विनेश फोगाट: यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने से लेकर ओलंपिक फ़ाइनल में पहुंचने तक

विनेश फोगाट

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पेरिस ओलंपिक में महिला कुश्ती के 50 किलोग्राम भार वर्ग इवेंट के फ़ाइनल में विनेश फोगाट पहुंच गई हैं. इसके साथ ही उनका सिल्वर मेडल पक्का हो गया है.

विनेश फोगाट ओलंपिक में कुश्ती के फ़ाइनल में पहुंचने वाली भारत की पहली महिला रेसलर हैं.

उन्होंने एक दिन में तीन मुकाबले जीत कर इतिहास रचा.

उन्होंने सेमीफ़ाइनल में क्यूबा की गुजमैन लोपेज को हराया.

विनेश फोगाट ने सेमीफ़ाइनल मुकाबले में अपनी विरोधी को एक भी प्वाइंट स्कोर करने का मौका नहीं दिया और उन्हें 5-0 से मात दी.

अब विनेश फोगाट का फ़ाइनल मुकाबला बुधवार को होगा.

सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले से पहले विनेश ने पहले प्री क्वार्टर-फ़ाइनल में जापान की युइ सुसाकी को हराया और क्वार्टर-फ़ाइनल में यूक्रेन की पहलवान ओकसाना लिवाच को हराया था.

युइ सुसाकी चार बार की वर्ल्ड चैंपियन, टोक्यो ओलंपिक की गोल्ड मेडलिस्ट और रैंकिंग में नंबर वन खिलाड़ी हैं.

इन रिकॉर्ड्स को देखकर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि महिलाओं की 50 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कैटेगरी में युइ सुसाकी के ख़िलाफ़ विनेश की जीत कितनी बड़ी थी.

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'बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमेन ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड 2022' की नॉमिनी भी रही हैं विनेश

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इमेज कैप्शन, विनेश ने पहले प्री क्वार्टर-फ़ाइनल में जापान की युइ सुसाकी को हराया
वीडियो कैप्शन, विनेश फ़ोगाट: हार, चोट और ताने... लेकिन इस पहलवान को कोई तोड़ ना सका

आख़िरी 20 सेकंड में पलटा मैच

रेसलिंग की दुनिया में युइ सुसाकी एक बड़ा नाम है और मैच की शुरुआत से पहले ही उन्हें एक मुश्किल चुनौती माना जा रहा था.

इस हार से पहले युइ सुसाकी अपने पूरे करियर में कोई अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबला नहीं हारी थीं. विनेश के ख़िलाफ़ मैच के शुरुआती दौर में वो हावी रहीं और 2-0 से आगे थीं.

इसके बाद विनेश ने वो किया जिसे कुश्ती की दुनिया में असंभव माना जाता है.

हार की तरफ़ बढ़ रहीं विनेश ने आख़िरी 20 सेकंड्स के खेल में आक्रामकता दिखाई और नतीजा ये हुआ कि इस मैच को विनेश ने 3-2 से अपने नाम कर लिया.

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इमेज कैप्शन, युइ सुसाकी अपने पूरे करियर में कोई अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबला नहीं हारी थीं

जीत के बाद विनेश मैट पर लेट गईं और उनकी आंखों में ख़ुशी के आंसू साफ़ देखे जा सकते थे.

इस जीत के बाद घंटे भर के भीतर विनेश ने क्वार्टर-फ़ाइनल मुक़ाबला खेला और इस मुक़ाबले में उन्होंने यूक्रेन की ओकसाना लिवाच 7-5 से हराया.

इस मुक़ाबले में विनेश ने शुरू में 4-0 की बढ़त बना ली थी फिर ओकसाना ने वापसी की लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

सेमीफ़ाइनल में विनेश का मुक़ाबला क्यूबा की पहलवान गुज़मन लोपेज़ से हुआ और इस मुक़ाबले में जीत के साथ विनेश ने फ़ाइनल में पहुंचकर मेडल पक्का कर लिया.

यौन उत्पीड़न से लड़ाई के बाद ओलंपिक की फ़ाइट

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विनेश फोगाट उन पांच महिला पहलवानों में से एक हैं जिन्होंने इस साल पेरिस ओलंपिक के लिए क्वॉलिफ़ाई किया है.

पेरिस ओलंपिक में हिस्सा लेने से पहले उन्होंने भारत में यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ एक लंबी लड़ाई लड़ी है.

पिछले साल भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष रहे बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे और कुछ भारतीय पहलवान लगातार बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ अपना विरोध दर्ज करा रहे थे. हालांकि, बृजभूषण इन आरोपों से इनकार करते हैं.

साल 2023 में पूरे साल बृजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ विरोध चलता रहा. इस दौरान ऐसे दृश्य भी देखने को मिले जो खेल के इतिहास में पहले कभी नहीं देखे गए थे.

पहलवान बजरंग पुनिया और विनेश फोगाट ने अपने सरकारी सम्मान 'खेल रत्न' और 'अर्जुन पुरस्कार' दिल्ली में फुटपाथ पर छोड़ दिए. दोनों पहलवानों ने पुलिस से इसे प्रधानमंत्री को सौंपने का अनुरोध किया था.

विनेश फोगाट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ख़ुला खत लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि वो मेडल लौटा देंगी.

चिट्ठी में उन्होंने कहा था, "इन पुरस्कारों का मेरी ज़िदगी में अब कोई मतलब नहीं रह गया है."

इससे पहले पहलवान साक्षी मलिक ने खेल से संन्यास लेने की घोषणा की थी और पहलवान बजरंग पुनिया ने भी उन्हें मिला पद्मश्री पुरस्कार सरकार को लौटा दिया था.

मामले में बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ आरोप तय हो चुके हैं और दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि उनके ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत हैं.

साथी खिलाड़ी और परिजन क्या बोले?

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इमेज कैप्शन, विनेश ने क्वार्टर-फ़ाइनल में यूक्रेन की पहलवान ओकसाना लिवाच को हराया

विनेश के शानदार प्रदर्शन पर पहलवान बजरंग पुनिया, उनके चाचा और कोच महावीर फोगाट समेत कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.

बजरंग पुनिया ने एक्स पर लिखा, ''‘विनेश फोगाट भारत की वो शेरनी जिसने आज बैक टू बैक मैच में चार बार की वर्ल्ड चैंपियन और मौजूदा ओलंपिक चैंपियन को हराया. उसके बाद क्वॉर्टर-फाइनल में पूर्व वर्ल्ड चैंपियन को हराया. मगर एक बात बताऊं, ये लड़की अपने देश में लातों से कुचली गई थी. ये लड़की अपने देश में सड़कों पर घसीटी गई थी. ये लड़की दुनिया जीतने वाली है मगर इस देश में सिस्टम से हार गई थी.''

विनेश की बहन गीता फोगाट ने लिखा, ''ज़माना झुकता है, बस झुकाने का जुनून होना चाहिए.''

महावीर फोगाट ने कहा कि उनकी उपब्लधि से पूरा गांव ख़ुश है.

महावीर फोगाट कहते हैं, ''2016 में विनेश से ओलंपिक मेडल की उम्मीद थी लेकिन चोट लगने के बाद ऐसा नहीं हुआ. 2020 में भी ऐसा हुआ था और वो मेडल लाने से चूक गई थीं. उन्होंने पहले ही राउंड में जापान की दमदार खिलाड़ी को हरा दिया है. अब हमें पूरी उम्मीद है कि वो गोल्ड मेडल लेकर आएंगी.''

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने विनेश को शाबादी देते हुए बधाई दी.

उन्होंने लिखा, '' शाबाश विनेश फोगाट! मैं जानती हूं कि आपके लिए यह सिर्फ ओलंपिक का कठिन मुक़ाबला भर नहीं है. आपने दुनिया की नंबर वन खिलाड़ी को तो हराया ही, यह मैदान के भीतर और बाहर आपके संघर्षों की भी जीत है. आज पूरी दुनिया आपके हाथों में लहराता हुआ तिरंगा देख रही है. आप इस देश का गौरव हैं और हमेशा रहेंगी."

ओलंपिक में विनेश का सफर

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इमेज कैप्शन, विनेश फोगाट ने राष्ट्रमंडल खेलों में तीन स्वर्ण, विश्व चैंपियनशिप में दो कांस्य पदक और एशियाई खेल में एक स्वर्ण पदक जीता है

विनेश ने अपने करियर में अच्छा प्रदर्शन करते हुए फोगाट परिवार की कुश्ती वाली विरासत को आगे बढ़ाया है.

दो बार की ओलंपियन (रियो 2016 और टोक्यो 2020) विनेश फोगाट ने राष्ट्रमंडल खेलों में तीन स्वर्ण, विश्व चैंपियनशिप में दो कांस्य पदक और एशियाई खेल में एक स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं.

इसके अलावा उन्होंने 2019 में विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक के साथ 2021 में एशियन चैंपियन का ख़िताब भी जीता था.

महज़ नौ साल की उम्र में विनेश ने अपने पिता को खो दिया था और फिर मज़ूबती से ऐसे खेल में ख़ुद को आगे बढ़ाया जिसमें कभी पुरुषों का वर्चस्व माना जाता था.

अब तक वो दो 2016 में ब्राज़ील के रियो डी जनेरियो और 2021 में जापान के टोक्यो में हुए ओलंपिक खेलों में हिस्सा ले चुकीं हैं और पेरिस ओलंपिक उनका तीसरा ओलंपिक है.

रियो में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं था और चोट के कारण वो बीच टूर्नामेंट से बाहर हो गई थीं. जबकि टोक्यो में उनका सफ़र क्वार्टर फ़ाइनल तक रहा था.

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