गोपाल कांडा: जूते-चप्पल के कारोबारी से नेता बनने और गीतिका शर्मा मामले में बरी होने की कहानी

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दिल्ली के राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने हरियाणा सरकार के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा को एमडीएलआर एयरलाइंस में एयर होस्टेस रहीं गीतिका शर्मा को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में बरी कर दिया है.
राउज़ एवेन्यू कोर्ट में विशेष न्यायाधीश विकास ढुल ने मामले में सह-अभियुक्त अरुणा चड्ढा को भी बरी कर दिया है.
अदालत के फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए गोपाल कांडा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ''मेरे ख़िलाफ़ कोई भी सबूत नहीं था. ये मामला सिर्फ़ और सिर्फ़ बनाया गया था. ये किस सोच से और क्यों बनाया गया था, ये आज कोर्ट ने बता दिया है. आज सब कुछ आपके सामने है. आप कोर्ट ऑर्डर पढ़ सकते हैं.''
मृतक गीतिका शर्मा के भाई अंकित शर्मा मामले में अदालत के फ़ैसले पर सवाल उठा रहे हैं.
एक न्यूज़ चैनल से बातचीत में अंकित ने कहा, ''ये बहुत ही मायूस करने वाली बात है. 11 साल से हम केस लड़ रहे थे जिसमें हमारे पास दस्तावेज़ हैं. मेडिकल रिपोर्ट्स हैं, निजी मैसेज हैं और ई-मेल हैं. इनमें साफ़ तौर पर धमकी दी गई हैं और फिर इन सबूतों को ख़ारिज कर देना बहुत ही निराशाजनक है.''

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गीतिका शर्मा कौन थीं और मामला क्या है?

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गोपाल कांडा की एक एयरलाइंस कंपनी थी एमडीएलआर एयरलाइंस. इस एयरलाइंस का मालिकाना हक मुरली धर लख राम (एमडीएलआर) ग्रुप के पास था. मुरली धर लख राम गोपाल कांडा के पिता थे और उन्हीं के नाम पर एमडीएलआर ग्रुप का नाम रखा गया था.
गीतिका शर्मा एमडीएलआर एयरलाइंस में एयर होस्टेस थीं. 18 अक्टूबर, 2006 को गोपाल कांडा की कंपनी एमडीएलआर (मुरली धर लख राम) एयरलाइंस में वो ट्रेनी केबिन क्रू मेंबर बनी थीं.
एयरलाइंस से जुड़ने के समय गीतिका की उम्र साढ़े सत्रह साल थी और वो नाबालिग थीं. इसलिए गीतिका को छह महीने बतौर ट्रेनी गुजारने थे.
फिर 28 अगस्त, 2008 को गीतिका को प्रमोट कर सीनियर केबिन क्रू बना दिया गया था.
5 अगस्त 2012 को एयर होस्टेस गीतिका शर्मा ने ख़ुदकुशी कर ली थी. उनका शव दिल्ली के अशोक विहार स्थित घर पर पंखे से लटका पाया गया था.
मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था. इस सुसाइड नोट में गीतिका ने कथित रूप से गोपाल कांडा और अरुणा चड्ढा का जिक्र किया था.
सुसाइड नोट में लिखा था कि गोपाल कांडा से परेशान होकर वो अपनी जान दे रही हैं. इसमें शारीरिक शोषण एक प्रमुख आरोप था.
गीतिका की आत्महत्या के छह महीने बाद उनकी मां ने भी ख़ुदकुशी कर ली थी और उन्होंने भी सुसाइड नोट में कथित तौर पर गोपाल नाम का नाम लिया था.
इस मामले में 8 अगस्त को अरुणा चड्ढा और फिर 18 अगस्त, 2012 को गोपाल कांडा को गिरफ़्तार किया गया था.
दोनों अभियुक्तों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 506 (आपराधिक धमकी), 201 (सबूत नष्ट करना), 120 बी (आपराधिक साजिश) और 466 (जालसाजी) सहित विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे.
इसके अलावा ट्रायल कोर्ट ने कांडा के खिलाफ बलात्कार (376) और 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध) के आरोप भी तय किए थे. लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने बाद में आईपीसी की धारा 376 और 377 के तहत आरोपों को खारिज कर दिया था.
गोपाल कांडा को लगभग 18 महीने जेल में रहना पड़ा था और फिर मार्च 2014 में कोर्ट ने कांडा को जमानत दे दी थी.
गीतिका के परिवार के आरोप

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पिछले साल 2022 में गीतिका शर्मा आत्महत्या मामले को दस साल पूरे हुए थे. इस मौके पर बीबीसी ने गीतिका शर्मा के परिजन से बातचीत की थी.
गीतिका के पिता दिनेश शर्मा ने बीबीसी से बातचीत में दावा किया था कि केस को लेकर उनको लगातार डराने की कोशिशें की गईं और यहां तक कि जब ये मामला रोहिणी की अदालत में चल रहा था तब एक बार उन पर हमला भी किया गया.
दिनेश शर्मा ने कहा था , ''चाहे 10 साल बीत गए पर मेरे ज़ख्म अब भी हरे हैं. गोपाल कांडा और अरुणा चड्ढा ने हमारा सब कुछ ख़त्म कर दिया.''
रोते हुए दिनेश शर्मा ने बताया था, ''जब गीतिका ने नौकरी छोड़ दी थी तब गोपाल कांडा और उनकी पत्नी उसको मनाने के लिए उनके घर आए थे, बहुत मान-मन्नौवल के बाद जनवरी 2011 में उसने वापस गोपाल कांडा की कंपनी में काम शुरू किया.''
"अगर वो दोबारा काम पर नहीं जाती तो शायद हमको ये दिन नहीं देखना पड़ता."
मामले पर गोपाल कांडा शुरू से ही 'राजनीतिक षडयंत्र' की बात कहते आए हैं.
पिछले साल बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा था कि गीतिका की मौत से क़रीब तीन महीने पहले से उनका उससे कोई संपर्क नहीं था और इतने साल काम करने के दौरान उसकी तरफ़ से कोई भी शिकायत नहीं थी.
कौन हैं गोपाल कांडा?
गोपाल कुमार उर्फ़ गोपाल कांडा हरियाणा के सिरसा में जन्मे और वर्तमान में सिरसा विधानसभा सीट से विधायक हैं. गोपाल के पिता मुरली धर शहर के जाने-माने वकील और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता थे.
गोपाल ने अपने करियर की शुरुआत नब्बे के दशक में रेडियो रिपेयरिंग की छोटी सी दुकान से की थी. दुकान का नाम जुपिटर म्यूजिक होम था. इसके बाद गोपाल अपने भाई गोविंद संग जूतों के बिजनेस में आए और सिरसा में ही जूतों की दुकान खोली.
धीरे-धीरे गोपाल की पहुंच व्यापारियों और नेताओं तक हो गई और इसके बीच गोपाल ने जूतों की फैक्ट्री शुरू की.
इस दौरान कांडा की नजदीकी सिरसा के ताक़तवर चौटाला परिवार से हुई.1999 से 2004 के बीच हरियाणा में आईएनएलडी सरकार के दौरान गोपाल कांडा का कारोबार काफ़ी फैल गया था.
फिर साल आया 2007 और कांडा ने अपनी एमडीएलआर एयरलाइंस शुरू की. लेकिन गोपाल की एयरलाइंस सिर्फ़ दो साल तक उड़ान भर पाई और 2009 में इसके ऑपरेशन्स को बंद कर दिया गया.
2009 में गोपाल कांडा ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की और भूपिंदर सिंह हुड्डा की सरकार में गृह राज्य मंत्री बने थे.
2012 में गीतिका शर्मा मामले में उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा और जेल जाना पड़ा था.
जेल से बाहर निकलकर गोपाल कांडा ने 'हरियाणा लोकहित' की पार्टी बनाई और सिरसा से ही 2014 का विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन तब इंडियन नेशलन लोकदल के मक्खन लाल सिंघल ने उन्हें हरा दिया था.
उसके बाद साल 2019 में गोपाल कांडा ने हरियाणा से चुनाव जीता और विधानसभा के सदस्य बने थे. जीत के बाद कांडा ने बिना शर्ता सत्तारूढ़ बीजेपी को अपना समर्थन दिया था.
लेकिन मीडिया में ख़बरें बनने लगीं तो बीजेपी ने कांडा से समर्थन लेने से इनकार कर दिया था.
गोपाल कांडा के भाई गोविंद कांडा अभी बीजेपी के सदस्य हैं और उन्होंने साल 2021 में पार्टी के टिकट पर ऐलनाबाद उपचुनाव लड़ा था.
कॉपी - अंशुल सिंह
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