हरियाणा में नूंह की सांप्रदायिक हिंसा: 'अभिषेक को गोली लगी, हम उसे उठा नहीं सके'

- Author, अभिनव गोयल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नल्हड़, नूंह से
हरियाणा के नूंह में सांप्रदायिक हिंसा के तीन दिन बाद भी प्रदेश के कई इलाक़ों में तनाव है. नूंह हिंसा में अब तक कम से कम पाँच लोगों की मौत हुई है, जिनमें दो होम गार्ड के जवान भी शामिल हैं.
नूंह ज़िले में सांप्रदायिक झड़प की शुरुआत तब हुई जब अफ़वाह फैल गई कि 31 जुलाई को एक हिन्दू धार्मिक जुलूस में फ़रार गौ रक्षक मोनू मानेसर भी शामिल होने वाले हैं.
मोनू मानेसर भिवानी में दो मुस्लिम युवक जुनैद और नासिर की हत्या के मुख्य अभियुक्त हैं. यह हत्या इसी साल फ़रवरी महीने में हुई थी. मोनू मानेसर बजरंग दल से जुड़े हुए हैं.
हिन्दुओं के उस धार्मिक जुलूस में मोनू मानेसर के शामिल होने की अफ़वाह के बाद स्थिति बिगड़ गई और पत्थरबाज़ी शुरू हो गई. इसके बाद कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया.
हरियाणा सरकार ने एहतियात के तौर पर पूरे इलाक़े में धारा 144 लगा दी थी और इंटरनेट भी बंद कर दिया था.
नूंह हिंसा के बाद मंगलवार की रात गुड़गाँव की एक मस्जिद में हमला हुआ था. मस्जिद को आग के हवाले कर दिया गया और उसके नायब इमाम की हत्या कर दी गई. नायब इमाम की उम्र महज़ 22 साल थी.
नूंह के स्थानीय निवासी मुस्तफ़ा ख़ान का कहना है, ''सोमवार को दोपहर में शोभायात्रा जब सड़क पर आई तो उन्होंने मोनू मानेसर ज़िंदाबाद के नारे लगाए. इसके बाद हिंसा भड़की. मोनू मानेसर ने तीन दिन पहले वीडियो जारी कर कहा था कि वो यात्रा में आ रहा है, जिसे लेकर लोग यहाँ भड़के हुए थे. लोग नहीं चाहते थे कि वो यहां आए.''
मुस्तफ़ा ख़ान ने कहा, ''उसके अलावा बजरंगी नाम के व्यक्ति ने वीडियो बनाकर कहा था कि तुम्हारा जीजा आ रहा है, उसे लेकर भी लोगों में ग़ुस्सा था. पिछले साल भी शोभायात्रा निकली लेकिन कोई दंगा-फसाद नहीं हुआ था लेकिन इन बार मोनू मानेसर और कुछ लोगों ने पहले से वीडियो जारी कर माहौल ख़राब किया. यहाँ के लोगों ने प्रशासन को पहले ही अलर्ट किया था लेकिन उनकी मुस्तैदी कहीं दिखाई नहीं दी.''
नूंह में शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा के शिकार दोनों समुदायों के लोग बने हैं. नूंह में हिंसा के दौरान बजरंग दल से जुड़े एक युवक की भी मौत हुई है. अभिषेक नाम का यह युवक मूल रूप से पानीपत का रहने वाला था और अपने चचेरे भाई के साथ बजरंग दल की जलाभिषेक यात्रा में शामिल हुआ था.

अभिषेक और साद मोहम्मद की मौत के लिए कौन ज़िम्मेदार?
नूंह के नल्हड़ मेडिकल कॉलेज परिसर में बीबीसी से बात करते हुए अभिषेक के साथ यात्रा में शामिल हुए उनके चचेरे भाई महेश ने बताया, “गोली लगने के बाद अभिषेक गिर गया था, हम उसे उठा नहीं सके. अगले दिन अस्पताल में उसका शव होने की जानकारी मिली.”
22 वर्षीय अभिषेक के शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया है. हालांकि पुलिस का कहना है कि गोली लगने की पुष्टि पोस्टमॉर्टम के बाद ही की जाएगी.
दूसरी तरफ़ मस्जिद के नायब इमाम मोहम्मद साद की हत्या पर उनके बड़े भाई शादाब अनवर ने कहा कि पुलिस ने सुरक्षा का भरोसा दिया था लेकिन भीड़ आई तो पुलिस कुछ भी नहीं कर पाई.
शादाब अनवर ने बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा से कहा, "मैं अपने भाई का बस चेहरा ही देख पाया हूँ. मेरे भाई पिछले सात महीने से इस मस्जिद के इमाम थे. मेरे भाई की उम्र महज़ 22 साल थी. हम मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं. आज मेरे भाई को वापस घर लौटना था. उसका टिकट था. मैंने उसे फ़ोन करके समझाया कि अभी माहौल ठीक नहीं है. जब तक हालात सामान्य ना हो मस्जिद से बाहर ना निकले. यही आख़िरी बात मेरी उससे हुई."
वहीं अभिषेक के चचेरे भाई महेश ने बताया, “यात्रा में हज़ारों लोग शामिल थे जिनमें बड़े पैमाने पर महिलाएँ और बच्चे भी थे. यात्रा को नल्हड़ के शिव मंदिर में जलाभिषेक करना था. नल्हड़ के शिव मंदिर से यात्रा के निकलने के दो-तीन किलोमीटर बाद ही पत्थरबाज़ी शुरू हो गई थी."

'दिहाड़ी मज़दूर का बेटा'
महेश के मुताबिक़- अभिषेक का एक बड़ा भाई है, एक शादीशुदा बहन है और पिता दिहाड़ी मज़दूर हैं.
महेश के मुताबिक़, “अभिषेक 22 साल का समझदार लड़का था. अपना पूरा घर संभाल रहा था. वो गाड़ियों का मैकेनिक था.”
अभिषेक और महेश पहली बार यात्रा में शामिल हो रहे थे. महेश के मुताबिक़ यहाँ आने के लिए उन्हें बजरंग दल की तरफ़ से पहचान पत्र भी मिला था.
महेश के मुताबिक़ वो बजरंग दल की पानीपत इकाई के सदस्य हैं और अभिषेक भी बजरंग दल से जुड़े थे.
महेश के मुताबिक़ वो 8-9 महीने पहले बजरंग दल से जुड़े थे और उसके कार्यक्रमों में शामिल होते थे.
हालांकि महेश का कहना है कि उनके और अभिषेक के पास बजरंग दल का कोई पद नहीं है.

दुष्यंत चौटाला ने आयोजकों पर उठाया सवाल
विपक्षी पार्टियां हरियाणा की बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को घेर रही हैं. विपक्ष का कहना है कि बीजेपी क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम रही है.
वहीं मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा है कि दोषियों को बख़्शा नहीं जाएगा. उन्होंने हिंसा के पीछे साज़िश की आशंका जताई है.
दूसरी ओर हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि ऐसी घटना हरियाणा में कभी नहीं हुई.
दूसरी ओर दुष्यंत चौटाला ने कहा, ''नूंह मेवात का इलाक़ा है और इसका इतिहास स्वतंत्रता के पहले का हो या बाद का, हमेशा इस देश की अखंडता और एकता के साथ रहा है. जब मुग़लों ने हमला किया तब भी मेवात के लोगों ने उस वक़्त के भारतीय राजाओं का साथ दिया था.''
दुष्यंत चौटाला ने कहा, ''धार्मिक जुलूस के निकालने वालों ने पूरे कार्यक्रम की जानकारी नहीं दी थी. उन्होंने यह भी नहीं बताया था कि इसमें कितनी तादाद में लोग शामिल होंगे. इस सूचना की कमी के कारण भी हिंसा बेकाबू हुई. यात्रा के आयोजकों को ज़िला प्रशासन को भीड़ की पूरी जानकारी देनी चाहिए थी.''
विश्व हिंदू परिषद ने सोमवार मेवात में एक धार्मिक रैली का आयोजन किया था. विश्व हिंदू परिषद का आरोप है कि इलाक़े के ‘जिहादी तत्वों’ ने अचानक रैली पर हमला किया.
बीबीसी से बात करते हुए विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, “हमारे कई लोग घायल हुए हैं. कुछ के मारे जाने की भी रिपोर्ट है, हालाँकि अभी हमने इसकी पुष्टि नहीं की है और हम आँकड़े जुटा रहे हैं.”
विनोद बंसल दावा करते हैं, “एक सुनियोजित साज़िश के तहत हमारी यात्रा पर हमला किया गया. हमारे लोग बड़ी तादाद में वहां फँस गए थे जिन्हें देर रात तक बाहर निकाला गया.”

इमेज स्रोत, ANI
मंदिर के पुजारी ने क्या बताया?
नूंह के नल्हड़ शिव मंदिर के पुजारी दीपक शर्मा के मुताबिक़ करीब दो हज़ार लोगों ने मंदिर में शरण ली थी जिन्हें शाम छह बजे के बाद प्रशासन ने सुरक्षित निकाल लिया.
सोमवार के घटनाक्रम के बारे में पुजारी बताते हैं, “सुबह से सब शांत था. दोपहर के बाद माहौल ख़राब हुआ. भक्तजनों का आना जाना सुबह चार बजे से लगा हुआ था. दोपहर बारह बजे के बाद यात्रा यहां आई. मैं पहले भी भीतर था और हादसे के दौरान भी भीतर ही था.”

मंदिर पर हमले के बारे में पूछने पर पुजारी कहते हैं, “जलाभिषेक सुबह से ही चल रहा था. हम अपनी गद्दी पर बैठे थे, लोग आ जा रहे थे. दिनभर में क़रीब चार हज़ार भक्त यहां रहे होंगे. शाम के समय दो से ढाई हज़ार लोग मंदिर परिसर के भीतर थे, जब बाहर का माहौल ख़राब हुआ. जो लोग आगे फंस गए थे उन्होंने फिर यहां आकर शरण ली.”
मंदिर में लोगों के फंसे होने के बारे में पुजारी ने बताया, “माहौल ख़राब था, वो लोग यहां क़रीब दो से ढाई घंटे रहे होंगे. अंदर भजन चल रहा था, माहौल जब ख़राब हो गया तो लोग बाहर नहीं निकले. मंदिर के बाहर गोली चल रही थी.शाम साढ़े छह बजे के बाद पुलिस ने लोगों को निकालना शुरू किया. पुलिस के आने के बाद यहां कुछ नहीं हुआ.”
बजरंग दल की जलाभिषेक यात्रा के बारे में पुजारी बताते हैं, “जहां तक मुझे मालूम है, बजरंग दल की ये यात्रा एक साल पहले ही शुरू हुई है. पहले यहां कभी भी इस तरह का तनाव नहीं हुआ है. हमेशा से ही शांति रही है. बजरंग दल के कार्यकर्ता भी जलाभिषेक करते हैं, बाकी लोगों की तरह.”
नूंह का इलाक़ा कैसा है?
हरियाणा का नूंह ज़िला मेवात में आता है जो राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के क़रीब मुस्लिम बहुल आबादी का इलाक़ा है.
इसके उत्तर में गुरुग्राम, पश्चिम में रेवाड़ी और पूर्व में पलवल ज़िले हैं. दक्षिण में इसकी सीमाएं राजस्थान से जुड़ी हैं. इस ज़िले में एक तरफ़ मैदानी इलाक़ा है और दूसरी तरफ़ अरावली पर्वत की छोटी-छोटी पहाड़ियां हैं.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ ज़िले की क़रीब 79 प्रतिशत आबादी मुसलमान हैं.
जम्मू और कश्मीर और लक्षद्वीप के बाहर, असम के धुबरी को छोड़कर प्रतिशत के लिहाज़ से मुसलमानों की सर्वाधिक आबादी यहीं रहती है.
नूंह को अक्सर इस इलाक़े के नाम पर मेवात भी कहा जाता है और ये भारत के नीति आयोग की देश में सबसे कम विकसित ज़िलों की सूची में शामिल हैं.
गुरुग्राम से सटा इस ज़िले की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत रही है.
हाल के सालों में हिंदू गौ-रक्षकों और स्थानीय मेव मुसलमानों के बीच टकराव के कई मामले सामने आए हैं और साप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक रहे इस इलाक़े में धर्म के आधार पर टकराव बढ़ा है.
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