भारतीय कुश्ती संघ के 'दंगल' पर महिला पहलवान क्यों ख़ामोश हैं

कुश्ती के एक मुक़ाबले के दौरान विनेश फोगाट की फ़ाइल तस्वीर

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, कुश्ती के एक मुक़ाबले के दौरान विनेश फोगाट की फ़ाइल तस्वीर
    • Author, सत सिंह
    • पदनाम, बीबीसी के लिए

रेसलिंग फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया के नव-निर्वाचित अध्यक्ष संजय सिंह और उनकी कार्यकारिणी के चुने जाने पर भारत की ओलंपिक पदक विजेता पहलवान साक्षी मलिक ने कुश्ती से संन्यास की घोषण की और दो दिन बाद ही खेल मंत्रालय ने कुश्ती संघ को निलंबित कर दिया.

कुश्ती जगत में मची इस उथल पुथल पर हर कोने से पक्ष या विपक्ष की आवाज़ें आ रही हैं, लेकिन जिन उभरती हुई महिला पहलवानों पर इस घटनाक्रम का सबसे ज़्यादा असर पड़ रहा है वो इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं.

बीबीसी की टीम शनिवार को सुबह छह बजे रोहतक के छोटू राम रेसलिंग अकादमी पहुंची जहां रिओ ओलंपिक मेडल विजेता साक्षी मलिक ने कुश्ती की शुरुआत की थी.

यहां क़रीब 50 युवा लड़कियां अभ्यास करती दिखाई दीं. साक्षी मलिक के ओलंपिक मेडल जीतने से पहले यहां सुविधा न के बराबर थी पर आज यहां फॉल्स सीलिंग है, एयर कंडीशनिंग हैं, बढ़िया लाइट्स हैं. मैट्स हैं, वाटर कूलर हैं.

ये अकादमी अब अनेक सुविधाओं से लैस है. साक्षी मलिक के बड़े-बड़े पोस्टर लगे हुए हैं. कुश्ती हॉल का नाम भी साक्षी मलिक के नाम पर है.

बृजभूषण के नाम पर ख़ामोशी

कुश्ती का अखाड़ा

इमेज स्रोत, Sat Singh

इमेज कैप्शन, सत्यवान अखाड़े में अभ्यास करती लड़कियां

मनदीप सैनी, जो लड़कियों को कोचिंग देते दिखाई दे रहे हैं, वहीं उनके अभिभावक एक कोने में सर्दी से बचने के लिए दुबके नज़र आ रहे हैं.

हरियाणा के अखाड़ों में लड़कियों के अभिभावकों का ट्रेनिंग के दौरान कुश्ती मैट के बाहर बैठे हुए पाए जाना आम बात है. क्योंकि उनका मानना है कि चाहे लड़की नेशनल और इंटरनेशनल मेडल ले आए पर उनकी सुरक्षा में एक आदमी का होना ज़रूरी है.

जब हमने ट्रेनिंग करती हुए लड़कियों से बात करनी चाही तो कोच मनदीप ने बताया कि कोई लड़की बात नहीं करेगी आप चाहे तो कोशिश कर लो. कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि जब नामी पहलवान बजरंग, विनेश और साक्षी मलिक जंतर मंतर पर आंदोलन कर रहे थे तो कुछ लड़कियों ने अपनी आवाज़ बुलंद करने की कोशिश की तो उनको समझा दिया गया था.

"कोई नहीं चाहता कि किसी तरह भी उनका नाम सामने आए और बात आगे बढ़े. सबको अपने करियर की चिंता है."

बहुत कोशिश करने पर एक लड़की जब बात करने को तैयार हुई. उस खिलाड़ी ने कहा कि उससे सिर्फ़ साक्षी के संन्यास को लेकर सवाल पूछा जाए. कुश्ती संघ के नए अध्यक्ष या पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण के बारे में वो कोई जवाब नहीं देंगी.

बृजभूषण शरण सिंह

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, बृभूषण ने यौन उत्पीड़न के आरोपों को ख़ारिज किया है. ताज़ा बयान में उन्होंने कहा है कि कुश्ती से अब उनका कोई संबंध नहीं है
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

ये युवा खिलाड़ी झिझकते हुए कहती हैं, "हमें अभी कंपटीशन लड़ने जाना है और आगे वही लोग हमें मिलेंगे."

एक और खिलाड़ी सामने आईं. इस कुश्ती हॉल की दीवारों पर टंगे हुए साक्षी मलिक के पोस्टर की तरफ इशारा करके उन्होंने कहा कि वो सबकी आदर्श खिलाड़ी हैं पर सब लड़कियां मज़बूर हैं.

"हमारे अभिभावकों की तरफ से हमें हिदायत है कि मीडिया से कोई बात ना करें."

पुराने बस स्टैंड के पीछे महादेव अखाड़े के नाम से महिला कुश्ती ट्रेनिंग सेंटर पर जब बीबीसी की टीम पहुंची तो सामने बड़ा गेट बंद किया हुआ था.

यहां मौजूद एक व्यक्ति ने अपने आप को कोच बताते हुए कहा, "कोई लड़की नहीं बोलना चाहती. ट्रेनिंग का टाइम पूरा हो चुका है. सब अपने कमरों में अकादमी में ही हैं. पर मीडिया से कोई बात नहीं करेगा."

उन्होंने बिना अपना नाम बताए सवाल किया कि जब साक्षी, विनेश और बजरंग के बोलने से कुछ नहीं हुआ तो इन आम घरों कि उभरती हुए खिलाड़ियों के बोलने से कुछ नहीं होने वाला.

कोच ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने इन तीनों बड़े नामचीन खिलड़ियों का साथ दिया था पर उनका साथ किसी ने नहीं दिया.

कोच कहते हैं, "बृजभूषण के नाम से सब डरते हैं. कोई अभिभावक नहीं बोलेगा और ना ही ये लड़कियां बोलेंगी."

कोच ने बताया कि जो महिला खिलाड़ी बोलती हैं उसको प्रतिस्पर्धा में टारगेट किया जाता है और हर कोशिश की जाती है कि उसको या तो प्रतिस्पर्धा में खेलने नहीं दिया जाए या फिर हारा हुआ घोषित कर दिया जाए.

मायूसी के साथ वो कहते हैं, "कोई भी कहाँ तक लड़ेगा सिस्टम से. सभी आम ग़रीब घरों से लड़कियां आती हैं."

कोच ने बताया कि जब साक्षी, बजरंग और विनेश को खेल मंत्री अनुराग ठाकुर से मुलाक़ात में भरोसा दिलाया कि ना बृजभूषण शरण सिंह न ही उनका कोई नज़दीकी कुश्ती संघ की कमान संभालेगा तो एक बार लगा था की महिला कुश्ती का भला हो सकेगा.

करियर की चिंता

साक्षी मलिक

इमेज स्रोत, Sat Singh

इमेज कैप्शन, अकादमी की दीवार पर लगा साक्षी मलिक का पोस्टर

जैसे इन दोनों अखाड़ों का हाल था, वैसा ही माहौल सत्यवान कादयान अखाड़े में मिला. सत्यवान अखाड़ा साक्षी मलिक के ससुर सत्यवान चलाते हैं और साक्षी मलिक के मेडल आने के बाद यहाँ कई लड़कियों ने कुश्ती सीखने के लिए आना शुरू कर दिया था.

जिस भी लड़की से बीबीसी ने बात करने की कोशिश की - सभी का एक ही जवाब था वो नहीं बोलेंगी.

एक लड़की ने कहा ,"साक्षी मलिक को और खेलना चाहिए था अभी संन्यास नहीं लेना चाहिए था. बाकी मैं कुछ बोलूंगी तो बवाल मच जाएगा."

पहली लड़की अपनी बात पूरी कर ही रही थी कि एक दूसरी लड़की बोली, "आप रहने दो. हम से ना बुलवाओ कुछ मुँह से निकल गया तो परिवार वाले डाँट लगाएंगे."

संदीप कुमार, जो अपनी एक बेटी के साथ अखाड़े में आए हुए थे, उन्होंने कहा कि सबका करियर दांव पर है.

साक्षी मल

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, संजय सिंह की कुश्ती संघ के चुनाव में जीत के बाद साक्षी मलिक ने कुश्ती से संन्यास की घोषणा कर दी थी

वो कहते हैं, "यहाँ ये बोलेगी वहां बृज भूषण के लोग सुनेंगे और बाद में उसका हिसाब मांगेंगे. बेहतर हैं सब चुप रहें."

सत्यवान कादयान जो साक्षी मलिक के ससुर हैं और ख़ुद एक राष्ट्रीय पहलवान रह चुके हैं, उन्होंने अफ़सोस जताते हुए कहा, "इन लड़कियों की क्या गलती जब सरकार ही बृजभूषण के ख़िलाफ़ कुछ नहीं कर पाई है."

"सबको डर लगता है बोलने से. बड़े कष्ट से बेटियों को अखाड़े में पहलवान बनने का ख़र्च उठाते हैं इनके अभिभावक, कोई नहीं चाहता कि इनकी तपस्या ख़राब हो. सरकार को चाहिए कि महिलाओं की एक अलग से फेडरेशन बना दे और महिलाओं को ही उसकी कमान दे दें जो उनके बीच बैठकर उनकी परेशानियां सुन सके और उसका समाधान कर सकें."

अधूरी घोषणा

पहलवान सत्यवान अखाड़ा

इमेज स्रोत, Sat Singh

इमेज कैप्शन, पहलवान सत्यवान अखाड़ा

साक्षी मलिक का गांव मोखरा एक जाट बाहुल गांव है. वहां लोगो की नाराज़गी हरियाणा सरकार से इस बात को लेकर है कि जब रिओ ओलंपिक में साक्षी मलिक ने मेडल जीता तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गांव में कुश्ती को समर्पित एक स्टेडियम बनने की घोषणा की थी जो आज छह साल बाद भी अधूरा है.

स्थानीय व्यक्ति वेदपाल मलिक ने अपना परिचय हमें साक्षी मालिक का ताऊ कह कर दिया, उन्होंने बताया कि उनके गांव में कुश्ती को लेकर काफ़ी क्रेज़ है और खिलाड़ी स्टेडियम ना बन पाने की वजह से परेशानी में हैं.

वेदपाल कहते हैं, "सरकार का कहना है कि उनकी तरफ़ से पांच करोड़ से ऊपर फंड खर्च हो चुके हैं पर सच यह है कि अभी सिर्फ़ दस प्रतिशत ही काम हो पाया है. गांव वाले भी अपनी तरफ़ से पैसा ख़र्च कर रहे हैं ताकि ये जल्दी पूरा हो सके."

बृज भूषण शरण सिंह पर महिला खिलाड़ियों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. बृज भूषण शरण सिंह ने इन आरोपों को ख़ारिज किया है. दिल्ली पुलिस ने इस संबंध में एफ़आईआर दर्ज की है जिसकी जांच अभी जारी है.

इसी बीच कुश्ती संघ के चुनावों में संजय सिंह की जीत के बाद बृज भूषण शरण सिंह ने कहा था कि उनका दबदबा क़ायम है और बना रहेगा.

हालांकि भारत सरकार के खेल मंत्रालय ने जब कुश्ती संघ को निलंबित कर दिया तो इसके बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अब उनका कुश्ती से कोई लेना देना नहीं है.

साक्षी मलिक ने अंडर-15 और अंडर-18 के लिए गोंडा के नंदिनी नगर में ट्रायल की घोषणा का भी विरोध किया था. फिलहाल ये ट्रायल भी रद्द कर दिए गए हैं. गोंडा बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह का गृहक्षेत्र है.

भारतीय कुश्ती में दांव-पेच का खेल अभी जारी है. इस सबके बीच आगे बढ़ने का सपना लेकर प्रैक्टिस कर रहीं लड़कियां ख़ामोश हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)