दलित छात्र इंद्र कुमार मेघवाल की मौत की वजह को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल

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- Author, मोहर सिंह मीणा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, जालौर (राजस्थान) से
जालौर ज़िला मुख्यालय से 75 किलोमीटर दूर बागोड़ा सड़क के दोनों ओर बसे सुराणा गांव के सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल की दरार पड़ी इमारत के एक कमरे में कई दिनों पहले बनाई गई रोटी, सब्ज़ी और दही रखी हुई है. पास ही एक चारपाई रखी है. यहां रस्सी पर कुछ कपड़े लटके हैं और बाक़ी सामान बिखरा हुआ है.
ये सरस्वती विद्या मंदिर के संचालक और शिक्षक छैल सिंह का कमरा है, जिन्हें एक दलित छात्र की मौत के मामले में पुलिस ने गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया है. शिक्षक पर आरोप हैं कि उन्होंने दलित छात्र को एक मटके से पानी लेकर पीने के कारण इतना मारा कि उसकी बाद में अस्पताल में मौत हो गई.
बागोड़ा सड़क से लगभग पांच किलोमीटर आगे एक घर के आगे सैकड़ों लोग जुटे हैं. ये घर उस 9 वर्षीय दलित छात्र इंद्र कुमार मेघवाल का है जिनकी मौत हो गई है. यहां गाड़ियों से लोगों का आना जाना लगातार जारी है.
लोगों की संख्या को देखते हुए एक डीएसपी, एक इंस्पेक्टर समेत कई पुलिसकर्मी भी यहां तैनात किए गए हैं. एक खेत में वाहनों के लिए पार्किंग बनाई गई है.
सुराणा गांव में मृतक बच्चे के परिवार से मिलने के लिए राजस्थान समेत गुजरात से बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं.

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बच्चे की मां ने क्या कहा?
लोगों की भीड़ से होते हुए हम इंद्र कुमार की मां पवनी देवी तक पहुंचे.
लाल रंग की चुनरी ओढ़े, हाथ जोड़ कर बैठीं पवनी देवी ने बीबीसी से कहा, "इंद्र ने घर आकर बताया था कि मटके से पानी पीने के कारण मास्टरजी ने उसे पीटा है. इंद्र के कान में दर्द हो रहा था, उसे अस्पताल लेकर गए."
इंद्र की मां से बातचीत के दौरान घर में एक ओर लोगों के साथ श्रद्धांजलि सभा में बैठे इंद्र के पिता देवाराम मेघवाल आ गए. उन्होंने हमसे कहा, "इनकी (इंद्र की मां की) तबीयत ठीक नहीं है, डॉक्टर ने बोलने से मना किया है."

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बच्चे के पिता क्या बोले?
सफ़ेद रंग की धोती और शर्ट पहने हुए और सिर पर एक गमछा डाले इंद्र के पिता देवाराम मेघवाल ने बीबीसी से कहा, "इंद्र ने बताया था कि मास्टरजी ने पीटा है क्योंकि मटकी से पानी पी लिया था. इंद्र की नस ब्लॉक हो गई और हाथ-पैर काम नहीं कर रहे थे."
उन्होंने बताया, "कई जगह इलाज कराने के बावजूद आराम नहीं मिला, अहमदाबाद में टेस्ट कराए तो रिपोर्ट्स में आया कि चोट लगी हुई है."
दूसरी ओर डॉक्टर और स्कूल के कुछ शिक्षकों का कहना है कि इंद्र को कई सालों से कान का इन्फ़ेक्शन था.
बीबीसी के इस सवाल पर इंद्र के पिता देवाराम मेघवाल कहते हैं, "इंद्र बिल्कुल हृष्ट-पुष्ट था, उसे कोई बीमारी नहीं थी."
मेघवाल कहते हैं, "स्कूल वालों पर गांव वालों का दबाव है. यहां बहुत जातिवाद है, हमारी सिर्फ़ यही मांग है कि जातिवाद ख़त्म होना चाहिए."
बीते साल के राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों को अगर देखें तो साल 2020 में हर 10 मिनट में कोई न कोई अनुसूचित जाति का व्यक्ति किसी न किसी अपराध का सामना कर रहा था.
साल 2020 में अनुसूचित जाति के किसी शख़्स के साथ अपराध के 50,291 मामले दर्ज किए गए थे.
NCRB के आंकड़ों के मुताबिक़, इन कुल मामलों में 25 फ़ीसदी (12,714) उत्तर प्रदेश के हैं जबकि दूसरे नंबर पर बिहार (7,368) और तीसरे नंबर पर राजस्थान (7,017) है.

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जालौर के सरकारी अस्पताल के डॉक्टर ने उच्चाधिकारियों के निर्देशों का हवाला देते हुए कैमरे पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. वहीं नाम न छापने की शर्त पर एक डॉक्टर ने बीबीसी से कहा, "बच्चे का क़रीब दो साल से इलाज चल रहा था. उसके कान में इन्फेक्शन था."
जालौर पुलिस अधीक्षक (एसपी) हर्ष वर्धन अग्रवाला ने कहा, "बच्चे को कोई बीमारी थी या नहीं. इस मामले की अभी जांच चल रही है."

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सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल
सुराणा गांव के सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल में मीडिया कर्मियों का जमावड़ा है. दो पुलिस कर्मी तैनात हैं.
सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल में एक बड़े मुख्य प्रवेश द्वार के बिल्कुल बगल में सीधे हाथ पर तीन ओर दीवार से बनी बिना गेट की कक्षा है. यहां तीसरी कक्षा चला करती है और मृतक छात्र इंद्र कुमार मेघवाल भी इसी कक्षा में पढ़ाई करते थे.

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स्कूल में प्रवेश कर के उल्टे हाथ की ओर कुछ क़दम आगे सीमेंट की एक बड़ी पानी की टंकी है. इसमें दो नल लगे हैं. इसके आगे दीवार के किनारे टिनशेड के नीचे कुछ दरी रखी हुई हैं. यहां भी कक्षा चला करती हैं.
स्कूल की मुख्य इमारत में प्रवेश करते ही छोटे-छोटे कई कमरे हैं. यहां कक्षाएं चला करती हैं. बारिश होने के कारण जगह जगह से पानी टपक रहा था. कमरों में कुछ बच्चों के स्कूल बैग रखे हुए थे. कई कमरे गंदगी से अटे पड़े थे.
स्कूल के शिक्षक अजमल राम कहते हैं, "यह स्कूल 2004 से शुरू किया गया है. पहले यह इसी गांव के एक शख़्स का घर था. तो घर के मुताबिक ही इसकी बनावट है."

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छैल सिंह का कमरा
स्कूल के आख़िरी हिस्से में बने कमरों में अभियुक्त शिक्षक छैल सिंह रहा करते थे. अजमल राम और मावा राम भील भी छैल सिंह के साथ ही इन कमरों में रहते थे.
अजमल राम बीबीसी से कहते हैं, "छैलसिंह और हम मिलकर खाना बनाते थे और साथ रहते थे. कभी जातिवाद जैसा कुछ नहीं रहा हमारे बीच."

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स्कूल में 352 बच्चे हैं. सात शिक्षक हैं. इनमें से पांच शिक्षक अनुसूचित जाति और जनजाति से हैं, एक ओबीसी से और सामान्य वर्ग के छैल सिंह हैं.

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क्या स्कूल में मटका था?
दरार पड़ चुकी इमारत के छोटे-छोटे कमरों में स्कूल चल रहा है. एक मंज़िल की इमारत में अधिकतर दीवारों में ब्लैक बोर्ड बनाया हुआ है. कमरों के बीच एक बरामदा भी बना हुआ है.
स्कूल में मटका रखने के लिए अलग-अलग जगह दो पनिहारी (मटका रखने की जगह) बनी हुई हैं. हालांकि, फिलहाल यहां मटका या पानी पीने के लिए अन्य कोई भी बर्तन नहीं रखा हुआ.
मृतक इंद्र कुमार मेघवाल के पिता ने बीबीसी से कहा, "हम कई बार स्कूल गए थे. वहां मटका होता है, लेकिन अब मटका हटा दिया है. इंद्र ने 20 जुलाई को घर आकर बताया था कि मटके से पानी पीने के कारण छैलसिंह मास्टर ने उसे पीटा है."
स्कूल के शिक्षक और छात्र तो मटका होने की बात से इनकार कर रहे हैं, बीबीसी के इस सवाल पर इंद्र के पिता देवाराम कहते हैं, "स्कूल वालों पर गांव वालों का दबाव है. वह झूठ बोल रहे हैं. मटका था, उन्होंने मटका हटा दिया है."
स्कूल में मौजूद शिक्षक चेतन प्रजापत ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "मैं डेढ़ साल से स्कूल में पढ़ा रहा हूं. मैंने न तो यहां कभी मटका देखा और न कभी किसी बच्चे के साथ भेदभाव हुआ है. हम सभी यहां मिलकर रहते हैं."

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शिक्षक चेतन सीमेंट की बड़ी टंकी की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, "सभी बच्चे और स्कूल स्टाफ़ भी यहीं से पानी पिया करते हैं."
जब चेतन हमसे बात कर रहे थे तब स्कूल में दो पानी के कैंपर रखे हुए थे.
जब सीमेंट से बनी टंकी से ही सभी पानी पीते हैं तो पानी के ये कैंपर क्यों रखे हुए हैं, इस सवाल पर वे कहते हैं, "आज गांव के लोग और बाहर से कुछ अधिकारी आए थे उनके लिए मंगाए गए हैं."
स्कूल के सातवीं कक्षा के एक छात्र ने बीबीसी से कहा, "स्कूल में मटका तो कभी रखा नहीं गया है. हम सभी टंकी के नल से ही पानी पीते हैं."
स्कूल में ही तैनात कुछ पुलिसकर्मियों से बातचीत में उन्होंने कहा कि मटके वाला मुद्दा बनाया जा रहा है जबकि स्कूल के हालात और संचालक की स्थिति देख कर नहीं लगता कि ऐसा हुआ होगा.
जैसा कि परिजनों का आरोप है कि मटके से पानी पीने के कारण बच्चे की पिटाई की गई, क्या वाकई स्कूल में मटका था, बीबीसी के इस सवाल पर एसपी हर्ष वर्धन अग्रवाला ने कहा, "अभी इस मामले की पुष्टि नहीं हुई है. हम जांच कर रहे हैं."

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अब तक क्या हुआ?
सुराणा गांव से लौटते समय लगभग पंद्रह किलोमीटर आगे सियावट क्षेत्र में सड़क पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे. छात्र की मौत के विरोध में एकजुट हुए लोग जमकर नारेबाज़ी कर रहे थे. वहां बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती भी थी.
जिस दौरान सियावट में लोग एकजुट हो रहे थे उसी समय जालौर ज़िले में 36 कौम के लोग एकजुट हुए और जाम लगा दिया. लोगों ने इस दौरान कलेक्टर और एसपी की मौजूदगी में ज्ञापन सौंपा.
हमारे सुराणा गांव पहुंचने से पहले चिराग पासवान भी मृतक छात्र के घर परिजनों से मिलने पहुंचे थे.
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एडीजी (क्राइम) रवि प्रकाश महरड़ा भी स्कूल में पहुंचे और ग्रामीणों से बात की.
परिजनों ने आरोप लगाया है कि 20 जुलाई को बच्चे को शिक्षक ने पीटा. इसके बाद छात्र के कान में दर्द होने पर उसे 23 दिन तक जालौर के कई अस्पताल, उदयपुर और अहमदाबाद में इलाज के लिए भर्ती करवाया. 13 अगस्त को छात्र की मौत हो गई.
अभियुक्त शिक्षक के ख़िलाफ़ 13 अगस्त को बच्चे की मौत के बाद ही परिजनों की शिकायत पर हत्या और एससी एसटी/एक्ट में गिरफ़्तार कर लिया गया है.
इस मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री सहायता कोष से पांच लाख रुपये, समाज कल्याण विभाग ने चार लाख और प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने बीस लाख रुपये देने की घोषणा की है.
पुलिस को छात्र की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है, हालांकि पुलिस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं कर रही है. जांच पूरी होने के बाद ही छात्र की मौत के सही कारण स्पष्ट हो पाएंगे.
राजस्थान से लेकर दिल्ली तक में इस घटना का विरोध देखा जा रहा है. हालांकि, जालौर सीओ हिम्मत सिंह को इस मामले की जांच सौंपी गई है.
जांच पूरी होने पर ही पुष्टि होगी कि छात्र के कान में इन्फेक्शन था या नहीं, शिक्षक ने सिर्फ़ एक थप्पड़ मारा था या ज़्यादा पिटाई की थी. स्कूल में मटका था या नहीं, मटके से ही पानी पीने के कारण भेदभाव के कारण शिक्षक ने पिटाई की थी या नहीं. जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि छात्र की मौत का असली कारण क्या है?
हालांकि जालौर में लोगों की ज़ुबान पर सिर्फ़ एक ही सवाल है कि "आख़िर स्कूल में मटकी थी या नहीं."
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