नूंह हिंसा के बाद फिर चर्चा में आए मोनू मानेसर कौन हैं?

हरियाणा के नूंह में सोमवार को बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा के दौरान भड़की हिंसा की आग गुरुग्राम और सोहना तक फैल गई है.
ये यात्रा हिंदूवादी संगठन बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद की ओर से निकाली जा रही थी. सोमवार सुबह 10 बजे नूंह में हज़ारों की तादाद में लोग इस यात्रा में शामिल होने के लिए जुटे और इस यात्रा को इलाके के हर मंदिर में जाना था लेकिन दोपहर तक़रीबन 12 बजे के आसपास इस यात्रा की सूरत बदल गई.
ख़बर आने लगी कि कथित आपत्तिजनक नारेबाज़ी के बाद यात्रा पर पत्थरबाज़ी हुई है और शाम तक नूंह से शुरू हुई हिंसा गुरुग्राम, सोहना तक फैल गई. कई वाहन, दुकानें जला दी गईं.
गुरूग्राम के सेक्टर- 57 में एक मस्जिद जला दी गई और मस्जिद के नायब इमाम की हत्या कर दी गई.
अब तक कम से कम पांच लोगों की मौत हिंसा में हुई है और 15 से अधिक लोग घायल हैं.
हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज का कहना है, ''जिस स्तर की ये हिंसा हुई है, ये अचानक भड़की हिंसा नहीं है. नूंह में दोनों समुदाय लंबे समय से प्यार से रहते हुए आए हैं. ये तो किसी ने ज़हर घोला है. किसी ने इंजीनियरिंग की है, किसी ने मास्टरमाइंड किया है. जिस तरह से एंट्रीऔर छतों पर पत्थर रखे हुए हैं, हथियार भी हैं और गोलियां भी हैं. एकदम तो सामने आते नहीं हैं.''

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कौन हैं मोनू मानेसर
एक नाम जो इस हिंसा के केंद्र में बताया जा रहा है वो नाम है मोहित यादव उर्फ़ मोनू मानेसर.
मोनू मानेसर हरियाणा में एक जाना माना नाम हैं, इससे पहले कथित गोरक्षा के नाम पर हुई हत्याओं के मामले में उनका नाम सुर्खियों में आता रहा है.
बृजमंडल यात्रा से दो दिन पहले, मोनू मानेसर का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वो लोगों से अपील कर रहे हैं कि सोमवार को होने वाली बृजमंडल यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हों और वह खुद इस यात्रा में अपने समर्थकों के साथ शामिल होंगे और पूरे नूंह के मंदिरों में यात्रा लेकर जाएंगे.
कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यात्रा में मोनू मानेसर के शामिल होने से नूंह के लोग नाराज़ थे.
मेवात के घसेरा गांव के सरपंच अशरफ़ ख़ान बताते हैं, “मोनू मानेसर ने वीडियो डाला था कि वो नूंह में आएगा, उसका नाम नूंह में मुसलमानों की हत्या के मामले में दर्ज था लेकिन वो गिरफ्तारी के डर से बेखौफ़ वीडियो में कह रहा था कि नूंह से यात्रा निकालेंगे. इस वीडियो की चर्चा थी. लोगों में नाराज़गी थी कि हत्या का अभियुक्त वीडियो डाल कर कह रहा है वो अपने समर्थकों के साथ आ रहा है.”
हालांकि मोनू मानेसर ने समचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा है कि विश्व हिंदू परिषद की सलाह पर उन्होंने इस यात्रा में हिस्सा नहीं लिया था.
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मोनू मानेसर खुद को बजरंग दल का गौरक्षक प्रांत प्रमुख बताते हैं.
फरवरी में राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले जुनैद और नासिर के जले हुए शव हरियाणा के भिवानी में मिले थे. इस हत्या की एफ़आईआर में मुख्य अभियुक्त मोनू मानेसर थे.
तब हरियाणा पुलिस ने कहा था कि वो फ़रार हैं और उनकी तलाश जारी है. राजस्थान पुलिस की एक टीम भी भिवानी पहुंची थी लेकिन उसे भी खाली हाथ लौटना पड़ा.
मोनू मानेसर को हत्या के इस केस में कभी भी गिरफ़्तार नहीं किया गया.
जुनैद और नासिर के शव 16 फरवरी 2023 को मिले थे.
लेकिन इससे पहले 6 फरवरी को पटौदी के बाबरशाह कॉलोनी में हिंसा भड़की थी और चार लोग घायल हुए थे, एक 20 साल के लड़के को गोली भी लगी.
इँडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उस समय पटौदी के एक अधिकारी ने बताया था, “मोनू इस घटना में दर्ज एफ़आईआर में बतौर अभियुक्त नामजद किए गए हैं. सोशल मीडिया पर इस घटना का एक कथित वीडियो सामने आया है जिसमें वो गोलियां चलाते दिख रहे हैं. क्राइम बांच की टीम सहित कई टीम उन्हें खोज रही हैं लेकिन अब तक उनका पता नहीं लगाया जा सका है, वो फरार हैं.”
नेताओं और पुलिस अधिकारियों के साथ मोनू की मीडिया में तस्वीरें भी उनके स्थानीय प्रशासन से निकट संबंधों पर रोशनी डालती हैं.
मोनू मानेसर हरियाणा सरकार के गोरक्षा टास्क फोर्स के सदस्य हैं.
28 साल की उम्र वाले मोनू मानेसर ने पॉलिटेक्निक कॉलेज से डिप्लोमा किया है. हरियाणा के मानेसर में रहने वाले मोनू की आय का ज़रिया है किरायेदारी. उनके मकान हैं जिनमें मज़दूर किराये पर कमरा लेकर रहते हैं और यही मोनू मानेसर की कमाई होती है.
उनके पिता ड्राइवर थे, बस और डंपर चलाते थे.

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‘गो रक्षा’, हिंसा और हीरो की छवि
साल 2011 में मोनू बजरंग दल में शामिल हुए और बीते 10 सालों में वो संगठन में बढ़ते गए. बीते साल यानी 2022 में उन्हें राज्य में गौरक्षा टास्क फोर्स का अध्यक्ष बनाया गया.
मोनू मानेसर के कई ऐसे वीडियो और तस्वीरें हैं जिसमें वो हथियार के साथ दिखते हैं.
मई 2022 में फ़िरोज़पुर झिरका का एक वीडियो सामने आया था जिसमें मोनू मानेसर एक व्यक्ति की कनपटी पर बंदूक लगाए उसे जबरन एक एसयूवी कार में बैठा रहे हैं. वीडियो में कहा गया कि गौ तस्करी की जानकारी मिलने पर वह यहां पहुंचे हैं.
लेकिन नूंह के लोगों का कहना था कि गौरक्षा के नाम पर बिना किसी सबूत के मुसलमानों को मारा-पीटा जा रहा है.
मोनू मानेसर हरियाणा गुरुग्राम-मेवात के इलाके में खासे पॉपुलर हैं. सोशल मीडिया पर उनके कई फैनपेज तक बनाए गए हैं.

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हरियाणा में उनकी पॉपुलैरिटी को समझने के लिए आपको एक वाकया बताते हैं.
4 जुलाई 2021 को हरियाणा के पटौदी में एक महापंचायत का आयोजन किया गया.
'लव जिहाद' के खिलाफ़ की गई इस महापंचायत में मंच से मोनू मानेसर ने कहा, “भाईयों! यहां पर एक समाधान होना चाहिए, जो भी लव जिहाद करता है उसकी लिस्ट हमें दें. हम और हमारी टीम उनको मारेंगे, खुल्ला. ना हम किसी केस से डरते हैं, नाम तो मैं लेना नहीं चाहता लेकिन अपने बड़े भाई जो यहां बैठे हैं वो हमारी फुल पैरवी करेंगे. जो लव जिहाद करेगा, हमारी बहन-बेटियों को छेड़ेगा उसको मारने का काम सिर्फ़ और सिर्फ़ हम करेंगे, हमारी टीम करेगी और युवा साथी करेंगे ”
जब मोनू मंच से ये बातें कर रहे थे तो उनको सुन रहे सैकड़ों लोग जामकर तालियां बजा रहे थे और मोनू मानेसर के नाम के नारे लगाए जा रहे थे.
मंच से खुलेआम हिंसा और हत्या करने की बात करने वाले मोनू मानेसर के लिए ये कोई पहला मौका नहीं है जब उन्होंने मुसलमानों के ख़िलाफ़ इस तरह के बयान दिए हों.
साल 2021 में ही जब गुरुग्राम के सेक्टर 12 में जुमे की नमाज़ सार्वजनिक स्थानों पर पढ़े जाने को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे तो मोनू मानेसर ने उस समय भी ऐसा ही एक हिंसक नारा दिया था- ‘हिंदू के गद्दारों को, गोली मारो सालों को...’
इस साल जनवरी में नूंह के रहने वाले 21 साल के वारिस की मौत हो गई थी. गोरक्षा दल ने वारिस का घायल अवस्था में एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया था. वीडियो में गोरक्षक वारिस और दो अन्य कथित गोतस्करों को पीटते दिख रहे थे.

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गोरक्षक दल ने वारिस के साथ एक तस्वीर शेयर की थी और इस तस्वीर में मोनू मानेसर भी थे.
वारिस की मौत के बाद उनके परिवार वालों ने मोनू मानेसर और बजरंग दल पर अपने बेटे की मौत का आरोप लगाया था.
वारिस के भाई इमरान का कहना था कि “बजरंग दल के मोनू मानेसर ने सुबह फ़ेसबुक लाइव किया तो गाँव वालों को पता चला कि उन्होंने बच्चे पकड़ रखे हैं. बच्चों को मोनू मानेसर की बोलेरो कार में बिठाया और अलग-अलग लोकेशन पर ले जाकर तीनों बच्चों को पीटा गया. जहां हादसा हुआ वहां से चंद क़दम पर पुलिस चौकी थी, बच्चे वहाँ कस्टडी में देना चाहिए था, लेकिन पुलिस को बच्चे नहीं दिए गए."
इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए तब मोनू मानेसर ने बीबीसी को बताया था कि वे ख़ुद घटनास्थल पर 35 मिनट बाद पहुँचे थे.
हालांकि पुलिस ने भी परिवार वालों के दावे को ख़ारिज करते हुए मोनू मानेसर को इस केस में क्लीनचिट दे दी थी.
मोनू मानेसर और उनकी टीम जब भी किसी कथित गो तस्कर को पकड़ने जाते हैं तो उसका सोशल मीडिया पर लाइवस्ट्रीम करते हैं. कथित गो तस्करों को पकड़ने के बाद कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की जाती हैं. कुछ तस्वीरें ऐसी भी होती हैं जिसमें वो और उनकी टीम के हाथ में बंदूक या रिवॉलवर होती है.

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मोनू का समर्थन करने वाले लोग
मोनू के चाहने वाले बहुत हैं जो उनके काम को 'गाय के प्रति सेवा भाव' की तरह देखते हैं.
इस साल मार्च में बीबीसी ने मोनू मानेसर के परिवार से मुलाकात की थी.
मोनू के चचेरे भाई विनोद कुमार ने बताया था कि उनका नाम जुनैद और नासिर की हत्या के मामले में जबरन खींचा जा रहा है.
उनके मुताबिक़, "वो (मोनू) बहुत शांत स्वभाव का है. किसी से लड़ना-झगड़ना नहीं... वोटों की राजनीति चल रही है. राजनीति के अंदर इनको घसीटा जा रहा है."
बजरंग दल से जुड़े मोनू के दोस्त सूरज यादव ने बीबीसी को बताया था, "पॉलीटेक्निक के पास गो-तस्करों की एक गाड़ी पकड़ी गई थी तो कॉलेज के सभी बच्चों ने अच्छा साथ दिया था. तभी से उनका रुझान बन गया कि गाय की सेवा करनी है."
स्थानीय लोगों और गो रक्षा दल के गुरुग्राम डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट नीलम रामपुर ने बताया था कि इलाके में ज़्यादातर लोगों के घरों में गाय है और गो सेवा की भावना से 19-20 साल की उम्र में ही युवा गो रक्षा जैसे कामों से जुड़ जाते हैं.
मोनू के समर्थन में नीलम ने तब बीबीसी से कहा था, “हमारी गो माता को (कोई) उठाकर ले जाएगा तो उसकी आरती थोड़े ही ना उतारी जाएगी. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि उसके हाथ-पैर तोड़ दिए जाते हैं.”
मोनू मानेसर जब पटौदी के मंच पर आमंत्रित किए गए तो उनके परिचय में कहा गया – “मोनू मानेसर वो हैं जो गोरक्षा के लिए गोली खा भी सकते हैं और मार भी सकते हैं.”
भले ही उन पर हत्या के आरोप हों लेकिन उनके समर्थकों के लिए वो ‘हीरो’ हैं.
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