरू हुई यह हिंसा शाम को क़रीब पाँच बजे फिर से भड़की और इस बार भीड़ ने शिव मंदिर को घेर लिया.

नल्हड शिव मंदिर के पुजारी ने बीबीसी को बताया, “शाम को माहौल और ज़्यादा ख़राब हो गया. बाहर गोलियाँ चल रही थीं और लोग मंदिर में शरण ले रहे थे. उस समय दो से ढाई हज़ार लोग मंदिर के अंदर थे.”

पानीपत के रहने वाले महेश का दावा है कि वे उस समय अपने चाचा के लड़के अभिषेक के साथ मंदिर के बाहर थे और इस गोलीबारी में अभिषेक की मौत हो हुई. वहीं पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम के बाद ही मौत के कारणों की पुष्टि हो पाएगी.

मंदिर के आस-पास कई मुस्लिम बहुत गाँव हैं, जहाँ हिंसा के बाद से सन्नाटा पसरा हुआ है. पुलिस कार्रवाई के डर से कई मुस्लिम मोहल्ले खाली हो गए हैं. गोलीबारी के सवाल पर यहाँ मौजूद लोग कहते हैं, “बाहर के कुछ शरारती तत्व स्थानीय लोगों की भीड़ में घुस गए थे. यहां के लोगों ने किसी पर गोली नहीं चलाई है.”

नूंह से शुरू हुई ये हिंसा देर शाम हरियाणा के सोहना और गुरुग्राम तक पहुँच गई, जहाँ भीड़ ने तोड़फोड़ और आगजनी की और मस्जिद के 22 साल के नायाब इमाम मोहम्मद साद की हत्या कर दी.

हरियाणा में भड़की इस सांप्रदायिक हिंसा को राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल 'सोची-समझी साजिश' बताते हैं. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “इस घटना के बारे में पता लगते ही हमने पुलिस के उच्च अधिकारियों को घटनास्थल पर भेजा, जिसमें डीजीपी, एडीजी, डीजीपी लॉ एंड ऑर्डर और आस-पास के जिलों की पुलिस शामिल थी.”

उन्होंने कहा, “कुछ लोगों ने एक षड़यंत्र रचकर उस यात्रा पर आक्रमण करना शुरू किया, न सिर्फ यात्रा पर बल्कि पुलिस को भी निशाना बनाया गया. जिसके बाद यात्रा को भी भंग किया और बहुत स्थानों पर आगज़नी की घटनाएं हुईं. निश्चित रूप से एक बड़े षड़यंत्र का हिस्सा लगता है.”

हरियाणा सरकार के मुताबिक, शांति बनाए रखने के लिए नूंह में 14, पलवल में 3, गुरुग्राम में 2 और फरीदाबाद में अर्धसैनिक बलों की एक कंपनी तैनात की हुई है.

सीएम के मुताबिक हिंसा में अब तक छह लोगों की मौत हुई है, जिसमें दो पुलिसकर्मी शामिल हैं. वहीं अब तक 116 लोगों को गिरफ्तार और 90 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है.

इस हिंसा के लिए विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने पुलिस-प्रशासन पर सवाल उठाया है. उन्होने कहा, “बृज मंडल यात्रा हर साल होती है. बीस हजार लोग हिस्सा लेते हैं, यह सबको पता था. इसकी तैयारी पुलिस ने नहीं की, लेकिन मुसलमानों ने की. कई दिनों से पत्थर इकट्ठा किए जा रहे थे. योजना बनाई जा रही थी. यात्रा एक किलोमीटर बढ़ी ही थी कि हमला किया गया. यह एक इंटेलिजेंस की एक बड़ी चूक है.”

नूंह से शुरू हुई हिंसा में एक नाम जो केंद्र में बताया जा रहा है वो नाम है मोनू मानेसर.
इमेज कैप्शन, नूंह से शुरू हुई हिंसा में एक नाम जो केंद्र में बताया जा रहा है वो है मोनू मानेसर.

हिंसा के पीछे की वजह?

इस सांप्रदायिक हिंसा के शुरू होने से पहले ही नूंह के लोगों में काफ़ी गुस्सा था. जिसकी कई वजहों में से एक वजह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो हैं, ये वीडियो बजरंग दल के हरियाणा गौरक्षा प्रांत प्रमुख मोनू मानेसर, बिट्टू बजरंगी और फ़िरोज़पुर झिरका से कांग्रेस के विधायक मामन ख़ान के हैं.

एक वीडियो में मोनू मानेसर कह रहे हैं, “सभी भाइयों को बड़ी ख़ुशी के साथ बताया जा रहा है कि 31 जुलाई, दिन सोमवार को मेवात ब्रजमंडल यात्रा है. सभी भाई बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और मेवात के सभी मंदिरों में ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में जाएँ. हम ख़ुद यात्रा में शामिल रहेंगे. हमारी पूरी टीम यात्रा में शामिल रहेगी.”

यहाँ बताना ज़रूरी है कि मोनू मानेसर पर कई गंभीर आपराधिक मामले हैं जिनमें मेवात के दो युवकों नासिर और जुनैद की हत्या का मामला भी शामिल है, मोनू मानेसर के वीडियो आते रहे हैं लेकिन पुलिस का कहना है कि वे फ़रार हैं.

ऐसा ही एक वीडियो खुद को गौरक्षक बताने वाले बिट्टू बजरंगी का है, जिसमें वे कह रहे हैं, “पूरी लोकेशन दे दूँ कि मैं कहाँ-कहाँ आ रहा हूँ. नहीं तो यह कहेंगे कि बताया नहीं, कि हम ससुराल आए और मुलाक़ात नहीं हुई इसलिए हम पूरी लोकेशन देंगे. अभी हम पाली हैं और निकलेंगे धौंस से. फूल माला तैयार रखना. कोई दिक़्क़त नहीं हैं.”

इसी वीडियो में पीछे से आवाज़ आती है कि 'जीजा तुम्हारे आ रहे हैं', जिस पर बिट्टू बजरंगी सहमति जताते हुए दिखते हैं.

वहीं एक वीडियो में फ़िरोज़पुर झिरका से कांग्रेस विधायक मामन ख़ान ने विधानसभा में मोनू मानेसर को धमकी दी थी, हिंसा के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने अपने बयान पर सफाई दी, “मैंने ये बात (प्याज़ की तरह फोड़ने की) पब्लिकली नहीं कही थी. मैंने यह बात सरकार से कही थी कि सरकार इसके ऊपर (मोनू मानेसर) लगाम लगाए ताकि भाईचारा न बिगड़े.”

सोमवार को नूंह में शुरू हुई हिंसा के बाद शाम में सोहना में भी आगजनी हुई.

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इमेज कैप्शन, सोमवार को नूंह में शुरू हुई हिंसा के बाद शाम में सोहना में भी आगजनी हुई.

हिंसा से पहले का डर

हिंसा से पहले इन तीनों वीडियो की चर्चा पूरे नूंह में हो रही थी.

स्थानीय निवासी नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं, “मोनू मानेसर को लेकर यहाँ के लोगों में ग़ुस्सा है. उसने तीन दिन पहले वीडियो डाली थी और कहा था कि मैं यात्रा में आ रहा हूँ. उन्होंने माहौल को ख़राब करने का काम किया.”

इस तनाव को नूंह के रहने वाले स्थानीय लोग महसूस कर रहे थे.

स्थानीय निवासी मुस्तफ़ा ख़ान बताते हैं, “हिंसा से पहले ही लोगों ने प्रशासन से कहा था कि इस तरह के वीडियो बनाकर माहौल ख़राब करने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन जो मुस्तैदी पुलिस को दिखानी चाहिए थी, वैसा कुछ दिखाई नहीं दिया.”

नूंह थाने के एक पुलिस अधिकारी ने बीबीसी से बातचीत में बताया, “हमने दोनों पक्षों को बिठाकर बात भी की, ताकि यात्रा के दिन कुछ गड़बड़ी न हो. बकायदा प्रेस में निकलवाया भी कि मोनू मानेसर यात्रा में शामिल नहीं हो रहा है.”

उन्होंने बताया कि हिंसा के दिन हज़ारों की भीड़ के सामने पुलिस जवानों की संख्या काफ़ी कम थी. इस घटना में कई पुलिसकर्मी घायल भी हुए हैं.

हिंसा भड़काने के लिए मोनू मानेसर पर आरोप लग रहे हैं. उनका जवाब लेने के लिए बीबीसी ने कई बार उनसे फ़ोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बात नहीं की.

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क्यों सुलग रहा है मेवात?

मेवात के लोग मोनू मानेसर और बजरंग दल के लोगों को लेकर रोष में हैं और इसकी वजह पिछले कई सालों से इलाक़े में बढ़ते कथित गौरक्षक और उनसे जुड़ी घटनाएँ हैं.

फरवरी महीने में राजस्थान में भरतपुर के रहने वाले नासिर और जुनैद को कुछ कथित गोरक्षकों ने जलाकर मार दिया था.

पीड़ित परिवार ने इसके पीछे मोनू मानेसर का हाथ बताया था.

इस मामले में राजस्थान पुलिस मोनू मानेसर को कई महीनों से गिरफ़्तार करने की कोशिश कर रही है लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाई है जबकि मोनू खुलेआम मीडिया को इंटरव्यू दे रहे हैं.

इस घटना से कुछ दिन पहले, जनवरी महीने में नूंह के ही रहने वाले 21 साल के वारिस की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी, इस मामले में भी पीड़ित परिवार ने मोनू मानेसर पर हत्या करने का आरोप लगाया था. उस समय भी घटनास्थल पर मोनू मानेसर की मौजूदगी की तस्वीरें सामने आई थीं.

तब बीबीसी से बातचीत करते हुए मोनू ने कहा था, "वारिस गो-तस्करी कर रहा था और हमारे कार्यकर्ता उसका पीछा कर रहे थे, सड़क दुर्घटना में उसकी मौत हुई, मैं दुर्घटना के कुछ देर बाद पहुँचा था और मैंने पहुँचने पर वारिस को चाय पिलाई और अस्पताल पहुँचवाया था."

ये दो घटनाएँ मेवात के लोगों की ज़ुबान पर हैं, जिसे वे भूल नहीं पाए हैं. पिछले कुछ सालों से मोनू मानेसर सहित गोरक्षकों पर मारपीट, हिंसा के आरोप लगातार लगते रहे हैं. बजरंग दल से जुड़े गोरक्षकों ने हरियाणा के ज़िलों में अपनी-अपनी टीमें बनाई हुई हैं, जो रात के अंधेरे में सूचना मिलने पर कथित गोतस्करों को पकड़ते हैं.

मेवात के स्थानीय लोगों का कहना है कि गोरक्षकों के निशाने पर हमेशा मुसलमान होते हैं, जिसके कारण इलाक़े में लंबे समय से भय का माहौल है.

वरिष्ठ पत्रकार हेमंत अत्री कहते हैं, “हरियाणा सरकार 2015 में गोवंश संरक्षण संवर्धन बिल लाई थी. यह बहुत सख़्त क़ानून है, जिसमें 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है. किसी भी क़ानून को लागू करने का दायित्व सरकार, पुलिस का है, लेकिन सरकार इसमें गोरक्षकों की मदद ले रही है. हरियाणा सरकार ने हर ज़िले में काउ टास्क फ़ोर्स बनाई है जिसमें सरकारी अधिकारियों के साथ ऐसे गोरक्षक भी सदस्य बने हुए हैं.”

वे कहते हैं, "न सिर्फ़ कथित गौरक्षकों की हिंसा बल्कि गुरुग्राम में जो खुले में नमाज़ पढ़ने को लेकर जो माहौल ख़राब किया गया वो सब इसी कड़ी की हिस्सा हैं कि कैसे मेवात का माहौल खराब किया जाए".

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पारंपरिक यात्रा में वीएचपी की सेंध

ऐसा पहली बार नहीं है कि जब नूंह के नल्हड शिव मंदिर से मेवात ब्रजमंडल यात्रा निकली हो. स्थानीय लोगों के मुताबिक़ यह यात्रा दशकों से निकल रही है.

स्थानीय निवासी बताते हैं कि इस इलाक़े में हिंदुओं के तीन बड़े मंदिर हैं. पिछले कई सालों से स्थानीय हिंदू परिवार, इन तीनों मंदिरों की यात्रा करते हैं लेकिन पिछले तीन सालों से इस यात्रा का स्वरूप बदल गया है.

वरिष्ठ पत्रकार हेमंत अत्री कहते हैं, “यह यात्रा स्थानीय हिंदू परिवारों से जुड़ी हुई है और यह उनकी मान्यता है, लेकिन पिछले दो तीन सालों से वीएचपी और बजरंग दल ने बाहर के लोगों को इस यात्रा में मोबलाइज करना शुरू किया, ताकि यहाँ के मुसलमानों पर दबाव डाला जा सके.”

वे कहते हैं, “यह यात्रा मेवात के लोगों की है, इसमें पानीपत, हिसार, भिवानी और कुरुक्षेत्र जैसे दूर-दराज ज़िलों के लोग क्या कर रहे हैं? यह साज़िश के तहत किया जा रहा है. हज़ारों की संख्या में लोगों को जमा किया गया."

इसके जवाब में बीबीसी से बात करते हुए विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री डा. सुरेंद्र जैन ने कहा, "इस तरह की बातें मेव मुसलमानों के तरीकों पर पर्दा डालने की कोशिश की. पहले लोग आते थे लेकिन हम लोगों ने इस यात्रा को संगठित रूप दिया है. अगर कोई कहता है कि मेवात के हिंदू ही जा सकते हैं तो मैं समझता हूं कि यह तीर्थों के महत्व का अपमान करना है.”

सुरेंद्र जैन पर आरोप है कि उन्होंने यात्रा के दिन मंदिर में भड़काऊ भाषण दिया था. वरिष्ठ पत्रकार हेमंत अत्री कहते हैं, "यात्रा से पहले मंदिर परिसर में भड़काऊ भाषण दिए गए. यात्रा में शामिल लोग क्या कोई युद्ध लड़ने के लिए आए थे, उनके हाथ में हथियार क्या कर रहे हैं?”

इसके जवाब में सुरेंद्र जैन कहते हैं, “मैंने कोई भड़काऊ भाषण नहीं दिया, मैंने सिर्फ इतना कहा कि हम अपनी बेटियों को उठने नहीं देंगे, गाय की रक्षा करेंगे.”

उन्होंने कहा, “धार्मिक यात्रा में कोई हथियार नहीं लेकर जाता, लेकिन जिनके पास हथियार का लाइसेंस होता है वो अपने साथ लेकर चलता ही है. यात्रा में लोगों के पास लाइसेंस हथियार थे. अगर वे इस्तेमाल नहीं करते तो बहुत लोग मारे जाते.”

सवाल है कि क्या जानबूझकर मेवात का माहौल ख़राब किया जा रहा है?

अगर ऐसा है तो इसे रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है? क्या सरकार की तरफ से इसे रोकने के गंभीर प्रयास हो रहे हैं?

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