पेरिस ओलंपिक: नीरज चोपड़ा को इन खिलाड़ियों से मिल सकती है चुनौती

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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार
नीरज चोपड़ा को गोल्डन आर्म वाला जेवेलिन थ्रोअर कहा जाता है. उन्होंने पेरिस ओलंपिक की जेवेलिन स्पर्धा के क्वालिफिकेशन दौर में सबसे ज्यादा 89.34 मीटर थ्रो करके लगातार दूसरे ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीदें जगा दी हैं.
नीरज के अब तक के करियर पर नज़र डालें तो उनकी सबसे बड़ी ख़ासियत यही है कि वह बड़ी प्रतियोगिताओं के खिलाड़ी हैं.
जब प्रतियोगिताओं का स्तर बढ़ता है तो वह गियर बदलकर अपने प्रदर्शन को शिखर पर पहुंचाने की क्षमता रखते हैं, इसलिए ही उन्हें असाधारण प्रतिभा वाला खिलाड़ी माना जाता है.
नीरज चोपड़ा ने तीन साल पहले टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था. वह यदि यहां भी स्वर्ण पदक जीत जाते हैं, तो वह दुनिया के सिर्फ पांचवें जेवेलिन थ्रोअर होंगे, जिनके नाम लगातार दो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने का कारनामा होगा.
अब तक यह करिश्मा एरिक लेमिंग (1908, 1912), जोन्नी मायरा (2004, 2008), आंद्रेस थोरकिल्डसन (2004, 2008) के नाम हैं. वहीं नीरज के आदर्श जेन जेलेंजी ने लगातार तीन बार वर्ष 1988 से 2000 तक स्वर्ण पदक जीते थे.
जहां तक भारत की बात है, व्यक्तिगत तौर पर नीरज के अलावा सिर्फ़ अभिनव बिंद्रा को ही ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने का गौरव हासिल है.


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नीरज का क्या कहना है
नीरज चोपड़ा ने पेरिस ओलंपिक में क्वालिफिकेशन राउंड पूरा होने के बाद कहा, “मैं हमेशा पहली थ्रो में ही अपना बेस्ट देने का प्रयास करता हूं. पर यह बात हर बार कारगर नहीं होती है. कई बार स्थितियां विपरीत चली जाती हैं. पर मैं क्वालिफिकेशन में अच्छी थ्रो करने से खुश हूं. यह सही है कि क्वालिफिकेशन दौर में मेरी थ्रो सर्वश्रेष्ठ रही है. इससे आपको और बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है और भरोसा भी बढ़ता है.”
उन्होंने फ़ाइनल की चुनौती पर कहा, “ मेरे हिसाब से जिन जेवेलिन थ्रोअर ने सीधे फ़ाइनल के लिए क्वालिफाई किया है, वह सभी अच्छे फॉर्म में हैं. फ़ाइनल के लिए इसके मुक़ाबले कहीं ज्यादा तैयारियां करने की ज़रूरत होगी. एक अच्छी बात यह है कि फ़ाइनल शाम को होगा, जिससे मौसम थोड़ा ठंडा होगा, जिसका फ़ायदा मिलेगा.”
हम क्वालिफिकेशन दौर के प्रदर्शन की बात करें तो नीरज के सबसे करीब ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स हैं. उन्होंने 88.34 मीटर की थ्रो की है. वह भी नीरज की तरह ही पहली थ्रो में फाइनल के लिए क्वालिफाई कर गए थे.
इसके अलावा जूलियन वेबर हमेशा ही नीरज के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी रहे हैं. वह 87.76 मीटर की थ्रो करके बहुत पीछे नहीं हैं. इसके अलावा पाकिस्तान के अरशद नदीम, केन्या के जूलियस यिगो और चेक गणराज्य के जाकूब वाल्डिच भी ख़तरा बनने की क्षमता रखते हैं. जाकूब और अरशद दोनों ही 90 मीटर की बाधा को पार कर चुके हैं.
नीरज क्वालिफिकेशन राउंड के प्रदर्शन को बहुत अहमियत नहीं देते हैं. वे क्वालिफिकेशन और फाइनल की दिमागी तैयार अलग-अलग करते हैं और ज़ाहिर है दोनों परिस्थितियां एकदम से भिन्न होते हैं.

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वेबर हैं नीरज के अच्छे दोस्त
पेरिस में नीरज चोपड़ा को अपने बेहद अच्छे दोस्त जूलियन वेबर से सबसे तगड़ी चुनौती मिल सकती हैं. पेरिस ओलंपिक के खेल गांव में वह दोनों काफी समय एक साथ बिताते भी नजर आए हैं.
नीरज ने वेबर के साथ अपनी दोस्ती पर कहा, “हम जब भी एक ही प्रतियोगिता में भाग लेते हैं तो आपस में मिलते जरूर हैं. हम दोनों यहां भी कई बार एक साथ जिम जाते हैं. कई बार हमें प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए सड़क मार्ग से जाना होता है, तो हम एक साथ जाना पसंद करते हैं.”
टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद साल 2023 नीरज के लिए बहुत ही शानदार रहा है. इस साल उन्होंने पहले मई में दोहा डायमंड लीग में स्वर्ण जीता और फिर अगस्त माह में विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता.
दोहा डायमंड लीग में नीरज ने 88.67 मीटर की थ्रो से स्वर्ण पदक जीता था. पर इस स्वर्ण जीतने के लिए नीरज को जाकूब की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा था. इसमें वह भाग्यशाली थे. वे जाकूब को मात्र चार सेंटीमीटर से पीछे छोड़कर स्वर्ण पदक जीत सके थे.
इस प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले नीरज ने कहा था कि “दोहा डायमंड लीग को 90 मीटर की बाधा पार करने के लिए जाना जाता है.”
2023 में चार थ्रोअर ऐसे थे, जो 90 मीटर से ज्यादा दूरी तक जेवेलिन फेंक चुके थे.
नीरज इस इवेंट में जब आखिरी प्रयास के लिए उतरे तो यह माना जा रहा था कि वह 90 मीटर की बाधा पार करने का प्रयास करेंगे. पर इस प्रयास में भाला लंबाई के बजाय ऊंचाई में चला गया और वह उनका सबसे कमजोर प्रदर्शन साबित हुआ.

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ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप दोनों में गोल्ड
नीरज चोपड़ा ने बुडापेस्ट विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर निशानेबाज अभिनव बिंद्रा की बराबरी कर ली.
नीरज के गोल्ड जीतने से पहले अभिनव अकेले भारतीय थे, जिन्होंने ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप दोनों में स्वर्ण पदक जीते थे. इस सफलता के बाद नीरज का नाम भी बिंद्रा के साथ जुड़ गया.
दिलचस्प बात यह है कि नीरज ने टोक्यो ओलंपिक का स्वर्ण पदक 87.58 मीटर और बुडापेस्ट विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक 88.17 मीटर की थ्रो से हासिल किया है और यह दोनों उनके सर्वश्रेष्ठ पांच प्रदर्शनों में शामिल नहीं हैं.
इससे यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप जैसे मुकाबलों में खिलाड़ियों पर इतना दवाब रहता है, जिसमें अपना बेस्ट देना बेहद मुश्किल होता है.
नीरज चोपड़ा की केबिनेट में दुनिया हर प्रमुख गोल्ड मेडल शोभा बढ़ा रहा है. पर वह अब तक 90 मीटर जेवेलिन फेंकने का सपना साकार नहीं कर सके हैं. नीरज ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 30 जून 2022 को स्टॉकहों डायमंड लीग में किया था. यह प्रदर्शन 89.94 मीटर का है.
इसमें वह बहुत ही मामूली अंतर से सपना साकार करने से रह गए थे. इसके अलावा वह दो बार अन्य मौकों पर 89 मीटर को पार कर चुके हैं.
इससे यह तो साफ है कि वह 90 मीटर पार करने की क्षमता रखते हैं, जिस दिन परिस्थितियां बन जाएंगी, यह उपलब्धि भी उनके नाम दर्ज हो जाएगी.
नीरज चोपड़ा ने साल 2024 में अपने को फिट बनाए रखने के लिए कम ही प्रतियोगिताओं में भाग लिया है.
एक प्रतियोगिता से हटने की वजह तो यह भी कहा गया कि वह मामूली चोटिल हैं.
पर नीरज ने बाद में साफ़ किया कि वह ओलंपिक में तरोताजा उतरना चाहते थे, इसलिए प्रतियोगिता से हटे थे. अब क्वालिफिकेशन के प्रदर्शन से यह बात साबित भी हो गई है.
ज़ाहिर है कि तैयारी और क्वालिफिकेशन राउंड के बाद नीरज फ़ाइनल राउंड में चूकना नहीं चाहेंगे.















